स्थाई शिक्षक भर्ती 2018 को पूर्ण करने पात्र अभ्यर्थियों ने डिप्टी सीएम से लगाई गुहार

Eligible candidates appealed to the Deputy CM to complete the Permanent Teacher Recruitment 2018. निराशा के नहीं छट रहे बादल, तीसरी काउंसलिंग की मांग  भोपाल। मध्य प्रदेश में स्थाई शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद शिक्षा विभाग पद भरने को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है। वर्ष 2018 की स्थाई शिक्षक भर्ती आज तक अधूरी है। जिसको तीसरी काउंसलिंग के साथ पूर्ण कराने की मांग को लेकर चयनित अभ्यर्थियों ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को ज्ञापन पत्र सौंपा है। पांच सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री के अलावा, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को ज्ञापन देकर भर्ती प्रकिया पूरी करने की मांग की है। 2018 से चल रही प्रक्रिया फिर भी अधूरी, हो रहे ओवरयेज  शिक्षक भर्ती 2018 के चयनित उम्मीदवार नियुक्ति पत्र का इंतजार पिछले 6 से 7 वर्षों से कर रहे हैं। चयनित अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि उच्च माध्यमिक शिक्षक के 5,935 और माध्यमिक शिक्षक के 2,237 पहली काउंसिलिंग से रिक्त रहे पदों पर तीसरी काउंसलिंग आयोजित की जाए, ताकि शेष पदों पर चयन सूची जारी हो और नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि विभाग की उदासीनता के कारण कई उम्मीदवार ओवरएज हो चुके हैं, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। अधिकार मिलने तक लड़ाई जारी पात्रता परीक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल रविदास सहित दिनेश बामनिया, लीलेश कुमार आदि ने बताया कि हमने वर्षों तक मेहनत की और परीक्षा पास की, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हमें नियुक्ति नहीं मिल रही। हमारी मांग है कि तत्काल शेष पदों पर तीसरी काउंसलिंग कर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक आंदोलन जारी रखेंगे। recent visitors 8

सीएम हेल्पलाइन चीख रही है, राजधानी बेहाल, व्यवस्था बदहाल, शिकायतों ने खोल दी सरकार की पोल

