नई दिल्ली
ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। सरकार की ओर से बताया गया है कि इस साल फरवरी तक डिजिटल फ्रॉड से जुड़े 7.81 लाख से ज़्यादा सिम कार्ड ब्लॉक कर दिए हैं। साथ ही 2 लाख 8 हजार 469 IMEI को भी ब्लॉक कर दिया गया है। IMEI आमतौर पर मोबाइल फोन में मौजूद यूनीक नंबर होता है। इसे ब्लॉक करने पर वह डिवाइस किसी भी नेटवर्क पर काम नहीं करती है यानी उससे कॉल्स वगैरह करना पॉसिबल नहीं होता। इस बारे में लोकसभा में जानकारी दी गई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने एक लिखित जवाब में बताया कि भारत सरकार ने पुलिस रिपोर्ट्स के बाद एक्शन लिया है।
हजारों स्काइप आईडी और वॉट्सऐप अकाउंट ब्लॉक
बताया गया है कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाले इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने डिजिटल अरेस्ट के लिए यूज हो रहीं 3,962 से ज्यादा स्काइप आईडी और 83 हजार 668 वॉट्सऐप अकाउंट को भी ब्लॉक किया है। I4C का मुख्य काम फाइनेंशल धोखाधड़ी को रिपोर्ट करना और अपराधियों को पैसे निकालने से रोकना है।
जनता के 4386 करोड़ रुपये बचाए
लोकसभा में सरकार की ओर से बताया गया है कि 13.36 लाख से ज्यादा शिकायतों के बाद पब्लिक के लगभग 4,386 करोड़ रुपये अपराधियों के पास जाने से बचाए गए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराधों का दायरा कितना बड़ा है और कितनी ज्यादा संख्या में लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं।
साइबर फ्रॉड की कंप्लेंट ऐसे कराएं दर्ज
साइबर फ्रॉड से जुड़ी कंप्लेट दर्ज कराने के लिए सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर शुरू किया है। 1930 नंबर पर कॉल करके कंप्लेट की जा सकती है। इसके अलावा, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की मदद से भी डिजिटल धोखाधड़ी की कंप्लेंट दी जा सकती है।
डिजिटल फ्रॉड रोकने पर लगातार हो रहा काम
सरकार की ओर से बताया गया कि डिजिटल अपराधों को रोकने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी के मद्देनजर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल को शुरू किया गया है। मंत्री ने बताया कि पोर्टल पर दी गई शिकायतों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें काम करती हैं। सरकार का यह भी कहना है कि वह आने वाले दिनों में और सख्त कदम उठाएगी।
लगातार सामने आ रहे मामले
ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में मुंबई की एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट करके 20 करोड़ रुपये की चपत लगाई गई। महिला कई महीनों तक डिजिटल अरेस्ट में रहीं। आरोपी धीरे-धीरे करके उनसे पैसे वसूलते गए।

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