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Education system in Madhya Pradesh is in a bad state: Some children are sweeping the floor, while others are forced to study on the roadside

सतना। Education system in Madhya Pradesh का हाल बताने के लिए सतना से दो तस्वीरें ही काफी हैं—एक तस्वीर में बच्चे सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं, तो दूसरी तस्वीर में नन्हें मासूमों के हाथ में किताब नहीं बल्कि झाड़ू थमा दी गई है।

स्कूल या सड़क किनारे की कक्षा?

सतना जिले के नागौद विकासखंड के इटमा गांव में शासकीय प्राथमिक शाला के बच्चों के पास भवन ही नहीं है। जर्जर इमारत कई साल पहले गिरा दी गई थी और तब से बच्चे सड़क किनारे बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। महज 19 बच्चों का भविष्य भवनहीन स्कूल की इस लापरवाही पर टिका हुआ है।

शिकायतें धरी की धरी

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक कई बार पहुंचाई गईं, लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ। यह न सिर्फ बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है बल्कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की सीधी अवहेलना भी।

झाड़ू लगाते बच्चे, जिम्मेदारी कौन लेगा? Education system in Madhya Pradesh

इसी बीच मझगवा विकासखंड की पिंडरा बस्ती से वीडियो सामने आया है, जिसमें एक शिक्षिका मासूम बच्चों से स्कूल की साफ-सफाई करवा रही है। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। सवाल यह है कि क्या बच्चों को स्कूल इसलिए भेजा जाता है कि वे शिक्षा ग्रहण करें या सफाई का काम करें?

सरकारी आश्वासन, हकीकत से कोसों दूर
जिला परियोजना समन्वयक विष्णु त्रिपाठी का कहना है कि—

  • सतना और मैहर जिलों में करीब 95 भवनविहीन विद्यालय हैं।
  • लगभग 237 विद्यालय जर्जर हालत में हैं।
  • फंड उपलब्ध होते ही भवन निर्माण कराया जाएगा।

लेकिन यह आश्वासन कब हकीकत बनेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं।

सतना की तस्वीर बताती है कि शिक्षा का अधिकार सिर्फ कागजों पर है। जहां बच्चों को सुरक्षित कक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, वहां वे सड़क किनारे बैठकर भविष्य लिखने को मजबूर हैं। सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि इस लापरवाही पर तुरंत संज्ञान लें और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करें।

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