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महासमुंद

सायबर ठगी में मदद करने वाले म्यूल अकाउंट से जुड़े तीन खाताधारकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4), 318(4), 61(2), 111 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

समन्वय पोर्टल से मिली थी सूचना
मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को समन्वय पोर्टल के माध्यम से सूचना मिली थी कि जिले में 6 संदिग्ध बैंक खातों में बेहद कम समय में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है. इन छह खातों में से पांच खाते केनरा बैंक और एक खाता बैंक ऑफ बड़ौदा में हैं. हैरानी की बात यह है कि सभी खाताधारक महासमुंद जिले के निवासी हैं, लेकिन इन खातों का संचालन दिल्ली से कोई अज्ञात व्यक्ति कर रहा था.

3 खाता धारक चढ़े पुलिस के हत्थे
पुलिस ने जांच के दौरान जिन तीन खातों पर सबसे पहले कार्रवाई की, उनके नाम हैं:

    रविंदर चावला (54 वर्ष), निवासी पंजाबी पारा
    दीपक तिलवानी (35 वर्ष)
    महेश (60 वर्ष), निवासी गुरुद्वारा रोड

जांच में इन खातों में लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन का पता चला. पूछताछ में सभी खाताधारकों ने खुद को इससे अनभिज्ञ बताया और कहा कि उन्हें इस लेन-देन की कोई जानकारी नहीं है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं बाकी तीन खातों की जांच अभी जारी है, और पुलिस का कहना है कि दोषी पाए जाने पर अन्य खाताधारकों पर भी जल्द ही कार्रवाई की जाएगी.

क्या है म्यूल अकाउंट घोटाला?

“म्यूल अकाउंट” वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी दूसरों के नाम पर अवैध लेन-देन के लिए करते हैं. कई बार खाताधारक पैसे के लालच में अपनी जानकारी या खाता दूसरों को दे देते हैं, जो बाद में साइबर फ्रॉड का जरिया बनता है.

पुलिस ने लोगों से अपील की गई है कि वे अपने बैंक खाते या दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न दें. ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है.

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