Saturday, July 4, 2026 3:54 am

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा: अबू धाबी में वार्ता, लेकिन कब्ज़े वाले क्षेत्र पर मतभेद हैं

यूक्रेन यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रविवार को घोषणा की कि रूस और यूक्रेन के बीच अगली शांति वार्ता 4 और 5 फ़रवरी को अबू धाबी में होगी। वार्ता में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। ज़ेलेंस्की ने अपने टेलीग्राम पोस्ट में कहा“हमारी वार्ता टीम से रिपोर्ट मिली है। अगली तीनतरफा बैठक के लिए तारीखें तय हो गई हैं। यूक्रेन सार्थक वार्ता के लिए तैयार है और हम चाहते हैं कि यह युद्ध के वास्तविक और गरिमापूर्ण अंत की दिशा में ले जाए।” हालाँकि, अमेरिकी और रूसी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। रूस और यूक्रेन की सरकारें अभी भी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बना पाई हैं। सबसे बड़ा विवाद डोनबास क्षेत्र में रूसी कब्ज़ा और अन्य क्षेत्रों के भविष्य को लेकर है। इसी बीच, रूसी हमले भी लगातार जारी हैं। रविवार सुबह, दक्षिणी यूक्रेन के ज़ापोरिज़्ज़िया शहर में रूसी ड्रोन ने एक मातृत्व अस्पताल पर हमला किया। यूक्रेनी आपातकालीन सेवा ने टेलीग्राम पोस्ट में बताया कि हमले में तीन महिलाएं घायल हुईं और गाइनेकोलॉजी वार्ड में आग लगी, जिसे बाद में बुझाया गया। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रूस ने अस्थायी रूप से कीव और अन्य शहरों पर हमले रोकने पर सहमति दी है, ताकि ठंडे मौसम में नागरिकों की हालत बिगड़े। क्रेमलिन ने शुक्रवार को कीव पर हमले रोकने की पुष्टि की, लेकिन कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। पिछले सप्ताह रूस ने दक्षिणी यूक्रेन के ओडेसा, उत्तर-पूर्वी खार्किव और कीव क्षेत्र में भी हमले किए। हमले में दो लोग मारे गए और चार घायल हुए। रविवार तक, रूस ने 90 हमले ड्रोन लॉन्च किए, जिनमें से 14 ने नौ स्थानों को निशाना बनाया। पूर्वी यूक्रेन के द्निप्रो शहर में भी ड्रोन हमले में एक महिला और एक पुरुष की मौत हुई। इसके अलावा, केंद्रिय खेरसन में भी शेलिंग से एक 59 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हुई।   recent visitors 29

गुजरात की धरा ने दिया है, मानव कल्याण और सनातन का संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जन्म उत्सव में एक साथ श्लोक पाठ का बना नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव वडोदरा में महंत स्वामी महाराज के 92वें जन्मजयंती महोत्सव में हुए शामिल मध्यप्रदेश से जुड़ी हैं स्वामी जी की जीवन यात्रा की जड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुजरात की धरती भारत सहित अनेक राष्ट्रों में धर्म, आध्यात्म, सनातनी परम्परा, मानव कल्याण और सेवा मूल्यों को चेतना से जोड़ने का कार्य कर रही है। इस धरा से कभी महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसी विभूतियों ने राष्ट्र को योगदान दिया, वहीं अब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह इस परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। आज सऊदी अरब सहित अबूधाबी और अमेरिका में स्वामी नारायण अक्षर धाम के पारम्परिक हिन्दू मंदिर और विश्व के अनेक देशों में 600 से अधिक मंदिरों का निर्माण उल्लेखनीय है। सत्संगदीक्षा जैसे शास्त्रसम्मत ग्रंथ की रचना और हजारों सेवाभावी नवयुवान संतों का निर्माण सनातन की परम्परा को ऊंचाइयां दे रहा है। यह गर्व की बात है कि महंत स्वामी महाराज की जीवन यात्रा की जड़ें मध्यप्रदेश से भी जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को गुजरात के वडोदरा में पूज्य महंत स्वामी महाराज की 92वीं जन्म वर्षगांठ पर उनके दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वामी को जन्म दिवस की बधाई देते हुए उनके शतायु होने की कामना की और आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में स्वामी जी का जन्म शताब्दी समारोह अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वडोदरा एक नगर नहीं बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है जहां भक्ति के साथ सेवा की सुदीर्घ परम्परा है। इस धरती से गुरू के उस संदेश का प्रसार हो रहा है, जो भगवान स्वामी नारायण से लेकर पूज्य महंत स्वामीजी के जीवन में अभिव्यक्त होता है। अमृत बरसाने वाली यह धारा निरंतर प्रवाहित रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत वृंद ईश्वर के रूप में विराजमान रहते हैं। उनकी सामूहिक उपस्थिति बगिया में अनेक पुष्पों के एक साथ खिलने की तरह होती है। अपनी शिक्षाओं से वे बच्चों को आलोकित करते हैं। निश्चित ही यह बच्चे भारतीय संस्कृति को जीवंत करने का कार्य करेंगे। दीक्षित हो रहे बच्चे भी वंदन अभिनंदन के पात्र हैं। संस्कृत श्लोकों के सामूहिक पाठ का बना नया रिकार्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महंत स्वामी महाराज के 92वें जन्मजयंती महोत्सव में 15 हजार 666 बच्चों को एक साथ स्वामी जी द्वारा रचित 'सत्संग दीक्षा' ग्रंथ के 315 श्लोकों का पाठ किए जाने को एक उपलब्धि बताया। इस गतिविधि का नया गिनीज वर्ल्ड रिकार्ड भी बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री पटेल ने महंत स्वामी महाराज से जनकल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने दोनों मुख्यमंत्रियों का पुष्पमाला से अभिनंदन किया। कार्यक्रम में श्री गुणातितानंद स्वामी की अद्भुत महिमा एवं जीवन पर केंद्रित नाटक का मंचन किया गया। इसमें गौंड साम्राज्य के राजा श्री भगवत सिंह के चरित्र के माध्यम से गुणातितानंद स्वामी के सामाजिक और धार्मिक कार्यों की जानकारी दी गई। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव के वडोदरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री पटेल ने आत्मीय स्वागत किया। recent visitors 23

