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हाईकोर्ट में दी चुनौती, छत्तीसगढ़-वक्फ बोर्ड में अविश्वास प्रस्ताव पर विवाद

रायपुर। छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ग़ुलाम मिन्हाजुद्दीन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सरकार के समय नियुक्त किए गए वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य इमरान मेमन, पूर्व विधायक खुज्जी, फ़िरोज़ ख़ान, फैसल रिज़वी और भाजपा सरकार में नियुक्त सदस्य सलीम राज ने वर्तमान राज्य शासन के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। अविश्वास प्रस्ताव के लिए दशरथ लाल साहू पिछड़ा वर्ग और अल्प संख्यक विकास विभाग पीठासीन अधिकारी नियुक्त किए गए थे। पीठासीन अधिकारी दशरथ लाल साहू ने इस प्रस्ताव के संबंध में वक़्फ़ बोर्ड के सभी सदस्यों को 26/09 /2024 की तारीख़ वाली नोटिस जारी की थी। जो वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य रियाज़ हुसैन को 30/09/2024 की शाम छह बजे के बाद तामील की गई। इस अविश्वास प्रस्ताव की कारवाई के लिए दिनांक 14/10/2024 को दिन के साढ़े दस बजे वक़्फ़ बोर्ड कार्यालय में हाजिर होने की जानकारी दी गई थी। वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य रियाज़ हुसैन ने इस नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। उनके द्वारा धारा 20क के तहत लाए गए अविशवास प्रस्ताव के संबंध में 20 क (घ)के परंतुक के तहत यह प्रावधान है :- ऐसी बैठक की सूचना कम से कम (एटलीस्ट) 15 दिन पहले दी जाएगी। अविश्वास प्रस्ताव की बैठक नोटिस तामिली दिनांक के 15 दिन के भीतर की जा रही जो धारा 20 क (घ) के (मेंडेटरी)अनिवार्य आदेशात्मक प्रावधान का उल्लंघन है बताया है। अविश्वास प्रस्ताव नियम विरुद्ध लाया जा रहा है इस संबंध में रियाज़ के द्वारा रिट पिटीशन फाइल किए जाने की जानकारी दी गई है, जिसकी सुनवाई के दौरान पीठासीन अधिकारी दशरथ लाल साहू जो अवर सचिव पिछड़ा एवं अल्प संख्यक विकास विभाग को हटाकर मार्टिन लकड़ा अवर सचिव पशुधन विकास विभाग को दिनांक 08/10/2024 को नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई। इस आदेश की कोई प्रति की तमीली रियाज हुसैन ने नहीं होना बताया, जबकि अविश्वास प्रस्ताव के लिए पीठासीन अधिकारी उसी विभाग का नहीं होना चाहिए। वक़्फ़ एक्ट में स्पष्ट लिखा है कि इस नोटिस के तामील होने के बाद भी कम से कम 15 दिन बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने के लिए बैठक बुलाई जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। रियाज ने अपने अविश्वास प्रस्ताव के लिए नियुक्त नए पीठासीन अधिकारी मार्टिन लकड़ा को आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के कार्यालय में दिनांक 09/10/2024 को एक तीन पेज की कई बिंदुओं वाली आपत्ति प्रस्तुत की, जिसमें बोर्ड के तीन सदस्य इमरान मेमन, फ़िरोज़ ख़ान और फैज़ल रिज़वी के वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य के रूप में अधिवक्ता अज़ीमुद्दीन के द्वारा चुनौती देने की जानकारी याचिका पर 14/10/2024 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में लिस्ट होना है। अधिवक्ता अज़ीमुद्दीन की रिट याचिका 1947/2023 सिविल में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 27/04/2023 की प्रति भी लगाई है, जिसमें आदेशित किया गया है कि याचिका के लंबित रहने के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य वक़्फ़ बोर्ड द्वारा लिए गए सभी निर्णय उपरोक्त याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे। आपत्तिकर्ता रियाज हुसैन छत्तीसगढ़ वक़्फ़ बोर्ड द्वारा अपनी आपत्ति में उच्च न्यायालय का हवाला देकर अविश्वास प्रस्ताव की कारवाई को आगे बढ़ाना आदेश की अवमानना बताया है। उक्त आपत्तियों के बावजूद देखने वाली बात है कि पीठासीन अधिकारी मार्टिन लकड़ा अवर सचिव पशुधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन क्या निर्णय इन आपत्तियों का करते हैं। पहली बार वक़्फ़ बोर्ड में आया अविश्वास प्रस्ताव गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में ये पहली बार है जब वक़्फ़ बोर्ड में अविश्वास प्रस्ताव प्रस्ताव आया है। क्यों लाया गया है, कारण भी नहीं बताया गया, जबकि पूर्ववर्ती मामलों में कई भ्रष्टाचार के मामले होने के बाद भी कभी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया। साफ़ सुथरी छवि वाले अध्यक्ष के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जिसको लेकर मुस्लिम समाज में चर्चा का बाज़ार गर्म है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 28

