जनता को गुमराह करने आए थे राहुल! मोहन यादव ने स्कूल एजुकेशन का बजट बताकर कसा तंज

Rahul Gandhi came to mislead the public! Mohan Yadav took a dig at him by revealing the school education budget. भोपाल। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मध्य प्रदेश में सियासत गरमा गई है. उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की जीत को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया. सीएम मोहन यादव ने ABVP को जीत पर बधाई देते हुए इसे ‘झूठ की गूंज’ का जवाब बताया. वहीं उन्होंने मध्य प्रदेश में ड्रॉप आउट स्टूडेंट्स और शिक्षा को लेकर भी आंकड़े सामने रखे. राहुल गांधी में सीरियसनेस की कमी मोहन यादव ने कहा कि, ”इंदौर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक ऐसा इवेंट किया जो असल में झूठ फैलाने की कोशिश थी. अपनी आदत के मुताबिक उन्होंने इस विषय को लेकर अपनी सीरियसनेस की कमी दिखाई. वे बिना तैयारी के आए और बच्चों और युवाओं से बात की, जबकि उनके साथ एक असली सवाल-जवाब का सेशन होना चाहिए था. कांग्रेस सिर्फ जनता को गुमराह करने के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, यह बहुत निराशाजनक है.” मध्य प्रदेश ने ज़ीरो-ड्रॉपआउट रेट उन्होंने कहा कि, मध्य प्रदेश ने ज़ीरो-ड्रॉपआउट रेट हासिल किया है, यह एक रिकॉर्ड है जिसे कांग्रेस और उसके साथियों को मानना चाहिए. कांग्रेस के राज में 2002-03 तक ड्रॉपआउट रेट 16% था. 1956 और 2002-03 के बीच ज़्यादातर समय कांग्रेस सत्ता में थी, फिर भी ड्रॉपआउट के आंकड़े उस विरासत को दिखाते हैं. उस समय स्कूल एजुकेशन का बजट लगभग 16% था. 2002-03 तक यह 2,000 करोड़ रुपए था, जबकि आज यह 38,658 करोड़ रुपए है. यह बच्चों और उनकी शिक्षा के मैनेजमेंट के प्रति हमारे गहरे कमिटमेंट को दिखाता है.” कांग्रेस ने छात्रों को कभी स्कूटी-लेपटॉप नहीं दिया मोहन यादव ने सवाल किया कि, ”कांग्रेस जवाब दे क्या उन्होंने अपने समय में कभी स्टूडेंट्स को यूनिफॉर्म दी? क्या उन्होंने कभी आने-जाने के लिए साइकिल दी? क्या उन्होंने कभी टॉप करने वाले स्टूडेंट्स को स्कूटर या लैपटॉप दिए? कांग्रेस ने स्टूडेंट्स और युवाओं को बढ़ावा देने या सपोर्ट करने के लिए कभी ऐसी कोई स्कीम लागू नहीं की.” उन्होंने कहा, ”जंतर मंतर पर युवाओं की आड़ में मायाजाल को फैलाने का काम करने का जवाब दिल्ली के युवाओं ने विद्यार्थी परिषद की जीत में दिया है. विजयवर्गीय बोले- राहुल गांधी फैला रहे ‘झूठ की गूंज’ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विश्राम भवन पर प्रेस वार्ता आयोजित कर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि, ”राहुल गांधी ने इंदौर में ‘झूठ की गूंज’ फैलाने की कोशिश की है. इसके पहले दिल्ली और पंजाब भी गए थे. एक कहावत है ‘जहां जहां पैर पड़े संतन के वहां बंटा ढाल’. पंजाब में गए तो पंजाब में यूनिवर्सिटी के चुनाव में कांग्रेस का सफाया हो गया. फिर दिल्ली आए दिल्ली में झूठ की गूंज का बड़ा दावा किया था. 7 से 8 लाख रजिस्ट्रेशन हो गए और वहां पर उन्होंने बडी युवा शक्ति की सभा ली. दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव के परिणाम आए हैं. सूपड़ा साफ हो गया, NSUI का एक भी सीट नही मिली है.” देश के युवाओं ने कांग्रेस को नकारा कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ”दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव दिल्ली के नहीं होते बल्कि पूरे देश के विद्यार्थीयों के होते हैं. पूरे देश के छात्र वहां पढ़ते हैं. दिल्ली के चुनाव का परिणाम मूड ऑफ कंट्री है, मतलब देश के युवा शक्ति का मूड क्या है इस चुनाव परिणाम से साफ दिखाई देता है. इसलिए यह झूठ की गूंज के माध्यम से युवाओं को भड़काने का काम कांग्रेस पार्टी और वामपंथी कर रहे हैं. देश की युवा शक्ति ने उनको नकार दिया है और सिर्फ दिल्ली में नहीं मैं फिर इसको रिपीट कर रहा हूं. पंजाब में भी नकार, राजस्थान में नकार, राजस्थान की लोकल बॉडीज के चुनाव में नकार और इसलिए अब यह झूठ की गूंज ज्यादा चलने वाली नहीं है.” ’12 हजार क्षमता का था पंडाल, दावा लाख लोगों का’ कैलाश विजयवर्गीय ने लाखों की भीड़ के दावे और मंच की क्षमता पर Gen z को लेकर कहा, ”उस पंडाल का साइज आप पता लगाएंगे तो उस पंडाल में 12 हज़ार की संख्या आ सकती और उनका दावा था 1 लाख लोगों का. शहडोल, सतना सब दूर से आए तब जाकर इतनी भीड़ हुई.” उन्होंने कहा, ”मध्य प्रदेश की युवा शक्ति सिर्फ मोदी जी के साथ है. दिल्ली ने भी बता दिया है आने वाले समय में मध्य प्रदेश भी बताएगा.” recent visitors 10

