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India जल्द बनने वाला है दुनिया की तीसरी बड़ी इकॉनमी, जापान की इकनॉमी की ग्रोथ रेट अभी शून्‍य से भी नीचे

नई दिल्‍ली भारत ने हाल में ही जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था का खिताब हासिल कर लिया है और अब उसकी निगाह तीसरी बड़ी अव्‍यवस्‍था बनने पर है. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था से आगे फिलहाल जापान, चीन और अमेरिका ही बचे हैं. इसमें भी जापान की हालत लगातार खराब होती जा रही है. जापान सरकार ने  एक रिपोर्ट जारी कर बताया कि उसकी सालाना ग्रोथ रेट 2025 की पहली तिमाही में गिरकर 0.7 फीसदी पर आ गई है, जबकि भारत अभी 6 फीसदी से ज्‍यादा की दर से आगे बढ़ रहा है. जापान सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (या किसी देश की वस्तुओं व सेवाओं का माप) जनवरी-मार्च में अक्टूबर-दिसंबर 2024 (पिछली तिमाही) की तुलना में अनुमान से भी ज्‍यादा 0.2 फीसदी सिकुड़ गया है. पिछले एक साल में पहली बार इसमें संकुचन दर्ज किया गया. संकुचन का मतलब है कि जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से भी नीचे चली गई है और यह अर्थव्‍यवस्‍था का आकार बढ़ने के बजाय घटने लगा है. कहां से कहां पहुंच गया जापान रिपोर्ट के अनुसार, जापान की अर्थव्यवस्था 2024 की अंतिम तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में 2.4 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ रही थी. निर्यात में 2.3 फीसदी की दर से गिरावट दिख रही, जबकि उपभोक्ता खर्च स्थिर रहा और पूंजी निवेश में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2024 की तिमाही में भी जापान की इकनॉमी शून्‍य से नीचे जाकर माइनस 0.4 फीसदी रही थी. इस तरह, सालाना आधार पर देखा जाए तो अभी जापान की अर्थव्‍यवस्‍था माइनस 0.7 फीसदी की दर से घट रही है. मंदी की तरफ जा रहा जापान जापान की मुश्किलें अभी खत्‍म नहीं हुई हैं, बल्कि आगे और चुनौतियां आ रही हैं. दरअसल, अमेरिकी शुल्क से जापान के बड़े निर्यातकों, खासतौर पर मोटर वाहन विनिर्माताओं को नुकसान होने की आशंका है. न केवल जापान से भेजे जाने वाले उत्पादों के लिए, बल्कि मैक्सिको और कनाडा जैसे अन्य देशों से भी. जापान के अधिकारियों ने माना कि प्रतिक्रिया की योजना बनाना भी एक चुनौती है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख बदलते रहते हैं. ऐसे में जापान की तरफ से कोई प्रस्‍ताव देना भी बड़ा मुश्किल काम है. अगर टैरिफ का असर दिखा तो 2025 की दूसरी तिमाही में भी जापान की ग्रोथ रेट शून्‍य से नीचे रहने की आशंका है, जिससे यह तकनीकी रूप से मंदी में चला जाएगा. अभी कहां खड़ा है जापान साल 2025 में जापान की जीडीपी 4.39 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. इस दौरान जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.77 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है. इस लिहाज से देखा जाए तो जापान अभी तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था बना हुआ है. साल 2024 में जापान की पर्चेजिंग पॉवर 6.31 ट्रिलियन डॉलर रही थी. अब जबकि जापान की इकनॉमी ग्रोथ शून्‍य से भी नीचे चली गई है तो उसकी अर्थव्‍यवस्‍था का आकार भी कम हो सकता है. कहां खड़ा है भारत अगर भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो अभी इसका आकार 4.3 ट्रिलियन डॉलर है. