Wednesday, July 8, 2026 12:40 am

पीएम योजना में आईसीटी लैब की स्थापना

पीएम योजना में आईसीटी लैब की स्थापना विद्यार्थियों को दी जा रही है कम्प्यूटर की शिक्षा भोपाल प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान और पीएमयोजना के अंतर्गत करीब 1200 आईसीटी लैब सरकारी विद्यालयों में स्थापित की गई है। एक आईसीटी लैब की लागत 6 लाख 40 हजार है। एक लैब में 10 कम्प्यूटर स्थापित किये गये है। आईसीटी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को कम्प्यूटर की शिक्षा दी जा रही है। केन्द्र सरकार की स्मार्ट क्लास योजना के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 891 सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनाई गई है। एक स्मार्ट क्लास की लागत एक लाख 20 हजार रूपये है। स्मार्ट क्लास योजना में प्रत्येक सरकारी विद्यालय की दो क्लासों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किये जाने के प्रयास किये जा रहे है। इसके साथ ही स्टार्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रदेश के 52 सीएम राईज स्कूलों में रॉबोटिक्स लैब की स्थापना की गई है। समर कैम्प सीएम राईज स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में नेतृत्व एवं व्यक्तित्व विकास के लिये प्रदेश के 274 सीएम राईज स्कूल 30 हजार विद्यार्थियों ने और पीएम के 89 विद्यालयों के 7 हजार 500 से अधिक विद्यार्थियों ने समर कैम्प में भाग लिया। समर कैम्प के दौरान विद्यार्थियों में नेतृत्व विकास क्षमता, योग, खेल, नृत्य और गायन इत्यादि की विद्याएँ विषय विशेषज्ञों द्वारा सिखाई गई। ईको क्लब फॉर मिशन लाइफ स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में पानी, स्वास्थ्य और विद्यालय के पर्यावरण के बीच सह संबंध की समझ विकसित करने के लिये ईको क्लब फॉर मिशन लाइफ के अंतर्गत गतिविधियां आयोजित किये जाने के लिये निर्देश दिये गये हैं। जिला शिक्षा अधिकारी को जारी किये गये निर्देश के अनुसार स्कूलों में समय-समय पर विषय विशेषज्ञों को बुलाकर पानी, स्वास्थ्य और विद्यालय के पर्यावरण के बीच सह संबंध की समझ विकसित करने के लिये व्याख्यान दिये जाने के लिये कहा गया है। इसके साथ ही विद्यालयों में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल का महत्व विषय पर निबंध प्रतियोगिता, साथ ही मानव स्वास्थ्य और अपशिष्ट पदार्थों के निपटान विषय पर भाषण प्रतियोगिता होंगी। यह गतिविधियां प्रत्येक शनिवार बस्ता विहीन दिवस आयोजित की जाएं।   recent visitors 99

14 विभागों से संचालित 28 पाठ्यक्रम में दिखाई दिलचस्पी, यूजी के साथ ही पीजी पाठ्यक्रम की होगी काउंसिलिंग

भोपाल सीयूईटी यूजी में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को चुनने वाले विद्यार्थियों का डाटा अगले कुछ दिनों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से मिलने वाला है। विश्वविद्यालय को स्कोर कार्ड के आधार पर छात्र-छात्राओं की मेरिट और रैंक बनाई जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक यूजी के साथ ही पीजी काउंसिलिंग की काउसिलिंग होगी। यूजी-पीजी के लिए पंजीयन को लेकर 15 अगस्त से प्रक्रिया रखी जाएगी। सीयूईटी यूजी की परीक्षा में देशभर से डीएवीवी को चुनने वाले एक लाख छह हजार विद्यार्थी है। इन्होंने विश्वविद्यालय के 14 विभागों से संचालित 28 पाठ्यक्रम में दिलचस्पी दिखाई है, जिसमें आईएमएस, आईआईपीएस, ईएमआरसी, पत्रकारिता, अर्थशास्त्र सहित कई विभाग है। विश्वविद्यालय ने काउंसिलिंग का पहला चरण 30 अगस्त से शुरू करने पर जोर दिया है। तीन दिन के भीतर पहला चरण खत्म किया जाएगा। recent visitors 94

