नई दिल्ली
ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तुर्की की ओर से पाकिस्तान का समर्थन करने पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तुर्की को पाकिस्तान का समर्थन करने के अपने रुख पर फिर से विचार करना चाहिए। ओवैसी ने कहा, 'हमें तुर्की को याद दिलाना होगा कि वहां एक बैंक है जिसका नाम इसबैंक (İşbank) है, जिसके शुरुआती जमाकर्ता भारत के लोग थे। तुर्की के भारत के साथ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। हमें तुर्की को लगातार याद दिलाना चाहिए कि भारत में 20 करोड़ से अधिक सम्मानित मुस्लिम रहते हैं। भारत में पाकिस्तान की तुलना में अधिक मुस्लिम हैं। जिस तरह से पाकिस्तान ने अब तक बर्ताव किया है, उनका इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है।'

एआईएमआईएम चीफ ने कहा, 'मैंने पहले भी कहा था और फिर कहूंगा कि हमारे प्रधानमंत्री को युद्धविराम की घोषणा करनी चाहिए थी, न कि अमेरिकी राष्ट्रपति को। क्या आपको पता है कि पाकिस्तान का अमेरिका के साथ व्यापार केवल 10 अरब का है, जबकि भारत का 150 अरब से ज्यादा है। क्या यह मजाक है? क्या यूएस गारंटी दे सकता है कि पाकिस्तान अब हम पर आतंकी हमले नहीं करेगा? पाकिस्तान की सेना हमेशा भारत के साथ छेड़छाड़ करती रहेगी। हम कब तक इसे सहन करेंगे? आप पाकिस्तान के साथ व्यापार कैसे कर सकते हैं? वे तो भिखारी हैं। हम अमेरिका से बस इतनी उम्मीद करते हैं कि वे द रेसिस्टेंस फ्रंट को आतंकवादी संगठन घोषित करें। TRF कुछ और नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा का पाकिस्तान प्रायोजित समूह है।'

ऑपरेशन सिंदूर को प्रदर्शित करने के लिए प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'पहलगाम की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद हमारी सरकार ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों की ओर से हमारे देश में आतंकी घटनाएं हुई हैं, उसे देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि हम दूसरे देशों के सामने भारत का पक्ष रखें। भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं। हम हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहे हैं। मैं इस जिम्मेदारी को निभाने की पूरी कोशिश करूंगा।' उन्होंने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब भी एक प्रतिनिधिमंडल गया था। 2008 में भी एक प्रतिनिधिमंडल गया था।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लोगों ने हमें सिर्फ अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं चुना है। हमें अपने देश का भी प्रतिनिधित्व करना है। भारत के सभी लोग आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने कहा, 'अभी तक मुझे पता है कि मैं जिस ग्रुप में हूं, उसका नेतृत्व मेरे अच्छे दोस्त बैजयंत जय पांडा करेंगे। मुझे लगता है कि इसमें निशिकांत दुबे, फंगनन कोन्याक, रेखा शर्मा, सतनाम सिंह संधू और गुलाम नबी आजाद शामिल होंगे। मुझे लगता है कि हम जिन देशों में जाएंगे, वे हैं यूके, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, इटली और डेनमार्क।' मालूम हो कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने का भारत का संदेश लेकर 7 सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रमुख साझेदार देशों का दौरा करेगा, जिनमें से चार प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व सत्तारूढ़ दलों के नेता, जबकि तीन की अगुवाई विपक्षी दलों के नेता करेंगे।

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