गोधरा

गुजरात के बहुचर्चित गोधरा कांड (Godhra Case) के गवाहों की सुरक्षा हटा दी गई है। केंद्र सरकार ने यह फैसला गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद लिया है। सूत्रों के मुताबिक, कुल 14 गवाहों की सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिन्हें पहले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 150 जवानों द्वारा सुरक्षा प्रदान की जा रही थी।

गृह मंत्रालय ने इस निर्णय के लिए विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट को आधार बनाया है। SIT ने 10 नवंबर 2023 को अपनी सिफारिशी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें गवाहों की सुरक्षा हटाने का सुझाव दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

जिन 14 गवाहों की सुरक्षा हटी है, उनमें हबीब रसूल सय्यद, अमीनाबेन हबीब रसूल सय्यद, अकीलाबेन यासीनमिन, सैय्यद यूसुफ भाई, अब्दुलभाई मरियम अप्पा, याकूब भाई, रजकभाई अख्तर हुसैन, नजीमभाई सत्तार भाई, माजिदभाई शेख यानुश महामद, हाजी मयुद्दीन, समसुद्दीन फरीदाबानू, समदुद्दीन मुस्तफा इस्माइल, मदीनाबीबी मुस्तफा और भाईलालभाई चंदूभाई राठवा शामिल हैं।

क्या था गोधरा कांड

गुजरात के गोधरा कांड को 23 साल बीत चुके हैं। फरवरी 2002 में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगाए जाने के बाद 59 कार सेवकों की मौत हो गई थी जिससे देशभर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इसकी कहानी यह है कि 27 फरवरी 2002 की सुबह साबरमती एक्सप्रेस के कोच S-6 में आग लगा दी गई और उस कोच में यात्रा कर रहे 59 यात्रियों की जलकर मौत हो गई। ट्रेन तभी गुजरात के गोधरा स्टेशन पर आ चुकी थी। पीड़ितों में 27 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं। ट्रेन में सवार अन्य 48 यात्रियों को चोटें आईं।

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मामले में एक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग में न्यायमूर्ति जी टी नानावटी और न्यायमूर्ति केजी शाह शामिल थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मारे गए 59 लोगों में से ज्यादातर कार सेवक थे जो उत्तर प्रदेश के अयोध्या से लौट रहे थे।

साबरमती एक्सप्रेस ने मुजफ्फरपुर से अपनी यात्रा शुरू की थी और अहमदाबाद जा रही थी। विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर पूर्णाहुति महायज्ञ में शामिल होने गए कम से कम 2,000 कार सेवक अयोध्या से ट्रेन में सवार हुए थे. यह यज्ञ राम मंदिर निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा था।

ट्रेन जलाने की घटना के कुछ ही घंटों के भीतर राज्य भर में हिंसक दंगे भड़क उठे। दंगे 2 फरवरी की शाम को भड़के और पूरे राज्य में 2-3 महीने तक जारी रहे। 2005 में केंद्र ने राज्यसभा को सूचित किया कि दंगों में 254 हिंदुओं और 790 मुसलमानों की जान चली गई। कुल 223 लोग लापता बताए गए। हजारों लोग बेघर भी हो गये।

 

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