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है. इस तरह, देखा जाए तो अगले 2 से 3 महीने में ही भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था जापान को पीछे छोड़ देगी. भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ रेट अभी 6.5 फीसदी के आसपास चल रही है, जबकि जापान शून्‍य से भी नीचे चला गया है. लिहाजा जल्‍द ही भारत इसे पीछे छोड़ते हुए तीसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन जाएगा. भारत की तेज गति भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था तक पहुंचने में 60 साल का समय लगा, जबकि 1 से 2 ट्रिलियन डॉलर का सफर महज 7 साल में पूरा किया. इसके बाद 3 और 4 ट्रिलियन डॉलर की इकनॉमी बनने में भी सिर्फ 4 साल का समय लगा. अब तो ग्रोथ इतनी तेज हो गई है कि भारत हर डेढ़ साल में अपनी इकनॉमी को 1 ट्रिलियन डॉलर बढ़ाने की क्षमता रखता है. आईएमएफ ने क्‍या लगाया अनुमान आईएमएफ ने साल 2025 में दुनिया की टॉप-5 इकनॉमी के साइज का अनुमान जारी किया है. इसमें सबसे ऊपर 30.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका है. दूसरे पायदान पर 19.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन के रहने का अनुमान है. जर्मनी की इकनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे पायदान पर और भारत की इकनॉमी 4.34 ट्रिलियन डॉलर के साथ चौथे तो जापान की इकनॉमी 4.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें पायदान पर रहने का अनुमान है.   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 11

MP में किसानों को जो सोलर पम्प दिए जाएंगे उनकी जियो टैगिंग की जाएगी, किसान जमा करेंगे 10 प्रतिशत राशि

भोपाल प्रदेश में किसानों को सोलर पम्प देने की तैयारी में जुटी मोहन यादव सरकार ने इसको लेकर नियम तय कर दिए हैं। किसानों को जो सोलर पम्प दिए जाएंगे उनके सोलर प्लांट की जियो टैगिंग की जाएगी। इससे सोलर पम्प और बिजली कनेक्शन पर अनुदान की डुप्लीकेसी की स्थिति से मिलेगी राहत। इस योजना में यह भी तय किया गया है कि 3 हार्स पावर तक के सोलर प्लांट के लिए किसानों को 5 प्रतिशत और इससे अधिक क्षमता की सोलर एनर्जी जनरेट करने वाले सोलर प्लांट के लिए 10 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। इसके लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया है। यह योजना मार्च 2028 तक लागू रहेगी। जनवरी में कैबिनेट ने दी थी मंजूरी     24 जनवरी 2025 को हुई कैबिनेट मीटिंग में सिंचाई के लिए सोलर पम्प स्थापना योजना को मंजूरी दी गई थी।     भारत सरकार की कुसुम योजना के घटक में देय अनुदान के माध्यम से प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना मार्च 2028 तक प्रभावी रहेगी।     पांच और सात हार्स पावर के सोलर पम्प कनेक्शन सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेंगे जिनके पास स्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं है।     हर सोलर पम्प के साथ एक बोर्ड लगाया जाएगा।     इसमें योजना के नाम और अनुदान का उल्लेख होगा।     पम्प पर लगे क्यूआर कोड से पूरी जानकारी हासिल की जा सकेगी।     मुख्यमंत्री सोलर पम्प योजना में रजिस्टर्ड किसान शर्तों को पूरा करने पर योजना का लाभ ले सकेंगे। दूसरे स्टेप में मिलेगा स्थायी कनेक्शन वाले किसानों को लाभ योजना के पहले चरण का लाभ सिर्फ ऐसे किसानों को दिया जाएगा, जिनके पास बिजली कनेक्शन नहीं है। दूसरे स्टेप मे स्थायी विद्युत पम्प का उपयोग कर रहे किसानों को भी सोलर पम्प दिया जाएगा। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा वर्ष 2023-24 और वर्ष 2024-25 में अस्थायी विद्युत कनेक्शन और स्थायी विद्युत कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं की समग्र और आधार ई-केवाईसी का उपयोग कर उनकी जमीन की डिटेल निकाली जाएगी। इसके आधार पर तैयार होने वाले डेटाबेस पर राज्य सरकार द्वारा ऋण भुगतान किया जाएगा। इसी के आधार पर सब्सिडी वाले किसान तय किए जाएंगे। सिंचाई के अलावा दूसरे कामों में उपयोग की जा सकेगी जनरेट हुई बिजली     सोलर पैनल से साल भर में 330 दिन व औसत 8 घंटे ऊर्जा का उत्पादन होता है।     