जेट इंजन की डिलिवरी में देरी फिर भी स्वदेशी लड़ाकू विमान के उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना जेट इंजन की डिलिवरी में देरी के बावजूद स्वदेशी लड़ाकू विमान (एलसीए) के उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस वित्तीय वर्ष में 14 विमानों और उनके सिस्टम को पूरा करने की उम्मीद है। एयरक्राफ्ट के नए मॉडल, एलसीए एमके 1ए का अभी पूरी तरह से परीक्षण किया जा रहा है। उम्मीद है कि पहले विमान को अगले दो महीनों के अंदर दिया डिलेवर कर दिया जाएगा। वायु सेना ने इस विमान के 83 मॉडल का ऑर्डर दिया है। हालांकि विमान का ढांचा बनकर तैयार है और बाकी के पुर्जे भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन अमेरिकी कंपनी जीई से 404 इंजन की आपूर्ति में देरी हो रही है, जिसकी वजह से विमान की डिलिवरी में भी देरी हो रही है। पहले यह तय था कि पहला एलसीए एमके 1ए जुलाई में दिया जाएगा। यह है पूरा प्लान सूत्रों के मुताबिक, जीई कंपनी को भी इंजन बनाने वाली दूसरी कंपनियों को कोरोना के कारण दिक्कतें हुई हैं, जिसकी वजह से उन्हें इंजन बनाने में देरी हो रही है। उम्मीद है कि यह कंपनी इस साल अक्टूबर से इंजन की आपूर्ति शुरू करेगी। यह पता चला है कि विमान बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इस वित्तीय वर्ष में 16 विमान देने का काम दिया गया था। कंपनी ने एक योजना बनाई है जिसके तहत विमान का ढांचा और बाकी के पुर्जे पहले ही तैयार कर लिए जाएंगे, और इंजन बाद में लगाया जाएगा जब जीई कंपनी इंजन की आपूर्ति ठीक से कर पाएगी। अनुमान के मुताबिक, इस वित्तीय वर्ष के अंत तक कम से कम 14 विमान तैयार हो जाएंगे। अभी के लिए, विमान बनाने वाली कंपनी अपने पास रखे हुए पुराने इंजनों का इस्तेमाल करके विमान बनाएगी और उनका परीक्षण करेगी। जब इंजन की आपूर्ति शुरू होगी, तो उन्हें तैयार विमानों में लगाया जाएगा, जिसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं, और फिर विमान को वायु सेना को दिया जाएगा। हर लाइन साल में आठ विमान बना सकती है एलसीए एमके 1ए के लिए दो उत्पादन लाइनें अभी बेंगलुरु में चल रही हैं और तीसरी लाइन नासिक में अक्टूबर तक शुरू हो सकती है। नासिक लाइन से पहला विमान इस वित्तीय वर्ष में ही तैयार हो जाने की उम्मीद है। हर लाइन साल में आठ विमान बना सकती है। इंजन में देरी होने के बावजूद, ऑर्डर किए गए सभी 83 जेट विमानों की डिलीवरी 2028 की समय सीमा के भीतर पूरी होने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि अभी पहला एलसीए एमके 1ए विमान उड़ान परीक्षण कर रहा है और जल्द ही इसमें स्वदेशी हथियारों जैसे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। दूसरे उत्पादन विमान का अंडरग्राउंड ट्रायल चल रहा है और चार और विमान बनने के अंतिम चरण में हैं। भारत पहले से ही जीई से बातचीत कर रहा है ताकि जीई 404 इंजन के ऑर्डर में काफी बढ़ोतरी की जा सके। सरकार ने 97 और एलसीए एमके 1ए विमानों के ऑर्डर को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए इन इंजनों की जरूरत होगी। ऐसा करने का मकसद है कि समय से पहले ऑर्डर देकर डिलीवरी में देरी न हो। recent visitors 131

भोपाल में एयरफोर्स की होने वाली अग्निवीर भर्ती की भर्ती, , साढ़े सात हजार युवा होंगे शामिल, जाने तारीख

