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भारतीय महासागर के मध्य से ही पूरे चीन को भारतीय नौसेना की पहुंच आएगा,म इस कदम से

नईदिल्ली भविष्य में भारतीय नौसेना की नई अरिहंत-क्लास न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन S-4 में खतरनाक K-5 मिसाइल लगाई जाएगी. Indian Navy में K Series की कई मिसाइलें तैनात हैं. कुछ पनडुब्बियों में तो कुछ युद्धपोतों में. इस मिसाइल से चीन-पाकिस्तान की हालत खराब हो जाएगी. हिंद महासागर से दागी गई तो ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, चीन, रूस, मिडिल ईस्ट, यूरोप सब रेंज में आएंगे. पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली यह मिसाइल 5 से 6 हजार किलोमीटर तक मार कर सकेगी. यानी समंदर में रहकर पूरे देश की सुरक्षा कर पाएगी. अगली मिसाइल जो भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों में लग सकती है, वो है K सीरीज की परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल K-5. यह सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है. इस मिसाइल को देश में ही डेवलप किया गया है. इसमें 2000 kg वजनी वॉरहेड लगा सकते हैं. वह पारंपरिक हो या फिर परमाणु हो. इसकी रेंज फिलहाल 5 से 6 हजार km बताई जा रही है. लेकिन हल्के वॉरहेड के साथ यह 8 से 9 हजार किलोमीटर तक मार कर सकती है. इसे भारतीय रक्षा एवं विकास संगठन बना रहा है. अगर इस मिसाइल को भारतीय समुद्री क्षेत्र (Indian Ocean Region – IOR) में मौजूद पनडुब्बी से लॉन्च किया जाए तो चीन और पाकिस्तान के कई प्रमुख शहर किसी भी मिनट खत्म हो सकते हैं. इसे फिलहाल अरिहंत क्लास सबमरीन और एस-5 क्लास सबमरीन में लगाया गया है. भविष्य में बाकी पनडुब्बियों में भी लगाया जा सकता है. कई टारगेट पर हमला भी कर सकेगी K-5 बैलिस्टिक मिसाइल में राडार को धोखा देने की तकनीक और काउंटरमेजर्स भी लगाए जाने की उम्मीद है, ताकि दुश्मन को यह पता ही न चले कि मिसाइल कब और कहां से आ रही है. इसके अलावा इसमें MIRV तकनीक भी लगाई जा सकती है, ताकि एक ही बार में कई जगहों पर निशाना लगाया जा सके.  फिलहाल K-4 सीरीज की मिसाइलें भारत के पास फिलहाल K-4 सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा है. जिनकी रेंज 750 से 3500 km है. लेकिन जब नौसेना नई पनडुब्बियां बना रही है, तो उसे नई मिसाइलों की भी जरूरत होगी. ऐसे में K-5 और K-6 SLBM मिसाइलों की जरूरत है. ताकि ज्यादा रेंज तक हमला किया जा सके. इसके अलावा Agni-5 सीरीज की SLBM इस्तेमाल की जा सकती है. अग्नि-5 मिसाइल की ताकत को पूरी दुनिया जानती है. साथ ही चीन और पाकिस्तान तो खौफ खाते हैं. क्योंकि इसकी रेंज में पूरा पाकिस्तान और आधा चीन आता है. लेकिन के-सीरीज की एडवांस मिसाइलों को शामिल किया जा सकता है. अग्नि-5 SLBM की ताकत यह एक अंतरमहाद्वीपीय परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल है. जिसकी रेंज 7 से 8 हजार किलोमीटर है. इसमें एक साथ कई वॉरहेड लगा सकते हैं. यानी यह MIRV तकनीक से लैस है. एक ही मिसाइल से पांच टारगेट्स को हिट किया जा सकता है. इसमें 400 किलोग्राम वजनी परमाणु या पारंपरिक हथियार लगा सकते हैं. इसकी अधिकतम गति 30 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा है.   K-6 मिसाइल भी दमदार यह मिसाइल अभी बनाई जा रही है. 39 फीट लंबी इस मिसाइल में 3 हजार किलोग्राम वजनी परमाणु हथियार लगा सकते हैं. इससे कई टारगेट्स पर निशाना लगाया जा सकता है. इसकी रेंज 8 से 12 हजार किलोमीटर होगी. इसे एस-5 सबमरीन में लगाने की योजना है.     Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 11

म्यांमार जैसे भूकंप का खतरा भारत में भी नकारा नहीं जा सकता: IIT कानपुर

