Monday, July 6, 2026 5:38 pm

सिंहस्थ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ और हरियाली से आच्छादित रहेंगे, नगर निगम ने ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर काम शुरू किया

 उज्जैन  तीन साल बाद उज्जैन में लगने जा रहे महाकुंभ सिंहस्थ में 22 हजार 200 टन कचरा निकलने का अनुमान नगर निगम ने लगाया है। अनुमान है कि प्रतिदिन औसत 740 टन कचरा (सालिड वेस्ट) निकलेगा। इतने कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सरकार से 15220 सफाई कर्मचारी, 379 वाहन, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट की अपेक्षा की गई है। पिछली बार महाकुंभ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे, इस बार 13 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। ढाई से तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या बता दें कि 92.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उज्जैन शहर की आबादी सात लाख के करीब है। यहां ‘महाकाल महालोक’ के रूप में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर का विस्तार होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या ढाई से तीन गुना बढ़ गई है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कहना है कि उज्जैन शहर में रोजाना चार लाख 81 हजार लोगों का आवागमन होता है। रेलवे का कहना है कि वर्तमान में उज्जैन रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 36946 व्यक्ति ट्रेन से उतरते-चढ़ते हैं। पिछले सिंहस्थ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे सिंहस्थ के दरमियान ये संख्या 66132 हो सकती है। नगर निगम का कहना है कि अभी प्रतिदिन शहर से रोजाना औसत 240 टन (महीने में 7200 टन) कचरा निकलता है। पिछले सिंहस्थ के दौरान महीनेभर में सात करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आए थे, तब महीनेभर में 18700 टन कचरा निकला था। इसकी कीमत 150 रुपये प्रति टन के हिसाब से 28 लाख पांच हजार रुपये थी। इन सब आंकड़ों का अध्ययन, विश्लेषण करने के बाद ही नगर निगम ने सिंहस्थ के दौरान 22200 टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान लगाया है। इतने कचरे के एकत्रीकरण, परिवहन एवं सड़क-नाली की सफाई के लिए वाहन एवं कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया है। प्रारंभिक योजना से अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजोरा को अवगत कराया जा चुका है। ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर होगा काम पिछली बार की तरह इस बार भी यहां ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ अवधारणा पर काम होगा। इसका मतलब है कि महाकुंभ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ तो होगा ही हरियाली से आच्छादित भी होगा। नगर निगम हर संभव प्रयास करेगा कि मेला प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरा मुक्त हो। योजना, जीरो वेस्ट सिंहस्थ इवेंट की बनाई जा रही है। इसमें सारे कचरे का बेहतर तरीके से संग्रहण कर वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। शहर से 12 किलोमीटर दूर गोंदिया ट्रेचिंग ग्राउंड में भारत सरकार की नवरत्न कंपनी गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किए जाने वाले कम्प्रेस्ड बायोमिथिनेशन प्लांट की इसमें अहम भूमिका होगी। मच्छर मारने तक के होंगे इंतजाम सिंहस्थ में कचरा संग्रहण, सफाई कार्य के साथ मच्छर मारने तक के इंतजाम होंगे। पिछली बार मच्छरों को पनपने से रोकने और मलेरिया की रोकथाम पर सवा करोड़ रुपये खर्च हुए थे। घाट क्षेत्र में शाही स्नान वाले दिन सुगंधित स्प्रे भी किया था। ऐसा इस बार भी किए जाने की योजना है। सिंहस्थ 2028 के लिए बनाया जा रहा प्लान     सिंहस्थ-2028 के लिए कचरा प्रबंधन का विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। अभी आकलन में यह बात सामने आई है कि सिंहस्थ के दरमियान महीनेभर में 22 हजार 200 टन कचरा निकलेगा। कचरा प्रबंधन के लिए 15220 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, 379 वाहनों की खरीदी, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट बनाने का प्रस्ताव शासन को दिया जा रहा है। – आशीष पाठक, आयुक्त, नगर निगम, उज्जैन   recent visitors 32

60 साल बाद त्रिग्रही योग में मनेगी महाशिवरात्रि, दूल्हा बनेंगे भोलेनाथ, चार प्रहर की साधना देगी धन, यश, प्रतिष्ठा व समृद्धि