भोपाल  सेना भर्ती कार्यालय भोपाल द्वारा 22 से 30 अगस्त 2024 तक मोतीलाल नेहरू पुलिस स्टेडियम भोपाल में मध्यप्रदेश के 15 जिलों अशोकनगर, भोपाल, बैतूल, छिंदवाडा, दमोह, गूना, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पन्ना, पांढुर्णा, रायसेन, राजगढ, सिहोर और विदिशा के पुरूष उम्मीदवारों के लिए अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक व अग्निवीर ट्रेड्समैन रैली का आयोजन किया गया है तथा मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के लिए सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी, नर्सिंग सहायक और धर्म गुरू की भी सेना भर्ती रैली का आयोजन साथ में किया जा रहा हैं। राजधानी Bhopal के मोतीलाल नेहरू Police स्टेडियम में आगामी 22 अगस्त से 30 अगस्त तक प्रदेश के 15 जिलों Bhopal , अशोकनगर, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पन्ना, पांढुर्ना, रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा के पुरूष उम्मीदवारों के लिए अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन रैली का आयोजन किया जाएगा. साथ ही Madhya Pradesh एवं छतीसगढ़ के सभी जिलों के लिए सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी नर्सिंग सहायक और धर्मगुरू की भी सेना भर्ती रैली का आयोजन साथ में किया जाएगा. रोजगार तलाश रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. राजधानी भोपाल में 22 से 30 अगस्त तक सेना में भर्ती का आयोजन होने जा रहा है. भोपाल के मोतीलाल नेहरू पुलिस स्टेडियम में सेना भर्ती का आयोजन किया जाएगा. इस भर्ती प्रक्रिया में मध्य प्रदेश के 15 जिलों के युवा शामिल हो सकेंगे. सेना भर्ती कार्यालय भोपाल से प्राप्त जानकारी अनुसार, 22 अगस्त से 27 अगस्त तक अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्नि वीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक और अग्निवीर ट्रेड्समैन भर्ती का आयोजन होगा. युवा इस भर्ती प्रक्रिया में ले सकेंगे भाग इसी तरह 29 अगस्त को सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी, नर्सिंग सहायक की रैली का आयोजन किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि सेना के जरिये अप्रैल 2024 में सामान्य ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया था. ऑनलाइन परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार शारीरिक दक्षता सहित अन्य भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भर्ती रैली में भाग ले सकेंगे.  15 जिलों के युवा हो सकेंगे शामिल सेना भर्ती के लिए मध्य प्रदेश के 15 जिलों के युवा शामिल हो सकेंगे. इन जिलों में अशोक नगर, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, दमोह, गुना, हरदा, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, पन्ना, पांढुर्णा, रायसेन, राजगढ़, सीहोर और विदिशा के पुरुष उम्मीदवारों के लिए भर्ती आयोजन किया जाएगा. इसके तहत अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी, अग्निवीर ऑफिस सहायक एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन के लिए भर्ती रैली का आयोजन किया जाएगा. इसके साथ मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के लिए सिपाही फार्मा, सिपाही तकनीकी, नर्सिंग सहायक और सेना भर्ती रैली का आयोजन साथ में ही किया जाएगा. एक दिन पहले तक प्रवेश भर्ती रैली में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र पर अंकित तारीख के एक दिन पहले विश्राम स्थली में रात 9 बजे तक ही प्रवेश दिया जाएगा. भर्ती रैली के लिए अभ्यर्थियों की दौड़ का आयोजन रात्रि 2 बजे से प्रारंभ होगा. ये डॉक्यूमेंट्स लाना जरूरी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए प्रवेश पत्र और सभी दस्तावेज रैली अधिसूचना के अनुसार, साथ में आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर भी लेकर आना अनिवार्य है. भर्ती रैली में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र संबंधितों को ईमेल पर भेज दिया गया है. recent visitors 94