पेट्रोल-डीजल भरवाने जा रहे हैं? 2000 से ज्यादा का UPI पेमेंट हो सकता है बंद, अब कर लो कैश की तैयारी

Heading out to refuel with petrol or diesel? UPI payments exceeding ₹2,000 might be blocked—better get some cash ready. UPI MDR Charge: मध्य प्रदेश में यूपीआई से भुगतान को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों और व्यापारियों ने विरोध का फैसला किया है. पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, 16 अक्टूबर से पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपए से ज्यादा के पेट्रोल-डीजल की खरीद का भुगतान यूपीआई से नहीं लिया जाएगा. ऐसे भुगतान के लिए ग्राहकों को नकद राशि देनी होगी. एसोसिएशन का कहना है कि यह फैसला 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के कारण लिया गया है. नए नियम के तहत 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रति ट्रांजेक्शन 5 रुपए एमडीआर देना होगा. एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक, भोपाल के एक पेट्रोल पंप पर रोजाना औसतन 100 ऐसे यूपीआई ट्रांजेक्शन होते हैं. 5 रुपए एमडीआर पर 18% जीएसटी जोड़ने के बाद एक ट्रांजेक्शन पर करीब 5.90 रुपए का एक्सट्रा खर्च आएगा. इस हिसाब से एक पेट्रोल पंप पर रोज लगभग 590 रुपए और महीने में करीब 17,700 रुपए का एक्सट्रा खर्च होगा. एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर डीलरों का मार्जिन पहले से ही कम है. ऐसे में यूपीआई लेनदेन पर लगने वाला एक्सट्रा चार्ज उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ाएगा. इसी वजह से 2,000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई भुगतान को बंद करने का फैसला लिया गया है. इंदौर में भी व्यापारी करेंगे विरोधइंदौर में भी यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर के विरोध में व्यापारियों ने आंदोलन का फैसला किया है. शहर के 100 से ज्यादा व्यापारिक संगठनों ने 23 सितंबर को 2,000 रुपए से अधिक का यूपीआई भुगतान नहीं लेने की घोषणा की है. विरोध के दौरान कई व्यापारी दुकानों पर लगे यूपीआई स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काला कपड़ा चढ़ाएंगे. इसके अलावा कई दुकानों पर विरोध से जुड़े पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं. व्यापारी संगठनों का कहना है कि यूपीआई भुगतान पर एक्सट्रा चार्ज लगने से कारोबारियों का खर्च बढ़ेगा. इसी के विरोध में वे 23 सितंबर को 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे. recent visitors 7

