आवारा कुत्तों ने दौड़ाया, बचने के लिए इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गई गाय, क्रेन और सुरक्षा बेल्ट से उतारा

पुणे महाराष्ट्र में पुणे की पारंपरिक इमारत ‘वाड़ा’ के लोगों की नींद शुक्रवार सुबह उस समय शोरगुल से खुल गई, जब आवारा कुत्तों से बचने के लिए एक गाय इमारत की तीसरी मंजिल पर चढ़ गई। दमकल विभाग के अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना रविवार पेठ इलाके के परदेसी वाड़ा में सुबह करीब 6 बजे की है। दमकल विभाग के अधिकारी ने कहा, ‘आवारा कुत्तों के पीछा किए जाने पर एक जर्सी गाय इमारत के परिसर में घुस गई। वह एक संकरी लकड़ी की सीढ़ी से तीसरी मंजिल पर चढ़ गई।’ दमकल विभाग के अधिकारी ने बताया कि जब स्थानीय लोग गाय को नीचे नहीं उतार सके तो उन्होंने दमकल विभाग को फोन किया। उन्होंने कहा, ‘गाय को सीढ़ियों से नीचे नहीं लाया जा सका। अंतिम उपाय के रूप में, हमने उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्रेन और सुरक्षा बेल्ट का इस्तेमाल किया।’ इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा रही है और यूजर्स तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। लोगों ने आवारा कुत्तों से निजात पाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इस दिशा में लल्द से जल्द कदम उठाया जाना चाहिए। आवारा कुत्तों ने 7 साल की बच्ची को मार डाला इसी महीने, महाराष्ट्र के जालना शहर में आवारा कुत्तों के झुंड ने 7 साल की बच्ची पर हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। गांधी नगर इलाके में घटित इस घटना के बाद जालना महानगर पालिका आयुक्त ने कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में स्वच्छता निरीक्षक को निलंबित कर दिया। मृतक संध्या पटोले अपने घर के पास आंगन में खेल रही थी और तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। घटना के बारे में बात करते हुए उसके चाचा राम पटोले ने कहा, ‘परिवार पहले से ही एक रिश्तेदार की मौत हो जाने के कारण शोक मना रहा था और अपने घर पर इकट्ठा हुआ था। इस सब के बीच, संध्या बाहर निकल गई और एक खुले भूखंड के पास खेलने लगी, तभी कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। उसे कुछ दूर तक घसीटते हुए ले गए। उसके गले और पेट पर बेरहमी से हमला किया गया।’   recent visitors 54

डीजल टैंकर पलटा, लगी आग, आग लगने से ड्राइवर और हेल्पर घायल

धमतरी नेशनल हाईवे 30 पर एक डीजल टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे टैंकर में भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इस हादसे में ड्राइवर और हेल्पर आग की चपेट में आए. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को कुरुद अस्पताल में भर्ती कराया. हादसे के बाद हाईवे पर जाम की स्थिति बनी रही. यह हादसा बिरेझर चौकी क्षेत्र के कोड़ेबोड़ में हुआ. जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार टैंकर रायपुर की ओर जा रहा था, अचानक संतुलन बिगड़ा और वाहन सड़क किनारे पलट गया. हादसे के बाद टैंकर में भीषण आग लगी, जिससे ड्राइवर और हेल्पर आग की चपेट में आए. स्थानीय लोगों और पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को बाहर निकाला. फायर ब्रिगेड टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया. घायलों को कुरूद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज जारी है. इस हादसे के बाद कुछ देर के लिए NH-30 मार्ग पर यातायात बाधित रहा. पुलिस ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर स्थिति को नियंत्रित किया. recent visitors 45

विधायक देवेंद्र जैन ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, कहा- बच्चों का आहार हड़प गए, हाईकोर्ट जाऊंगा

