पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अपने कर्जों को चुकाने के लिए काफी नहीं: मूडीज

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर हो चुका है। दोनों देशों के बीच हुए इस संघर्ष में पाकिस्तान को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। बताया जा रहा है कि तीन दिन से कुछ ज्यादा समय तक चली इस लड़ाई में पाकिस्तान को करीब 4 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। यह रकम हाल ही में आईएमएफ से मिले 2.4 बिलियन डॉलर के लोन के मुकाबले कहीं ज्यादा है। ऐसे में पाकिस्तान एक बार फिर से आईएमएफ या किसी दूसरी संस्था से लोन लेने के लिए हाथ फैला सकता है। पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी। भारतीय सेना ने पिछले हफ्ते मंगलवार रात 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इस हमले से पाकिस्तान बौखला गया था और उसने भारतीय सेना और सीमा से सटे आम नागरिकों को निशाना बनाया। भारत ने भी पाकिस्तान के इस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया और उसके एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था। दोनों देशों के बीच तीन दिन तक संघर्ष चला। शनिवार को सीजफायर हो गया। पाकिस्तान को कितना नुकसान? तीन दिन से कुछ ज्यादा समय चले इस संघर्ष में पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान हुआ है। अमेरिका की एनालिस्ट सहर खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पाकिस्तान मीडिया की एक खबर को शेयर करते हुए एक पोस्ट की है। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि इस संघर्ष में पाकिस्तान को करीब 4 अरब डॉलर की कीमत चुकानी पड़ी है। सहर खान ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए अपनी पोस्ट में बताया है कि पाकिस्तान को किस चीज में कितना नुकसान हुआ है: मिलिट्री ऑपरेशंस: 25 मिलियन डॉलर प्रतिदिन ड्रोन और मिसाइल ऑपरेशंस: 300 मिलियन डॉलर शेयर मार्केट में गिरावट: 2.5 बिलियन डॉलर पीएसएल सस्पेंड होने से: 10 मिलियन डॉलर एयरस्पेस बंद होने से: 20 मिलियन डॉलर कितना मंजूर हुआ लोन? भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में पाकिस्तान को 2.4 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया है। इस बेलआउट पैकेज में एक मौजूदा कार्यक्रम से 1 अरब डॉलर और 1.4 अरब डॉलर का नया लोन शामिल है। भारत ने आईएमएफ में इस वोटिंग के दौरान भाग नहीं लिया, क्योंकि भारत इस बेलआउट पैकेज के खिलाफ था। पाकिस्तान को आईएमएफ से जितना लोन मिला है, उससे कहीं ज्यादा रकम वह खर्च कर चुका है। भरत नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने सहर खान की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा है, 'उन्होंने यानी पाकिस्तान ने IMF का लोन जारी होने से पहले ही इसे खर्च कर दिया।' पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी बुरी पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति अभी बहुत खराब है। मूडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी पाकिस्तान के पास जितना विदेशी मुद्रा भंडार है, वह अगले कुछ सालों में अपने कर्जों को चुकाने के लिए काफी नहीं है। पाकिस्तान के पास अभी करीब 15 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। वहीं, भारत के पास 688 अरब डॉलर से भी ज्यादा का भंडार है। पाकिस्तान कई देशों से लोन ले चुका है। साल 1948 से अकेले अमेरिका ने पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर की आर्थिक और सैन्य मदद दी है। अगर कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप को भी मिला लें, तो यह आंकड़ा 55 अरब डॉलर से ज़्यादा हो जाता है। recent visitors 148

