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नई दिल्ली
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाले मुक्त व्यापार समझौते को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय संघ समझौते में डेयरी उद्योग को जोड़ने की मांग पर जोर देता रहेगा तो यह समझौता नहीं हो पाएगा। अपनी बात पर जोर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि दोनों पक्षों के बीच में मुक्त व्यापार समझौता वार्ता में तेजी आए लेकिन यह आपसी संवेदनशीलता और समझने की क्षमता के बिना नहीं हो सकता।

एशिया पैसिफिक के नाम से आयोजित एक सम्मेलन में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी समझौते पर आगे बढ़ने के लिए दोनों पक्षों को एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं को समझना होगा। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की प्रति व्यक्ति आय भारतीय राज्यों की तुलना में बहुत अधिक है। जिस समय केंद्रीय मंत्री गोयल यह बात बोल रहे थे वहां पर जर्मनी के आर्थिक मंत्री बैठे हुए थे।

डेयरी सेक्टर नहीं खोल सकता- पीयूष गोयल
केंद्रीय मंत्री ने डेयरी सेक्टर पर अपनी बात साफ-साफ रखते हुए कहा कि मैं भारत का डेयरी सेक्टर नहीं खोल सकता। यदि आप बार-बार इस पर जोर देते हैं तो फिर यह समझौता होगा ही नहीं। आप इसके बिना कोई बेहतर विक्लप पर आ सकते हैं तो फिर यह बेहतर है। आप ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण ले लीजिए, हम दोनों ही देशों में डेयरी सेक्टर मजबूत है ऐसे में हमारे बीच में जो एफटीए साइन हुआ वह बिना डेयरी सेक्टर के हुआ।

पहले औद्योगिक क्षेत्रों पर ध्यान दें दोनों पक्ष- जर्मन मंत्री
भारत की तरफ से सीधी बात रखी जाने के बाद जर्मनी के आर्थिक मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों के लिए यही बेहतर होगा कि पहले औद्योगिक पक्ष पर ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि इस समझौते के लिए एक समस्याग्रस्त क्षेत्र है क्योंकि भारत और जर्मनी में कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या में भारी अंतर है। उन्होंने कहा कि जर्मनी में यह जनसंख्या का 2 प्रतिशत है जबकि भारत में यह लगभग 60 प्रतिशत है। अगर समझौते के तहत भारत का कृषि बाजार खोल दिया जाएगा तो यह भारत के लिए परेशानी खड़ी कर देगा।

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