Autumn’s dry leaves will become a source of greenery, golden compost will restore the earth’s greenery.
- सूखे पत्तों को जलाने के बजाय बनेगी उपयोगी खाद
भोपाल। राजधानी में अब सूखे पत्तों को जलाने की बजाय उन्हें उपयोगी बनाने का इनोवेशन किया जा रहा है। स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप ने गोल्डन लीफ कम्पोस्ट बनाने का अभियान शुरू किया है। इसके तहत कालोनियों, पार्कों, स्कूलों और बड़े परिसरों में पतझड़ के दौरान गिरने वाले सूखे पत्तों से जैविक खाद तैयार की जा रही है। स्कूल, कालोनियों और अन्य संस्थानों के लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। पहल का उद्देश्य पत्तियों को फेंकने या जलाने की बजाय उन्हें खाद में बदलकर हरियाली और स्वच्छता को बढ़ावा देना है।

पत्तियों को कचरा नहीं, गोल्डन लीफ माने: स्वच्छता किटी ब्रांड एम्बेसडर ग्रुप की सदस्य रुचिका सचदेवा का कहना है कि शहर की हर सड़क, पार्क और गार्डन में सूखी पत्तियों के ढेर नजर आते हैं। लोग इन्हें कचरा समझकर फेंक देते हैं या जला देते हैं। उनके घर में भी कई पेड़ हैं और हर साल बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं।
पहले इन पत्तियों को भी कचरे में डाल दिया जाता था। जब इस विषय पर काम शुरू किया गया तो पता चला कि ये पत्तियां वास्तव में गोल्डन लीफ हैं। यदि इन्हें सही तरीके से उपयोग में लाया जाए तो यह बेहतरीन जैविक खाद में बदल सकती हैं।
शहर में लगाए जाएंगे 100 लीफ कम्पोस्ट यूनिट: रुचिका का कहना है कि कॉलोनियों, स्कूलों, पार्कों और बड़े परिसरों में ऐसे स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं, जहां बड़े पेड़ हैं और पतझड़ के दौरान बड़ी मात्रा में पत्तियां गिरती हैं। लगभग 100 स्थानों पर लीफ कम्पोस्टिंग यूनिट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। हर यूनिट से कम से कम 100 किलो जैविक खाद तैयार होगी। इस तरह लगभग 10 टन खाद तैयार करने की योजना है।
तीन से चार महीने में बनती है जैविक खाद: रुचिका ने बताया, लीफ कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। जालीदार संरचना वाली यूनिट बनाई जाती है ताकि हवा का आवागमन बना रहे। सूखी पत्तियों को इसमें इकट्ठा कर हल्की नमी बनाए रखने समय-समय पर पानी का छिड़काव किया जाता है। तीन से चार महीने के भीतर ये पत्तियां सड़कर बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाती हैं। इस खाद का उपयोग बागवानी और पौधारोपण में किया जा सकता है।
पत्तियां जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक: सदस्यों का कहना है कि पत्तियां जलाना पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है। कई बार पत्तियों के ढेर में प्लास्टिक और अन्य कचरा भी मिल जाता है। जब इन्हें जलाया जाता है तो जहरीला धुआं फैलता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। पत्तियों के साथ कई उपयोगी सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं जो प्राकृतिक रूप से इन्हें खाद में बदलने में मदद करते हैं। इसलिए पत्तियों को जलाने की बजाय उन्हें खाद में बदलना ज्यादा बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
स्वच्छता किटी ग्रुप कर रहा कई सामाजिक कार्य: स्वच्छता किटी ग्रुप में करीब 95 सदस्य हैं और हर सदस्य हर महीने 100 रुपए का योगदान देता है। इसी सहयोग से ग्रुप शहर में स्वच्छता और पर्यावरण से जुड़े कई छोटे-छोटे अभियान चलाता है। ग्रुप के सदस्य पार्कों की सफाई, तालाबों के आसपास कचरा हटाने, गार्बेज पाइंट्स को साफ और सुंदर बनाने जैसे कार्य भी करते हैं। लोगों को कचरे को संसाधन में बदलने और घर पर ही जैविक खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाती है।

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