UPI एमडीआर के खिलाफ पोस्टर वार, कांग्रेस बोली- नए नए टैक्स लगाना सरकार की हिटलरशाही

‘Poster war’ in Indore against UPI MDR; Congress calls the imposition of new taxes ‘Hitler-like’ government high-handedness. इंदौर/ग्वालियर: केंद्र सरकार द्वारा जब से यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर यानि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की घोषणा की गई है, तब से ही देश भर में व्यापारियों की नाराजगी जाहिर हो रही है. एक तरफ लोग इस नई व्यवस्था से परेशान हैं तो वहीं विपक्ष भी सरकार को निशाने पर लिए हुए है. ग्वालियर में कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों ने दुकानों पर इस संबंध में पोस्टर लगाए हैं. इंदौर में व्यापारियों ने लगाए पोस्टर, 125 संगठनों की बैठक इंदौर में एमडीआर के खिलाफ मैदान में उतरे व्यापारियों का कहना है कि, ”यदि ऐसे भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू होता है तो इससे डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि, ”अभियान के अगले चरण में सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की तैयारी है. संगठन की ओर से चार दिनों में करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. इसके जरिए व्यापारियों की आपत्ति और उनकी मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया जाएगा.” इंदौर निकलने से पहले सरकार पर निशानाइंदौर में शनिवार को राहुल गांधी के आने से पहले ही प्रदेश भर से कांग्रेस विधायकों नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी द्वारा बुलाया गया है. ग्वालियर से कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार भी इंदौर पहुंच रहे हैं. लेकिन ग्वालियर से रवाना होने से पहले विधायक सतीश सिकरवार मीडिया से मुखातिब हुए. इस दौरान उन्होंने 15 अक्टूबर को लागू होने जा रहे यूपी ट्रांजेक्शन पर एमडीआर को लेकर सरकार पर हमला बोला. अलग-अलग टैक्स लगाकर सरकार कर रही जनता को परेशानविधायक सतीश सिकरवार का कहना है कि, ”जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से ही कोई ना कोई टैक्स लगाकर जानता को परेशान किया जा रहा है. पहले के समय में जैसे जज़िया कर लगा करता था, अंग्रेजों के जमाने में भी टैक्स लगते थे. उसी तरह सरकार हिटलरशाही चला रही है और आम आदमी को परेशान करने का काम कर रही है.” एक तरफ ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दूसरी और टैक्स की मारकांग्रेस ने विधायक का कहना है कि, सरकार एक तरफ आम आदमी से ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह रही है. सारा काम नगद में बंद करने की बात कहती है. वहीं दूसरी तरफ इस टैक्स लगाकर जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है. ये निंदनीय है आने वाले समय में जनता इसका जवाब जरूर देगी. एमपी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने की एमडीआर स्थगित करने की मांगमध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स ग्वालियर के अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल का भी कहना है कि, ”डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के चक्कर में पहले ही कई व्यापारी वर्ग कई बार यूपीआई ट्रांजेक्शन से साइबर फ्रॉड्स, उनकी वजह से अकाउंट फ्रीज और फिर रिकवरी जैसी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में MDR भी व्यापारियों के लिए एक नए टैक्स की तरह होगा. कई बार छोटे व्यापारी को तो एक लाख तक का माल बेचने पर बमुश्किल 500-700 रुपये का ही मुनाफा होता है. ऐसे में एमडीआर की वजह से वह मुनाफा भी एमडीआर में चला जाएगा. इन हालातों को अगर देखा जाए तो व्यापारियों के हित में सरकार को यह नया शुल्क स्थगित करना चाहिए.” recent visitors 8

इंदौर में राहुल गांधी के विरोध में लगे ‘झूठ की गूंज’ के पोस्टर, कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा की साजिश बताकर हटाए