The CM Helpline is screaming for attention; the capital is in distress, the system is in shambles, and the complaints have exposed the government. भोपाल । मध्य प्रदेश में विकास के दावों की चमक जितनी तेज़ दिखाई जाती है, सीएम हेल्पलाइन के आंकड़े उतनी ही तेजी से उस चमक की परतें उधेड़ रहे हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि जुलाई 2026 में नगरीय निकायों से जुड़ी 51,610 शिकायतें दर्ज हुईं। असली सवाल यह है कि आखिर जनता को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार मुख्यमंत्री की हेल्पलाइन तक क्यों पहुंचना पड़ रहा है?क्या नगर निगम और नगर पालिकाएं अपने मूल दायित्व निभाने में विफल हो चुकी हैं? या फिर शिकायतों का अंबार इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक व्यवस्था जनता की अपेक्षाओं से बहुत पीछे छूट गई है?स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब 44,126 शिकायतें ग्रेडिंग अवधि तक लंबित रह जाती हैं और 10,136 शिकायतें 50 दिन से अधिक समय तक फाइलों में धूल खाती रहती हैं। इसका सीधा अर्थ है कि हजारों नागरिकों की समस्याएं सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं, लेकिन समाधान नहीं मिला। ‘डी’ रेटिंग… क्या यह सिर्फ एक ग्रेड है या शासन की असफलता का प्रमाण? प्रदेश के नगरीय निकायों को मिला ‘डी’ रेटिंग केवल एक प्रशासनिक रिपोर्ट नहीं है। यह उस व्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड है, जो शहरों को साफ रखने, सड़कें दुरुस्त करने, सीवर व्यवस्था संभालने, पेयजल उपलब्ध कराने और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए बनाई गई है।जब पूरी व्यवस्था को ‘डी’ ग्रेड मिले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या यह केवल अधिकारियों की नाकामी है, या फिर निगरानी और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है? राजधानी भोपाल सबसे ऊपर… क्या यही मॉडल राजधानी है? सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भोपाल पूरे प्रदेश में शिकायतों के मामले में पहले स्थान पर है।6,469 शिकायतें।यानी मध्य प्रदेश की हर आठवीं शिकायत राजधानी से।यदि मुख्यमंत्री, मंत्रालय और अधिकांश वरिष्ठ अधिकारियों का शहर ही नागरिक सुविधाओं के संकट से जूझ रहा है, तो छोटे शहरों और कस्बों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।भोपाल में हजारों शिकायतें लंबित रहना यह संकेत देता है कि समस्या केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति, जवाबदेही और निगरानी की भी है। जनता की मजबूरी: टैक्स दो… फिर शिकायत करो… फिर इंतजार करो एक नागरिक टैक्स देता है ताकि उसे साफ सड़कें, स्वच्छ कॉलोनियां, नियमित पेयजल, बेहतर सीवर व्यवस्था और सुरक्षित सार्वजनिक सुविधाएं मिल सकें।लेकिन वास्तविकता यह है कि नागरिक पहले समस्या झेलता है, फिर शिकायत दर्ज करता है, फिर महीनों इंतजार करता है, और कई मामलों में समाधान फिर भी नहीं मिलता। क्या यही सुशासन है? क्या ‘गुड गवर्नेंस’ सिर्फ भाषणों तक सीमित है? हर सरकारी कार्यक्रम में सुशासन, डिजिटल प्रशासन और जनसेवा की बातें होती हैं। लेकिन यदि लाखों लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन का सहारा लेने को मजबूर हों और उनमें से बड़ी संख्या समय पर हल ही न हो, तो यह डिजिटल सफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का संकेत माना जाएगा।सरकार को यह भी बताना चाहिए कि वर्षों से चल रही शिकायतों के बावजूद आखिर कौन-सी स्थायी सुधार योजना लागू हुई, जिससे शिकायतों की संख्या कम होती दिखाई दे? सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन? जब किसी निजी कंपनी का प्रदर्शन लगातार खराब होता है तो उसके प्रबंधन से जवाब मांगा जाता है।लेकिन सरकारी व्यवस्था में हजारों शिकायतें लंबित रहने के बाद भी क्या किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होती है?क्या किसी नगर निगम आयुक्त, मुख्य नगर पालिका अधिकारी या संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा गया?यदि नहीं, तो फिर सुधार की उम्मीद किस आधार पर की जाए? लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। जब नागरिकों की आवाज़ लगातार हेल्पलाइन पर दर्ज होती रहे और समाधान की गति शिकायतों से पीछे रह जाए, तो यह केवल प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि विश्वास का संकट बन जाता है।‘डी’ रेटिंग किसी रिपोर्ट की एक पंक्ति भर नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की कहानी है, जिन्हें साफ पानी, टूटी सड़क, जाम सीवर, अंधेरी गलियों और बदहाल नागरिक सेवाओं के बीच जीना पड़ रहा है।सरकार के सामने चुनौती अब नई योजनाएं घोषित करने की नहीं, बल्कि यह साबित करने की है कि सीएम हेल्पलाइन शिकायत दर्ज करने का माध्यम भर नहीं, बल्कि समाधान दिलाने की गारंटी भी है। क्योंकि जनता को आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए। recent visitors 16

आज शाम थम जाएगा दतिया में चुनावी शोर, 2.20 लाख मतदाता करेंगे 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

