दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना भारत में चलाई जा रही, स्वास्थ्य बजट के आवंटन में 164 % की बढ़ोतरी : जेपी नड्डा

 नई दिल्ली  केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने लोगों के स्वास्थ्य को मोदी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए दावा किया है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना भारत में चलाई जा रही है और स्वास्थ्य बजट के आवंटन में भी 164 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि मोदी सरकार सिर्फ घोषणाएं ही नहीं करती, बल्कि उसे धरातल पर सफल बनाने के लिए भी योजनाबद्ध तरीके से काम करती है। विपक्षी दलों के हंगामे के बीच लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमारी सरकार सक्रिय और प्रतिक्रियाशील रही है। वर्ष 2013-14 में स्वास्थ्य का जो बजट 33,278 करोड़ रुपए था, आज उस बजट को बढ़ाकर 90,958 करोड़ रुपए कर दिया गया गया है। स्वास्थ्य बजट के इस आवंटन में 164 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य के बजट में यह बढ़ोतरी लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता देने और भारतीयों नागरिकों की भलाई सुनिश्चित करने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नड्डा ने कहा कि एनडीए की पहली सरकार (अटल बिहारी वाजपेयी सरकार) से पहले देश में एक एम्स था, अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान 6 एम्स खोले गए। वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में 22 एम्स को मंजूरी दी गई, जिसमें से 18 ऑपरेशनल और 4 निर्माणाधीन हैं। अपने जवाब के दौरान विपक्षी दलों के हंगामे पर सदन में पलटवार करते हुए नड्डा ने कहा कि राजनीति करनी है तो करिए और सच्चाई सुननी है तो सुनिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भी निशाना साधते हुए बीमारी से संबंधित आंकड़ों को केंद्र के साथ शेयर नहीं करने का आरोप लगाया। नड्डा ने सदन के माध्यम से देश को यह भी बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 12 करोड़ परिवार यानी 55 करोड़ से ज्यादा लोगों को 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी गई है। इसके साथ ही 1.73 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं। दुनिया के देश भारत के आयुष्मान भारत योजना का अध्ययन कर रहे हैं। सरकार ने आयुष्मान भारत, मुफ्त दवाइयों एवं जांच सुविधाओं सहित स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य सुविधाओं पर जोर देकर आउट ऑफ पॉकेट खर्च को 62 प्रतिशत से कम कर 47.1 प्रतिशत पर पहुंचाया है। उन्होंने कोविड के संकट काल के दौरान मोदी सरकार द्वारा चलाए गए दुनिया के सबसे बड़े और सफल टीकाकरण अभियान का भी जिक्र करते हुए पिछली सरकारों की तुलना में मोदी सरकार द्वारा तेजी से कामकाज किए जाने का दावा किया। जेपी नड्डा के जवाब के बाद लोकसभा ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। recent visitors 137

मंडी में 9 सालों से चल रहा है देसी घी के पराठे का भंडारा, रोजाना बनते हैं 5 हजार पराठें