Posters titled ‘Echo of Lies’ targeting Rahul Gandhi appeared in Indore; Congress leaders removed them, alleging a BJP conspiracy. इंदौर। इंदौर में आज राहुल गांधी का कार्यक्रम छात्रों की गूंज होने वाला है। इसमें वे विद्यार्थियों के साथ संवाद करने शहर आने वाले हैं। राहुल गांधी के विरोध में शहर के कई मुख्य रास्तों पर होर्डिंग पर बैनर लगे हैं। इनमें लिखा है- झूठ की गूंज पर होगी सत्य की विजय। सभी पर एक क्यूआर कोड दिया गया है, जिसमें राहुल की पिछली चार रैलियों में किए गए चालीस दावों की जांच कर उन्हें झूठ बताया गया है। क्यूआर कोड को स्कैन करने पर www,jhoothkigoonj.com वेबसाइट खुलती है, इसमें राहुल गांधी की कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में की गई रैली में किए गए दावों और उनकी सत्यता पर सवाल उठाए गए हैं। सभी रैलियों में किए गए उनके दावों में से कुछ को झूठ और कुछ को गुमराह करने वाला बताया गया है। रातों रात तमाम बिल बोर्ड पर झूठ की गूंज पोस्टर लगने पर कांग्रेस नेताओ ने इसे भाजपा की साजिश बताया है। इससे शहर में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह लगे इन पोस्टरो को हटाना शुरू कर दिया। कांग्रेस ने कहा- हमेशा झूठ बोलने वाली पार्टी ने लगाए झूठ की गूंज के पोस्टर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि लोकतंत्र में भाजपा ने निचला स्तर बना लिया है। हमेशा झूठ बोलने वाली पार्टी ने सारे शहर में झूठ की गूंज के पोस्टर लगा दिए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात कहने और जनता के बीच जाने का अधिकार होता है। भाजपा के कारण देश के लोकतंत्र को खतरा है यह बात कांग्रेस हमेशा कहती रही है। भाजपा अपने कार्यों से यह साबित करती रही है कि उसका लोकतंत्र में विश्वास नहीं है। यही कारण है कि आज इंदौर में होने जा रहे हैं छात्रों की गूंज कार्यक्रम को देखते हुए भाजपा ने शहर में कई जगह झूठ की गूंज के पोस्टर लगाए हैं। भाजपा के झूठ की शुरुआत तो अच्छे दिन लाने और हर व्यक्ति को 15 लाख रुपए उसके खाते में पहुंचाने के साथ हुई थी। ऐसे झूठ भाजपा की भोपाल से लेकर दिल्ली तक की सरकार लगातार बोल रही है। सरकार के इस झूठ को छात्र और युवा समझ गए हैं। अब वह अपनी आवाज उठा रहे हैं और कांग्रेस उनके साथ खड़ी हो रही है तो भाजपा परेशान हो रही है। चौकसे ने कहा कि पहले तो राहुल गांधी के कार्यक्रम के आयोजन में जितनी बाधाएं पैदा की जा सकती थी उतनी बाधाएं भाजपा सरकार ने जिला प्रशासन, नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण और इंदौर पुलिस के माध्यम से पैदा की है। जब उन सभी बाधाओं को पार करते हुए भी कांग्रेस अपना कार्यक्रम कर रही है तो आज झूठ फैलाने वाली पार्टी ने झूठ की गूंज के पोस्टर लगा दिए। पार्षद राजू भदौरिया ने उतारे पोस्टरकांग्रेस पार्षद राजू भदोरिया को आज सुबह इस तरह के पोस्टर लगने की जैसे ही जानकारी मिली वैसे ही वे मैदान में उतर गए और उन्होंने अपने साथियों के साथ जाकर अवैध रूप से लगाए गए इन पोस्टरों को उतारना शुरू कर दिया। उन्होंने सवाल किया है कि इंदौर नगर निगम के अधिकारी और उनकी टीम अब कहां है जब अवैध रूप से इस तरह के पोस्टर पूरे शहर में रातों-रात लगा दिए गए हैं। 169 स्त्रोतों से दावों की जांच की गईराहुल गांधी द्वारा अपनी रैलियों में किए गए दावों की जांच 169 स्त्रोतों के जरिए की गई। इसमें भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट सहित संसद और न्यूज वेबसाइट से जानकारी ली गई है। इसके साथ ही वेबसाइट पर यह भी कहा गया है कि राहुल गांधी द्वारा देश से जितने झूठ बोले गए हैं, उन सभी को उजागर करने में मदद करें। वेबसाइट पर लिखा है कि कोई दावा तब झूठा होता है जब रिकॉर्ड उसका पूरी तरह खंडन करता है। कोई दावा तब भ्रामक होता है जब किसी वास्तविक आंकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, संदर्भ से अलग कर दिया जाता है या उसे किसी और रूप में प्रस्तुत किया जाता है। recent visitors 16

