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देश के सबसे बड़े घोटाले में लिप्त अधिकारी को फांसी पर चढ़ाया, चीन में भ्रष्टाचार की कोई माफी नहीं

बीजिंग. चीन की सरकार में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति है और इसी नीति के तहत चीन की सरकार ने अपने एक और शीर्ष अधिकारी को मौत की सजा दे दी है। चीन की सरकार ने मंगलवार को उत्तरी इनर मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के पूर्व अधिकारी ली जियानपिंग को फांसी दे दी। ली जियानपिंग को देश के अब तक के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामले में दोषी ठहराया गया था। यह भ्रष्टाचार 42 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का बताया जा रहा है। ली जियानपिंग चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यसमिति के सदस्य थे। ली को पूर्व में सितंबर 2022 में ही मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन उन्होंने सजा के खिलाफ अपील की थी। अपील के बाद भी चीन के सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद अब ली को फांसी की सजा दी गई। चीन के मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, ली जियानपिंग को अदालत द्वारा 42 करोड़ डॉलर की अवैध कमाई का दोषी पाया गया था। यह चीन के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला बताया जा रहा है। सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही सख्त रुख साल 2012 में चीन की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार के खिलाफ रुख सख्त रहा है। अब तक शी जिनपिंग के कार्यकाल के दौरान दो पूर्व रक्षा मंत्रियों और दर्जनों सैन्य अधिकारियों समेत दस लाख से अधिक पार्टी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। इस साल जनवरी में केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग (सीसीडीआई) के पूर्ण सत्र में दिए गए अपने भाषण में भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भ्रष्टाचार का डटकर सामना करने का आह्वान किया था। गौरतलब है कि चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के बावजूद घोटालों में लिप्त अधिकारियों के सजा पाने के मामले बढ़े हैं। सेना में शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने वैश्विक ध्यान खींचा है, जिसके बारे में उनके आलोचकों का कहना है कि इसने उन्हें सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने में सक्षम बनाया है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 16

चीनियों ने जिनपिंग से कहा उन्‍हें सुरक्षा के लिए अब पाकिस्‍तानी सैनिकों पर भरोसा नहीं

