भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नागर विमानन बाजारों में से एक, 2030 तक 30 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान

भारत के घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 2030 तक 30 करोड़ तक पहुंच जाएगी: नायडू मंत्री के. राममोहन नायडू ने  कहा कि भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 2030 तक 30 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नागर विमानन बाजारों में से एक, 2030 तक 30 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान नई दिल्ली  नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने  कहा कि भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 2030 तक 30 करोड़ तक पहुंच जाने का अनुमान है। साथ ही हवाई अड्डों के विकास पर करीब 11 अरब डॉलर खर्च किए जा रहे हैं। ‘फ्रेंच एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज एसोसिएशन’ (जीआईएफएएस) की ओर से राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस एक मजबूत वैश्विक एसएएफ (सतत विमानन ईंधन) आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नागर विमानन बाजारों में से एक है और बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एयरलाइंस अपने बेड़े के साथ-साथ तंत्र का भी विस्तार कर रही हैं। नायडू ने कहा कि 2030 तक घरेलू हवाई यात्री यातायात 30 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि अगले 20-25 वर्षों में 200 और हवाई अड्डों के विकसित होने की उम्मीद है। भारत में वर्तमान में 157 हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट और वॉटरड्रोम हैं। 2025 के अंत तक चालू हवाई अड्डों की संख्या 200 तक पहुंचने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच साझेदारी की संभावनाएं अपार हैं।     recent visitors 86

भारतीय वायुसेना को नए प्लेन की खरीद में लग रहा समय, ट्रेनिंग देने में लगेगा टाइम

नई दिल्ली  वायुसेना के पास फाइटर प्लेन की ताकत ऐतिहासिक रूप से कम हो गई है। स्थिति यह है कि भारत के फाइटर प्लेन की क्षमता साल 1965 से भी कम हो गई है। इस पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का कहना है कि 'जो कुछ भी हमारे पास है, उसी से लड़ने' को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान मौजूदा असेट्स के संरक्षण और कर्मियों को उनके सही तरीके से उपयोग करने के लिए ट्रेनिंग देने पर है। फाइटर प्लेन हो रहे रिटायर हालांकि एयरफोर्स के पास 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत क्षमता है। यह संख्या सीमा पर खतरे की स्थिति को देखते हुए विस्तृत विचार-विमर्श के बाद स्वीकृत की गई है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार कमी आई है। इसकी वजह है कि पुराने सोवियत युग के फाइटर प्लेन रिटायर हो गए हैं और उनकी जगह नए प्लेन को लाने का आदेश नहीं दिया गया है। पिछले 6 साल से नहीं दिख रही प्रोग्रेस अपने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) का उत्पादन, जो समय से पीछे चल रहा है, को तेज करने की जरूरत है। इसके साथ ही नए मल्टी रोल वाले वाले फाइटर प्लेन विमानों की जरूरत "कल से ही" है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि वायुसेना ने 2018 में मेक इन इंडिया योजना के तहत 114 मल्टीरोल फाइटर प्लेन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन पिछले छह साल से कोई प्रोग्रेस नहीं दिख रही है। रातों-रात प्लेन नहीं खरीद सकते वायुसेना प्रमुख ने लड़ाकू विमानों की कमी को स्पष्ट रूप से बताते हुए कहा कि यह कोई थोड़े समय की बात नहीं है कि हम रातों-रात सामान खरीद सकते हैं। इसमें समय लगता है, सिर्फ सेलेक्शन ही नहीं, बल्कि शामिल करने में भी समय लगता है। इसके साथ ही, अगर हम दो या तीन स्क्वाड्रन शामिल भी करते हैं, तो निश्चित रूप से उनका उपयोग करने में सक्षम होने के लिए ट्रेनिंग में समय लगता है। इसलिए हम इस समय जिस चीज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वह यह है कि हमारे पास जो कुछ भी है, हम उससे तुरंत लड़ने में सक्षम हों। 1965 के बाद सबसे कम ताकत रिकॉर्ड बताते हैं कि 31 स्क्वाड्रन की मौजूदा ताकत 1965 के बाद से भारत की सबसे कम ताकत है, जब पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ा गया था। 1965 के युद्ध के बाद यह संख्या लगातार बढ़ती गई और 1996 में 41 स्क्वाड्रन तक पहुंच गई। जैसे-जैसे विमान की रूपरेखा बदलती गई, 2013 में यह संख्या घटकर 35 रह गई और तब से लगातार कम होती गई। सर्विस में मौजूद 31 स्क्वाड्रन में से दो स्क्वाड्रन कम से कम उड़ान भर रहे हैं। ये अपने मिग 21 लड़ाकू विमानों को बचा रहे हैं, जिन्होंने पहली बार 1971 के युद्ध में हिस्सा लिया था। ये विमान लंबे समय से अपने लाइफ के अंत तक पहुंच चुके हैं। उनकी रिटायरमेंट को कई सालों के लिए टाला जा रहा है। इसकी वजह है कि वायुसेना एलसीए एमके1ए लड़ाकू विमानों की डिलीवरी का इंतजार कर रही है। अतीत से सबक लेने की जरूरत एलसीए परियोजना से करीब से जुड़े रहे वायुसेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि अतीत से सबक लेने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आगे कोई देरी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि जेट विमानों के उत्पादन में प्राइवेट सेक्टर को बड़े पैमाने पर शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर एलसीए डिलीवरी की समयसीमा पूरी हो जाती है और मल्टी-रोल फाइटर कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो वायुसेना 'बुरी स्थिति में' नहीं होगी।   recent visitors 86