 मंडी भंडारा सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है। आपने ज्यादातर भंडारों में दाल-चावल, सब्जी-रोटी या फिर हलवा-खीर-पूरी आदि खाए होंगे, लेकिन मंडी जिले में सावन महीने के दौरान एक ऐसा भंडारा भी लगता है जिसमें दिन भर सिर्फ और सिर्फ देसी घी से बने पराठे ही खिलाए जाते हैं। यह भंडारा सजता है चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर नागचला स्थित हनुमान मंदिर के पास। आप यहां चाहे सुबह जाएं, दोपहर को या फिर शाम को, यहां आपको देसी घी में बने तरह-तरह के पराठे ही खाने को मिलेंगे। हम बात कर रहे हैं हिमाच के मंडी जिले में लगने वाले पराठों के लंगर की। इस लंगर में देसी घी से बने पराठें भक्तों को परोसे जाते हैं। सुबह से शाम तक यहां हजारों पराठें बनाए जात हैं। यह भंडारा सजता है चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर नागचला स्थित हनुमान मंदिर के पास लगता है। ये लंगर पिछले 9 सालों से चल रहा है। कौन करता है भंडारे का आयोजन बता दें कि पराठों का ये भंडारा हर साल सावन के महीने में लगता है। ये परंपरा पिछले 9 सालों से चल रही है। पराठों का ये लंगर सुबह शुरू होता है और शाम तक चलता है। पराठे के भंडारे की प्रथा को वर्ष 2016 में स्वयं बाबा शंभू भारती ने शुरू किया था। उसके बाद हर साल बाबा शंभू भारती के अनुयायी आपसी और जनसहयोग से सावन माह में इस भंडारे का करते आ रहे हैं। 2016 में बाबा शंभू भारती ने शुरू की थी पराठे के भंडारे की प्रथा बीते 9 वर्षों से पराठों के इस भंडारे का आयोजन बाबा शंभू भारती के अनुयायी आपसी और जनसहयोग से हर वर्ष सावन माह में करते आ रहे हैं। आयोजक रमेश भारती ने बताया कि पराठे के भंडारे की प्रथा को वर्ष 2016 में स्वयं बाबा शंभू भारती ने शुरू किया था। उनके स्वर्गवास के बाद अब उनके अनुयायी सभी के सहयोग से हर वर्ष इसे आयोजित कर रहे हैं। रोजाना डेढ़ से दो क्विंटल आटे और 25 से 30 किलो देसी घी के इस्तेमाल से 3 से 5 हजार पराठे बनाकर हर आने-जाने वाले को खिलाए जाते हैं। इस कार्य को करने के लिए बहुत से सेवादार पंजाब से आकर स्वेच्छा से यहां अपना योगदान देते हैं। 'लोगों के लिए मददगार साबित होता है ये भंडारा' स्थानीय निवासी चेतन गुप्ता ने बताया कि कुल्लू-मनाली की तरफ जब रास्ता बंद हो जाता है तो अधिकतर वाहनों को नागचला के पास ही रोक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में यह भंडारा उन सभी लोगों के लिए मददगार साबित होता है जो रास्ते में फंसे होते हैं और भोजन की तलाश करते हैं। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इस भंडारे में आकर पराठे का प्रसाद ग्रहण करते हैं। बता दें कि यह भंडारा सावन माह के दौरान पूरा 40 दिन चलता रहता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को भरपेठ पराठे खिलाए जाते हैं। रोजाना लगता है डेढ़ से दो क्विंटल आटा मंडी में लगने वाले इस लंगर में रोजाना डेढ़ से दो क्विंटल आटे का इस्तेमाल किया जाता है। पराठों को बनाने के लिए 25 से 30 किलो देसी घी का इस्तेमाल रोज होता है। रोजाना 3 से 5 हजार पराठें इस लंगर सेवा में बनाए जाते हैं। यहां हर आने-जाने वाले को पराठें खिलाए जाते हैं। इस कार्य को करने के लिए बहुत से सेवादार पंजाब से आकर स्वेच्छा से यहां अपना योगदान देते हैं। लोगों के लिए मददगार साबित होता है ये लंगर स्थानीय लोगों ने बताया कि कुल्लू-मनाली की तरफ जब रास्ता बंद हो जाता है तो अधिकतर वाहनों को नागचला के पास ही रोक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में यह भंडारा उन सभी लोगों के लिए मददगार साबित होता है जो रास्ते में फंसे होते हैं। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में इस भंडारे में आकर पराठे का प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह भंडारा सावन माह के दौरान पूरा 40 दिन चलता रहता है। यहां आने वाले हर व्यक्ति को भरपेठ परांठे खिलाए जाते हैं।   recent visitors 95

जंग के मुहाने पर खड़ा इजरायल सुन्‍नी सऊदी अरब से करेगा दोस्‍ती, नेतन्‍याहू ने दे दिए बड़े संकेत