कोच्चि के एक गांव की जमीन पर Waqf Board ने किया दावा, सैकड़ो परिवार बेघर होने की कगार पर

कोच्चि केरल की व्यावसायिक राजधानी कोच्चि की हलचल से दूर मुनंबम उपनगर में मछुआरों का एक खूबसूरत गांव है- चेराई. समुद्र तट के करीब स्थित चेराई अपने बीच रिसॉर्ट्स के साथ आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है. लेकिन इस गांव के लोग पलायन के डर में जी रहे हैं. गांव के लगभग 610 परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन और संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है. कानूनी विवाद में फंसने के कारण गांव वाले 2022 से ही न तो अपनी जमीन पर लोन ले सकते हैं, और न ही इसे बेच सकते हैं. सिरो-मालाबार चर्च और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल जैसे प्रमुख ईसाई संगठनों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को एक पत्र भेजकर वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के लिए अपने सुझाव दिए हैं.  इस खूबसूरत गांव में पहुंची और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. समुद्र तट के सामने एक छोटे से घर में बूढ़ी मां गौरी और उनकी विकलांग बेटी सिंटा से मुलाकात हुई. सिंटा ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनका जीवन कठिन हो गया. उन्होंने कहा, 'मैं अब भी यहां लॉटरी टिकट बेचकर जीवन यापन करती हूं. हम यह घर नहीं छोड़ सकते. यह हमारा है. 2022 तक सब कुछ सामान्य था, अचानक हमें बताया गया कि जिस जमीन पर हम वर्षों से रह रहे, अब वह हमारी नहीं रही.' ग्रामीणों ने की वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन की मांग सिंटा की पड़ोसी सीना के पास भी बताने के लिए ऐसी ही कहानियां थीं. सीना ने कहा कि उनका घर ही उनकी जिंदगी की एकमात्र कमाई है. उन्होंने कहा, 'मेरे पति एक मछुआरे हैं. सालों की मेहनत के बाद उन्होंने यह घर बनाया है. हमने इस मकान के अलावा कुछ और नहीं बनाया है, जिसे अपना कह सकें. यदि यह घर हमारे हाथ से चला गया तो कुछ नहीं बचेगा. सरकार को वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और हमारी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए.' इस गांव के हर घर की यही कहानी है. थोड़ी दूर पर, प्रदीप और उनकी पत्नी श्रीदेवी मिले. उनके हाथों में अपनी जमीन और घर से जुड़े दस्तावेज थे. उन्होंने आजतक की टीम को अपने दस्तावेज दिखाए और कहा कि यह साबित करने के लिए काफी है कि जमीन हमारी है. प्रदीप ने कहा, 'मैंने यह जमीन 1991 में फारूक कॉलेज से उनके द्वारा मांगी गई राशि चुकाकर खरीदी थी. मेरे पास सभी सबूत हैं. मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए मैंने अब काम करना बंद कर दिया है. मेरा बेटा परिवार की देखभाल करता है. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में उसे इस घर में रहने में कोई दिक्कत न हो. मैं हमारे अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा. मैंने मेहनत से यह घर बनाया है.' प्रदीप इसके आगे अपनी बात पूरी नहीं कर पाए और रोने लगे. गांव वाले न जमीन बेच सकते हैं न ही गिरवी रख सकते हैं इलाके के लोगों को उम्मीद है कि चर्चों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लिखे गए पत्र से उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिलेगी. ग्रामीणों ने कहा कि वे एक सदी से भी अधिक समय से चेराई गांव में रह रहे हैं. उनके अनुसार, यह जमीन 1902 में सिद्दीकी सैत ने खरीदी थी और बाद में 1950 में फारूक कॉलेज को दान कर दी थी. मछुआरों और कॉलेज के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद 1975 में सुलझ गया, जब उच्च न्यायालय ने कॉलेज के पक्ष में फैसला सुनाया. 1989 से स्थानीय लोगों ने कॉलेज से जमीन खरीदनी शुरू कर दी. हालांकि, 2022 में विलेज ऑफिस ने अचानक दावा किया कि गांव वक्फ बोर्ड की जमीन पर बसा है. इसके बाद ग्रामीणों को उनके राजस्व अधिकारों से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपनी संपत्ति बेचने या गिरवी रखने से रोक दिया गया.   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 60

Waqf Act क्या है? मोदी सरकार क्या और क्यों संशोधन ला रही है?