थाना ओरछा रोड पुलिस ने ग्राम धमौरा में चोरी की घटना को अंजाम देने वाले अंतरराज्यीय चोर को किया गिरफ्तार

Orchha Road police station arrested an interstate thief who committed a theft in Dhamora village. छतरपुर। दिनांक 09 सितंबर 2026 को थाना ओरछा रोड अंतर्गत ग्राम धमौरा निवासी फरियादी विजय सिंह यादव के घर से सोने-चांदी के आभूषण चोरी होने की रिपोर्ट पर थाना ओरछा रोड में भारतीय न्याय संहिता के तहत चोरी का अपराध पंजीबद्ध किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक छतरपुर रजत सकलेचा द्वारा पुलिस टीम गठित कर आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी एवं चोरी की संपत्ति बरामद करने हेतु निर्देशित किया गया। पुलिस टीम द्वारा घटनास्थल से प्राप्त भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की तलाश की गई। पुलिस टीम ने चोरी की घटना को अंजाम देने वाले आरोपी चरण अहिरवार पिता सुम्मी अहिरवार, निवासी ग्राम देवथा, थाना अलीपुरा, जिला छतरपुर को गिरफ्तार किया। आरोपी के कब्जे से ग्राम धमोरा से चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषण, जिनमें बड़ा हार, छोटा हार, दो अंगूठियां, 4 सोने की चूड़ियां, चांदी की पायल, कमरबंद सहित अन्य आभूषण, जिनकी अनुमानित कीमत 15 लाख रुपए से अधिक है, बरामद किए गए। साथ ही घटना में प्रयुक्त हुंडई एक्सटर कार भी जप्त की गई। बरामद संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत करीब 24 लाख रुपए है। बारीकी से पूछताछ करने पर आरोपी द्वारा माह जुलाई में थाना लवकुशनगर की चौकी पठा अंतर्गत ग्राम हिनौता में भी चोरी की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया गया है। संबंधित वैधानिक कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। आरोपी अंतरराज्यीय चोर है तथा जिला झांसी, निवाड़ी, महोबा एवं छतरपुर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चोरी, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट सहित 14 से अधिक अपराधों में लिप्त है। उक्त कार्यवाही में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  आदित्य पटले एवं नगर पुलिस अधीक्षक  अरुण कुमार सोनी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी ओरछा रोड उप निरीक्षक दीपक यादव, साइबर प्रभारी निरीक्षक नेहा सिंह गुर्जर, थाना प्रभारी अलीपुरा उप निरीक्षक जितेंद्र सोनी, चौकी प्रभारी पठा उप निरीक्षक वीरेंद्र परस्ते, उप निरीक्षक अतुल झा, सहायक उप निरीक्षक सुरेश कुमार, प्रधान आरक्षक राजन सिंह, आरक्षक भूपेंद्र यादव, अभय यादव, लखचंद्र यादव, सत्यम शरण मिश्रा, रविंद्र यादव, सुरेंद्र तिवारी, अरविंद राय एवं टीम की भूमिका रही। recent visitors 15

मध्य प्रदेश में फाइलों का जंजाल खत्म! नगर पालिका और परिषदों में एक क्लिक पर होगा काम