ज्योतिष शास्त्र व पंचांग की गणना के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि का पर्वकाल त्रिग्रही युति योग में मनाया जाएगा। इस योग में की गई शिव साधना मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है। शिव साधना की दृष्टि से ऐसा शुभ संयोग वर्ष 2025 से पहले सन 1965 में बना था। मकर राशि में तीन ग्रहों की युति रहेगी     ज्योतिषाचार्य  ने बताया कि महाशिवरात्रि 26 फरवरी को बुधवार के दिन श्रवण उपरांत धनिष्ठा नक्षत्र, परिघ योग, वणिज उपरांत शकुनीकरण तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है।     जब भी कोई महापर्व आता है, तो ग्रह योग, नक्षत्र व संयोग देखा जाता है, क्योंकि ग्रहों की साक्षी एवं परिभ्रमण का प्रभाव जीवन पर पड़ता है। ग्रहों के परिभ्रमण का लाभ लेते हुए साधना की दृष्टि से जीवन को कैसे सुखमय बनाया जाए ज्योतिष शास्त्र इसका मार्ग बताते हैं।     महाशिवरात्रि पर मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में सूर्य, बुध व शनि की युति कुंभ राशि में रहेगी। सूर्य व शनि पिता पुत्र हैं और सूर्य शनि की कक्षा अर्थात शनि की राशि कुंभ में रहेंगे।     इस दृष्टि से यह विशिष्ट संयोग भी है, यह योग लगभग एक शताब्दी में एक बार बनता है। इस योग में की गई साधना परम पद व आध्यात्मिक धार्मिक उन्नति प्रदान करती है। इस दृष्टि से इन योग संयोग में विशिष्ट साधना अवश्य करनी चाहिए। -महाशिवरात्रि का पूजन रात्रि में करने का है विशेष प्रावधान  इस वर्ष आठ मार्च की महाशिवरात्रि बेहद खास है। ज्योतिषविदों के अनुसार 60 साल के बाद शिव योग एवं सवार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रहों की शुभ युति के त्रिग्रही योग में मनाई जाएगी। इसमें सिद्धि योग एवं श्रवण नक्षत्र का भी संयोग बना है। कुंभ राशि में सूर्य, शनि व शुक्र साथ मिलकर त्रिग्रही योग का निर्माण कर रहे हैं। ग्रहों की युति के साथ ही शिवयोग, प्रदोष व्रत एवं सवार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ बना यह संयोग लगभग तीन सौ साल के बाद आया है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा योग बेहद दुर्लभ और अकल्पनीय सुखद संयोग लेकर आता है। इस दिन की भगवान शिव के व्रत एवं अर्चन की तुलना सामान्य दिनों में होने वाले पूजन कार्यों से नहीं की जा सकती है। मेष, वृषभ, तुला, मकर एवं कुंभ राशि के लिए बेहद खास रहेगा यह संयोग। शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान है। इसके साथ ही सूर्यदेव अपने पुत्र एवं आदर्श शत्रु शनि की राशि कुंभ में चन्द्रमा के साथ विराजित रहेंगे। ग्रहों की ये स्थिति त्रिग्रही योग का निर्माण कर रही है। जो कि फलदायी है। रात्रि में ही क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ज्योतिषी महेश गुरु के अनुसार ईषान संहिता में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि रात्रि के द्वितीय पहर में शिवलिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। शिव यानि की रात्रि के प्रतीक हैं, और यह भूतेश्वर या भूतनाथ कहे जाते हैं। भूत आदि रात्रि में ही सक्रिय होते हैं। इस दिन में रात्रि में ही इनका प्रादुर्भाव होने की वजह से ही महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि पर चार प्रहर में यानि की चार बार पूजन का विधान आता है। पहले प्रहर में दूध से शिव के ईशान स्वरूप का, दूसरे प्रहर में दही से अघोर स्वरूप का, तीसरे प्रहर में घी से वामदेव रूप का और चौथे प्रहर में शहद से सद्योजात स्वरूप का अभिषेक कर पूजन करना चाहिए। यदि कन्याएं चार बार पूजन न कर सकें, तो पहले प्रहर में एक बार तो पूजन अवश्य ही करें। महाशिवरात्रि की रात महासिद्धिदायिनी होती है। इस रात्रि को निशा रात्रि भी कहते हैं। यानि की चारों ओर घोर अंधकार की स्थिति में शिवलिंग का उद्भव अंधकार में प्रकाश का भी प्रतीक माना जाता है। पूजा पद्धति सात्विक व शाक्त अलग-अलग विधियों से संपन्न कराई जाती है। इसी दिन शिव एवं पार्वती का पाणीग्रहण भी हुआ था। इस वजह से भी पूरी रात्रि को उत्सव की तरह मनाया जाता है। रात्रि पूजन का है विशेष विधान महाशिवरात्रि पर ऐसे की जा सकती है पूजा पूरी तरह से शुद्ध होने के बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा की जा सकती र्है। पहले शिवलिंग में चंदन का लेप करने के साथ ही पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। इसमें गन्ने के रस, कच्चे दूध, या शुद्ध घी से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके पश्चात महादेव को बेलपत्र, धतूरा, जायफल, कमल गट्टे, फल, फूल, मिठाई, मीठा पान, इत्र आदि अर्पित करना चाहिए। अर्चन सदैव पूर्वाभिमुखी या फिर उत्तरामुखी करनी चाहिए। इसके पश्चात शिव पंचाक्षर मंत्र आदि के साथ शिव ताण्डव स्तोत्र आदि का पाठ किया जा सकता है। व्रत रहने वाले को पूरा दिन निराहार रहना चाहिए। रोगी या अशक्त फलाहार कर सकते हैं। व्रत रखने वाले को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक भी किया जाता है। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करने का विधान है। इसमें पूजन तो चारों पहर में होता है, लेकिन मध्यरात्रि की पूजा को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है।   recent visitors 39