खेती के लिए पंपिंग की जरूरत मात्र 150 दिन ही होती है।     सोलर एनर्जी से जनरेट होने वाली ऊर्जा के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।     बची हुई ऊर्जा का उपयोग चाफ कटर, आटा चक्की, कोल्ड स्टोरेज, ड्रायर, बैटरी चार्जर आदि कामों में किया जा सकेगा।     सोलर पम्प के साथ ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने किसान कल्याण, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग प्राथमिकता पर काम करेगा। राज्य और जिला स्तर पर बनेगी कमेटी योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य और जिला स्तर पर कमेटी बनेगी। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी काम करेगी। इसमें सचिव नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग सदस्य सचिव होंगे। ऊर्जा, वित्त, नगरीय विकास और आवास, किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग, राजस्व विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सदस्य के रूप में होंगे। जिला स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष कलेक्टर होंगे। जिला पंचायत सीईओ, उप संचालक कृषि, प्रबंधक जिला सहकारी बैंक, सहायक संचालक उद्यानिकी, महाप्रबंधक या अधीक्षण यंत्री विद्युत वितरण कम्पनी, जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी ऊर्जा विकास निगम सदस्य के रूप में शामिल होंगे। योजना में ऐसे मिलेगा अनुदान     भारत सरकार की कुसुम योजना के अंतर्गत 3 हार्स पावर तक के सोलर पम्प पर 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।     किसान को 5 प्रतिशत मार्जिन मनी देनी होगी और 65 प्रतिशत राशि कृषक ऋण से आएगी।     3 हार्स पावर से अधिक वाले पंपों पर 30 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार से मिलेगा।     60 प्रतिशत से अधिक राशि कृषक ऋण के रूप में होगी।     किसान को मार्जिन मनी के रूप में 10 प्रतिशत राशि देना होगी।     कुसुम बी योजना में 7.5 हार्स पावर से अधिक के पम्प पर केंद्र के अंश की राशि 7.5 एचपी पम्प पर दिए जाने वाले अनुदान तक ही रहेगी।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 9

36 किमी लंबी कलियासोत नदी अब पूरे साल कल-कल करती बहेगी, स्टॉप डैम बनेंगे, जल-संसाधन विभाग सर्वे कर रहा

भोपाल मध्य प्रदेश के भोपाल जिले में स्थित 36 किलोमीटर लंबी कलियासोत नदी को साल भर पानी से भरपूर बनाए रखने के लिए जल-संसाधन विभाग ने तीन स्टॉप डैम बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए वर्तमान में विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। यह परियोजना नदी की जल उपलब्धता बढ़ाने और भू-जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कलियासोत नदी की खासियत और परियोजना का उद्देश्य कलियासोत नदी, जो कि कलियासोत वन क्षेत्र के जलस्रोतों से निकलती है, लगभग 36 किलोमीटर लंबी है। वर्तमान में यह नदी साल के अधिकांश महीनों में सूखी रहती है, केवल 3-4 महीने ही इसमें पानी बहता है। नदी के किनारे लगभग 8,000 एकड़ निजी जमीन है। नदी का प्रवाह भोजपुर से मिसरोद तक लगभग 17 किलोमीटर का है। इस नदी को गुजरात की साबरमती नदी की तरह विकसित करने की योजना है ताकि यह पूरे साल पानी से भरी रहे। तीन स्टॉप डैम कहां-कहां बनेंगे? जल-संसाधन विभाग द्वारा किए गए प्रारंभिक सर्वे के अनुसार, तीन प्रमुख स्थानों पर स्टॉप डैम बनाए जाएंगे:- स्टॉप डैम 1 :– सर्वधर्म पुल के पास, जो नदी के एक ढाई किलोमीटर के भीतर है। स्टॉप डैम 2 :- जेके अस्पताल पुल और दानिश कुंज ब्रिज के बीच, लगभग दो किलोमीटर दूरी पर। स्टॉप डैम 3 :- सलैया ब्रिज से आगे, जहां मौजूदा