अमेरिका और चीन के बीच हुई ट्रेड डील, ट्रंप के हाई टैरिफ से मिलेगी राहत

वाशिंगटन अमेरिका और चीन ने हाल ही में एक-दूसरे पर लगाए गए भारी शुल्कों को कम करने का फैसला किया है। दोनों देशों के बीच दो दिनों तक चली उच्च-सतरीय वार्ता के बाद आज (सोमवार को) जिनेवा में एक संयुक्त बयान जारी किया गया है, जिसके अनुसार, अमेरिका और चीन एक-दूसरे के उत्पादों पर अस्थायी रूप से यानी 90 दिनों के लिए टैरिफ कम करने पर सहमत हो गए हैं। ताकि व्यापार तनाव को कम किया जा सके और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को आपसी मतभेद सुलझाने के लिए तीन महीने का वक्त मिल सके। सोमवार को जारी किए गए बयान के अनुसार, अधिकांश चीनी आयातों पर अमेरिका ने 145% टैरिफ को 115 फीसदी घटाकर सिर्फ 30% तक लाने का अस्थाई फैसला किया है।इसमें फेंटेनाइल से जुड़ी दर भी शामिल है। चीन भी अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए 125% टैरिफ को 115 फीसदी तक घटाकर अब 10% तक लाने पर सहमत हुआ है। हालांकि, इस डील में पेच यह है कि यह सिर्फ 90 दिनों के लिए ही है। चर्चा जारी रखने पर भी बनी सहमति अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर 145 प्रतिशत शुल्क दर को घटाकर 30 प्रतिशत करने पर जबकि चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर अपनी दर को घटाकर 10 प्रतिशत करने पर सहमति व्यक्त की है। ग्रीर और अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने जेनेवा में संवाददाता सम्मेलन में शुल्क कटौती की घोषणा की। दोनों अधिकारियों ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने व्यापार मुद्दों पर चर्चा जारी रखने की रुपरेखा तैयार की है। दो दिन की वार्ता के बाद संवाददाता सम्मेलन में बेसेंट ने कहा कि उच्च शुल्क स्तर से दोनों पक्षों के सामान पर पूरी तरह रोक लग गई ऐसा परिणाम कोई भी पक्ष नहीं चाहता। बेसेंट ने कहा, ‘‘ इस सप्ताहांत दोनों प्रतिनिधिमंडलों की आम सहमति यह है कि कोई भी पक्ष अलगाव नहीं चाहता है। इन उच्च उच्च शुल्क से जो हुआ … वह अवरोध के बराबर था। कोई भी पक्ष ऐसा नहीं चाहता। हम व्यापार चाहते हैं। हम अधिक संतुलित व्यापार चाहते हैं। मुझे लगता है कि दोनों पक्ष इसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने चीन पर अमेरिकी शुल्क को बढ़ाकर 145 प्रतिशत कर दिया था और चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी आयात पर 125 प्रतिशत का शुल्क लगाया था। इतने अधिक शुल्क का मतलब है कि दोनों देश एक-दूसरे के उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं जिससे व्यापार बाधित हो रहा है, जो पिछले वर्ष 660 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक था। अमेरिका और चीन की घोषणा से शेयर बाजारों में उछाल आया। हांगकांग के हैंग सेंग सूचकांक में करीब तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई। जर्मनी तथा फ्रांस के बाजार में 0.7 प्रतिशत की तेजी आई। recent visitors 68

