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नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बढ़-चढ़कर दावे करने के लिए जाने जाते हैं। पिछले दिनों वाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूक्रेन को यूरोप की फंडिंग को लेकर उन्होंने एक दावा किया था, जिसे उसी दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खारिज कर दिया था। तब डोनाल्ड ट्रंप चुप रह गए थे। अब ऐसा ही मौका भारत के साथ भी आया है। उन्होंने भारत को लेकर दावा किया था कि नई दिल्ली से उन्हें भरोसा मिला है कि अमेरिकी उत्पादों के आयात पर टैक्स में कमी कर दी जाएगी। अब उनके इस दावे को भारत ने खारिज कर दिया है। वाणिज्य सचिव सुनील बरथवाल ने संसदीय पैनल को बताया है कि ऐसी कोई भी प्रतिबद्धता अमेरिका के आगे जाहिर नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि टैरिफ में कटौती जैसा कोई वादा भारत ने अमेरिका से नहीं किया है। विदेश मामलों की संसदीय समिति के समक्ष वाणिज्य सचिव ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच अब भी वार्ता जारी है। फिलहाल किसी भी तरह का ट्रेड अग्रीमेंट फाइनल नहीं हुआ है। संसदीय समिति के कई सदस्यों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को लेकर चिंता जाहिर की थी। इस पर बरथवाल ने जवाब देते हुए कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ही कुछ नहीं कहा जा सकता। फिलहाल दोनों देशों के बीच ट्रेड अग्रीमेंट को लेकर वार्ता जारी है। भारत ने अब तक अमेरिका के साथ ट्रेड टैरिफ में कटौती की कोई प्रतिबद्धता जाहिर नहीं की है।'

वाणिज्य सचिव ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ समझौतों में भारतीय हितों का संरक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत फ्री ट्रेड का पक्षधर है और उदारता की नीति अपनाता है। हमारी कोशिश है कि दोनों देशों के बीच कारोबार में इजाफा हो। भारतीय अधिकारी ने कहा कि हम फ्री ट्रेड की बात करते हैं, लेकिन यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि ट्रेड वार से किसी के भी हितों का संरक्षण नहीं हो सकेगा। इससे मंदी की आहट जरूर आ सकती है। बरथवाल ने ससंदीय समिति को बताया, ‘भारत मनमाने तरीके से टैरिफ में कोई कटौती नहीं करेगा। खासतौर पर ऐसे उद्योगों में जो घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत टैरिफ में कटौती के लिए द्विपक्षीय वार्ता को तरजीह देता है और यह भी ध्यान रखता है कि राष्ट्रीय हितों से समझौता न किया जाए।’

कनाडा और मेक्सिको से तुलना पर भी भारत ने दिया जवाब
कनाडा और मेक्सिको के साथ भारत की तुलना को भी उन्होंने खारिज किया। बरथवाल ने कहा कि कनाडा और मेक्सिको के साथ तो अमेरिका का अवैध प्रवासी, घुसपैठ और सुरक्षा के मामले पर भी मतभेद है। लेकिन भारत का मामला अलग है। हम अमेरिका के साथ वही समझौता करेंगे, जो दोनों के लिए हितकारी हो। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार दूसरे देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ में इजाफे के ऐलान कर रहे हैं। इससे दुनिया भर के बाजारों को नुकसान पहुंच रहा है। डाउ जोंस, वॉल स्ट्रीट से लेकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज तक में लगातार बिकवाली का माहौल बना हुआ है। खबर है कि भारत ने अमेरिका के साथ समझौते के लिए सितंबर 2025 तक का वक्त मांगा है।

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