Secret cellars and criminal activities going on in Anandpur Dham Trust
- ट्रस्ट कर रहा दलित आदिवासियों की जमीन पर कब्जा और उनका शोषण
- युवक-युवतियों का शोषण होने की आशंका, डीजीपी को लिखा पत्र
- आनंदपुर धाम ट्रस्ट की उच्चस्तरीय जांच की मांग
- आनंदपुर धाम ट्रस्ट में अवैध निर्माण और गुप्त तहखानों का लगाया आरोप
- मानवाधिकार और संविधान के मूल अधिकारों के उल्लंघन की आशंका
भोपाल। अशोकनगर जिले के ईसागढ़ क्षेत्र में स्थित आनंदपुर धाम ट्रस्ट को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूर्व सदस्य, अनुसूचित जाति आयोग एवं प्रदेश अध्यक्ष, अनुसूचित जाति विभाग (कांग्रेस) प्रदीप अहिरवार ने मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखकर ट्रस्ट की गतिविधियों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि आनंदपुर धाम में लंबे समय से आपराधिक और असंवैधानिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट परिसर में बिना अनुमति के बड़े-बड़े गुप्त तहखाने (बेसमेंट) बनाए गए हैं। इन तहखानों की न तो नगर प्रशासन से अनुमति ली गई और न ही किसी विभाग को इसकी विधिवत जानकारी दी गई। पत्र में आशंका जताई गई है कि इन तहखानों का उपयोग अवैध गतिविधियों और लोगों को छिपाकर रखने जैसे गंभीर कृत्यों के लिए किया जा सकता है, जिसकी तत्काल जांच आवश्यक है।

प्रदीप अहिरवार ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि ट्रस्ट से जुड़े मामलों में युवक-युवतियों के साथ शारीरिक व मानसिक शोषण, तथा दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जा और अनैतिक खरीद-फरोख्त के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के समर्थन में पीड़ितों के बयान, वीडियो साक्ष्य और अन्य दस्तावेज उपलब्ध होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आनंदपुर धाम ट्रस्ट के माध्यम से कुछ लोगों को पंजाब, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में भेजा गया, जहां उन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक रिकॉर्ड के रखा गया। इसे मानव तस्करी की गंभीर आशंका बताते हुए प्रदीप अहिरवार ने इस पूरे नेटवर्क की जांच की मांग की है। पत्र में भोपाल निवासी अमरीक सिंह जिसे हवाला कारोबारी बताया गया, सहित ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि आनंदपुर धाम को कथित रूप से प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त रहा है। पत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल सहित कुछ अधिकारियों के नामों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। प्रदीप अहिरवार ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि यह मामला कानून व्यवस्था, मानवाधिकार और संविधान के मूल्यों से सीधे जुड़ा हुआ है।

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