A 9-km road built in Singrauli for 8 crore rupees, the Commission Khori road collapsed at the very beginning.
- बरगवां-नैकहवा पीसीसी सड़क का मामला , सोन नदी से पहुंची थी रेत
सिंगरौली। जिले में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्य का एक और गंभीर मामला सामने आया है। बरगवां से नैकहवा मार्ग तक बनाई गई पीसीसी सड़क जिसकी लंबाई लगभग 9 किलोमीटर है। जनता के पैसों की खुली लूट का उदाहरण बन चुकी है। इस सड़क निर्माण पर शासन द्वारा 8 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई, लेकिन गुणवत्ता इतनी खराब है कि सड़क सेशवकाल में ही दम तोड़ चुकी है।
सड़क कार्य की प्रारंभ तिथि 15 मार्च 2024 दर्शाई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि सड़क का कार्य अभी हाल ही में पूरा हुआ है, लेकिन स्थिति यह है कि सड़क जगह-जगह से टूटने लगी है। पीसीसी सड़क मार्ग में एक-दो नहीं, बल्कि कम से कम 50 से अधिक स्थानों पर दरारें पड़ चुकी हैं। इन दरारों को छिपाने के लिए मरम्मत के नाम पर सिर्फ सीमेंट का लेप लगाया जा रहा है, जो आने वाले समय में और बड़े हादसों को आमंत्रण देगा।
सड़क का कार्य पूरी तरह गुणवत्ताविहीन
निर्माण कार्य में गंभीर में अनियमितताएं साफ नजर आ रही हैं। सड़क का कार्य पूरी तरह गुणवत्ताविहीन है। मानकों की खुलेआम अनदेखी की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ठेकेदार द्वारा नियमों का पालन नहीं किया गया। इस कार्य को अंजाम देने वाली ठेका कंपनी मेसर्स सिन्हा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रालि बताई जा रही है, जिसने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण किया है।
उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग
इतना ही नहीं, बरगवां क्षेत्र में नाले पर बनाया गया पुल भी भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। यह पुल बेहद संकीर्ण बनाया गया है और गुणवत्ता भी अत्यंत खराब है। पुल की चौड़ाई इतनी कम है कि दो वाहन ठीक से एक साथ पार नहीं कर सकते। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भविष्य में कभी भारी बारिश या बाढ़ की स्थिति बनी तो, इस पुल के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो सकता है, जिससे जान-माल का गंभीर खतरा उत्पन्न होगा। स्थानीय नागरिकों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है।
लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपए जनता के टैक्स से खर्च किए जाते हैं, तो सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं टिकाऊ और सुरक्षित होनी चाहिए थी, लेकिन यहां तो निर्माण पूरा होते ही सड़क टूटने लगी, जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर इशारा करता है।
संदेह के घेरे में लोनिवि की भूमिका
इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक बात यह है कि लोक निर्माण विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बिना गुणवत्ता जांच के कार्य को स्वीकृति देना और भुगतान करना स्पष्ट करता है कि अधिकारियों ने आंख मूंदकर ठेकेदार को संरक्षण दिया है। यदि समय रहते इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो ऐसी लापरवाहियां भविष्य में और बढ़ती रहेंगी। अब यह आवश्यक हो गया है कि इस सड़क और पुल निर्माण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई हो तथा जनता के पैसों की बर्बादी रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएं। आम जनता यही कह रही है कि बरगवां से नैकहवा पीसीसी सड़क निर्माण में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मिलीभगत से ठेकेदार ने सड़क निर्माण कार्य में जमकर अनियमितता की है। तभी तो सेशवकाल में ही सड़क ने दम तोड़ दिया है।
समयावधि के पहले ही सड़क फटी, होगी जांच
सिंगरौली लोनिवि के कार्यपालन यंत्री एसबी सिंह कर्चुली का कहना है कि अगर बरगवां से नैकहवा पीसीसी सड़क निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी की गई है, समया अवधि के पहले ही सड़क फट रही है और दरार आ रही है तो इसकी जांच मैं स्वयं करने जाउंगा।

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