ब्रिज डूब जाएगा इसलिए नया पुल बनाना होगा। इन तीनों स्टॉप डैम से लगभग 30 लाख घनमीटर पानी जमा किया जा सकेगा और इससे नदी में लगभग 8 किलोमीटर तक लगातार पानी बना रहेगा। शहर में नदी का बहाव 17 किमी 36 किमी लंबी नदी के किनारे 8,000 एकड़ के करीब निजी जमीन है। शहर में इसका बहाव भोजपुर से मिसरोद तक 17 किमी है। इसे गुजरात की साबरमती की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। अभी नदी 8-9 माह सूखी रहती है। कोई घाट नहीं है। नदी भोजपुर के पास बेतवा में मिलती है। अभी सीवेज का गंदा पानी ● शाहपुरा के पास कोलार रोड से नदी में टीटी नगर, मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली, चूनाभट्टी के नालों से घरेलू कचरा मिल रहा है। ● मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले से और दक्षिण पूर्वी भाग की बस्तियों से नदी में सीवेज व गंदा पानी जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र का कचरा मिलने से भी नदी दूषित हो रही है। ● मिसरोद व इससे जुड़ी आबादी का सीवेज नदी को गंदा कर रहा है। तीन नए डैम से बदलेगी तस्वीर रिवर डेवेलपमेंट के इस प्रोजेक्ट को गुजरात की साबरमती नदी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, जिससे नदी के आस-पास का क्षेत्र भी बेहतर तरीके से विकसित होगा। इस प्रक्रिया से नदी में पानी का प्रवाह बढ़ेगा और यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी होगा। हालांकि, नदी के रास्ते में कुछ समस्या भी मौजूद है। शाहपुरा, टीटी नगर, मैनिट, और चूनाभट्टी जैसे इलाकों से सीवेज का गंदा पानी नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। इसके अलावा, औद्योगिक क्षेत्रों और मिसरोद से भी गंदा पानी नदी में मिल रहा है। यह समस्या भविष्य में परियोजना की सफलता के लिए चुनौती बन सकती है, और इसे सही तरीके से नियंत्रित किया जाना जरूरी होगा। नदी के पुनर्जीवन की उम्मीद यह परियोजना नदी के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। जैसे ही इन तीन स्टॉप डैमों का निर्माण होगा, कलियासोत नदी की स्थिति में बदलाव आएगा, और यह नदी जीवनदायिनी बनकर पूरे साल बहती रहेगी। इससे शहर में जलवायु और पर्यावरणीय स्थिति में भी सुधार होगा। नदी की वर्तमान स्थिति और पर्यावरणीय चुनौतियां हालांकि नदी के संरक्षण की यह योजना सराहनीय है, किन्तु नदी पर कई पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं:- सीवेज का मिलना :– शाहपुरा क्षेत्र के कोलार रोड से आने वाले नालों से मैनिट, पंचशील नगर, चार इमली, चूनाभट्टी जैसे इलाकों का घरेलू और औद्योगिक कचरा सीधे नदी में जा रहा है, जिससे नदी दूषित हो रही है। औद्योगिक प्रदूषण :– मंडीदीप के पश्चिमी भाग के नाले और दक्षिण पूर्वी बस्तियों से भी सीवेज और औद्योगिक कचरा नदी में मिल रहा है। नदी के किनारे अवैध निर्माण :– दी और इसके बफर जोन में लगभग 1100 से अधिक निर्माण हो चुके हैं, जो भविष्य में डैम बनने पर पानी की पकड़ में आ सकते हैं और इन्हें हटाना आवश्यक होगा। सर्वे के बाद की संभावनाएं जल-संसाधन विभाग के पीएस विनोद देवड़ा के अनुसार, 1998 में भी कलियासोत नदी पर एक डैम बनाया गया था। वर्तमान सर्वे इसी को आधार बनाकर तीन स्टॉप डैम बनाने के लिए प्रारंभिक तथ्य एकत्रित कर रहा है। यदि ये डैम बन जाते हैं, तो नदी का जल प्रवाह स्थायी होगा और भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। साथ ही नदी के किनारे के इलाकों में खेती और जल संचयन को लाभ मिलेगा। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 8

चिलवाहा बायोगैस संयंत्र में हर दिन पांच टन बायो गैस और 50 टन बायोमास पैलेट का निर्माण होगा