गौतम अडानी त्योहारी सीजन में 10,000 करोड़ रुपये की खरीदारी की तैयारी में

नई दिल्ली  भारत और एशिया के दूसरे बड़े रईस गौतम अडानी सीमेंट सेक्टर में बड़ी खरीदारी की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक अडानी ग्रुप ने जर्मनी की कंपनी हीडलबर्ग मैटेरियल्स के भारत में सीमेंट कारोबार को खरीदने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस खरीदारी की अगुवाई ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स करेगी। माना जा रहा है कि यह डील 1.2 अरब डॉलर (10,000 करोड़ रुपये) में हो सकती है। यदि यह डील सफल होती है तो इससे इंडस्ट्री में चल रही कंसोलिडेशन की रेस तेज होगी। देश की की टॉप सीमेंटकंपनी अल्ट्राटेक भी अपनी पोजीशन को बनाए रखने के लिए कंपनियों का अधिग्रहण कर रही है। अडानी ग्रुप अभी देश की दूसरी बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी है। उसने साल 2022 में होलसिम के भारतीय बिजनस को खरीदकर सीमेंट इंडस्ट्री में एंट्री की थी। सूत्रों के मुताबिक अडानी ग्रुप होलसिम की तरह हीडलबर्ग के साथ भी डील को तेजी से आगे बढ़ना चाहता है। 30 जून, 2024 को अंबुजा सीमेंट्स के पास 18,299 करोड़ रुपये की नकदी समकक्ष थे। हालांकि एक सूत्र ने कहा कि अगर दूसरे दावेदार भी आगे आते हैं तो अडानी ग्रुप इससे बाहर निकल सकता है। जर्मन कंपनी भारत में लिस्टेड हीडलबर्ग सीमेंट इंडिया और अनलिस्टेड जुआरी सीमेंट के जरिए ऑपरेट करती है। भारत में हीडलबर्ग का बिजनस हीडलबर्ग सीमेंट इंडिया का मार्केट कैप 4,957 करोड़ रुपये है और इसमें 69.39% हिस्सेदारी मूल कंपनी की है। हीडलबर्ग दुनिया की सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादकों में से एक है और 50 देशों में मौजूद है। सूत्रों ने कहा कि हीडलबर्ग हेडक्वार्टर के एक सीनियर अधिकारी अडानी ग्रुप के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि उत्पादन क्षमता को लेकर मतभेद हो सकते हैं। हीडलबर्ग का दावा है कि उसकी क्षमता लगभग 14 मिलियन टन है लेकिन यह कम हो सकती है। यह वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकती है। हीडलबर्ग ने साल 2006 में मैसूर सीमेंट, कोचीन सीमेंट और इंडोरामा सीमेंट के जॉइंट वेंचर के अधिग्रहण के साथ भारत में प्रवेश किया था। कंपनी का दावा है कि साल 2016 में इटालसीमेंटी के अधिग्रहण के बाद भारत में उसकी उत्पादन क्षमता 14 मिलियन टन पहुंच गई। इस बारे में हीडलबर्ग और अडानी ग्रुप ने प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया।   recent visitors 81

भोपाल में बनेगा बड़ा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, सौ करोड़ रुपये की लागत से मार्च 2026 तक परियोजना पूरी होगी

