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मुंबई,

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने मुंबई के उन छह जगहों का दौरा किया जो उनकी ज़िंदगी और करियर का आधार बनीं।

अनुपम खेर ने इस साल हिंदी सिनेमा में 40 शानदार साल पूरे किए और इस मील के पत्थर को उन्होंने अपनी नई फिल्म विजय 69 के प्रचार के दौरान खास अंदाज में मनाया। नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही इस फिल्म को दर्शकों से खूब सराहना मिल रही है।

फिल्म विजय 69 की सफलता का आनंद लेते हुए, अनुपम ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों को याद किया, जब वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक स्ट्रगलिंग एक्टर के तौर पर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान, उन्होंने मुंबई के छह खास जगहों का दौरा किया, जो उनकी ज़िंदगी और करियर के लिए बेहद अहम हैं।

अनुपम ने बताया वर्ष1981 में मैंने बांद्रा ईस्ट, खेरवाड़ी में चार लोगों के साथ रहना शुरू किया। ये मेरे संघर्ष के शुरुआती दिन थे। 1982-83 के बीच मैं शास्त्री नगर ,सांताक्रूज़ लिंकिंग रोड एक्सटेंशन में चार लोगों के साथ रहता था। फर्श पर सोते थे और पंखा तक नहीं था। मैं उन दिनों को कभी नहीं भूल सकता।कासा मारिया सेंट पॉल्स रोड, ब्रांदा पर मेरी तीसरी रहन-सहन की जगह थी। यह वही समय था जब मैं सारांश (1984) कर रहा था। तब मैं यहां पहली मंजिल पर रहता था।

अनुपम खेर ने बताया,बाल गंधर्व रंग मंदिर, बांद्रा वेस्ट, यह वह जगह है जहां मैंने जून 3, 1981 को मुंबई आने के बाद काम शुरू किया। मुझे एक एक्टिंग स्कूल में नौकरी मिली थी। लेकिन बाद में पता चला कि असल में कोई स्कूल या बिल्डिंग ही नहीं है। हम समुद्र किनारे क्लासेस लेते थे! कालूमल एस्टेट, जुहू यह मेरा पहला वन बीएचके फ्लैट था। जुहू के कालूमल एस्टेट में बी23, जिसे मैंने खरीदा।मुंबई में मैंने अपना करियर पृथ्वी थिएटर जूहू से शुरू किया। यहां सतीश कौशिक का प्ले ‘उस पार का नज़ारा’, जो आर्थर मिलर के प्ले ‘अ व्यू फ्रॉम द ब्रिज’ का अडैप्टेशन था, उस पर परफॉर्म किया। यहां मैंने अपनी पत्नी किरण खेर के साथ ‘डिज़ायर अंडर द एल्म्स’, ‘लुक बैक इन एंगर’, ‘सालगिरह’ और ‘कुछ भी हो सकता है’ जैसे प्ले किए।

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