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मुंबई
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हिंसा के बीच बॉलीवुड फिल्म 'छावा' का जिक्र किया है। उन्होंने दावा किया है कि इस फिल्म के आने के बाद से ही लोगों में मुगल शासक औरंगजेब के खिलाफ गुस्सा बढ़ गया है। सोमवार को भी औरंगजेब के मकबरे के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बाद अफवाह के चलते हिंसा भड़क गई थी। उन्होंने कहा, 'छावा मूवी ने औरंगजेब के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़का दिया है। सभी को महाराष्ट्र को शांत रखने की जरूरत है।' साथ ही उन्होंने नागपुर की हिंसा को साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि नागपुर हिंसा के दौरान भीड़ ने कुछ चुनिंदा घरों और प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया; यह एक साजिश प्रतीत होती है। हिंसा में कई घरों और वाहनों को निशाना बनाया गया था।

सीएम फडणवीस ने सदन में कहा, 'नागपुर में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया। अफ़वाह फैलाई गई कि धार्मिक सामग्री वाली चीज़ें जला दी गईं….यह एक सुनियोजित हमला लगता है। किसी को भी कानून- व्यवस्था अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं है।' उन्होंने साफ किया है, 'पुलिस पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, सख्त कार्रवाई की जाएगी।' उन्होंने जानकारी दी है कि हिंसा में 3 डीसीपी समेत 33 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं, 5 आम नागरिक घायल हुए हैं और उनमें से एक ICU में है।

नागपुर में हिंसा
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे मध्य नागपुर के चिटनिस पार्क इलाके में तब हिंसा भड़क उठी जब अफवाह फैली कि औरंगजेब की कब्र को हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए आंदोलन के दौरान धर्मग्रंथ जलाया गया है। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया जिससे छह आम नागरिक और तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

क्या हुई कार्रवाई
नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि शहर में हुई हिंसा के सिलसिले में कम से कम 45 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और हिंसा के दौरान 34 पुलिसकर्मी तथा पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। मंत्री ने कहा कि हिंसा के दौरान 45 वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई और उन्होंने सभी समुदायों के सदस्यों से शहर में शांति बनाए रखने तथा किसी भी असामाजिक तत्व का समर्थन नहीं करने की अपील की।

एकनाथ शिंदे क्या बोले
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि जो लोग अब भी औरंगजेब की प्रशंसा कर रहे हैं, वे ‘‘देशद्रोही’’ हैं। उन्होंने कहा कि मुगल बादशाह ने राज्य पर कब्जा करने की कोशिश की थी और लोगों पर अनेक अत्याचार किए थे। शिंदे ने कहा कि दूसरी ओर, मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज एक ‘‘दैवीय शक्ति’’ थे, जो वीरता, बलिदान और हिंदुत्व की भावना के लिए डटे रहे।

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