इस्‍लामाबाद पाकिस्‍तान और चीन के बीच बलूचों के हमलों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। बलूच व‍िद्रोही चाइना पाकिस्‍तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) को बनाने में लगे चीनी इंजीनियरों पर लगातार खूनी हमले कर रहे हैं। यही नहीं चीनी बिजनसमैन को भी पाकिस्‍तान के पंजाब प्रांत के अंदर न‍िशाना बनाया जा रहा है। इससे उनके अंदर दहशत का माहौल है। चीनियों ने साफ तौर पर शी जिनपिंग की सरकार को बोल दिया है कि उन्‍हें सुरक्षा के लिए अब पाकिस्‍तानी सैनिकों पर भरोसा नहीं है। हम चीनी सैनिकों को प्राथमिकता देंगे। इन हमलों की वजह से कई चीनी बिजनसमैन पाकिस्‍तान छोड़ना चाहते हैं और उन्‍हें पाकिस्‍तान के अंदर अपना कोई भविष्‍य नहीं दिख रहा है। इससे राष्‍ट्रपति जिनपिंग अब चीनी सेना को तैनात करने को लेकर भारी दबाव में हैं। चीन अगर पाकिस्‍तान में सेना को तैनात करता है तो इसका पाकिस्‍तान और भारत पर क्‍या असर होगा? आइए समझते हैं चीन सरकार पर यह दबाव तब बढ़ गया है जब पिछले महीने दोनों चीनी इंजीनियरों की बलूचों के हमले में मौत हो गई। चीन ने सीपीईसी परियोजना पर अब तक 62 अरब डॉलर का निवेश किया है। सीपीईसी चीन के बीआरआई के सबसे बड़े प्राजेक्‍ट में से एक है। बीआरआई चीनी राष्‍ट्रपति का ड्रीम प्राजेक्‍ट है और सीपीईसी को इसका मुखौटा करार दिया जाता है। चीन के इस प्राजेक्‍ट का बलूच‍िस्‍तान में कड़ा विरोध हो रहा है और बलूचिस्‍तान लिबरेशन आर्मी ने चीनी लोगों को वापस जाने के लिए अल्‍टीमेटम दे रखा है। चीनियों की सुरक्षा में तैनात हैं 15 हजार पाक‍िस्‍तानी सैनिक चीनी निवेशकों को अब तक पाकिस्‍तानी सेना और चीन की निजी सुरक्षा एजेंसियों से सुरक्षा मिली हुई है। हालांकि बाद में पाकिस्‍तान ने विदेशी सुरक्षा एजेंसियों पर प्रतिबंध लगा दिया। बीआरआई मामलों के विशेषज्ञ अलेसांद्रो अरदुइनो ने फाइनेंशियल टाइम्‍स से कहा कि मैं समझता हूं कि यह मुद्दा अब अहम मोड़ पर पहुंच चुका है और सुरक्षा मुहैया कराने के मुद्दे पर चीन पाकिस्‍तान से और ज्‍यादा डिमांड कर रहा है। पाकिस्‍तान में चीनी सुरक्षा एजेंसियां करेंगी, वह पूरी दुनिया के लिए एक लिटमस टेस्‍ट होगा। इससे पता चलेगा कि चीन अपने नागरिकों की पूरी दुनिया में कैसे सुरक्षा करेगा। पाकिस्‍तानी सेना ने चीनियों की सुरक्षा के लिए करीब 15 हजार जवानों को तैनात किया है, इसके अलावा एक नौसैनिक यूनिट को ग्‍वादर में रखा है जहां चीन नौसैनिक अड्डा बना रहा है। इन सैनिकों की तैनाती का पूरा खर्च चीन के रक्षा मंत्रालय को वहन करना पड़ रहा है। बलूच विद्रोहियों ने ग्‍वादर पोर्ट को भी निशाना बनाने का प्रयास किया था जहां बड़ी संख्‍या में चीनी नागरिक काम करते हैं। बलूच 26 मार्च को पाकिस्‍तानी वायुसेना के पीएनएस सिद्दीक एयरबेस को भी निशाना बना चुके हैं। इन हमलों को रोकने में पाकिस्‍तानी सेना को काफी नुकसान पहुंचा है। पाकिस्‍तानी सेना की दुनिया में उड़ेगी खिल्‍ली चीनियों में खौफ की वजह एक यह है कि हाल ही में पाकिस्‍तानी सुरक्षा गार्ड ने दो चीनी वर्कर्स को गोली मार दी थी जिसमें वे बुरी तरह से घायल हो गए थे। इन सब वजहों से चीन पाकिस्‍तान में अपने सुरक्षाकर्मी तैनात करना चाहता है। चीन के सैनिक तैनात होना पाकिस्‍तान की संप्रभुता का खुला उल्‍लंघन होगा और दुनियाभर में पाकिस्‍तानी सेना की जो खिल्‍ली उड़ेगी, वह अलग से होगी। इसी वजह से पाकिस्‍तानी सेना चाह रही है कि चीन जासूसी और निगरानी करने में मदद करे। वहीं चीन के आर्थिक गुलाम बन चुके पाकिस्‍तान में अगर चीनी सेना आती है तो इसका भारत पर भी असर होगा। चीन की सेना पाकिस्‍तान पहुंची तो भारत को खतरा! यह वजह है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर बनाए हुए है। चीन अगर पाकिस्‍तान में अपनी सेना को तैनात करता है तो वे पीओके में भी आएंगे। पीओके से ही होकर सीपीईसी परियोजना जाती है। भारत इसका कड़ा विरोध करता रहा है। भारत ने साफ कहा है कि पीओके उसका हिस्‍सा है और मानता है कि अगर कोई भी विदेशी मौजूदगी नई दिल्‍ली की संप्रभुता का उल्‍लंघन है। भारत ने बार-बार पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल और बांग्‍लादेश को चेतावनी दी है कि वे बीआरआई से पैदा होने वाले खतरे से सजग रहें। बीआरआई आज दुनिया में कर्ज के जाल के रूप में देखा जा रहा है। वहीं अगर चीनी सेना पीओके में मौजूदगी बनाने में कामयाब हो जाती है तो इससे भारत के उत्‍तरी सीमा पर उसका प्रभाव काफी बढ़ जाएगा। इससे दोनों देशों से एक साथ निपटने की भारत की रणनीति और जटिल हो जाएगी। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 20

