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नई दिल्ली/ भोपाल 

केंद्र सरकार द्वारा करों के बंटवारे के लिए अपनाए गए नए फार्मूले (2026-31) ने राज्यों के बीच राजस्व वितरण के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है. इस नए बदलाव का सबसे बड़ा लाभ कर्नाटक को मिला है, जिसका कर बंटवारे में हिस्सा 3.65% से बढ़कर 4.13% हो गया है. इसके परिणामस्वरूप कर्नाटक को अतिरिक्त ₹7,387 करोड़ प्राप्त होंगे, जिससे उसका कुल आवंटन बढ़कर ₹63,050 करोड़ हो जाएगा. इस ऐतिहासिक लाभ के पीछे सबसे मुख्य कारण फार्मूले में "जीडीपी (GDP) में योगदान" को दिया गया 10% वजन है. विनिर्माण, सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी होने के कारण कर्नाटक को उसके आर्थिक प्रदर्शन के लिए यह विशेष 'इनाम' मिला है.

कर्नाटक के बाद केरल दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जिसके आवंटन में ₹6,975 करोड़ की वृद्धि हुई है. अधिक प्रति व्यक्ति आय और मजबूत आर्थिक योगदान के चलते गुजरात (₹4,228 करोड़) और हरियाणा (₹4,090 करोड़) को भी महत्वपूर्ण बढ़त मिली है, जबकि महाराष्ट्र का हिस्सा बढ़कर 6.44% हो गया है. यह नया फार्मूला स्पष्ट रूप से उन राज्यों को पुरस्कृत कर रहा है जो राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

दूसरी ओर, नए दक्षता मानकों पर खरा न उतर पाने वाले राज्यों को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है. मध्य प्रदेश को सबसे बड़ा झटका लगा है, जिसका आवंटन ₹7,677 करोड़ घट गया है. जनसंख्या-प्रधान राज्यों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव दिखा है; उत्तर प्रदेश को ₹4,884 करोड़ और पश्चिम बंगाल को ₹4,701 करोड़ की कमी झेलनी पड़ी है. बिहार को भी ₹1,679 करोड़ का नुकसान हुआ है, हालांकि वह अभी भी कुल आवंटन प्राप्त करने के मामले में देश में दूसरे स्थान पर बना हुआ है. यह आवंटन नीति अब केवल जनसंख्या के बजाय 'आर्थिक प्रदर्शन और दक्षता' की ओर झुकती नजर आ रही है.

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