ऊर्जा बचत का संदेश, जिम्मेदारी का आह्वान — कृष्णा गौर ने किया सक्षम महोत्सव का उद्घाटन

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बच्चे भी बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवन शैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।   recent visitors 22

चीन का नाम लेकर ट्रंप ने फिर दी चेतावनी, कनाडा और कार्नी पर तीखा हमला

विदेश  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को चेतावनी दी है। चीन के साथ व्यापारिक डील करने की मंशा रखने वाले कार्नी को चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर वह ऐसे किसी समझौते पर आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका बहुत बड़ा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। गौरतलब है कि कार्नी की चीन यात्रा के बाद जब इस तरह की संभावना जताई जा रही थी, तभी ट्रंप ने कार्नी को ऐसी किसी डील पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इतना ही नहीं अमेरिका की धमकी के बाद कनाडा ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि वह ऐसी कोई डील नहीं करने जा रहे। रविवार को एयरफोर्स वन में सवार राष्ट्रपति ट्रंप से जब एक बार फिर से कनाडा द्वारा इस डील पर आगे बढ़ने की बात कही गई, तो उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते कि चीन कनाडा पर कब्जा कर ले। अगर कनाडा यह व्यापारिक सौदा करता है, जो शी जिनपिंग करना चाहते हैं, तो चीन कनाडा के ऊपर हावी हो जाएगा। ऐसा होने के बाद वह सबसे पहला काम आइस हॉकी को खत्म करने का करेंगे।" बड़ा कदम उठाएंगे: ट्रंप रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप से जब पूछा गया कि अगर कनाडा ऐसा कोई समझौता करता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या होगी। ट्रंप ने इसका जवाब देते हुए कहा, "अगर वह चीन के साथ कोई समझौता करते हैं, तो हां, हम कोई बहुत बड़ा कदम उठाएंगे।" आपको बता दें अमेरिका के राष्ट्रपति कि कनाडा को लेकर यह तल्ख टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब वह ईरान के प्रति थोड़े नरम नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान लगातार अमेरिकी सरकार से बात कर रहा है। हालांकि, इसके बीच मध्य-पूर्व और अरब क्षेत्र में लगातार अमेरिकी सेना की तैनाती बढ़ रही है। ट्रंप की धमकियों के बाद झुका कनाडा? अमेरिका में ट्रंप का शासन आने के यूरोपीय देश और तमाम नाटो सहयोगी देश अब अमेरिका का विकल्प खोजते हुए नजर आ रहे हैं। इसी क्रम में पहले कनाडा और उसके बाद ब्रिटेन के नेताओं ने चीन की यात्रा की थी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्को कार्नी की जनवरी में हुई चीन यात्रा के दौरान यह संभावना जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच में एक व्यापारिक समझौता हो सकता है। हालांकि, बाद में ट्रंप ने 100 फीसदी टैरिफ की धमकी दे दी। इसके बाद कनाडा की तरफ से साफ किया गया कि वह चीन के साथ किसी तरह के व्यापारिक समझौते पर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। ओटावा में पत्रकारों से बात करते हुए कार्नी ने कहा, “चीन के साथ हमने पिछले कुछ वर्षों में पैदा हुई कुछ समस्याओं को ठीक करने के लिए कदम उठाए हैं।” उन्होंने चीन में बने इलेक्ट्रिक वाहनों, कृषि उत्पादों और मछली उत्पादों जैसे व्यापारिक मुद्दों का जिक्र किया। आपको बता दें, राष्ट्रपति ट्रंप के शासन में आने के बाद से ही लगातार अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में दरार आती जा रही है। ट्रंप के शुरुआती समय में वहां पर जस्टिन ट्रूडो का शासन था। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें गवर्नर कहकर संबोधित किया था। ट्रंप लगातार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य कहते नजर आते हैं। दोनों देशों के बीच में लगातार तल्खी देखने को मिल रही है। recent visitors 33