Election campaigning in Datia will come to a halt this evening; 2.20 lakh voters will decide the fate of 21 candidates. विधानसभा उपचुनाव में मंगलवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी और उनके स्थानीय कार्यकर्ता ही घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर सकेंगे। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में 2 लाख 20 हजार 344 मतदाता 21 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। ईवीएम में प्रत्याशियों के साथ नोटा का विकल्प भी रहेगा। तीन अगस्त को नतीजे आएंगे। दतिया में कुल 2,20,344 मतदाता हैं। इनमें 1,16,088 पुरुष और 1,04,246 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 10 अन्य मतदाता भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। विधानसभा क्षेत्र में 1,372 दिव्यांग, 80 वर्ष से अधिक उम्र के 1,237 और 443 सर्विस वोटर भी हैं। यही मतदाता 30 जुलाई को ईवीएम में बटन दबाकर 21 प्रत्याशियों की किस्मत तय करेंगे। भाजपा ने विकास को बनाया मुख्य मुद्दाभाजपा ने चुनाव प्रचार में दतिया के विकास को मुख्य मुद्दा बनाया। पार्टी ने ढाई साल से क्षेत्र में विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस को घेरा। भाजपा नेताओं ने मतदाताओं से कहा कि पार्टी प्रत्याशी के जीतने पर रुके हुए विकास कार्यों को पूरा कराया जाएगा। प्रचार के दौरान सरकार के काम और दतिया के विकास को लेकर भी जनता के बीच नेता पहुंचे। कांग्रेस ने नरोत्तम के साथ भाजपा को घेरावहीं कांग्रेस ने चुनाव प्रचार में दतिया उपचुनाव में भाजपा के दावेदार माने जा रहे पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को निशाने पर रखा। पार्टी ने उनके कार्यकाल के दौरान दतिया में कानून-व्यवस्था और कथित गुंडागर्दी को लेकर लगातार सवाल उठाए। कांग्रेस ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने को भी चुनावी मुद्दा बनाया और इसे लेकर भाजपा पर निशाना साधा। दोनों दलों ने जातीय समीकरण साधने लगाई पूरी ताकतदतिया उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 40-40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा। भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल लगातार प्रचार में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी रैली और जनसभा कर मतदाताओं से भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील की। करीब 10 से 15 कैबिनेट मंत्रियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में जातीय और स्थानीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी दी गई। ग्वालियर-चंबल अंचल के नेताओं ने भी प्रचार में मोर्चा संभाला। कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार प्रचार करते रहे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा हेमंत कटारे, जयवर्धन सिंह और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के अन्य नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। दोनों दलों ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए पूरी ताकत लगाई। आज पांच बजे के बाद बाहरी नेताओं की नो एंट्रीमंगलवार शाम पांच बजे प्रचार थमने के बाद बाहर से आए नेताओं को दतिया विधानसभा क्षेत्र की सीमा से बाहर जाना होगा। इसके बाद प्रत्याशी और स्थानीय कार्यकर्ता ही मतदाताओं से डोर-टू-डोर संपर्क कर सकेंगे। चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद अब दोनों दलों का फोकस मतदान के दिन अधिक से अधिक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने पर रहेगा। 30 को ईवीएम में बंद हो जाएगा प्रत्याशियों का भाग्य30 जुलाई को मतदान के साथ ही 2.20 लाख मतदाताओं का फैसला ईवीएम में बंद हो जाएगा। 21 प्रत्याशियों के साथ नोटा भी विकल्प होगा और मतगणना में तय होगा कि दतिया की जनता ने किसके पक्ष में अपना जनादेश दिया। recent visitors 12

मध्य प्रदेश: आज किसानों का भोपाल कूच व CM हाउस के घेराव की तैयारी, मूंग की 100% खरीदी पर अड़े; अब आगे क्या?