कानपुर  म्यांमार और बैंकॉक में जबर्दस्त नुकसान पहुंचाने वाले भूकंप की जड़ सगाइन फॉल्ट है। इस फॉल्ट को इंटरनेट पर मैप के जरिए आसानी से देखा जा सकता है। आईआईटी कानपुर के अर्थ साइंसेज विभाग के प्रोफेसर जावेद मलिक ने कहा कि सागइन फॉल्ट बेहद खतरनाक है। सिलिगुड़ी में गंगा-बंगाल फॉल्ट है। इन दोनों फॉल्ट के बीच कई अन्य फॉल्टलाइंस हैं। ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक फॉल्ट की सक्रियता किसी दूसरे फॉल्ट को ट्रिगर न कर दे। जिससे भारत को भी खतरा है। लंबे समय से भूकंपों पर शोध कर रहे प्रो. जावेद मलिक के अनुसार, यह फॉल्ट अराकान से अंडमान और सुमात्रा तक फैले शियर जोन का हिस्सा है। इसकी भूकंपीय आवृत्ति 150-200 साल है और इसकी सक्रियता दूसरी फॉल्टलाइनों को ट्रिगर कर सकती है। हमें बड़े भूकंपों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। हिमालय में कई सक्रिय फॉल्टलाइंस हैं। सभी लोगों ने फ्रंटल हिस्सों पर काम किया है। फॉल्टलाइन ऊपर भी हैं। भारत की तरफ भी इशारा प्रो. मलिक ने कहा कि हम सिर्फ प्लेटबाउंड्री के आसपास ही भूकंप न देखें। ऊपर भी सेस्मिक गतिविधियां जारी हैं। पूर्वोत्तर और कश्मीर सेस्मिक जोन-5 में हैं। इस जोन में हमें ज्यादा रिसर्च की जरूरत है। गंगा-बंगाल फॉल्ट बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें भी सगाइन फॉल्ट जैसी हलचल है। शायद म्यांमार का भूकंप भारत के लिए इशारा हैं। गंगा बंगाल और सगाइन फॉल्ट के बीच डॉकी, कोपली, डिबरूचौतांग फॉल्ट जोन भी हैं। गंगा-बंगाल फॉल्ट भी सतह पर दिखता है। पूरा हिस्सा दबाव में प्रो. मलिक ने कहा कि आप ये नहीं कह सकते हैं कि सगाइन और गंगा बंगाल के बीच कुछ नहीं चल रहा। एक पूरा हिस्सा दबाव में है। वहां लगातार ऊर्जा एकत्रित हो रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक भूकंप दूसरे भूकंप को ट्रिगर नहीं करेगा। इसे ‘ट्रिगर स्ट्रेस’ कहते हैं। यहां ये देखना होगा कि क्या ऐसी गतिविधियां उत्तर से दक्षिण की तरफ बढ़ी हैं। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक ने कहा कि 2004 में सुमात्रा, अंडमान में एक भूकंप आया था। इस क्षेत्र के दक्षिण में 2005 में भूकंप आया था। अब ऊपर की तरफ भूकंप आने लगे हैं। ट्रिगर होने की आशंका हमेशा बनी रहती है।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 9

संघ-भाजपा में तालमेल से जुड़े सुखद संकेत, नागपुर में हुआ संघ-भाजपा का महासंगम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रविवार को नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय का दौरा बहु प्रतिक्षित था. पिछले साल बीजेपी और संघ के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बाद इस यात्रा पर पूरे देश की निगाहें थीं. हालांकि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ समय में आरएसएस की तारीफों की पुल बांधे हैं उससे पहले से स्पष्ट था कि संघ और बीजेपी के बीच में अब कोई कटुता नहीं रह गई है. हेडगेवार स्मृति मंदिर जो आरएसएस के पहले दो सरसंघचालकों के.बी. हेडगेवार और एम.एस. गोलवलकर की स्मृति में बना है, वहां मोदी का जाना खुद संघ के लोगों के लिए अप्रत्याशित रहा. इसे भाजपा और आरएसएस के बीच संबंधों को सुधारने और एकता प्रदर्शित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. पर मोदी नागपुर में डॉ. आंबेडकर से संबंधित पवित्र दीक्षाभूमि जाना नहीं भूले. ये वही जगह है जहां डॉ. आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था. आइये मोदी की इस यात्रा के राजनीतिक पहलुओं की चर्चा करते हैं. 