चंद्रपुर में दो दिन में बाघ ने चार लोगों की ले ली जान, ग्रामीणों में दहशत

राजनांदगांव महाराष्ट्र के टाइगर बेल्ट में एक दुखद घटना हुई। दो दिन में बाघ ने चार लोगों की जान ले ली। शनिवार दोपहर को बाघ ने एक ही हमले में तीन महिलाओं को मार डाला था। यह पहली बार है जब एक बाघ ने एक साथ इतने लोगों की जान ली है। इसके बाद रविवार को एक और ग्रामीण की मौत हो गई। यह घटना सिंदेवाही वन रेंज के पास मेंढमाल गांव के जंगल में हुई। वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब एक बाघ ने एक ही हमले में तीन लोगों को मार डाला और एक को घायल कर दिया। कुछ महिलाएं तेंदूपत्ता इकट्ठा करने जंगल में गई थीं। तभी एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया। घटना के तुरंत बाद, वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और घायल महिला को अस्पताल पहुंचाया। वन विभाग ने बाघ की पहचान करने के लिए इलाके में कैमरे लगाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि वन्यजीवों के रहने की जगह कम होती जा रही है। महाराष्ट्र में पिछले तीन सालों में जंगली जानवरों के हमलों में 225 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें बाघों के हमलों में हुई हैं। इलाके की गश्त बढ़ाई गई वरिष्ठ वन अधिकारियों ने कहा कि एक बार जब बाघ की पहचान हो जाएगी, तो उसे बेहोश करने और पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को औपचारिक अनुरोध भेजा जाएगा। गांव वाले इस हमले से बहुत दुखी हैं। उन्होंने बाघ को तुरंत पकड़ने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। वन विभाग ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और लोगों को जंगल में न जाने की चेतावनी दी है। इस हमले के साथ, चंद्रपुर जिले में 2025 में वन्यजीवों से संबंधित मौतों की संख्या 16 तक पहुंच गई है। ये सभी मौतें बाघों के हमलों में हुई हैं। पिछले साल, ऐसी 29 मौतें हुई थीं, जिनमें से 27 बाघों के हमलों में हुई थीं। 2023 में, यह संख्या 25 थी। सबसे ज्यादा मौतें 2022 में हुई थीं, जब 51 लोग मारे गए थे। इनमें से 44 को बाघों ने और 7 को तेंदुओं ने मारा था। recent visitors 61

भारत और पाक के बीच सीजफायर:ट्रंप की मध्यस्थता से लेकर पहलगाम हमले पर भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली/रायपुर भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर होते ही एक बार फिर से सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंफ के सीजफायर के एलान से लेकर पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को लेकर सरकार से सवाल कर रही है. कांग्रेस की ओर से अबकी बार मोर्चा छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल ने संभाला है. छत्सीगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है. जब भी संकट आया कांग्रेस ने राजनीति की बजाय देशहित को आगे रखा. 1971 में अमेरिका के दबाव के बावजूद इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए. उन्होंने कहा कि आतंकवाद से लड़ाई में राजनीति नहीं राष्ट्रवाद चाहिए. दुश्मन के सामने कमजोरी नहीं ताकत दिखाएं. सरकार बताए कि क्या अमेरिका के दबाव में हममें अपनी नीति बदल दी? कांग्रेस ने अपने तमाम कार्यक्रम रद्द किए. संकट के समय जब पूरा देश एकजुट था तब सोशल मीडिया पर बीजेपी नेता राजनीतिक बयानबाजी कर रहे थे. संसद का बुलाया जाए विशेष सत्र कांग्रेस नेता ने कहा, कांग्रेस सरकार के साथ खड़ी है, लेकिन हम पारदर्शिता की मांग करते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से सीज फायर का ऐलान क्या कूटनीतिक नाकामी नहीं है? क्या हमनें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार कर ली? क्या शिमला समझौता रद्द हो गया? हम आतंक के खिलाफ लड़ रहे थे, बीच में कश्मीर का मुद्दा आ गया! संसद का विशेष सत्र बुलाकर बताया जाए कि संघर्ष विराम की शर्तें क्या हैं? सर्वदलीय बैठक बुलाकर शंकाओं का समाधान किया जाए. पहलगाम के आतंकियों का क्या हुआ? भूपेश बघेल ने सीजफायर के साथ-साथ पहलगाम आतंकी हमले पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी प्रवक्ता का ये कहना कि बदला ले लिया गया है, जो कई सवाल उठाता है. पहलगाम के चारों आतंकियों का क्या हुआ? वो पकड़े गए या मारे गए? सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी किसकी है? क्या गृहमंत्री इस्तीफा दे रहे हैं? recent visitors 52

भारत के हमले से रहीम यार खान एयरबेस का रनवे तहस-नहस, एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित

लाहौर पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान रहीम यार खान एयरबेस अब काम नहीं कर पा रहा है. भारत की ओर से किए गए जवाबी हमले ने इस एयरपोर्ट के रनवे को तहस-नहस कर दिया है. अब पाकिस्तान ने फिलहाल एक सप्ताह के लिए इस एयरबेस को एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित कर दिया है. पाकिस्तान ने इस बाबत नोटम (NOTAM) नोटिस टू एयरमैन जारी किया है. ये नोटिस पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने शनिवार शाम को जारी किया है. ये नोटम 10 मई को पाकिस्तानी समय के अनुसार 4 बजे शाम से प्रभावी हो गए हैं और 18 मई 5 बजे तक प्रभावी रहेगा. यानी कि इतने समय तक रहीम यार खान नूर बेस काम नहीं करेगा. पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि बंद करने का कारण वर्क इन प्रोग्रेस है. लेकिन पाकिस्तान ने शातिराना चालाकी करते हुए ये नहीं बताया है कि वो जंग जैसे इतने अहम समय में अपने सैन्य हवाई अड्डे पर क्या काम कर रहा है. नोटम में कहा गया है कि फिलहाल ये एयरबेस उड़ान के लिए संचालित नहीं होगा. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दक्षिणी भाग में इस महत्वपूर्ण एयरबेस को अस्थायी रूप से बंद करना और बंद करने का समय और इसकी टाइमिंग इस एयरबेस पर भारत की ओर से किए गए तगड़े हमले की पुष्टि करती है. रहीम यार खान एयरबेस, जिसे आधिकारिक तौर पर शेख जायद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Shaikh Zayed International Airport) के नाम से जाना जाता है, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहीम यार खान शहर के पास स्थित है. यह हवाई अड्डा शहर से लगभग 4.6 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है. रहीम यार खान एयरबेस पर हमले का असर रविवार शाम को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक ब्रीफिंग में, भारतीय वायु सेना ने उपग्रह चित्रों से पुष्टि की कि रहीम यार खान वायु सेना अड्डे के रनवे पर भारत ने स्ट्राइक किया था. इस हमले में ये हवाई अड्डा तबाह हो गया था. नोटम के लिए जारी इस मैसेज में लिखा गया है. “RWY NOT AVBL FOR FLT OPERATION WIP” अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुसार, NOTAM में कोड ‘WIP’ का उपयोग प्रगति पर चल रहे कार्य को दर्शाता है. अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) के अनुसार, ‘WIP’ हवाई अड्डे की सतह पर किए जा रहे किसी भी कार्य को दर्शाता है. यह देखते हुए कि NOTAM में विशेष रूप से एयरबेस पर रनवे का उल्लेख किया गया है, यह दर्शाता है कि रनवे पर ही प्रगति पर काम चल रहा है. रहीम यार खान एयरबेस में शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है. फ्लाइटराडार24 पर उपलब्ध एयरपोर्ट डेटा के अनुसार, इसका एकमात्र रनवे- रनवे 01/19- बिटुमिनस सरफेस वाला है और इसकी लंबाई 3,000 मीटर या 9,843 फीट है. यूं तो इस एयरपोर्ट को पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी (PCAA) द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग पाकिस्तान वायु सेना (PAF) द्वारा भी सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है. बता दें कि 10 मई को पाकिस्तानी हमले का जवाब देते हुए भारत ने पड़ोसी मुल्क के कई सैन्य एयरपोर्ट को निशाना बनाया. भारत के मिसाइल हमले में रफीकी, मुरीद, चकलाला, सुक्कुर, रहीम खान एयरबेस, चुनियां एयरबेस, नूर खान एयरबेस, सरगोधा एयरबेस को मुख्य रूप से निशाना बनाया. भारत के हमले में रहीम खान एयरबेस को तगड़ा नुकसान पहुंचा था. और इसकी हवाई पट्टी पर बड़ा गड्ढ़ा बन गया था. अब पाकिस्तान इन मलबों को साफ कर रहा है. और गड्ढे की मरम्मत कर रहा है. एयरबेस का मुख्य रनवे जो लगभग 3,000 मीटर लंबा है, पूरी तरह से तबाह हो गया. सैटेलाइट इमेजरी और वीडियो फुटेज में रनवे पर बड़ा गड्ढा दिखाई देता है. रिपोर्ट के अनुसार भारत के हमलों में एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और दो हैंगर तबाह हो गए. रडार यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा, जिससे एयरबेस की संचालन क्षमता अस्थायी रूप से ठप हो गई है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया कि भारत ने इन एयरबेसों पर अपने फाइटर जेट्स से एयर-टू-सरफेस मिसाइलें दागीं. भारत ने रविवार को कहा है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 आतंकी मारे गए हैं. जबकि 40 से 50 पाकिस्तानी जवान और अधिकारी मारे गए हैं.   recent visitors 109

भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार, मृत्यु दर 130 से घटकर 93 हुई

नई दिल्ली भारत में मातृ और शिशु मृत्य दर में वर्ष 2014 से 2021 के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवारण कल्याण मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-16 के दौरान जो मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 130 थी वह 2021 में घटकर 93 रह गई है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है। 2014 में प्रति एक हजार शिशुओं में 39 की मौत होती थी जो अब घटकर 27 रह गई है। यह जानकारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट में दी गई। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आठ राज्यों केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), और कर्नाटक (63) ने पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मातृ देखभाल सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं। नवजात मृत्यु दर में आई कमी नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में 26 से घटकर 2021 में 19 हो गई, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 45 से घटकर 31 हो गई। ये संकेतक भारत में नवजात और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति के दर्शाते हैं। इसके अलावा, जन्म के समय लिंगानुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया। यह लैंगिक संतुलन में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) भी 2014 में 2.3 से घटकर 2021 में 2.0 पर स्थिर रही, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर भारत का बेहतर प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान इंटर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की 2000-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एमएमआर 2020 से 2023 तक 23 अंक कम हुआ। 1990 से 2023 तक भारत में एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी केवल 48 प्रतिशत थी। संयुक्त राष्ट्र शिशु मृत्यु अनुमान समूह (यूएन-आईजीएमई) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यू5एमआर में 78 प्रतिशत, एनएमआर में 70 प्रतिशत, और आईएमआर में 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 और 2021 में भारत की अतिरिक्त मृत्यु दर 9.3% रही। आयुष्मान भारत को क्रेडिट इस प्रगति का श्रेय सरकार की आयुष्मान भारत को दिया जा सकता है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम है। इसके तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयों, जैसे मातृ प्रतीक्षा गृह, मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), और नवजात स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, मुफ्त परिवहन, दवाएं, निदान, और पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है। वहीं, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 26 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 19 हो गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 45 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 31 हो गई है। जन्म के समय लिंग अनुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया है। कुल प्रजनन दर 2021 में 2.0 पर स्थिर है, जो 2014 में 2.3 से उल्लेखनीय सुधार है। एसआरएस 2021 रिपोर्ट के अनुसार, देश में केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), कर्नाटक (63)। राज्य पहले ही एमएमआर (2030 तक <=70) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, बारह (12) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही यू5एमआर (2030 तक <=25) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं- केरल (8), दिल्ली (14), तमिलनाडु (14), जम्मू और कश्मीर (16), महाराष्ट्र (16), पश्चिम बंगाल (20), कर्नाटक (21), पंजाब (22), तेलंगाना (22), हिमाचल प्रदेश (23), आंध्र प्रदेश (24) और गुजरात (24)। इसके अलावा, 6 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही एनएमआर का एसडीजी लक्ष्य (वर्ष 2030 तक <=12) प्राप्त कर चुके हैं, जिसमें शामिल हैं -केरल (4), दिल्ली (8), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और हिमाचल प्रदेश (12)। दरअसल, सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं को गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी देने के लिए एकीकृत किया गया है। यह पूरी तरह से निःशुल्क है। इसमें देखभाल से इनकार करने के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है। वहीं, आयुष्मान भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन पहल है जो प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है, जिससे वित्तीय सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित होती है। केंद्रित सहयोग यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में निःशुल्क परिवहन, दवा, निदान और पोषण सहायता के साथ-साथ सीजेरियन सेक्शन सहित नि:शुल्क संस्थागत प्रसव का अधिकार हो। समावेशी और न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने मातृत्व प्रतीक्षा गृह, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयाँ (एचडीयू)/गहन देखभाल इकाइयाँ (आईसीयू) नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयाँ (एनबीएसयू), बीमार नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ (एसएनसीयू), माँ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ, और जन्म दोषों की जाँच के लिए समर्पित कार्यक्रम स्थापित करके स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है। वहीं, समय से पहले प्रसव के लिए प्रसवपूर्व कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की व्यवस्‍था, निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव (सीपीएपी) का उपयोग, और सुनने और दृष्टि की जांच के लिए संरचित अनुवर्ती जैसी प्रमुख नैदानिक ​​व्‍यवस्‍थाएं नवजात शिशु के जीवित रहने के परिणामों में सुधार करने में योगदान करती हैं। इन उपायों से सालाना लगभग 300 लाख सुरक्षित गर्भधारण और 260 लाख स्वस्थ जीवित जन्म होते हैं। recent visitors 53