भोपाल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले को उद्योग के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है। रायसेन तहसील के ग्राम चिलवाहा में बायो गैस संयंत्र (biogas plant) की स्थापना के लिए प्रक्रिया शुरू हो गई है। केंद्र सरकार के ग्लोबल बायो फ्यूल एलायंस के तहत कपर्दी बायो एनर्जी लिमिटेड द्वारा चिलवाहा में बायोगैस संयंत्र लगाया जा रहा है। जिसमें हर दिन पांच टन बायो गैस और 50 टन बायोमास पैलेट का निर्माण होगा। खास बात यह कि ये उत्पाद नरवाई से बनाए जाएंगे, जो जिले के किसानों से ही खरीदी जाएगी। संयंत्र लगाने के लिए कंपनी ने पांच एकड़ जमीन पर कार्य शुरू कर दिया है। फिलहाल जमीन की लेवलिंग का काम किया जा रहा है।  कंपनी के कार्यकारी अधिकारी अभिषेक पाठक ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस का शुभारंभ किया था, जिसके तहत 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बर उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया था। इसी के तहत बायो गैस प्लांट की स्थापना जिले में की जा रही है। रायसेन. संयंत्र लगाने शुरू हुआ काम। बायो गैस प्लांट बनने के बाद होंगे ये फायदे     नरवाई से बनाएंगे बायो गैस तथा बायोमास पैलेट     स्थानीय किसानों से नरवाई (पराली) खरीदी जाएगी। जिससे किसानों को फायदा होगा।     किसान नरवाई जलाना बंद करेंगे।     पर्यावरण सुरक्षित होगा।     क्षेत्र में बायो गैस के उपयोग से पर्यावरण सुरक्षित होने के साथ तापमान पर नियंत्रण होगा।     15 हजार हैक्टेयर फसल की नरबाई का उपयोग बायो गैस बनाने में होगा।     संयंत्र में गोवंश के अवशेष का उपयोग भी बायोगैस बनाने में किया जाएगा, जिससे गोवंश पालकों को भी अतिरिक्त आय होगी।     संयंत्र में गैस बनाने से जैविक खाद बनेगा, जिसे किसानों को दिया जाएगा।     यह खाद पूर्ण जैविक होगा, जिससे किसानों की फसलों का उत्पादन बढ़ने के साथ रसायनों से मुक्ति मिलेगी। किसानों के साथ पर्यावरण को फायदा अभिषेक पाठक ने बताया कि चिलवाहा में बनने वाली बायो गैस और बायोमास पैलेट इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड को देंगे, जिसके जरिए यह उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। गैल कंपनी से भी इस संबंध में अनबंध किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में गैल कंपनी ने रसोई गैस सप्लाई पर काम शुरू किया है। घरों में पाइप लाइन लगाई जा रही है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 9

राजधानी भोपाल से होगी प्रदेशभर में बसों की निगरानी, बीमा-फिटनेस खत्म होते ही जाएगा संदेश

भोपाल बाणगंगा चौराहा हादसे से सबक लेते हुए परिवहन विभाग ने प्रदेश में बसों की निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। हादसे में जिस बस से महिला डॉक्टर की मौत हुई थी, उसका फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं था। अब ऐसी लापरवाही रोकने के लिए एक केंद्रीकृत निगरानी सिस्टम शुरू किया जा रहा है, जिसकी कमान भोपाल में बने कंट्रोल रूम के हाथ में होगी। भोपाल स्थित परिवहन आयुक्त के कैंप ऑफिस में यह कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है, जहां से पूरे मध्यप्रदेश की बसों के फिटनेस, परमिट, पीयूसी और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) की निगरानी की जाएगी। परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था की जिम्मेदारी एआरटीओ स्तर के अधिकारियों को दी गई है। पूरे प्रदेश से जुटाया जा रहा डेटा राज्यभर से पंजीकृत 57 हजार बसों की जानकारी एकत्र की जा रही है। इसमें बसों का रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, पीयूसी और VLTD की स्थिति शामिल है। यह सारा डेटा कंप्यूटर में फीड कर एक एनालिटिकल सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, जो