आज से लागु होगी सॉफ्टवेयर संपदा-2, प्रशासन ने कसी कमर

भोपाल सभी जिलों में कृषि भूमि के खसरे के अंतरण के दस्तावेज पंजीकृत होने पर संपदा एप्लीकेशन से राजस्व विभाग के रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम के उपयोग से साइबर तहसीलों में स्वतः नामांतरण होना शुरू हो गया है। जल्दी ही इस संपदा सॉफ्टवेयर-2 का उपयोग शुरू हो जाएगा। इसे 15 अगस्त से शुरू करने की तैयारियाँ जारी हैं। सॉफ्टवेयर संपदा-2 का पायलट परीक्षण 4 जिलों – गुना, रतलाम, हरदा और डिंडोरी मुख्यालयों में उप पंजीयन कार्यालयों में सफलतापूर्वक किया गया। इस सॉफ्टवेयर में कई ऐसी विशेषताएं हैं, जो देश में पहली बार क्रियान्वित होंगी। उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा ने  मंत्रालय में गत दिवस पंजीयन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए नागरिकों द्वारा इस सॉफ्टवेयर के आधिकारिक उपयोग करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिये। संपदा सॉफ्टवेयर से उप पंजीयन कार्यालय में उपस्थित होने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। पंजीबद्ध दस्तावेज डीमैट दस्तावेज में परिवर्तन हो जाएंगे और फेसलेस पंजीयन होगा। इलेक्ट्रॉनिक रूप से पंजीबद्ध दस्तावेज व्हाट्सएप एवं ईमेल के माध्यम से तत्काल हितग्राही को मिल जायेंगे। सभी जिलों में भौतिक रूप से पंजीकृत दस्तावेज को भी डिजिटाइज करने की प्रक्रिया चल रही है । इसके अंतर्गत 7 जिलों हरदा, डिंडोरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सिंगरौली और बुरहानपुर में 100% दस्तावेज 2004-05 से डिजिटल किया जा चुके हैं । वर्ष 2005-06 तक के लगभग 1.1 करोड़ दस्तावेज में से 28 लाख दस्तावेज को डिजिटल किया जा चुका है। बताया गया कि 67 जिला मुख्यालयों और राजस्व के लिए महत्वपूर्ण उप पंजीयन कार्यालयों का आधुनिकीकरण किया गया है।   recent visitors 92

भोपाल बनेगा Rose City, हर जगह महकेगी गुलाब की खुशबू, 150 से अधिक पार्क और सड़कों के किनारे रोपे जाएंगे गुलाब के पौधे

 भोपाल  भोपाल जिसे सिटी ऑफ लेक्स के नाम से जाना जाता है, वह अब सिटी ऑफ रोज भी बनने जा रहा है। भोपाल में सात से 13 जनवरी, 2028 के बीच भारत का पहला और 21 वां वर्ल्ड रोज कन्वेंशन आयोजित किया जाना है, जिसमें करीब 40 देश शामिल होंगे। इस आयोजन की तैयारी की जा रही है। यहां अगले तीन वर्षों में हर छोटे-बड़े पार्क से लेकर सड़कों के किनारे गुलाब के पौधे रोपे जाएंगे। सिटी ऑफ रोज की तर्ज पर सजेगा भोपाल एमपी रोज सोसायटी और इंडियन रोज फेडरेशन के इस भव्य आयोजन के लिए होस्ट सिटी भोपाल को सिटी ऑफ रोज की तर्ज पर सजाया जाएगा। भोपाल नगर निगम और जिला प्रशासन ने हाल ही में एमपी रोज सोसायटी के पदाधिकारियों साथ बैठक करके कार्य योजना पर विचार-विमर्श किया।     भोपाल में फिलहाल तीन बड़े रोज गार्डन हैं। इनमें नेहरू रोज गार्डन बरखेड़ा, विधानसभा गार्डन और लिंक रोड स्थित रोज गार्डन शामिल हैं।     एमपी रोज सोसायटी के सदस्य एसएस गदरे ने बताया कि शहर के कई रोज गार्डन आज मृतप्राय: अवस्था में हैं, पहले उन्हें जीवंत किया जाएगा।     इसके बाद नगर निगम के 140 छोटे-बड़े गार्डन तथा पीडब्ल्यूडी के कुछ बड़े गार्डनों में गुलाब के पौधे बडिंग ग्राफ्टिंग प्रक्रिया से रोपे जाएंगे। ऐसे 150 से अधिक गार्डन गुलाबों से महकेंगे।     इसके साथ ही तीनों लिंक रोड, एयरपोर्ट रोड और वीआइपी रोड के सेंट्रल वर्ज में भी गुलाब के पौधे रोपे जाएंगे। हालांकि इसके लिए करीब एक वर्ष का समय लग सकता है। कलकत्ता, बेंगलुरु से आएंगे सबसे ज्यादा गुलाब शहर को रोज सिटी बनाने के लिए देशभर से गुलाब की खास किस्म भोपाल लाकर लगाई जाएगी। इसमें भी कोलकाता, बेंगलुरू और हिमाचल के तराई क्षेत्रों से सबसे ज्यादा गुलाब की किस्में आएंगी। इनके रोपण व रोज गार्डनों की देखरेख के लिए नगर निगम के 700 में से करीब 400 गार्डनरों को रोज सोसायटी द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। चीन को पछाड़कर भोपाल का चयन एमपी रोज सोसायटी के सदस्य एसएस गदरे के अनुसार, वर्ष 2022 में ऑस्ट्रेलिया में वर्ल्ड रोज कनवेंशन हुआ था, तब अगले आयोजन के लिए भारत और चीन ने दावेदारी की थी। 40 में 39 देशों ने वोटिंग में भाग लिया था। इनमें से 33 ने भारत के पक्ष में वोट दिया, जबकि छह वोट चीन को मिले। भारत को मिली मेजबानी इस तरह भारत को वर्ष 2028 में होने वाले वर्ल्ड रोज कनवेंशन की मेजबानी मिली। एमपी रोज सोसाइटी ने इंडियन रोज एसोसिएशन के समक्ष भोपाल में यह आयोजन करने का प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। आयोजन में भोपाल में विश्व के 40 देशों के प्रतिनिधि आकर यहां गुलाब की सुंदरता को निहारेंगे। recent visitors 83