भोपाल राजधानी का पहला बड़ा इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के पास मार्च 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग इसका निर्माण कर रहा है, जिस पर करीब सौ करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसमें दो हजार से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाला एक सभागार, ठहरने और भोजन की सुविधा के साथ एक कन्वेंशन सेंटर के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं होंगी। पर्यटन विभाग भारत सरकार की पूंजी निवेश योजना के लिए राज्यों को विशेष सहायता के तहत परियोजना के लिए राशि की व्यवस्था कर रहा है। मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) के प्रबंध निदेशक डा. इलैयाराजा टी ने बताया कि हमने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया है और जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर में एमआइसीइ पर्यटन (बैठकें, सम्मेलन और प्रदर्शनियों)को बढ़ावा देना है।केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने भारत में देश- विदेश के कारपोरेट और अन्य लोगों द्वारा सम्मेलन,बैठक और प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए एक पसंदीदा गंतव्य विकसित करने के लिए 2022 में एक राष्ट्रीय रणनीति शुरू की थी। इसी तहत इस परियोजना की रूपरेखा बनाई गई है। एमआइसीइ, बिजनेस टूरिज्म का एक रूप है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को किसी गंतव्य की ओर आकर्षित करता है।एमआइसीइ सेंटर के रूप में राजधानी में अभी मिंटो हाल है,जिसे अब कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के नाम से जाना जाता है, परंतु मिंटो हाल की क्षमता सिर्फ आठ सौ लोागों के बैठने की है। इसमें एक रेस्तरां है, लेकिन प्रतिनिधियों के लिए आवास नहीं हैं। एमआइसीई पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरेगा भोपाल मप्र पर्यटन बोर्ड के संयुक्त निदेशक (योजना) प्रशांत बघेल ने बताया कि प्रस्तावित कन्वेंशन सेंटर में दो हजार लोागों से अधिक की बैठक क्षमता वाला एक मुख्य सभागार होगा। ऐसे कमरे होंगे जहां प्रतिनिधि रुक सकेंगे, डाइनिंग हाल, रेस्तरां, प्रदर्शनी हाल, गैलरी और बड़े सम्मेलन, बैठकें और प्रदर्शनियां आयोजित करने के लिए अन्य सुविधाएं होंगी। नया सेंटर कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर से सटी जमीन पर बनेगा,जहां पहले मछलीघर हुआ करता था। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि देश के मध्य में स्थित होने और बेहतरीन रेल और हवाई संपर्क के कारण भोपाल में एमआइसीई पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरने की क्षमता है।शहर कई औद्योगिक क्षेत्रों से घिरा हुआ है,जहां कई प्रमुख कंपनियों के विनिर्माण संयंत्र हैं। recent visitors 147

राफेल फाइटर जेट ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइस से ऑब्जेक्ट को मार गिराया, अब चीन की नहीं खैर

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना ने चीन के जासूसी गुब्बारों को मार गिराने में महारत हासिल कर ली है। बीते दिनों दौरान वायुसेना ने इसकी प्रैक्टिस की। इस दौरान चीनी गुब्बारों जैसे ऑब्जेक्ट्स को हवा में उड़ाया गया। इसके बाद राफेल फाइटर जेट ने हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइस के जरिए इस ऑब्जेक्ट को मार गिराया। भारतीय सेना का यह अभ्यास चीन की जासूसी से निपटने की पूर्व तैयारी का हिस्सा है। अगर 200 फीट की ऊंचाई पर उड़ने वाले चीनी गुब्बारे भविष्य में जासूसी करने के इरादे से भारत की सीमा पर दिखते हैं तो सेना उन्हें आसानी से मार गिराएगी। गौरतलब है कि साल 2023 के जनवरी-फरवरी महीने में कुछ चीनी जासूसी गुब्बारे अमेरिका में 200 फीट की ऊंचाई पर कई दिनों तक उड़े थे। बाद में अमेरिकी एफ-22 रैप्टर ने इन गुब्बारों को एआईएम-9एक्स साइडवाइंडर मिसाइल का इस्तेमाल करके मार गिराया था। बाद में अमेरिका ने भारत समेत विभिन्न देशों को इस बारे में जानकारी दी थी। सूत्रों ने बताया कि आईएएफ ने टीटीपी का फॉर्मूला तैयार किया है। इस फॉमू्ले का इस्तेमाल इसी तरह के हालात का सामना करने में होगा। यह टीटीपी है, टैक्टिस, टेक्निक्स और प्रॉसीजर। सूत्रों के मुताबिक राफेल का यह प्रदर्शन पिछले साल चार फरवरी को 55 हजार फीट की ऊंचाई पर किया गया। जिस ऊंचाई पर प्रैक्टिस की गई थी, यह उससे कहीं ज्यादा थी। इसके अलावा टारगेट बनाया गया बैलून उस चीनी बैलून से छोटा था जिसने अमेरिका हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया था। पांचवीं जनरेशन के एफ-22 ने 58 हजार फीट की ऊंचाई से 60 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे बैलून पर मिसाइल से हमला किया। गौरतलब है कि चीनी जासूसी गुब्बारे अनमैन्ड एयरशिप्स जैसे होते हैं। यह खास किस्म का ट्रांसमिशन भेजते हैं, जिन्हें डिटेक्ट या इंटरसेप्ट करना बहुत मुश्किल होता है। 2022 की शुरुआत में अंडमान और निकोबार के करीब गुब्बारे जैसा ऑब्जेक्ट देखा गया था। हालांकि तब इस पर कोई एक्शन नहीं हो पाया था। वजह, तब तक भारत ने महत्वपूर्ण जगहों पर स्थायी आधार पर फाइटर्स की तैनाती नहीं की थी। बता दें कि चीन अक्सर बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारतीय समुद्र में अपना जासूसी जहाज भेजता रहता है। उसका मकसद भारत की बैलिस्टिक मिसाइल लांच को ट्रैक करना होता है। इसके अलावा वह नेविगेशन और सबमरीन ऑपरेशन पर भी नजर रखना चाहता है। आईएफ ने हसीमारा और अंबाला एयरबेस पर 36 राफेल तैनात कर रखे हैं। हसीमारा सिक्किम-भूटान-तिब्बत के करीब और चीन की पूर्वी सीमा के लिहाज से भी अहम है। recent visitors 132

जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में किसका होगा राजतिलक? परिणाम से पहले पर्टियों की बढ़ी बेचैनी, गुणा-भाग में जुटे उम्मीदवार

नई दिल्ली  विधानसभा के लिए हुए मतदान के बाद जिले की चारों विधानसभाओं में चुनाव लड़ रहे 40 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला आज मतगणना के बाद होगा। आज सुबह के 8 बजते ही ईवीएम में कैद वोट बाहर आने लगेंगे और इसके साथ ही उम्मीदवारों की जीत-हार को लेकर रुझान मिलने शुरू हो जाएंगे। शाम होते-होते कहीं खुशियों की बारिश होने लगेगी तो कई लोगों की शाम गम के साये से घिर जाएगी, लेकिन रिजल्ट से पहले वाली रात तो सबके लिए कत्ल की रात रही। उम्मीदवारों के दिल की धड़कनें बढ़ी रही हैं कि आखिर आज क्या होनेवाला है। सोमवार को कोई उम्मीदवार पूजा पाठ करने में लगा रहा तो कोई कार्यकर्ताओं के साथ काउंटिंग को लेकर रणनीति बनाने में जुटा रहा। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर (JK) विधानसभा चुनावों के लिए आज मंगलवार को नतीजे का दिन है। दोनों राज्यों में कड़ी सुरक्षा के बीच आज सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हुई । मतगणना की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से शुरू हुई  सबसे पहले मतगणना में लगे कर्मचारी मतगणना केंद्रों पर पहुंचेंगे। विभिन्न दलों के एजेंटों को सुबह 6 बजे तक पहुंचने के लिए कहा गया है। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती होगी। पहले डाक मत पत्र के साथ ही रुझान सामने आने लगेंगे। इसके बाद ईवीएम खोली जाएंगी। सब कुछ ठीक रहा, तो दोपहर तक स्थिति साफ हो जाएगी। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनाव परिणामों की आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दी जाएगी। यहीं हर पार्टी की स्थिति देखी जा सकती है। साथ ही सीट वार ब्यौरा भी देखा सकता है। वहीं, विभिन्न समाचार चैनलों पर मतगणना की जानकारी लाइव दिखाई जाएगी।     हरियाणा में विधानसभा की कुल 90 सीट है। यहां सरकार बनाने के लिए किसी भी दल को 46 विधायकों की दरकार होगी। पिछले 10 सालों से राज्य में भाजपा की सरकार है।     हरियाणा में इस बार 65 फीसदी मतदान ही हुआ है। कम मत प्रतिशत के बाद भाजपा और कांग्रेस की टेंशन बढ़ी हुई है। कई बड़े नेताओं की किस्मत दांव पर है।     इस बार भाजपा और कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। हालांकि एग्जिट पोल के अनुसार, मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।     2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 36.49 फीसदी वोट के साथ भाजपा को 40 सीट मिली थी। पार्टी ने जजपा (10 सीट) के साथ सरकार बनाई थी।     जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा की कुल 90 सीट है, जहां तीन चरणों में मतदान (कुल 63.45%) हुआ था। आर्टिकल 370 हटने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव था।     हर बार की तरह इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीडीपी मैदान में है। कई सीटों पर निर्दलीयों का पलड़ा भारी है।     एग्जिट पोल के मुताबिक, JK में किसी दल को बहुमत नहीं मिलेगा। हालांकि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के गठबंधन को बढ़त मिल सकती है।     2014 के विधानसभा चुनाव में मेहबूबा मुफ्ति की पार्टी PDP 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा 25 सीटों के साथ दूसरी बड़ी पार्टी बनी है।   recent visitors 55