इस दिवाली चीन का निकला दिवाला, 1.25 लाख करोड़ का नुकसान… नहीं बिक रहा है चाइनीज सामान, ‘मेड इन इंडिया’ का जलवा

नई दिल्ली पिछले कुछ वर्षों से दिवाली और धनतेरस पर चाइनीज प्रोडक्ट्स की डिमांड भारतीय बाजारों में लगातार घटती जा रही है. खासकर डेकोरेटिंग आइटम्स की बिक्री पहले के मुकाबले काफी घटी है. डिमांड कम होने से आयात भी कम हो रहा है, जिससे घरेलू सामानों की बिक्री बढ़ रही है. दरअसल, देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का असर अब दिखने लगा है. चाइनीज सामानों की बिक्री लगातार घट रही है. इस साल अधिकतर लोग दिवाली पर स्वदेशी सामान खरीदते हुए नजर आ रहे हैं. खासकर लोग इलेक्ट्रॉनिक्स सजावट के सामान 'मेड इन इंडिया' देखकर ही खरीद रहे हैं. चाइनीज प्रोडक्ट्स का विरोध    एक अनुमान के अनुसार दिवाली से जुड़े चीनी सामानों की बिक्री में तगड़ी गिरावट से चीन को करीब 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. क्योंकि लगातार कई वर्षों से दिवाली पर चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार किया जा रहा है. कुम्हारों से मिट्टी के दीये और सजावट का सामान खरीदकर लोग 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. कैट ने देशभर के व्यापारिक संगठनों से आग्रह किया है कि वह अपने क्षेत्र की जो महिलाएं, कुम्हार, कारीगर सहित अन्य लोग दीपावली से संबंधित सामान बना रहे हैं, उनकी बिक्री में वृद्धि करने में सहायता करें. इससे लोगों में जागरुकता बढ़ी है, और अब वो घरेलू प्रोडक्ट्स को तरजीह दे रहे हैं. जिससे चीन को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) जो व्यापारियों का संगठन है, उसने व्यापारियों से अपील की है कि वो लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दें. कैट के जनरल सेक्रेटरी और चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि इस दिवाली पर 'वोकल फॉर लोकल' का दर्शन पूरी तरह बाजारों में दिख रहा है क्योंकि करीब सारी खरीदारी भारतीय सामानों की ही हो रही है. सोने-चांदी की खूब खरीदारी बता दें, भारतीय परंपरा में दिवाली और धनतेरस पर जमकर खरीदारी की जाती है. इस दिन खासतौर पर लोग सोने-चांदी के आभूषण और अन्य वस्तुएं, सभी प्रकार के बर्तन, रसोई का सामान, वाहन, कपड़े और रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली का सामान एवं उपकरण, व्यापार करने के उपकरण जैसे कंप्यूटर एवं कंप्यूटर से जुड़े उपकरण, मोबाइल, बही खाते और फर्नीचर खरीदते हैं. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मुताबिक इस साल धनतेरस पर लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के कारोबार होने का अनुमान लगाया गया है. जबकि दिवाली तक यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा. इस दौरान सोने, चांदी के अलावा पीतल के बने बर्तन की जबरदस्त खरीद हुई है.  इस बार करीब 2500 करोड़ रुपये की चांदी खरीदी गई. जबकि एक दिन में 20 हजार करोड़ का सोना बिक गया है.   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 33