1-समझना होगा प्रयागराज महाकुंभ के बाद नागपुर के घटनाक्रम को प्रयागराज में कुंभ हर 12 साल पर लगता रहा है. पर इस बार जिस तरह की भीड़ उमड़ी और जिस तरह का उत्साह पूरे देश में देखने को मिला वह अभूतपूर्व था. इसके पीछे हिंदुत्व की उभार से इनकार नहीं किया जा सकता है. पूरा उत्तर भारत कुंभ के दौरान चोक हो गया था. करीब 65 करोड़ लोग अगर कुंभ पहुंचे तो इसका मतलब है कि देश में रहने वाला हर दूसरा आदमी कुंभ आया. जात-पात से परे जाकर हिंदुओं ने संगम स्‍नान किया. यह एक हिंदू पुनर्जागरण जैसी चीज थी. जाहिर है कि इसके पीछे संघ की दशकों की मेहनत थी. इतना ही नहीं संघ के कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जबरदस्त मेहनत की थी. कुंभ की व्यवस्था केवल सरकारी अधिकारियों के वश की बात नहीं थी. शायद यही कारण है कि पीएम मोदी ने अपनी नागपुर दौरे में  स्वयंसेवकों के प्रयागराज के महाकुंभ मेले में निभाई गई भूमिका के लिए सराहना की. और इससे यह भी साबित हो रहा है कि बीजेपी के कोर एजेंडे में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है. क्‍योंकि, मोदी की खा‍स बात यह है कि वह हवा के रुख को बखूबी पहचानते हैं. और संघ भी यह समझ रहा है कि हिंदुत्‍व की बहती हवा में वह भाजपा से अलग खड़ा नहीं रह सकता. 2-क्‍या संदेश है संघ के लिए आम तौर पर ऐसी चर्चा चल रही थी बीजेपी और आरएसएस में एक दूरी आ गई है. साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खराब प्रदर्शन के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत की कुछ टिप्पणियों को पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी की सीधी आलोचना के रूप में भी देखा गया था. माना जा रहा था कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का एक बयान संघ को बहुत नागवार लगा था. जिसके बाद संघ लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टो को सपोर्ट देने से पीछे हट गया था. लोकसभा चुनाव से पहले, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि भाजपा अब उस दौर से आगे निकल चुकी है जब उसे संघ की जरूरत थी, और अब वह सक्षम है तथा अपने फैसले खुद लेती है. इसके बाद बीजेपी और संघ के बीच कुछ दूरियां देखने को मिलीं. पर हरियाणा,  महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनावों की जीत में आरएसएस की बहुत बड़ी भूमिका निकल कर सामने आई. देखने को यह भी मिला कि जो आरएसएस पहले पर्दे के पीछे से बीजेपी के लिए काम करती थी अब वो खुलकर अपने कार्यों के बारे में मीडिया को भी बताने लगी थी. जैसे हरियाणा विधानसभा और दिल्ली विधानसभा चुनावों में संघ की पूरी स्ट्रैटजी अखबारों में छपने लगी. पर असली खेल महाकुंभ के बाद हुआ है. महाकुंभ में जिस तरह पूरे देश से हिंदू उमड़े हैं वह एक तरीके से हिंदुओं का पुनर्जागरण ही है. जाहिर है कि इसके पीछे कहीं न कहीं आरएसएस की बरसों से चल रही साधना है. मोदी की यात्रा से यह साफ हो गया है कि संघ अब केवल वैचारिक और सांस्कृतिक संस्था ही नहीं है.  बीजेपी में उसकी भूमिका ऊपर उठ चुकी है.  3-क्‍या संदेश है भाजपा के लिए भाजपा के नेताओं ने पूर्व में बहुत सावधानी बरतते हुए सरकार और संघ के बीच एक क्लीयर रेखा खींच दी थी. पर नरेंद्र मोदी कई मौकों पर संघ की तारीफ करने में नहीं चूकते हैं. इसके बारे में कहा जाता है कि खुद नरेंद्र मोदी आरएसएस के प्रचारक रहे हैं इसलिए उन्हें किसी प्रकार की हिचक नहीं होती है. इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस तरह की तारीफ से बचते रहे.अभी कुछ दिन पहले मोदी ने एक पॉडकास्ट में अपने जीवन को सही मार्गदर्शन देने के लिए संघ का आभार जताया था.  