तनाव के बीच भारत ने चीन पर कंसा शिकंजा, 5 साल के लिए सोलर ग्लास पर लगाई एंटी-डंपिंग ड्यूटी

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव (India-Pakistan Tension) कम हो गया है और सीमा पर सीजफायर लागू है. एक ओर जहां अमेरिका की ओर से Indo-PAK Ceasefire का ऐलान बीते शनिवार को किया गया था, तो उसी दिन चीन पाकिस्तान को उकसाते हुए नजर आया था. अब सीजफायर के बाद भारत ने China को तगड़ा झटका दिया है, जिसका असर 5 साल तक ड्रैगन पर देखने को मिलेगा. आइए जानते हैं भारत सरकार ने ऐसा क्या फैसला लिया है? 5 साल के लिए लगाई एंटी डंपिंग ड्यूटी   India-Pakistan के बीच सीजफायर के ऐलान के बाद भारत सरकार ने चीन को निशाने पर लिया है और उस पर नया टैरिफ बम फोड़ा है. जी हां, चीन से आयातित टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide) पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा दी है और ये अगले पांच साल के लिए लगाई गई है. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने 460 डॉलर-681 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के बीच एंटी डंपिंग ड्यूटी को नोटिफाई किया है. क्यों लिया भारत सरकार ने फैसला? अब सवाल कि भारत और पाकिस्तान सीमा पर तनाव के बाद सीजफायर और चीन का पाकिस्तान को उकसाने के बीच भारत सरकार (Indian Govt) ने आखिर ड्रैगन को लेकर ये फैसला क्यों लिया. तो बता दें कि भारत के डीजीटीआर (DGTR) यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज ने ये पाया कि चीन बहुत कम कीमतों पर टाइटेनियम डाइऑक्साइड देश में डंप कर रहा है, जिससे घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा है और इसीके मद्देनजर ये एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला लिया गया है. इन सेक्टर्स पर दिखेगा असर यहां बता दें कि टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide) का इस्तेमाल तमाम सेक्टर्स में किया जाता है. इनमें पेंट, प्लास्टिक, कागज, खाद्य उद्योग शामिल हैं. ऐसे में इनसे जुड़ी भारतीय कंपनियों पर सरकार के इस फैसले का असर देखने को मिलेगा. खासतौर पर पेंट्स कारोबार से जुड़ी भारतीय कंपनियों Asian Paints, Berger Paints, Shalimar Paints समेत अन्य आने वाले दिनों में फोकस में रहेंगी. US के साथ China की बनी बात! उधर दूसरी ओर ग्लोबल ट्रेड वॉर का मुद्दा बने अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं. दरअसर, US-China ट्रेड डेफिसिट को कम करने को  लेकर जेनेवा में डील फाइनल हो गई है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, उन्होंने चीन के साथ दो दिवसीय बैठकों के बाद एक समझौता किया है, जिससे अमेरिका को अपना 1.2 ट्रिलियन डॉलर व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलेगी. हालांकि, ये खुलासा नहीं किया कि कैसे अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट कम होगा और न ही उन्होंने टैरिफ कटौती पर स्पष्ट ऐलान नहीं किया है. recent visitors 53