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार संसद में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल लाने की तैयारी कर रही है. ऐसे में सियासी माहौल गरमाया हुआ है. इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वक्फ सिस्टम को सियासत से बाहर आना होगा. नकवी ने दो टूक कहा कि वक्फ सिस्टम को टच मी नॉट की सनक-सियासत से बाहर आना होगा, समावेशी सुधार पर सांप्रदायिक वार ठीक नहीं है. इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने कहा कि वक्फ बोर्ड की कानूनी स्थिति और शक्तियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने एनडीए के सहयोगी दलों और विपक्षी दलों से भी ऐसे किसी भी कदम को पूरी तरह से खारिज करने और संसद में ऐसे संशोधनों को पारित न होने देने का आग्रह किया है. संसद में पेश होगा विधेयक! सूत्रों के मुतबिक, सरकार वक्फ बोर्ड को नियंत्रित करने वाले 1995 के कानून में संशोधन करने के लिए संसद में एक विधेयक लाने वाली है ताकि इनके कामकाज में अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके तथा इन निकायों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी हो सके. यह कदम मुस्लिम समुदाय के भीतर से उठ रही मांगों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है. संशोधन विधेयक वक्फ बोर्डों के लिए अपनी संपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टरों के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य कर देगा. केंद्र की मोदी सरकार वक्फ अधिनियम में बड़े संशोधन करने जा रही है. इसी सत्र में संसद में संशोधन विधेयक लाने पर विचार किया जा रहा है. इससे पहले शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में वक्फ अधिनियम में 40 संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. संसद में संशोधन विधेयक पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड की अनियंत्रित शक्तियां कम हो जाएंगी. बोर्ड किसी भी संपत्ति पर बिना सत्यापन आधिपत्य घोषित भी नहीं कर सकेगा. वक्फ एक्ट क्या है? वक्फ बोर्ड के पास कितनी जमीन है? सरकार का क्या प्लान है? विरोध में क्या दलीलें दी जा रही हैं? जानिए सारे सवालों के जवाब… बता दें कि 2013 में यूपीए की सरकार में वक्फ बोर्ड की शक्तियों को बढ़ा दिया गया था. आम मुस्लिम, गरीब मुस्लिम महिलाएं, तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के बच्चे, शिया और बोहरा जैसे समुदाय लंबे समय से कानून में बदलाव की मांग कर रहे थे. इन लोगों का कहना था कि वक्फ में आज आम मुसलमानों की जगह ही नहीं है. सिर्फ पावरफुल लोग हैं. रेवन्यू पर सवाल है. कितना रेवन्यू आता है, इसका कोई आकलन नहीं करने देता. रेवेन्यू जब रिकॉर्ड पर आएगा तो वो मुस्लिमों के लिए ही इस्तेमाल होगा. देश में अभी 30 वक्फ बोर्ड हैं. सभी वक्फ संपत्तियों से हर साल 200 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है.   वक्फ बोर्ड की लेकर वो फैक्ट, जो चर्चा में हैं? – पहला वक्फ अधिनियम 1954 में पारित किया गया. पहला संशोधन 1995 में और फिर 2013 में दूसरी बार संशोधन किया गया. – दुनिया के किसी भी देश में वक्फ बोर्ड के पास इतनी शक्तियां नहीं हैं. यहां तक ​​कि सऊदी या ओमान में भी ऐसा कानून नहीं है. – एक बार जब कोई जमीन वक्फ के पास चली जाती है तो उसे पलट नहीं सकते. पावरफुल लोगों ने वक्फ बोर्ड पर कब्जा कर लिया है. – भारत में वक्फ संपत्ति दुनिया में सबसे ज्यादा है और 200 करोड़ का भी राजस्व नहीं आ रहा है. – यहां तक ​​कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार या अदालतें भी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं. वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण रखने वालों के अलावा अन्य लोग भी इस कानून के खिलाफ हैं. – सच्चर कमेटी ने भी कहा कि वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता होनी चाहिए. वक्फ संपत्ति का उपयोग सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं. 