मंदी की चपेट में आया ड्रैगन! $1.07 ट्रिलियन के पैकेज का नहीं दिखा असर

बीजिंग चीन ने अपनी इकॉनमी में जान फूंकने के लिए हाल में $1.07 ट्रिलियन के भारी-भरकम पैकेज की घोषणा की थी। इसके बाद उसके शेयर बाजारों में काफी तेजी देखने को मिली। कुछ विदेशी निवेशक भारत जैसे देशों से अपना पैसा निकालकर चीन के बाजार में डाल रहे हैं। लेकिन कुछ निवेशकों ने चीन के इस पैकेज की सफलता पर संदेह जताया था और उनकी आशंका सही होने जा रही है। अब तक इस पैकेज का जमीन पर कोई असर होता नहीं दिख रहा है। देश में तीसरी तिमाही में कंज्यूमर प्राइस में गिरावट आई है। लगातार छठी तिमाही में ऐसा हुआ है और यह साल 1999 के बाद इस गिरावट का सबसे लंबा दौर है। माना जा रहा है कि चीन की इकॉनमी पहले ही मंदी में फंस चुकी है और इससे बाहर निकलने के लिए उसे लंबा समय लग सकता है। चीन में डिफ्लेशन की स्थिति बनी हुई है। 2008 में देश में लगतार पांच तिमाहियों तक डिफ्लेशन की स्थिति रही थी लेकिन इस बार यह उससे भी आगे निकल गया है। पूरी दुनिया महंगाई से त्रस्त है लेकिन चीन में उल्टी गंगा बह रही है। दिक्कत यह है कि डिफ्लेशन को इनफ्लेशन भी बदतर माना जाता है। इसमें चीजों की कीमत में गिरावट आती है। यह इकॉनमी में धन की आपूर्ति और क्रेडिट में गिरावट से जुड़ी होती है। इकॉनमी की परेशानी डिफ्लेशन को इकॉनमी के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। अगर आपको पता है कि कल चीजों की कीमत गिरनी है तो आप आज क्यों खरीदारी करेंगे? इस तरह एक प्रकार से इकॉनमी फ्रीज हो जाती है। जापान के साथ 1990 के दशक में यही हुआ था। आज भी जापान उस स्थिति से बाहर नहीं निकल पाया है। चीन की इकॉनमी कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। बेरोजगारी कई दशक के चरम पर पहुंच गई है, मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट आई है और रियल एस्टेट सेक्टर संघर्ष कर रहा है। कंज्यूमर डिमांड कमजोर है। चीन के ग्राहक इस तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे कि देश मंदी में है। दुनिया के लिए खतरे की घंटी अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते पिछले कुछ साल से ठीक नहीं चल रहे हैं। दोनों देश एकदूसरे की कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने में लगे हैं। अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली कई वस्तुओं पर ड्यूटी बढ़ा दी है जो अगले चरणों में लागू होगी। चीन में मंदी आने से पूरी दुनिया प्रभावित होगी। इसकी वजह यह है कि पिछले करीब तीन दशक से चीन ग्लोबल इकॉनमी का इंजन बना हुआ है। यही वजह है कि चीन में मंदी की आशंका ग्लोबल इकॉनमी के लिए खतरे की घंटी है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 31

चीन की चाल का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ, पैंगोंग झील किनारे बस्ती को आकार दिया जा रहा