दस्तावेजों की वैधता खत्म होने से पहले ही अलर्ट भेजेगा। अलर्ट सिस्टम देगा पहले से सूचना सिस्टम में ऐसा अलर्ट फीचर जोड़ा गया है, जो किसी दस्तावेज की वैधता खत्म होने से 7 दिन पहले कंट्रोल रूम की स्क्रीन पर अलर्ट दिखाएगा। जैसे अगर किसी बस का परमिट 15 तारीख को समाप्त हो रहा है, तो 8 तारीख से ही अलर्ट दिखने लगेगा। चिन्हित बसों की जानकारी संबंधित जिले के आरटीओ को भेजी जाएगी, जो बस मालिक को नोटिस जारी कर दस्तावेज अपडेट कराने को कहेगा। तय समय तक दस्तावेज अपडेट नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     तीन चरणों में लागू होगा प्रोजेक्ट     पहला चरण: 26 हजार शैक्षणिक बसें     दूसरा चरण: 20 हजार यात्री बसें     तीसरा चरण: 11 हजार औद्योगिक संस्थानों की बसें पहले चरण की मॉनिटरिंग इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। भोपाल आरटीओ का नया प्रभार बाणगंगा हादसे के बाद भोपाल आरटीओ रहे जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया गया था। उनके स्थान पर सीहोर के जिला परिवहन अधिकारी रितेश तिवारी को भोपाल आरटीओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। साथ ही, निलंबन के बाद खाली हुए नरसिंहपुर जिला परिवहन अधिकारी का कार्यभार जबलपुर की संभागीय उप परिवहन आयुक्त रमा दुबे को दिया गया है। सचिव परिवहन विभाग मनीष सिंह ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। हर जिले से रजिस्टर्ड बसों की जानकारी मंगाई जा रही है। इसमें रजिस्ट्रेशन, परमिट, फिटनेस, पीयूसी की वैधता और वीएलटीडी की स्थिति शामिल है। सारा डेटा कंप्यूटर में फीड कर एक एनालिटिकल सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। तीन चरणों में शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण की मॉनिटरिंग इसी महीने के अंत तक शुरू हो जाएगी। परिवहन विभाग बुलवा रहा है 57 हजार बसों की जानकारी, आरटीओ को बताएंगे बस का फिटनेस कब खत्म हो रहा है नोटिस से पहले अलर्ट जैसे ही अलर्ट सिस्टम में कोई बस चिन्हित होगी, उसका डेटा संबंधित जिले के आरटीओ को भेजा जाएगा। वहां से बस मालिक को नोटिस भेजकर दस्तावेज समय रहते अपडेट कराने को कहा जाएगा। तय समय तक अपडेट नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। कैसे काम करेगा सिस्टम: डिप्टी टीसी किरण शर्मा ने बताया कि सॉफ्टवेयर में ऐसा अलर्ट सिस्टम होगा, जो किसी भी दस्तावेज की वैधता खत्म होने से 7 दिन पहले स्क्रीन पर जानकारी ब्लिंक करेगा। मसलन, अगर किसी बस का परमिट 15 तारीख को खत्म हो रहा है, तो 8 तारीख से ही कंट्रोल रूम में अलर्ट आने लगेगा। रितेश तिवारी को भोपाल आरटीओ का अतिरिक्त प्रभार बाणगंगा चौराहा पर अनफिट बस से हुए हादसे के बाद खाली हुए भोपाल आरटीओ के पद का प्रभार रितेश तिवारी को सौंपा गया है। अब तक वह जिला परिवहन अधिकारी सीहोर थे। अब उन्हें भोपाल क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनका मूल पद सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी है। तीन दिन पहले बाणगंगा चौराहा पर हुए हादसे के बाद भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह ने भोपाल आरटीओ रहे जितेंद्र शर्मा को निलंबित कर दिया था। तब जितेंद्र शर्मा के पास नरसिंहपुर जिले के आरटीओ का भी अतिरिक्त प्रभार था। उनके निलंबन आदेश के बाद नरसिंहपुर जिला जिला परिवहन अधिकारी का पद भी खाली हो गया था। इसलिए जबलपुर कार्यालय संभागीय उप परिवहन आयुक्त रमा दुबे को नरसिंहपुर जिला परिवहन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। सचिव परिवहन विभाग मनीष सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिए हैं। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 9