दलाई लामा का गैमी अवॉर्ड और चीन का विरोध: धर्म और राजनीति के बीच तनातनी

बीजिंग चीन ने सोमवार को दलाई लामा को दिए गए ग्रैमी पुरस्कार की निंदा करते हुए कहा कि वह तिब्बती आध्यात्मिक नेता द्वारा इस सम्मान का उपयोग "चीन विरोधी गतिविधियों" को अंजाम देने के लिए किए जाने का "कड़ा विरोध" करता है। दलाई लामा, तेनजिन ग्यात्सो ने रविवार को लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कारों में अपने स्पोकन-वर्ड एल्बम, 'मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शंस ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा' के लिए सर्वश्रेष्ठ ऑडियो बुक, कथावाचन और किस्सागोई की रिकॉर्डिंग श्रेणी में अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता। दलाई लामा को पुरस्कार मिलने पर उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने चीन के इस आरोप को दोहराया कि 90 वर्षीय आध्यात्मिक नेता धर्म के नाम पर अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं। लिन ने यहां मीडिया से कहा कि दलाई लामा विशुद्ध रूप से धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा, "वह एक राजनीतिक निर्वासित हैं, जो धर्म की आड़ में चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा कि बीजिंग इस बात का पुरजोर विरोध करता है कि संबंधित पक्ष इस पुरस्कार का इस्तेमाल चीन विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक उपकरण के रूप में करें। दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। उनको तिब्बत को मुक्त कराने के लिए उनके निरंतर, अहिंसक संघर्ष के लिए 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इस श्रेणी में कैथी गार्वर (एल्विस रॉकी एंड मी: द कैरल कॉनर्स स्टोरी), ट्रेवर नोआ (इंटू द अनकट ग्रास), केतनजी ब्राउन जैक्सन (लवली वन: ए मेमॉयर) और फैब मोरवन (यू नो इट्स ट्रू: द रियल स्टोरी ऑफ मिली वैनिली) जैसे कलाकारों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार जीता। दलाई लामा ने यह पुरस्कार मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा, ''मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखता हूं।'' उन्होंने कहा, ''मेरा दृढ़ विश्वास है कि शांति, करुणा, पर्यावरण की देखभाल और मानवता की एकता की समझ, सभी आठ अरब लोगों के सामूहिक कल्याण के लिए आवश्यक है।'' दलाई लामा ने कहा, "मैं आभारी हूं कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को व्यापक रूप से फैलाने में मदद कर सकता है।"   recent visitors 31