No more red tape in Madhya Pradesh! Work in municipalities and councils to be done with just a single click. भोपाल : मध्य प्रदेश की नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में अब फाइलें टेबल से टेबल घूमने के बजाय ऑनलाइन दौड़ेंगी. नगर निगमों के बाद अब छोटे नगरीय निकायों में भी ई-फाइल व्यवस्था लागू की जा रही है. इससे जनता को अपनी फाइल का स्टेटस जानने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, वहीं कागज और स्टेशनरी की खपत घटने से पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा. इस व्यवस्था से हर महीने नगरीय निकायों को लाखों रुपये के स्टेशनरी की बचत का अनुमान है. एक क्लिक में पता चलेगा फाइल का स्टेटसई-फाइल व्यवस्था शुरू होने के बाद किसी आवेदन की फाइल किस अधिकारी या शाखा के पास है, यह ऑनलाइन देखा जा सकेगा. फाइल कितने दिन किस स्तर पर रुकी, कब आगे बढ़ी और किस अधिकारी के पास पहुंची, इसका डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार होगा. इससे काम में देरी होने पर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा 30 हजार से ज्यादा फाइलें होंगी ऑनलाइननगर पालिका और नगर परिषदों में करीब 30 हजार नई फाइलें ऑनलाइन तैयार की जा रही हैं. नागरिकों से मिलने वाले आवेदन और दस्तावेज पहले स्कैन किए जाएंगे, इसके बाद संबंधित ई-फाइल के साथ ऑनलाइन आगे भेजे जाएंगे. वहीं प्रदेश के 16 नगर निगमों में पहले से 4 लाख से ज्यादा फाइलों का ऑनलाइन मूवमेंट हो रहा है. अब इसी व्यवस्था का विस्तार छोटे नगरीय निकायों तक किया जा रहा है. प्रमाण पत्र से संपत्ति तक, कई काम होंगे डिजिटलई-फाइल व्यवस्था का दायरा रोजमर्रा की कई नागरिक सेवाओं तक रहेगा. इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, भवन अनुज्ञा, नामांतरण और संपत्ति से जुड़े मामलों की फाइलों को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा. इससे आवेदन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फाइल गुम होने या लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या पर भी निगरानी रखी जा सकेगी. दफ्तर के चक्कर कम, कागज की खपत भी कमनई व्यवस्था का सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा. वहीं आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी. इसके साथ ही दस्तावेजों की बार-बार फोटोकापी कराने और कागजी फाइलों में रिकॉर्ड रखने की जरुरत घटेगी. कागज की खपत कम होने का पर्यावरणीय फायदा भी होगा. recent visitors 13

यूपीआई पर शुल्क से खत्म हुआ मुफ्त डिजिटल भुगतान का दौर, पर इसकी असली कीमत आखिर चुकाएगा कौन?