तेलअवीव  हमास के राजनीत‍िक प्रमुख इस्‍माइल हानिया की हत्‍या के बाद शिया देश ईरान और इजरायल में युद्ध जैसे हालात हैं। अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि ईरान अगले 3 दिनों में इजरायल पर भीषण हमला कर सकता है। इस हमले में लेबनान का हिज्‍बुल्‍ला और यमन के हूती व‍िद्रोही भी साथ दे सकते हैं। इन सबके बीच अमेरिका जॉर्डन, यूएई और सऊदी अरब जैसे सुन्‍नी मुस्लिम देशों से एक गठबंधन बना रहा है ताकि ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के किसी भी हमले को विफल किया जा सके। हमास के 7 अक्‍टूबर के हमले से पहले इजरायल और सऊदी अरब के बीच रिश्‍तों को पहली बार सामान्‍य बनाने पर लगभग सहमति बन गई थी लेकिन अब यह खटाई में चली गई है। इजरायली मीडिया के मुताबिक अब नेतन्‍याहू ईरान तनाव को देखते हुए सऊदी अरब के साथ रिश्‍तों को सामान्‍य बनाने की प्रक्रिया को अमेरिका के चुनाव तक स्‍थगित करना चाहते हैं। इजरायल के एन 12 टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली प्रधानमंत्री चाहते हैं कि नवंबर में अमेरिका के चुनाव परिणाम आने तक सऊदी अरब के साथ रिश्‍ते को सामान्‍य करने की प्रक्रिया को स्‍थगित कर दिया जाए। नेतन्‍याहू को डर सता रहा है कि ईरान के साथ युद्ध छिड़ सकता है और अमेरिका की सीनेट में सऊदी डील को मंजूरी मिलेगी या नहीं, यह कहना मुश्किल है। वहीं द वॉशिंगटन इंस्‍टीट्यूट के कार्यकारी डायरेक्‍टर रॉबर्ट स्‍टालओफ का कहना है कि वह इस रिपोर्ट में भरोसा नहीं करते हैं। उन्‍होंने कहा कि नेतन्‍याहू और बाइडन के बीच मुर्गा लड़ाई चल रही है। बाइडन और नेतन्‍याहू में चल रही है टेंशन रॉबर्ट ने कहा कि बाइडन और नेतन्‍याहू दोनों पुराने खिलाड़ी हैं। बाइडन ने यह बात लीक होने दी कि सऊदी अरब के साथ डील को अब किनारे कर दिया गया है क्‍योंकि उन्‍हें पता है कि नेतन्‍याहू ऐसा चाहते हैं। बाइडन ने नेतन्‍याहू पर दबाव बनाने के लिए यह किया। वहीं अब नेतन्‍याहू ने खुद ही सऊदी डील को किनारे करके बाइडन को संदेश दे दिया है कि उन्‍हें दबाया नहीं जा सकता है। नेतन्‍याहू का मुख्‍य लक्ष्‍य सऊदी अरब के साथ इजरायल के सामान्‍य रिश्‍ते था और सत्‍ता में आने के बाद उन्‍होंने पूरी ताकत लगा दी थी। इससे पहले बाइडन और नेतन्‍याहू सऊदी अरब के साथ 3 हिस्‍सों वाले समझौते की ओर आगे बढ़ रहे थे जिसे हमास के हमले ने पटरी से उतार दिया। इसमें सऊदी अरब और अमेरिका के बीच सुरक्षा समझौता शामिल था। इसके अलावा इजरायल सऊदी अरब के बीच रिश्‍ते सामान्‍य बनाना और फलस्‍तीन देश के लिए रास्‍ता साफ करना था। बाइडन प्रशासन को यह भरोसा था कि गाजा में बंधक संकट को खत्‍म करने और सीजफायर डील से एक बार फिर से सऊदी अरब के साथ रिश्‍तों को सामान्‍य बनाने के डील को फिर से आगे बढ़ाया जा सकेगा। ईरान के खिलाफ गठजोड़ बना रहे थे बाइडन सऊदी अरब के साथ सुरक्षा समझौते को अमेरिका के सीनेट से मंजूरी मिलना जरूरी होगा लेकिन इसके लिए रिपब्लिकन पार्टी के सपोर्ट की जरूरत होगी। वहीं ऐसा माना जाता है कि एक सऊदी अमेरिकी सुरक्षा डील को डेमोक्रेट तब सपोर्ट नहीं करेंगे जब डोनाल्‍ड ट्रंप सत्‍ता में होंगे। वहीं इस डील को शिया देश ईरान के खिलाफ एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के लिए आधार माना जा रहा था। इसमें सऊदी अरब और इजरायल दोनों को ही शामिल किया जाना था। recent visitors 171