Madhya Pradesh: Farmers set to march to Bhopal and lay siege to the CM’s residence today, adamant on 100% procurement of moong; what next? मध्यप्रदेश में मूंग की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने समेत किसानों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया है। नर्मदापुरम से भोपाल के लिए निकली संयुक्त किसान मोर्चा की पदयात्रा सोमवार को प्रशासन की रोक-टोक के बावजूद आगे बढ़ती रही। किसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के साथ ओबैदुल्लागंज से भोपाल की तरफ जाने वाला हाईवे बंद है, वहीं जबलपुर की तरफ से सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित है। किसान नेताओं ने साफ किया है कि वे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे। आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी है। इसके अलावा ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी, फसल बीमा में सुधार, बिजली कटौती बंद करने और ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगें भी शामिल हैं। नर्मदापुरम से निकले किसान, रास्ते में कई बार रोका गयाकिसान पदयात्रा सोमवार को नर्मदापुरम से आगे बढ़ी। प्रशासन ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर किसानों को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। नर्मदा पुल के पास से लेकर बुधनी क्षेत्र तक कई जगह पुलिस और किसानों के बीच आमना-सामना हुआ। किसानों ने रास्ते में लगाए गए पांच बैरिकेड हटाकर आगे का रास्ता बनाया। इसके बाद यात्रा बरखेड़ा तक पहुंची। रात में विश्राम के बाद मंगलवार को किसानों ने भोपाल की तरफ फिर कूच किया। सुबह से शाम तक पुलिस-किसानों में खींचतानपहले दिन करीब सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे तक अलग-अलग स्थानों पर किसानों और पुलिस के बीच गतिरोध बना रहा। प्रशासन ने नर्मदापुरम शहर में प्रवेश से लेकर सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा सहित कई जगहों पर किसानों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। पदयात्रा में युवा किसानों के साथ बुजुर्ग भी शामिल रहे। सोमवार की लंबी पैदल यात्रा के बाद किसान बरखेड़ा पहुंचे और मंगलवार को फिर राजधानी की ओर बढ़े। हाईवे पर यातायात प्रभावित, वैकल्पिक रास्तों का दबावकिसानों के भोपाल की ओर बढ़ने के कारण ओबैदुल्लागंज-भोपाल मार्ग पर यातायात प्रभावित है। इसके साथ जबलपुर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सुल्तानपुर मार्ग भी प्रभावित होने की सूचना है। ऐसे में भोपाल की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब मूंग की एमएसपी खरीदी को लेकर प्रदेश में किसान पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले भी किसानों ने हाईवे जाम और विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी। गुरुद्वारा बंद कराने का किसान नेताओं ने लगाया आरोपकिसान नेताओं ने आरोप लगाया कि औबेदुल्लागंज स्थित गुरुद्वारे में किसानों के ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन प्रशासन ने गुरुद्वारा बंद करा दिया। उनका कहना है कि नर्मदापुरम में आंदोलन के चलते देरी होने के बाद किसानों को रात बरखेड़ा में गुजारनी पड़ी। इन मांगों पर अड़े किसानकिसानों की मांगों की सूची में मूंग की 100 प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, ई-टोकन व्यवस्था खत्म की जाए, एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार किया जाए, अघोषित बिजली कटौती बंद की जाए, अनुदान पर ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं, ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया जाए, भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त करने की मांग की है। किसानों का ऐलान-मांग पूरी होने तक आंदोलनसंयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों का कहना है कि सरकार को मूंग की पूरी उपज एमएसपी पर खरीदने सहित सभी मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल किसानों का काफिला राजधानी की तरफ बढ़ रहा है और दो प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित होने से प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट की भी चुनौती खड़ी हो गई है। recent visitors 14

जीएडी के नियमों को ठेंगा बता पीएचई विभाग, पदोन्नति देने ठोकी अपनी शर्तें, अधिकारों से वंचित कर्मचारी

Flouting GAD rules, the PHE Department has imposed its own conditions for granting promotions, leaving employees deprived of their rights. भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों एवं कर्मचारी हितैषी मंशा अनुरूप जीएडी के नियमों के मुताबिक सभी विभागों में पदोन्नति का बड़ा काम चल रहा है। लेकिन कुछ विभाग उदासीनता भी दिखा रहे हैं। ऐसा ही कुछ पीएचई विभाग में चल रहा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मनमानी से सैकड़ों कर्मचारी पदोन्नति से बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।वैसे तो जीएडी ने सभी विभागों को विस्तृत दिशा निर्देश दिए हैं। मध्यप्रदेश शासन के अनेक विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी पदों पर पदोन्नत कर दिया गया है। कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पूर्ण करने के लिए 5 वर्ष का समय भी दिया गया है। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD), स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग, उद्योग विभाग, जनसंपर्क विभाग तथा संभागीय उपायुक्त, वाणिज्यिक कर विभाग सहित कई विभागों में जीएडी नियमों के तहत कर्मचारियों की पदोन्नति का कार्य बड़ी तेजी से चल रहा है। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब तक लंबित है। पीएचई विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि जब समान शासन, समान सेवा नियम और समान परिस्थितियों में अन्य विभागों के कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिल चुका है, तब पीएचई विभाग के कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी शासन की मंशा के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ताकि पात्र कर्मचारियों को शीघ्र पदोन्नति प्रदान की जा सके तथा कंप्यूटर डिप्लोमा एवं सीपीसीटी की पूर्ति के लिए अन्य विभागों की तरह पाँच वर्ष का अवसर उपलब्ध कराया जाए। कर्मचारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से पीएचई विभाग के कर्मचारियों को भी समान न्याय मिलेगा और पूरे प्रदेश में एक समान पदोन्नति नीति लागू होगी। recent visitors 17