शिवपुरी शिवपुरी जिले में सत्ताधारी बीजेपी के विधायकों ने स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वह विधानसभा से लेकर हाईकोर्ट तक का दरवाजा खटखटाएंगे। इससे पहले पिछोर विधायक प्रीतम लोधी भी पुलिस अधीक्षक पर आरोप लगाकर दिल्ली तक कूच करने की बात कह चुके हैं। प्रेसवार्ता में जैन ने लगाए गंभीर आरोप शुक्रवार को प्रेसवार्ता में देवेंद्र जैन ने कहा कि क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ईमानदारी चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवपुरी में भूदान और विक्रय-वर्जित जमीनों की अवैध रजिस्ट्रियां हो रही हैं। पोषण आहार केंद्र में भी गड़बड़ी जैन ने पोषण आहार केंद्रों में बच्चों के लिए मिलने वाला आहार हड़पने का सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। हाईकोर्ट तक जाएंगे जैन जैन ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो वह विधानसभा में मुद्दा उठाएंगे और जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट का रुख करेंगे। जिले में बढ़ते भ्रष्टाचार पर सत्ताधारी विधायकों की यह मुखरता चर्चा का विषय बनी हुई है। recent visitors 36

छत्तीसगढ़ में पहले आओ, पहले पाओ पद्धति से जमीन का आवंटन बंद, अब बोली के जरिए मिलेगी उद्योगों की जमीन

रायपुर छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को अब पहले आओ, पहले पाओ पद्धति से जमीन का आवंटन नहीं होगा. राज्य सरकार ने 2015 के नियम में संशोधन करते हुए अब बोली के माध्यम से उद्योगों को जमीन आवंटन करने का प्रावधान किया है. साय सरकार ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2015 में संशोधन करने का निर्णय लिया है. नियमों में संशोधन से औद्योगिक क्षेत्रों, लैंड बैंक तथा अन्य भूमि खंडों के आवंटन की प्रक्रिया में और अधिक स्पष्टता व पारदर्शिता आएगी. इसके साथ औद्योगिक निवेशकों को भूमि आवंटन प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने व लाभ उठाने में सुविधा होगी. माकूल स्थान पर ले सकेंगे जमीन राज्य सरकार के द्वारा नियम बदले जाने पर औद्योगिक क्षेत्र की जमीनों पर राजस्व की प्राप्ति होगी. साथ ही निर्धारित अवधि में औपचारिकताओं की पूर्ति जैसे भू-भाटक और अन्य शुल्कों की राशि का भुगतान न करने के मामले कम होंगे. जिन लोगों को अपना उद्योग लगाना है, वह अपने इकाई की स्थापना के अनुसार, उन क्षेत्रों में जमीन ले सकेंगे, जो उनके लिए उपयुक्त होगी. समयसीमा में लगाना होगा उद्योग प्रदेश में ऐसे उद्योगपति जिन्होंने विभाग से सब्सिडी दर पर जमीन तो ले ली, लेकिन समय सीमा खत्म होने के बाद भी उत्पादन शुरू नहीं किया है. ऐसी प्रवृत्तियों पर इस संशोधन के बाद रोक लगेगी. अब इस प्रक्रिया से ऐस जरूरतमंद लोग ही आगे आएंगे, जो वास्तव में उद्योग लगाना चाहते हैं. नई उद्योग नीति को लेकर प्रदेश सरकार लगातार निवेश को बढ़ाने का प्रयास कर रही है. ऐसे में लैंड बैंक और भूमि आवंटन को लेकर कोई परेशानी न हो इसे देखते हुए नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है. श्रमिक कल्याण नियम में भी संशोधन राज्य में औद्योगिक विकास को गति देने और श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है. फरवरी में ही इसका अनुमोदन किया गया था. औद्योगिक इकाइयों के लिए पट्टे पर दी गई भूमि के उपयोग और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक आवास निर्माण को लेकर नए अवसर प्रदान करता है. इस कदम को राज्य की औद्योगिक नीति को और अधिक निवेशक- अनुकूल बनाने और स्थानीय श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है. उद्योगों को आकर्षित करने प्रयास नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद साय सरकार लगातार निवेशक सम्मेलन कर उद्योगों को राज्य में आकर्षित करने का प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति में कई संशोधन किए हैं. संशोधन के माध्यम से उद्योगपतियों को राज्य में “अच्छा और पारदर्शी माहौल मिले इसके प्रयास किए जा रहे हैं. recent visitors 44

चिरमिरी-नागपुर रोड हॉल्ट रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रारंभ

