सिवनी मालवा
शासकीय कन्या महाविद्यालय, सिवनी मालवा के ईको क्लब के द्वारा पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम 2024-25 के अंतर्गत पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को ) भोपाल द्वारा प्रायोजित परियोजना के अंतर्गत मिलेट्स व्यंजन मेले का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन मोटे अनाज (मिलेट्स) की उपयोगिता और महत्व को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया। मेले में छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करते हुए मोटे अनाज से बने व्यंजनों के स्टॉल लगाए। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. आर. के. रघुवंशी कुसुम महाविद्यालय एवं प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे शासकीय कन्या महाविद्यालय द्वारा रिबन काटकर किया गया।
प्राचार्य डॉ. उमेश कुमार धुर्वे ने कहा, "मिलेट्स, जिन्हें हम मोटा अनाज कहते हैं, भारतीय कृषि और आहार परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। बदलती जीवनशैली के कारण इनका उपयोग घट गया है, लेकिन इनकी पोषण क्षमता को देखते हुए इन्हें फिर से मुख्य धारा में लाने की आवश्यकता है। इस प्रकार के आयोजन न केवल छात्राओं को इनकी उपयोगिता समझाते हैं बल्कि समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी माध्यम बनते हैं।"
इको क्लब प्रभारी डॉ. सतीश बालापुरे ने कहा, "मिलेट्स को 'सुपरफूड' के रूप में जाना जाता है। इनमें न केवल पोषण तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, बल्कि ये जलवायु परिवर्तन के अनुकूल और पर्यावरण के अनुकूल फसलें भी हैं। यह मेला हमारी छात्राओं को इन अनाजों के रचनात्मक उपयोग और उनके महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता है।"
ईको क्लब सहसंयोजक रजनीकांत वर्मा ने कहा, "मिलेट्स हमारी परंपराओं और स्वास्थ्य का प्रतीक हैं। इस मेले के माध्यम से हमने छात्राओं को इन अनाजों के उपयोग के नए तरीकों को सीखने और समाज में इनके प्रति जागरूकता फैलाने का मंच प्रदान किया है। हमें गर्व है कि छात्राओं ने इतनी रचनात्मकता और उत्साह के साथ भाग लिया।"
प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में उपस्थित श्रीमती विजयश्री मालवीय और डॉ. रश्मि सोनी ने सभी व्यंजनों का स्वाद चखने और उनकी प्रस्तुति का मूल्यांकन करने के बाद कहा, "यह देखकर खुशी हुई कि छात्राओं ने मिलेट्स जैसे स्वास्थ्यवर्धक अनाज को इतनी रचनात्मकता और उत्साह के साथ उपयोग में लाया। इस प्रकार की गतिविधियाँ नई पीढ़ी को पारंपरिक और पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों के महत्व को समझाने में मदद करती हैं।"
मेले में छात्राओं द्वारा लगाए गए स्टॉल्स में रागी डोसा, बाजरा खिचड़ी, ज्वार की रोटी, कोदो के लड्डू, कुटकी पुलाव जैसे व्यंजनों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इन व्यंजनों ने यह साबित किया कि मिलेट्स से न केवल पारंपरिक व्यंजन बनाए जा सकते हैं, बल्कि आधुनिक स्वाद और सेहत का भी ध्यान रखा जा सकता है।
कार्यक्रम का समापन एक सकारात्मक संदेश के साथ हुआ। मेले ने न केवल छात्राओं बल्कि उपस्थित सभी लोगों को मोटे अनाज के पोषण, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय लाभों के प्रति जागरूक किया। ईको क्लब के इस प्रयास की सभी ने सराहना की और ऐसे आयोजनों को भविष्य में भी आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की सफलता में ईको क्लब के सभी सदस्यों, डॉ. बाऊ पटेल श्रीमती काजल रतन श्रीमती संगीता कहार मनोज प्रजापति रजनीश जाटव डॉ. धर्मेंद्र गुर्जर डॉ. गजेंद्र वाईकर डॉ. राकेश निरापुरे डॉ. मनीष दीक्षित डॉ. पदम शर्मा कु.आकांक्षा पांडे डॉ. दुर्गा मीणा डॉ. रीमा नागवंशी। और छात्राओं की सहभागिता सराहनीय रही।

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