1. मोदी सरकार का क्या प्लान है? शुक्रवार को कैबिनेट ने वक्फ अधिनियम में करीब 40 संशोधनों को मंजूरी दे दी. मोदी सरकार कैबिनेट में वक्फ बोर्ड की किसी भी संपत्ति को "वक्फ संपत्ति" बनाने की शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहती है. इन संशोधनों का उद्देश्य किसी भी संपत्ति को 'वक्फ संपत्ति' के रूप में नामित करने के वक्फ बोर्ड के अधिकार को प्रतिबंधित करना है. वक्फ बोर्ड द्वारा संपत्तियों पर किए गए दावों का अनिवार्य रूप से सत्यापन किया जाएगा. संशोधन विधेयक पारित होने के बाद वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट और ट्रांसफर में बड़ा बदलाव आएगा. सूत्रों का कहना है कि कानून में संशोधन की वजहों का भी जिक्र किया है. इसमें जस्टिस सच्चर आयोग और के रहमान खान की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया है. 2. कानून में बदलाव से क्या होगा? चूंकि, मौजूदा कानून के मुताबिक राज्य और केंद्र सरकार वक्फ संपत्तियों में दखल नहीं दे सकती हैं. संशोधन के बाद वक्फ बोर्ड को अपनी संपत्ति जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर में रजिस्टर्ड करानी होगी, ताकि संपत्ति का मूल्यांकन हो सके. राजस्व की जांच हो सकेगी. नए बिल में यह प्रावधान होगा कि सिर्फ मुस्लिम ही वक्फ संपत्ति बना सकते हैं. बोर्ड के स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाएगा और इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की जाएगी. राज्यों में वक्फ बोर्ड में महिला सदस्य शामिल होंगी. प्रत्येक राज्य बोर्ड में दो और केंद्रीय परिषद में दो महिलाएं होंगी. अभी तक महिलाएं वक्फ बोर्ड और काउंसिल की सदस्य नहीं हैं. जिन जगहों पर वक्फ बोर्ड नहीं है, वहां कोई ट्रिब्यूनल में जा सकता है. जो अब तक नहीं है. वक्फ बोर्ड की विवादित और पुरानी संपत्ति का नए सिरे से सत्यापन हो सकेगा. नया संशोधन उन संपत्तियों पर भी लागू होगा, जिन पर वक्फ बोर्ड और या किसी व्यक्ति ने दावे-प्रतिदावे किए हैं. प्रस्तावित एक्ट के मुताबिक, वक्फ बोर्ड द्वारा किए गए सभी दावों का अनिवार्य और पारदर्शी सत्यापन जरूरी होगा. वक्फ एक्ट की धारा 19 और 14 में बदलाव होगा. इससे केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव संभव है. वक्फ बोर्ड के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अब अपील की जा सकती है. यह प्रावधान अब तक नहीं था.  3. वक्फ बोर्ड को कब ज्यादा अधिकार मिले? 2013 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 1995 के बेसिक वक्फ एक्ट में … Read more

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का शाहजहां की बहू की संपत्ति पर बड़ा फैसला, ‘वक्फ बोर्ड का हिस्सा नहीं …’

 बुरहानपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि वक्फ बोर्ड बुरहानपुर के किले में मौजूद उन स्मारकों पर मालिकाना हक नहीं जता सकता, जिन्हें केंद्र सरकार पहले ही 'प्राचीन और संरक्षित' घोषित कर चुकी है। यह विवाद शाह शुजा के मकबरे, नादिर शाह के मकबरे और किले में स्थित बीबी साहिबा मस्जिद को लेकर था। जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि विवादित स्मारकों को प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 की धारा 1(1) (प्राचीन स्मारक घोषित) और धारा 3(1) (संरक्षित स्मारक घोषित) के तहत संरक्षण दिया गया था। केंद्र सरकार की है संपत्ति ऐसे में वक्फ बोर्ड वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 5 (2) के तहत इन्हें वक्फ संपत्ति घोषित करते हुए कोई और अधिसूचना जारी नहीं कर सकता। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि विवादित संपत्ति को पहले ही वर्ष 1913 और 1925 में प्राचीन स्मारक और संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका था। इस प्रकार, उक्त अधिसूचना जारी होने के बाद, संपत्ति अब आयुक्त की संरक्षकता में है और संपत्ति केंद्र सरकार की है । साथ ही यह भी कहा कि 1995 का कानून लागू होने पर ये संपत्तियां 'मौजूदा वक्फ संपत्तियां' नहीं थीं। वक्फ बोर्ड की नहीं है संपत्ति सिंगल बेंच ने आगे कहा कि जब तक 1904 के अधिनियम की धारा 14 के तहत मुख्य आयुक्त संपत्ति पर अपनी संरक्षकता नहीं छोड़ देते, तब तक बोर्ड की अधिसूचना प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के तहत जारी की गई अधिसूचनाओं को रद्द नहीं करेगी। अदालत ने आगे कहा कि उस संपत्ति के संबंध में जारी की गई एक गलत अधिसूचना, जो वक्फ अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख को मौजूदा वक्फ संपत्ति नहीं है, उसे वक्फ संपत्ति नहीं बनाएगी। साथ ही यह भी कहा कि ऐसी अधिसूचना अपने आप 1904 के अधिनियम के तहत जारी की गई अधिसूचनाओं को रद्द नहीं करेगी। केंद्र का ही रहेगा कब्जा इसलिए, अदालत ने यह व्यवस्था दी कि बोर्ड विवादित प्राचीन और संरक्षित स्मारकों से केंद्र सरकार को बेदखल करने की मांग सही तरीके से नहीं कर सकता है। शाहजहां की बहू का है मकबरा ऐसा कहा जाता है कि शाह शुजा का मकबरा बेगम बिलकिस का मकबरा है जो शाहजहां की बहू थीं। प्रत्न समीक्षा, पुरातत्व का एक जर्नल, खंड 11 के अनुसार, फारुकी वंश के दसवें सुल्तान मुहम्मद शाह फारुकी II के मकबरे को गलती से नादिर शाह का मकबरा बताया जाता है। इसी तरह, बीबी साहेबा मस्जिद संभवतः गुजरात के सुल्तान की बेटी रानी बेगम रुकैया ने बनवाई थी। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के सीईओ ने 2013 में एक आदेश जारी कर इन स्मारकों को 1995 के अधिनियम के आधार पर वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। केंद्र सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि बोर्ड की ओर से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि इस मामले को पहले वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील में सुना जाना चाहिए था। इन तीन इमारतों पर विवाद एएसआई की तरफ से कहा गया है कि शाह शुजा स्मारक, नादिर शाह का मकबरा और बुरहानपुर के किले में स्थित बीबी साहिबा की मस्जिद भी प्राचीन और संरक्षित स्मारक हैं. शाह शुजा स्मारक मुगल सम्राट शाहजहां के बेटे शाह शुजा की पत्नी बेगम बिलकिस की कब्र है. बेगम बिलकिस की बेटी के जन्म देते समय मौत हो गई थी, जिसे बुरहानपुर में दफनाया गया था. एएसआई ने कहा कि जब इन स्मारकों से प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1904 के तहत संरक्षणकता छोड़ी नहीं गई तो इसे वक्फ बोर्ड कैसे अपनी संपत्ति घोषित कर सकता है. इसपर दूसरे पक्ष की तरफ से जवाब दिया गया कि जब सीईओ ने संपत्ति को वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित कर दिया था तो उनके पास इसे खाली कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. कोर्ट की तरफ से कहा गया कि इस संपत्ति के संबंध में गलत अधिसूचना जारी की गई. वक्फ बोर्ड की अधिसूचना विवादित संपत्ति पर केंद्र सरकार का स्वामित्व नहीं छीनेगी. वक्फ बोर्ड ने 2013 में इन्हे घोषित किया था अपनी संपत्ति : मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा, साल 2013 में इन स्मारकों को आदेश जारी अपनी संपत्ति घोषित की थी। केंद्र सरकार ने वक्फ बोर्ड के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 63