रेल मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी, 6 ग्रामों की भूमि होगी अधिग्रहित एमसीबी मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के अपर कलेक्टर एवं सक्षम प्राधिकारी (भू-अर्जन) के आदेशानुसार चिरमिरी-नागपुर रोड हॉल्ट रेल परियोजना के अंतर्गत 17 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित रेल मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इस परियोजना के अंतर्गत ग्राम चिरईपानी, सरोला, बंजी, खैरबना, सरभोका एवं चित्ताझोर की ओर आने वाली निजी भूमि को अधिग्रहित किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण हेतु रेलवे एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सर्वेक्षण किया गया। इसके पश्चात अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनेन्द्रगढ़, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा दिनांक 07 अप्रैल 2025 को पत्र क्रमांक 1047/वाचक-1/2025 के माध्यम से चिरमिरी-नागपुर रोड हॉल्ट रेल परियोजना के लिए प्रतिवेदित भूमि सूची उप मुख्य अभियंता (निर्माण)-1, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नार्थ बिलासपुर को भेजी गई। इसके आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के कार्यालय से पत्र क्रमांक 1876/अप. कले./वाचक/रे. परि./2025, दिनांक 01 मई 2025 को प्रेषित किया गया, जिसके माध्यम से अधिग्रहण संबंधी सूचना राजपत्र में प्रकाशन हेतु भेजी गई। तदनुसार भारत सरकार के राजपत्र में रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा अधिसूचना संख्या 2074 दिनांक 09 मई 2025 को प्रकाशित की गई है, जो रेल अधिनियम 1989 की धारा 20 (ए) के अंतर्गत जारी की गई है। राजपत्र में प्रकाशन की तिथि 09 मई 2025 से 09 जून 2025 तक कोई भी व्यक्ति, जो उक्त अधिग्रहित की जाने वाली भूमि में हितबद्ध है, वह रेल अधिनियम की धारा 20 (घ) की उपधारा (1) के अंतर्गत इस भूमि के अर्जन और उपयोग से संबंधित कोई भी दावा या आपत्ति सक्षम प्राधिकारी को लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकता है। यह दावा या आपत्ति अपर कलेक्टर न्यायालय, कक्ष क्रमांक 19, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (छ.ग.) में 09 जून 2025 की शाम 5 बजे तक प्रस्तुत किया जा सकता  है। recent visitors 35