छतरपुर:  गुरु पूर्णिमा महोत्सव , 29 जुलाई को रविदास मंदिर अबार बनेगा श्रद्धा और भक्ति का केंद्र

Chhatarpur: Guru Purnima Festival, on July 29, Ravidas Temple Abar will become a center of faith and devotion. छतरपुर/रामटौरिया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत रविदास मंदिर अबार माता तहसील घुवारा जिला छतरपुर में 29 जुलाई 2026 बुधवार को गुरु पूजन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर समिति द्वारा आमंत्रण पत्र जारी कर समाज के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित करने की अपील की गई है। आयोजन आल इंडिया आदि धर्म मिशन के तत्वाधान में रैदास समाज सेवा समिति रविदास मंदिर अबार, तथा रविदास मंदिर समिति अबार माता के तत्वावधान में संपन्न होगा। कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे गुरु पूजन किया जाएगा। जबकि शाम 4 बजे से प्रसाद वितरण एवं भंडारा प्रारंभ होगा। समिति ने अपने संदेश में समाज के सभी गुरु प्रेमी बंधुओं, माताओं, बहनों एवं युवाओं से तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया है। आमंत्रण पत्र में श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह किया गया है कि वे परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंचकर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में सहभागिता निभाएं। कार्यक्रम में स्थानीय समाजजन, क्षेत्रवासी एवं आसपास के ग्रामीणों की बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है। आयोजन स्थल रविदास मंदिर अवार (अबार माता), तह. घुवारा जिला छतरपुर निर्धारित किया गया है। समिति का संदेश: भजन मंडली एवं कीर्तन के साथ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं तथा गुरु कृपा प्राप्त करें। recent visitors 34

फर्जी पीएचडी और भर्ती वाले बनेंगे कुलपति.

फर्जी पीएचडी और भर्ती वाले बनेंगे कुलपति..किसी अधिकारी के निकट रिश्तेदार को सहायक प्राध्यापक के पद पर भर्ती करने के लिए कुलपति    0 फर्जी पीएचडी और भर्ती वाले बनेंगे कुलपति..?किसी अधिकारी के निकट रिश्तेदार को सहायक प्राध्यापक के पद पर भर्ती करने के लिए कुलपति का आवेदन करने वाले ओसडी को बचा रहे है अधिकारी …?उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय में अटैच गणित के प्राध्यापक जो ओएसडी बनाए गए हैं जबकि पूरव में अपर मुख्य सचिव ने उनकी अनियमितता की जांच कर कार्रवाई करने को लिखा है? लेकिन वर्तमान अधिकारी बचा रहे है..? उक्त ओएसडी ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलपति के लिए आवेदन किया है…! जबकि उनके द्वारा अवैधानिक तरीके से अर्जित पीएचडी, प्राध्यापक पद पर चयन, और जिन अंकसूची के आधार पर नौकरी मिली है में गम्भीर अनियमितता है ? और जांच जारी है और जांच के सदस्यों को बदलवाया जा रहा है और जांच को प्रभावित भी…!जैसा कि सुनने में आ रहा है…? एक्सीलेंस कालेज के प्राचार्य कब तक उनके दस्तावेज छिपा सकते हैं..? लोगों का कहना है कि किसी अधिकारी की निकट रिश्तेदार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक भर्ती के लिए 2-3 विषयों में आवेदन किया है? लेकिन ओएसडी साहब अवैध तरीके से पीएचडी, प्राध्यापक पद पर चयन, और असंगत अंकसूची की सत्यता छिपाने के लिए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का कुलपति बनाने का झांसा recent visitors 39