प्रधानमंत्री ने आरएसएस की तारीफ नागपुर में भी आरएसएस को एक ऐसे संगठन के रूप में संदर्भित किया जिसने समर्पण और सेवा के उच्चतम सिद्धांतों को कायम रखा. मोदी ने संघ की राष्ट्र निर्माण और विकास में रचनात्मक भूमिका को रेखांकित करके अपनी 2047 तक विकसित भारत की योजनाओं में संघ की भूमिका के महत्व को भी दर्शाया. जाहिर है कि बीजेपी में बनने वाले नए अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी को ढूंढने और उसे तैयार करने की भूमिका में संघ की अब महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है. 4-क्‍या संदेश है हिंदू एकता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ मुख्यालय के दौरे के साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन से संबंधित दीक्षाभूमि का भी दौरा कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. आरएसएस पर हिंदू धर्म का एक तबका आरोप लगाता रहा है कि संघ अभी भी वर्ण व्यवस्था का पोषक है. संघ का कोई प्रमुख दलित या पिछड़ी जाति का शख्स नहीं बन सका. पर पीएम मोदी ने अपनी छवि एक पिछड़े नेता ओर दलितों के शुभचिंतक के रूप में बना ली है. शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने संघ मुख्यालय में दिये गये अपने संबोधन में भी बाबा साहेब को याद किया और भारतीय संविधान की भरपूर प्रशंसा की.बीजेपी और संघ दोनों के लिए दलितों के बीच पैठ बनाना आज पहली प्राथमिकता है. दीक्षाभूमि वही जगह है जहां आंबेडकर ने 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था. मोदी … Read more

एमपी के 8 जिलों में ओले-बारिश का अलर्ट: भोपाल-जबलपुर में आंधी चलने के आसार; सिवनी-पचमढ़ी में तापमान गिरा

Hailstorm alert in 8 districts of MP: Chances of storm in Bhopal-Jabalpur; Temperature drops in Seoni-Pachmarhi भोपाल। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम, खंडवा, नरसिंहपुर समेत 8 जिलों में बुधवार को ओले गिरने का अलर्ट है। भोपाल-जबलपुर में तेज आंधी चल सकती है। इसकी रफ्तार 40 से 50 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, साइक्लोनिक सर्कुलेशन-टर्फ की वजह से प्रदेश में ओले-बारिश और आंधी का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे तो कहीं-कहीं हल्की बारिश भी हुई। भोपाल में पूरे दिन बादल रहे। जबलपुर, नीमच, मंदसौर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, उमरिया और कटनी में गरज-चमक, तेज आंधी का असर भी देखने को मिला। दूसरी ओर, कई शहरों में दिन के तापमान में गिरावट हुई है। सिवनी में पारा 30.4 डिग्री सेल्सियस, मलाजखंड में 32.3 डिग्री, पचमढ़ी में 32.4 डिग्री, मंडला में 34.5 डिग्री, सीधी में 34.8 डिग्री और बैतूल में 35 डिग्री रहा। वहीं, धार सबसे गर्म रहा। यहां दिन का पारा 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रतलाम में 39.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 39.2 डिग्री, गुना-दमोह में 38.5 डिग्री, छतरपुर के खजुराहो में 38.2 डिग्री, शिवपुरी-शाजापुर में 38 डिग्री तापमान रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 37 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, ग्वालियर में 36.6 डिग्री, उज्जैन में 38.4 डिग्री और जबलपुर में पारा 36.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसलिए ओलावृष्टि-बारिश का अलर्ट सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- एक टर्फ दक्षिणी छत्तीसगढ़ से मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ-मराठवाड़ा के पास से गुजर रही है। वहीं, साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम भी एक्टिव है। इस वजह से मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि, गरज-चमक और बारिश की स्थिति बनी हुई है। 