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट से फीस वृद्धि मामले में निजी स्कूलों को अंतरिम राहत

जबलपुर हाई कोर्ट ने जिला कमेटी के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके जरिए निजी स्कूलों को फीस रिफंड करने कहा गया था और समिति द्वारा फीस निर्धारित की गई थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने जिला कमेटी के आदेश को निर्धारित नियम का उल्लंघन करार दिया। इसके साथ ही आयुक्त लोक शिक्षण, कलेक्टर जबलपुर व डीईओ को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया। स्कूलों ने आनलाइन पार्टल पर फीस वृद्धि की जानकारी अपलोड नहीं की थी दरअसल क्राइस्ट चर्च स्कूल, सेंट अलॉयसियस स्कूल, ज्ञानगंगा, स्टेमफील्ड व स्कूलों की ओर से यह अपील दायर की गई थी। अपीलार्थियों की से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जिला कमेटी ने इस आधार पर उक्त आदेश जारी किया था कि स्कूलों ने आनलाइन पार्टल पर फीस वृद्धि की जानकारी अपलोड नहीं की थी। स्कूलों ने बताए नियम उनके मामले में फीस में बढ़ोतरी 10 फीसदी से कम है और असाधारण मामलों में 13 फीसदी तक है। इसके अलावा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर स्कूल फीस बढ़ोतरी की गाइडलाइन भी अपलोड नहीं की गई है। जिला समिति को अगर यह पता चलता कि फीस में वृद्धि ज्यादा है, तो वह केवल संबंधित स्कूलों पर जुर्माना लगा सकती थी। 25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने एक अंतरिम आदेश में संबंधित जिला समितियों के आदेशों पर रोक लगा दी और प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा, जिला कलेक्टर, शिक्षा अधिकारी, और जिला समितियों सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। मामले की सुनवाई अब 25 अगस्त को होगी। जिला कमेटी ने बढ़ाई गई फीस वापस करने के आदेश जारी किए थे जिला कमेटी ने वर्ष 2017-18 से 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में बढ़ाई गई फीस वापस करने के आदेश जारी किए थे। इसके अलावा कमेटी ने वर्तमान सत्र की फीस भी निर्धारित की थी। जिला कमेटी ने फीस वृद्धि का गलत आंकलन किया था। मप्र निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) के अंतर्गत स्कूल प्रबंधन फीस में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर सकता है। स्कूल प्रबंधन ने 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं की है स्कूल प्रबंधन द्वारा फीस वृद्धि में 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की जाती है, तो इसके लिए जिला कमेटी से अनुमति आवश्यक है। फीस में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी करने पर राज्य कमेटी से अनुमति आवश्यक है। स्कूल प्रबंधन के द्वारा 10 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि नहीं की गई है। लिहाजा, जिला कमेटी के अादेश पर रोक अपेक्षित है। हाई कोर्ट ने मांग स्वीकार करते हुए अंतरिम रोक लगा दी। recent visitors 86