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा का पुनःनिर्माण में निकल जाएंगा पसीना! सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च

गाजा  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पर कब्जा करने और उसे जन्नत बनाने की बात कही है। ट्रंप के बयान ने दुनिया को चौंका दिया है। अरब देशों के साथ साथ अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी उनके प्लान की निंदा की है। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा को 'मध्य पूर्व का रिवेरा' बनाने और 'गाजा को फिर से महाने बनाने' का अपना प्लान पेश किया है। जिसके तहत गाजा में रहने वाले करीब 23 लाख लोगों को उन्होंने मिस्र, जॉर्डन और अरब देशों में भेजने की पेशकश की है। हालांकि, उनके प्लान को अरब देशों ने फौरन ही खारिज कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर विवाद जरूर हो रहे हैं, लेकिन एक सवाल भी उठ रहे हैं कि इजरायली बमबारी में ध्वस्त हो चुके गाजा का फिर से निर्माण कैसे होगा? डोनाल्ड ट्रंप के प्लान पर शक करने वाले लोगों का कहना है, कि असल में ये गाजा में रहने वाले लोगों के सफाए के लिए बनाया गया ये एक फॉर्मूला है। लोगों का कहना है कि ट्रंप का प्लान असल में गाजा पर कब्जा करना है। लेकिन सवाल ये है, कि गाजा को जन्नत बनाने में कितने साल लगेंगे? और गाजा स्वर्ग की तरह दिखे, ऐसा होने में जो खर्च आएगा, उसे कौन वहन करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए जो प्लान किया है, उसे पूरा करने में कई सालों का वक्त लगेगा और अरबों डॉलर का खर्च आएगा। गाजा को फिर से बनाने में कितने साल लगेंगे? गाजा में जिस तरह की बर्बादी फैली है, उसे देखते हुए एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि पुननिर्माण में कम से कम 20 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। गाजा को साफ करने में अमेरिका को लाखों टन मलबा पट्टी से बाहर निकालना होगा। मलबे को निकालने में ही कई सालों का वक्त लग जाएगा। सवाल ये भी हैं, कि आखिर इतना मलबा कहां रखा जाएगा? ब्रिटिश सेना के कर्नल रिचर्ड केम्प ने द सन की रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के प्लान का समर्थन किया है। उन्होंने इसे एक तार्किक योजना बताया है। उन्होंने कहा, कि "गाजा के पुनर्निर्माण में कम से कम एक दशक का समय लगेगा।" केम्प ने द सन की रिपोर्ट में कहा है, कि "गाजा को एक ऐसी जगह में बदलने के लिए, जहां लोग फिर से रह सकें, इसमें शायद कम से कम एक दशक लगने वाला है।" उन्होंने कहा, कि "इसमें शायद अरबों डॉलर खर्च होंगे, लेकिन मध्य पूर्व में कई अरब देश हैं, और वो इस प्रोजेक्ट में मदद दे सकते हैं।" हालांकि, बुधवार को व्हाइट हाउस ने कहा है, कि ट्रंप ने फिलिस्तीनी एन्क्लेव के अपने प्रस्ताव के तहत गाजा पट्टी में अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संवाददाताओं से कहा, कि ट्रंप का मानना है कि "क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए" गाजा के पुनर्निर्माण में संयुक्त राज्य अमेरिका को शामिल होना चाहिए। गाजा पट्टी में कितनी बर्बादी फैली है? यूनाइटेड नेशंस ने अनुमान लगाा है, कि गाजा में करीब 50 मिलियन टन मलबा फैला है, जिसे साफ करने में 21 सालों का वक्त लग सकता है। अनुमान में कहा गया है, कि गाजा पट्टी से सिर्फ मलबा साफ करने में 1.2 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो सकते हैं। केम्प ने कहा कि, "मेरा मानना है, कि गाजा में लोगों को ट्रंप के प्लान के मुताबिक अलग रखा जाए, सुरंगों को साफ किया जाए, हथियारों को हटाया जाए और फिर एक नये गाजा का निर्माण किया जाए। हवाई अड्डे का निर्माण हो, बंदरगाह का निर्माण हो और ये सभी के लिए बेहतर होगा।" लेकिन असल सवाल ये है, कि क्या गाजा से लोगों को निकालना संभव है? डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया है, कि गाजा के लोगों को निकालकर अस्थाई तौर पर मिस्र और जॉर्डर में बसाया जाए, जिसे दोनों देशों ने खारिज कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, कि "गाजा के लोगों ने मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं देखा है और अगर नये गाजा का निर्माण होगा, तो कौन होगा जो वापस नहीं जाना चाहेगा।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, गाजा "मध्य पूर्व का रिवेरा" होगा। लेकिन, सवाल ये है कि क्या ऐसा संभव है? recent visitors 56

मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा, माधव टाइगर अभयारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिज़र्व बनेगा

शिवपुरी चंबल रीजन के शिवपुरी में मध्य प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि हमारे राज्य में बनने जा रहे एक नए टाइगर रिजर्व के लिए औपचारिकताएं भी लगभग पूरी हो चुकी हैं. CM यादव ने अपने एक बयान में कहा, मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. माधव टाइगर अभयारण्य जल्द ही राज्य का 9वां टाइगर रिज़र्व बनेगा, जिससे चंबल अंचल में वन्यजीवों की समृद्धि बढ़ेगी. बुधवार को कूनो में 5 और चीते छोड़े गए हैं. यह गर्व की बात है कि पहले छोड़े गए चीते न केवल शिकार कर रहे हैं, बल्कि कुशलता से जंगल में विचरण कर रहे हैं. प्रकृति और संतुलन की यह अनमोल झलक हमारे प्रदेश में दिख रही है. बता दें कि पिछले साल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की तकनीकी समिति ने शिवपुरी जिले के माधव राष्ट्रीय उद्यान को मध्य प्रदेश के 9वें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्तावित बाघ अभयारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर, बफर क्षेत्र 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा. समिति ने इस राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ को छोड़ने की भी मंजूरी दी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था. मध्यप्रदेश में हो जाएंगे 9 अभ्यारण्य माधव टाइगर रिजर्व के बाद मध्यप्रदेश में टाइगर रिवर्ज की संख्या 9 हो जाएगी. देश में लगभग 60 टाइगर रिजर्व हैं, इनमें से 9 मध्यप्रदेश में हैं. देश में सबसे ज्यादा टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में हैं. पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ एल कृष्णमूर्ति बताते हैं कि, ''इस बाघ अभ्यारण्य का कोर क्षेत्र 375 वर्ग किलोमीटर का और बफर जोन 1276 वर्ग किलोमीटर और कुल क्षेत्रफल 1751 वर्म किलोमीटर का होगा.'' 1958 में हुई माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना माधव राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1958 में मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना के बाद ही हो गई थी. यह क्षेत्र कभी ग्वालियर के महाराजाओं और मुगल बादशाहों का शिकारगाह हुआ करता था. ग्वालियर राजघराने द्वारा साल 1918 में मनिहार नदी पर बांध का निर्माण कर माधव तालाब बनाया गया था. यह इस पार्क का सबसे बड़ा जल क्षेत्र है. लाया जाएगा बाघ का जोड़ा माधव नेशनल पार्क को टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन के मामले में काफी संभावनाएं बढ़ जाएंगी. इससे शिवपुरी क्षेत्र को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी. उधर माधव टाइगर रिजर्व में बाधों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. यहां जल्द ही एक बाघ का जोड़ा दिया जाएगा. इसमें एक नर और मादा होगा. अभी माधव टाइगर रिजर्व में तीन टाइगर और दो शावक हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, ''माधव टाइगर रिजर्व प्राकृतिक रूप से काफी संपन्न क्षेत्र हैं और यह क्षेत्र टाइगर के लिए प्राकृतिक आवास रहा है. इसलिए आने वाले समय में यहां टाइगर की संख्या में अच्छी बढ़ोत्तरी होगी.'' कैसा है ये टाइगर रिजर्व? एनटीसीए की तकनीकी समिति ने प्रस्ताव दिया है कि बाघ अभयारण्य का कोर एरिया 375 वर्ग किलोमीटर, बफर एरिया 1276 वर्ग किलोमीटर तथा कुल क्षेत्रफल 1751 वर्ग किलोमीटर होगा. समिति ने राष्ट्रीय उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ छोड़ने की भी स्वीकृति दी है. मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश पर माधव राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को प्रस्ताव भेजा गया था.   recent visitors 40