3 दिन ऐसा रहेगा मौसम 2 अप्रैल: खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में ओले गिर सकते हैं। यहां ऑरेंज अलर्ट है। भोपाल, जबलपुर, सिंगरौली, सीधी, मऊगंज, रीवा, सतना, मैहर, उमरिया, डिंडौरी, सिवनी, मंडला, कटनी, पन्ना, दमोह, सागर, रायसेन, सीहोर, खरगोन और बड़वानी में तेज आंधी, हल्की बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। 3 अप्रैल: खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में ओले-आंधी का ऑरेंज अलर्ट है। बड़वानी, श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, भिंड, दतिया, छतरपुर में भी तेज आंधी चल सकती है। 4 अप्रैल: सिवनी-मंडला में ओले गिर सकते हैं, जबकि बालाघाट में तेज आंधी चलने का अनुमान है। ऐसे रहेंगे अगले 4 सप्ताह… पहला सप्ताह: रात का तापमान सभी संभागों में सामान्य से 2-3 डिग्री ज्यादा (21-24 डिग्री) बना रहेगा। वहीं, दिन में पश्चिमी गर्म हवाओं के कारण अधिकतम तापमान इंदौर, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से ज्यादा 39 से 42 डिग्री तक रह सकता है। उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर समेत बाकी संभागों में यह 38 से 41 डिग्री के बीच रहेगा। लगभग सभी जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है। पहले सप्ताह में लू नहीं चलेगी। दूसरा सप्ताह: इंदौर, उज्जैन और चंबल संभाग में रात का तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री ज्यादा यानी 23 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। पूर्वी नम हवाओं के कारण थोड़ी राहत के साथ भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में तापमान सामान्य यानी 22-24 डिग्री बना रहेगा। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में तापमान सामान्य से बढ़कर 41 से 43 डिग्री सेल्सियस रहेगा। 2 से 3 दिन लू भी चल सकती है। इस दौरान बारिश होने की संभावना नहीं है, लेकिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से दक्षिणी हिस्से में बादल जरूर छा सकते हैं। तीसरा सप्ताह: उत्तर-पश्चिमी हवाओं के जोर पकड़ने के साथ इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, नर्मदापुरम संभागों में न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। पूरे प्रदेश में दिन में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। 2 से 3 दिन लू चल सकती है। हल्की बारिश होने की संभावना है। चौथा सप्ताह: उत्तर-पश्चिमी हवाओं के लगातार जोर पकड़ने के साथ न्यूनतम तापमान पूरे प्रदेश में सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक यानि 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। दिन के साथ रातें भी गर्म हो जाएंगी। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में पारा 43-45 डिग्री जबकि इंदौर, उज्जैन-भोपाल सहित बाकी प्रदेश में 41 से 44 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। बंगाल क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से अप्रैल के आखिरी में 3 से 4 दिन तक लू का असर रह सकता है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा मध्यप्रदेश में मार्च से गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। इसी ट्रेंड के अनुसार अगले 3 महीने तेज गर्मी पड़ेगी। मौसम विभाग ने मई तक 15 से 20 दिन हीट वेव चलने का अनुमान जताया है। अप्रैल-मई में 30 से 35 दिन तक गर्म हवा चल सकती है। अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मार्च महीने के आखिरी में ही टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट हुई। अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार 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