The era of free digital payments has ended with the introduction of UPI charges, but who will ultimately pay the real price? डिजिटल इंडिया की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) अब अपनी पूरी तरह से मुफ्त सेवाओं के दौर से बाहर निकलकर एक नए वित्तीय मॉडल में कदम रख रहा है। 15 अक्तूबर से 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4% का नया शुल्क लागू किया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह दावा किया गया है कि यह शुल्क आम उपभोक्ताओं की रसीद में नहीं जोड़ी जाएगा। लेकिन देश में अब तक का आर्थिक अनुभव यह साफ दिखाता है कि यह शुल्क प्रत्यक्ष नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से हर नागरिक की जेब पर ही असर डालेगा। यूपीआई पर नया शुल्क क्या है और यह कब से लागू हो रहा है?15 अक्तूबर से लागू होने वाले नए नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) या शुल्क वसूला जाएगा। बड़े भुगतानों के लिए राहत देते हुए 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर इस फीस की अधिकतम सीमा (कैप) 300 रुपये तय की गई है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के अनुसार, इस राशि का उपयोग डिजिटल पेमेंट के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, धोखाधड़ी रोकने और साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाने में किया जाएगा। उद्योग ने क्या मांग की थी और सरकार/एनपीसीआई ने क्या तय किया?इस नए शुल्क को लागू करने में बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर की अहम भूमिका रही है। बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (पीएसपी) और फिनटेक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को पत्र लिखकर बड़े व्यापारियों पर 0.3% एमडीआर लगाने और रूपे (रूपे) डेबिट कार्ड के लिए एमडीआर में समानता की सिफारिश की थी। हालांकि, जो अंतिम दर लागू की गई, वह 0.4% है- जो खुद उद्योग की मांग (0.3%) से भी अधिक है। उद्योग की मांग और अंतिम तय दर के बीच इस 0.1% के अंतर पर किसी भी आधिकारिक संस्था ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।इस शुल्क संरचना का असली गणित क्या है?यूपीआई के तकनीकी और वित्तीय ढांचे में एक प्रमुख असंतुलन नजर आता है: लागत में समानता: यूपीआई सर्वर, फ्रॉड चेक और साइबर सुरक्षा परत के लिए 2,100 रुपये के भुगतान और 50,000 रुपये के भुगतान की प्रोसेसिंग लागत लगभग एक समान होती है।शुल्क में भारी अंतर: समान प्रोसेसिंग लागत के बावजूद 2,100 रुपये के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट को लगभग 8 रुपये देने होंगे, जबकि 50,000 रुपये के भुगतान पर यह शुल्क लगभग 200 रुपये बैठता है।लागत स्थिर होने के बावजूद प्रतिशत आधारित शुल्क लगाना यह दर्शाता है कि यह व्यवस्था लागत की भरपाई नहीं, बल्कि लेनदेन मूल्य के आधार पर राजस्व बांटने का तंत्र है। किस वर्ग को होगा मुनाफा और किसे उठाना पड़ेगा नुकसान?इस नई नीति के लागू होने से डिजिटल इकोसिस्टम में दो स्पष्ट वर्ग सामने आते हैं: लाभार्थी: कमर्शियल बैंक, पीएसपी और एनपीसीआई, जिन्हें पिछले छह वर्षों से यूपीआई चैनल से शुल्क के रूप में शून्य आय मिल रही थी, उन्हें अब एक नया और नियमित राजस्व स्रोत मिल गया है।प्रभावित वर्ग: बड़े व्यापारियों को रातों-रात एक नया लागत बोझ सहना पड़ेगा। वहीं, आम नागरिक जो मान रहे हैं कि वे इस चार्ज से बचे हुए हैं, वे अनजाने में इसका वित्तीय जोखिम उठाएंगे।ग्राहकों की जेब पर यह शुल्क अप्रत्यक्ष रूप से कैसे भारी पड़ेगा?सरकारी नियम व्यापारियों को ग्राहकों से अलग से यूपीआई रसीद पर शुल्क वसूलने से रोकते हैं। लेकिन यह नियम व्यापारियों को अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमतें फिर से तय करने से नहीं रोकता। व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को तीन तरीकों से बाजार में पास कर सकते हैं:उत्पादों का एमआरपी बढ़ाकर: सामान का मूल मूल्य थोड़ा बढ़ाकर लागत ग्राहकों पर डालना।छूट और डिस्काउंट खत्म करके: ग्राहकों को मिलने वाले डिस्काउंट और ऑफर्स को धीरे-धीरे बंद करना।नकद लेनदेन को प्राथमिकता देकर: 2,000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर डिजिटल के बजाय कैश मांगने की शुरुआत होना।डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के टिकाऊ भविष्य का सही रास्ता क्या है?डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का खाका शुल्क सेवा की वास्तविक लागत के बजाय लेनदेन के मूल्य से तय होता है। एमडीआर जैसा शुल्क लागत की भरपाई नहीं रहकर डिजिटल लेनदेन पर एक अप्रत्यक्ष कर बन जाता है। यह शुल्क व्यापारियों के माध्यम से घूमकर अंततः देश के आम नागरिकों की जेब से ही निकलता है। ऐसे में सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक पारदर्शी और टिकाऊ फंडिंग मॉडल की आवश्यकता है, जो गहन तकनीकी जांच में खरा उतर सके। recent visitors 17