भोपाल: तहज़ीब, तालीम, तरक्क़ी और तासीर का शहर

दुआ है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को कभी कोई बुरी नज़र न लगे और इसकी खूबसूरती बनी रहे •    ताहिर अली यदि मंदिरों से घंटियों की मधुर आवाज़ और मस्जिदों से बुलंद अज़ान एक साथ गूंजे, तो समझ लीजिए आप उस शहर में हैं, जहाँ सदियों से गंगा-जमुनी तहज़ीब ने अपने खूबसूरत रंग बिखेरे हैं। यह शहर है भोपाल – झीलों की नगरी, नवाबी संस्कृति की परछाईं, प्राकृतिक सौंदर्य की मिसाल और ऐतिहासिक धरोहरों का सजीव संग्रह। तहज़ीब और भाईचारा भोपाल की सबसे बड़ी खासियत इसकी साझा संस्कृति है। यहाँ तालाब के बीचों-बीच मंदिर, मस्जिद और मजारों का साथ-साथ दिखना आम बात है। यही वह शहर है, जहाँ सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक – ताजुल मस्जिद है, तो वहीं विश्व की सबसे छोटी मस्जिद मानी जाने वाली ‘ढाई सीढ़ी मस्जिद’ भी यहीं स्थित है। भोपाल में उर्दू भाषा का उपयोग लगभग सभी समुदाय के लोग करते हैं। भोपाल की सड़कों पर चलते हुए अगर कोई राहगीर किसी मोहल्ले का पता पूछ ले, तो भोपाली उसे दरवाजे तक छोड़कर आते हैं। यही इसकी तहज़ीब है, यही इसकी पहचान है। भोपाल की एक बात ओर मशहूर है कि जो भी भोपाल आता है यहां के लोग उसे सीने से लगा लेते हैं। हिन्दुस्तान के किसी भी कोने से जो भोपाल आया जैसे नौकरीपेशा या कोई भी व्यवसाय के लिए यहीं का होकर रह गया। भेल कारखाना इसका जीता-जागता उदाहरण है। ज्यादातर नौकरी पेशा अधिकारी एवं कर्मचारी रिटायर होने के बाद भोपाल को ही अपना मानकर यहीं बस गए। काफी लोग कारोबार करने के उद्देश्य से यहीं आकर आबाद हो गये। भोपाल की मज़ेदार ‘उर्फ़ियत’ – नाम के पीछे नाम की दुनिया! भोपाल, भोपाली और भोपालियत की पहचान  केवल ताल-ता‍लैया और ऐतिहासिक इमारतों आबोहवा, तहजीब और संस्‍क़ति तक सीमित नहीं है,  बल्कि अपनी अनोखी और मज़ेदार ‘उर्फ़ियतों’ के लिए भी मशहूर है। जब किसी मोहल्ले में एक ही नाम के कई लोग हों, तो पहचान बनाने के लिए नाम के पीछे कुछ जोड़ना लाज़मी हो जाता है, फिर चाहे वो पहनावे से जुड़ा हो, बोलचाल से, शौक से या किसी मज़ेदार किस्से से – हर भोपाली को मिल जाता है उसका ख़ास "उर्फ़ी टाइटल"। तो मिलिए भोपाल की इस अनोखी नामावली से – तारिक़ टाई, जो हमेशा टाई में दिखते थे, तारिक़ चपटे, जिनके गाल खुद गवाही देते हैं, तारिक़ होंठ कटे, जिनके होंठों की कहानी हर गली जानती है, और तारिक़ झबरे, जिनकी आंखें ही उनकी पहचान हैं। आरिफ़ अंडे का नाश्ता शहर भर में मशहूर है, तो आरिफ़ बुलबुल अपने गले से सबको दीवाना बना देते हैं। बाबूलाल 501 नाम की सिगरेट की तरह मशहूर हैं, और सेठ छगनलाल, जिनका "सेठपना" मोहल्ले में आज भी कायम है। रविंद्र सिंह लखरत, बाबूलाल लठमार, चांदमल हिटलर, मोहन पंचायती, लाला मुल्कराज, सरदारमल लालवानी, नाहर सिंह सूरमा भोपाली, कन्हैयालाल ‘बीड़ी’ और के. अमीनउद्दीन-301 तो अपनी शान और रसूख़ के लिए पहचाने जाते हैं। अखिलेश अग्रवाल गफूरे और वहीद अग्रवाल की उर्फ़ियतें उनकी दोस्ती और कारोबार की दास्तान सुनाती हैं। हफ़ीज़ पाजामे और चांद कटोरे का नाम सुनते ही भोपाल मुस्कुरा उठता है, वहीं चांद चुड़वे मोहल्ले की कहानियों के नायक हैं। सुरेश 501, अनिल अग्रवाल पटीये, और देवेश सिमहल वकील साहब अपने नाम से ही काफ़ी असरदार हैं। बाबू साहब घोड़े और बाबू साहब नाम की सादगी में गजब की शान है। आलू बड़े, ज़ायकों की दुनिया के हीरो हैं, और लोक सिंह ताल ठोंकू हर बहस में जीत की गारंटी हैं। रईस भूरा, मुन्ने मॉडल ग्राउंड, मुन्ने पेंटर, मुईन क़द्दे और माहिर मदीना – ये नाम जैसे ही कान में पड़ें, पूरा मोहल्ला मुस्करा उठता है। भोपाल की गलियों में लोग नाम से कम और उर्फ़ियत से ज़्यादा जाने जाते हैं। जावेद चपटे और जावेद चिराटे जैसे नामों में मज़ाकिया तंज है, तो बन्ने पहलवान और बन्ने लखेरा में मोहल्ले की दो अलग-अलग शख्सियतें झलकती हैं। कल्लू अट्ठे, बाबू भड़भुजे, मुन्ने फुक्की, ईरानी और डूंड जैसे नाम रोज़मर्रा की आदतों, मज़ाक या पेशे से जुड़े हैं। सईद बुल, छुटकटे, वहीद ढेलकी, आरिफ पिस्स, और अनफिट भोपाल की उस खास तासीर को दर्शाते हैं, जहां हर नाम के पीछे एक किस्सा है — हँसी, अपनापन और तंज से भरा। यही भोपाल की असली पहचान है — उर्फ़ियतों में बसी यारी और यादें। भोपाल की इन मज़ेदार उर्फ़ियतों में वो अपनापन है, जो किसी GPS में नहीं मिलता – सिर्फ मोहल्लों की यादों और बातों में ही जिंदा रहता है। भोपाल में हिंदू-मुस्लिम एकता : सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की मिसाल भोपाल की सांस्कृतिक विरासत की सबसे मजबूत कड़ी उसकी हिंदू-मुस्लिम एकता है, जो सिर्फ सामाजिक सौहार्द का प्रतीक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों के बीच पनपी सहिष्णुता और साझेदारी की अनूठी मिसाल है। जब देश के अन्य हिस्सों में अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति ने सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया, तब भी भोपाल ने अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोए रखा। हर वर्ग के लोगों ने एक दूसरे से बहुत प्यार मोहब्बत के साथ दिली लगाव रखा। सन 1812 की लड़ाई में हिंदू योद्धाओं जैसे डांगर सिंह, जय सिंह, और अमन सिंह पटेल ने भोपाल की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां तक कि युद्ध में महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी की, यह दिखाते हुए कि भाईचारा केवल धार्मिक स्तर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के स्तर पर भी जीवित था। भोपाल रियासत के प्रशासन में हर कालखंड में हिंदुओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। दीवान (प्रधानमंत्री) जैसे उच्च पदों पर लाला घानी राम, लाला फूलानाथ, राजा अवध नारायण जैसे हिंदू अधिकारी रहे। यह समावेशिता केवल औपचारिक नहीं थी — ये अधिकारी नवाबों के विश्वासपात्र भी थे। नवाब क़ुदसिया बेग़म के दरबार में एक हिंदू, एक मुसलमान और एक ईसाई मंत्री नियुक्त थे — यह उस समय की धार्मिक विविधता के प्रति सम्मान का प्रतीक था। रियासत के इंजिमाम (शामिल करने) के बाद शरीफ़ शरणार्थियों में (उच्च परिवार के शरणार्थी) सरदार गुरबख्श सिंह भी थे, जिनके बेटे अमरीक सिंह रंजीत होटल चलाते हैं। वे बहू मियाँ के साथ ईद पर नवाब साहब को सलाम करने जाते। एक बार नवाब साहब ने पूछा कि भोपाल कैसा लग रहा है, तो सरदार साहब ने हाथ जोड़कर कहा कि जहाँ गरीब परवर सरकार का साया हो, वहाँ कोई कैसे … Read more

यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि: संदिग्ध गतिविधियों पर आरपीएफ की सख्त कार्रवाई

भोपाल मंडल रेल प्रबंधक श्री देवाशीष त्रिपाठी के मार्गदर्शन में भोपाल मंडल में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। रेलवे सुरक्षा बल द्वारा स्टेशन परिसरों में संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इसी क्रम में, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री प्रशांत यादव के निर्देशन में आरपीएफ टीम ने भोपाल रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त एक व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की। दिनांक 16 मई 2025 को प्रातः 6:00 बजे, प्लेटफॉर्म क्रमांक 02 पर आरक्षक आरिफ खान ने एक युवक को संदिग्ध स्थिति में घूमते हुए पकड़ा, जिसकी नीयत यात्री सामान की चोरी प्रतीत हुई। पूछताछ में उक्त व्यक्ति की पहचान रफीक (आयु 20 वर्ष) के रूप में हुई। उसके पास कोई वैध यात्रा टिकट अथवा पहचान पत्र उपलब्ध नहीं था। घटना स्थल पर कोई प्रत्यक्ष शिकायतकर्ता नहीं होने के बावजूद, संदिग्ध गतिविधियों और रेलवे परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरपीएफ ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय रेलवे अधिनियम की धारा 145 (अशांति फैलाना) एवं धारा 137 (बिना टिकट यात्रा) के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे पूरी तरह से सतर्क है। स्टेशन परिसरों में हर प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने यात्रियों से भी अपील की कि यदि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखें, तो तत्काल इसकी सूचना नजदीकी रेलवे स्टाफ या आरपीएफ को दें, ताकि आवश्यक कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जा सके। रेल प्रशासन यात्रियों को सुरक्षित, सुगम एवं निर्बाध यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए संकल्पबद्ध है। recent visitors 42