मुफ्त शिक्षा का सुनहरा अवसर! UP RTE 2026 के लिए प्राइवेट स्कूलों में ऑनलाइन आवेदन आज से शुरू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के परिवारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्राइवेट स्कूलों की 25% आरक्षित सीटों पर फ्री एडमिशन की प्रक्रिया आज, 2 फरवरी 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इस साल प्रवेश प्रक्रिया को चार चरणों में विभाजित किया है, ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सके। क्या है RTE प्रवेश प्रक्रिया? आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत, प्राइवेट स्कूलों को अपनी कुल सीटों का 25% हिस्सा उन बच्चों के लिए आरक्षित रखना होता है, जिनके परिवार की वार्षिक आय बहुत कम है या जो सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग से आते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है। महत्वपूर्ण तिथियां (प्रथम चरण) अगर आप अपने बच्चे का दाखिला पहले चरण में कराना चाहते हैं, तो इन तारीखों को नोट कर लें। ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत: 2 फरवरी 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 25 फरवरी 2026 दस्तावेजों का सत्यापन: 26 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक। लॉटरी निकालने की तिथि: 3 मार्च 2026। स्कूल में दाखिला: 8 मार्च 2026 तक छात्रों को आवंटित स्कूलों में प्रवेश लेना होगा। जरूरी पात्रता और डॉक्यूमेंट आवेदन करने के लिए बच्चे की आयु 3 से 7 वर्ष के बीच होनी चाहिए (नर्सरी से कक्षा 1 तक के लिए)। आवेदन के लिए इन डॉक्यूमेंट की आवश्यकता होगी। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र। परिवार का आय प्रमाण पत्र (निर्धारित सीमा के भीतर)। निवास प्रमाण पत्र (राशन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी)। बच्चे की नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो। जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)। कैसे करें आवेदन? अभिभावक घर बैठे या पास के जन सुविधा केंद्र (CSC) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं-     सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rte25.upsdc.gov.in पर जाएं। 2. 'Online Application/Student Registration' लिंक पर क्लिक करें। 3. बच्चे का विवरण और पते की जानकारी भरें। 4. पसंदीदा स्कूलों की लिस्ट का चयन करें (अभिभावक अपने वार्ड के स्कूलों को प्राथमिकता दें)। 5. डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद फॉर्म सबमिट करें और प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रखें। शिक्षा विभाग की तैयारी उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) और बीएसए (BSA) को निर्देश दिया है कि वे पोर्टल की निगरानी करें और आवेदनों के वेरिफिकेशन में देरी न होने दें। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।   recent visitors 28

असम CM के बयान पर कानूनी लड़ाई, ‘मियां’ शब्द को लेकर जमीअत सुप्रीम कोर्ट पहुंची

देश  जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है। याचिका में सरमा के हालिया सार्वजनिक बयान को सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ बताया गया है। साथ ही संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के भाषणों के लिए एक कठोर नियामक दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई है। जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने अपने अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के माध्यम से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिसवा सरमा के हालिया सार्वजनिक बयान को घृणा आधारित, सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ और संवैधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन बताया है। याचिका में असम के मुख्यमंत्री के 27 जनवरी 2026 को दिए गए उस भाषण का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि चार से पांच लाख ‘मियां’ वोटर्स को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा। याचिका के अनुसार, ‘मियां’ शब्द असम में मुसलमानों के लिए अपमानजनक और बेइज्जती करने वाले तरीके से प्रयोग किया जाता है। याचिका में आगे कहा गया है कि असम के मुख्यमंत्री एक ऊंचे संवैधानिक पद आसीन हैं। उनका उपरोक्त भाषण किसी भी तरह से केवल अभिव्यक्ति के दायरे में नहीं आता। इसका एकमात्र और प्रमुख उद्देश्य एक समुदाय के विरुद्ध नफरत, दुश्मनी और दुर्भावना को बढ़ावा देना है। ऐसे बयानों से सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा है और एक विशेष समुदाय को सामूहिक रूप से निशाना बनाया गया है, जो अपने पद की गरिमा के साथ गद्दारी है। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की है कि वह संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के भाषणों के लिए एक कठोर नियामक दिशा-निर्देश तय करे। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पद की आड़ में सांप्रदायिक नफरत फैलाने, उकसाने या किसी समुदाय को बदनाम करने का अधिकार न रखता हो। ऐसी संहिता इस सिद्धांत को मजबूत करेगी कि कोई भी व्यक्ति संविधान और कानून से ऊपर नहीं है और यही अवधारणा कानून के शासन का आधार है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह के बयान भारत के संविधान में प्रदत्त समानता, भाईचारे, धर्मनिरपेक्षता और इंसानी गरिमा की गारंटी को कमजोर करते हैं और अभिव्यक्ति की आजादी के संरक्षण में नहीं आ सकते। जमीअत ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नफरती बयानों के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेने से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद ऐसे बयानों का जारी रहना चिंताजनक है। ज्ञात रहे कि यह याचिका जमीअत उलमा-ए-हिंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही विचाराधीन हेट स्पीच और पैगंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के अपमान के खिलाफ रिट पिटीशन नंबर 1265/2021 में संलग्न की गई है। इस मामले में चार साल की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाने से पहले जमीअत उलेमा-ए-हिंद के सीनियर वकील एमआर शमशाद और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड फर्रुख रशीद से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सुझाव मांगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि उनके अनुसार में देश में हेट स्पीच को रोकने के लिए कौन से प्रभावी और उपयोगी कदम आवश्यक हैं। recent visitors 28