बीजिंग भारत और चीन सीमा पर तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए हैं। हालांकि इस बातचीत का बहुत थोड़ा फायदा होता नजर आ रहा है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर कई बिंदु ऐसे हैं, जहां अब भी भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं। इसमें पूर्वी लद्दाख में स्थित पैंगोंग त्सो झील दोनों देशों के बीच तनाव का एक महत्वपूर्ण स्थल है। अब पता चला है कि चीन इन दिनों भारत से बातचीत की आड़ में पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास बड़े पैमाने पर एक बस्ती का निर्माण कर रहा है। चीन की इस चाल का खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है, जिसमें बस्ती को आकार लेते देखा जा सकता है। पैंगोंग झील के उत्तर में बन रही बस्ती  हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी तट के पास एक बड़ी चीनी बस्ती का निर्माण चल रहा है। यह बस्ती भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच 2020 के गतिरोध बिंदुओं में से एक से लगभग 38 किलोमीटर पूर्व में स्थित है, हालांकि यह भारत के क्षेत्रीय दावों से बाहर है। दुनिया की सबसे ऊंची खारे पानी की झील पैंगोंग त्सो भारत, चीन प्रशासित तिब्बत और उनके बीच विवादित सीमा पर फैली हुई है। 17 हेक्टेयर के क्षेत्र में हो रहा निर्माण कार्य रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा 9 अक्टूबर को कैप्चर की गई सैटेलाइट तस्वीरों में लगभग 17 हेक्टेयर क्षेत्र में तेजी से निर्माण कार्य दिखाया गया है। 4,347 मीटर की ऊंचाई पर येमागौ रोड के पास स्थित यह स्थल निर्माण और मिट्टी हटाने वाली मशीनरी से भरा हुआ है। तक्षशिला संस्थान में जियो पॉलिटिकल रिसर्च प्रोग्राम के प्रोफेसर और प्रमुख वाई निथ्यानंदम के अनुसार, "आवासीय संरचनाओं और बड़ी प्रशासनिक इमारतों सहित 100 से अधिक इमारतें बनाई जा रही हैं। खुली जगहें और समतल भूमि पार्कों या खेल सुविधाओं के लिए संभावित भविष्य के उपयोग का सुझाव देती हैं।" हेलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड का भी किया गया निर्माण उन्होंने दक्षिण-पूर्व कोने में 150 मीटर लंबी आयताकार पट्टी की ओर भी इशारा किया, यह अनुमान लगाते हुए कि इसे हेलीकॉप्टर संचालन के लिए तैयार किया जा सकता है। ओपन-सोर्स सैटेलाइट इमेजरी के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि झील की ओर ढलान वाली नदी के किनारे अप्रैल 2024 की शुरुआत में निर्माण शुरू हुआ था। सैन्य सूत्रों के अनुसार, यह बस्ती संभवतः प्रशासनिक और परिचालन क्षेत्रों के बीच अंतर करते हुए दो भागों में विभाजित प्रतीत होती है। एक से दो मंजिला इमारतें बनाई जा रहीं संरचनाओं के छाया विश्लेषण से पता चलता है कि इस बस्ती में एक और दो मंजिला इमारतों का मिश्रण है, पास में छोटी झोपड़ियां हैं, जिनमें से प्रत्येक में छह से आठ लोग रह सकते हैं। दो बड़ी संरचनाएं प्रशासन और भंडारण सुविधाओं के रूप में काम कर सकती हैं। सीधी रेखाओं के बजाय अर्धचंद्राकार लाइनों में डिजाइन किया गया लेआउट लंबी दूरी के हमलों के प्रति असुरक्षा को कम करने के इरादे का सुझाव देता है। ऊंची चोटियों के पीछे बस्ती बना रहा चीन ऊंची चोटियों के पीछे बस्ती का स्थान इसके रणनीतिक लाभ को और बढ़ाता है, जिससे आस-पास के क्षेत्रों से दृश्यता सीमित हो जाती है। निथ्यानंदम ने कहा, "आस-पास की ऊंची चोटियां भूमि-आधारित निगरानी उपकरणों से साइट को अस्पष्ट करती हैं।" सैन्य सूत्रों का अनुमान है कि यदि सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, तो बस्ती "एड-हॉक फॉरवर्ड बेस" के रूप में कार्य कर सकती है, जिससे चीनी सेना के लिए प्रतिक्रिया समय कम हो सकता है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 31