Madhya Pradesh is going to get a new state president soon, the list will come on this day
भाजपा जिला अध्यक्ष चुने जाने की मप्र भाजपा की अड़चनें शीर्ष नेतृत्व ने दूर कर दी है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही भाजपा को प्रदेश अध्यक्ष भी मिल जाएगा। इन बिंदुओं पर दिल्ली में शुरू हुई केंद्रीय भाजपा की बैठक में मंथन हुआ। इसमें मप्र भाजपा संगठन पदाधिकारियों का एक दल शामिल रहा। चुनाव को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत हुई।
प्रदेश भाजपा ने किया था मंथन
प्रदेश भाजपा खुद के स्तर पर मंथन कर रही थी, लेकिन जिला अध्यक्ष चुने जाने को लेकर एक राय नहीं बनी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व की लाइन पर पार्टी बढ़ेगी। प्रत्येक जिले से तीन-तीन नामों का पैनल मंगवाया जाएगा। इसी में से एक नाम संगठन के संज्ञान में लाकर फाइनल किया जाएगा। बता दें कि अध्यक्षों की सूची पांच जनवरी तक आ जाएगी। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी।
बूथ व मंडल अध्यक्ष चुनने में अव्वल
राष्ट्रीय बैठक में मप्र भाजपा द्वारा बूथ और मंडल अध्यक्ष चुने जाने को लेकर बरती गई पारदर्शिता व सक्रियता चर्चा का विषय रही। सूत्रों के मुताबिक अन्य राज्यों के संगठन को मप्र भाजपा के कामों से सीख लेने की सलाह दी गई।
सक्रिय सदस्यता में भी अच्छा काम
प्रदेश भाजपा ने सक्रिय सदस्य बनाने में भी अच्छा काम किया। मप्र भाजपा इसमें पहले स्थान पर रहा तो गुजरात को दूसरी व यूपी को तीसरी रैंक मिली। इस पर भी प्रदेश भाजपा संगठन को सरहाना मिली है।
पूर्व संगठन मंत्री भी ठोक रहे ताल
पार्टी के पूर्व संगठन मंत्री से लेकर पूर्व विधायक तक जिला अध्यक्ष के लिए ताल ठोक रहे हैं। क्षेत्रीय क्षत्रपों से समीकरण बैठाने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक कई नेता पूर्व संगठन मंत्रियों के नाम की पुरजोर पैरवी भी कर रहे हैं। ऐसा होता है पार्टी में ही नई लकीर खींची जाएगी। भाजपा संगठन ने सितंबर 2021 में छह संभागीय संगठन मंत्रियों की छुट्टी कर दी थी। शैलेंद्र बरूआ, जितेंद्र लिटोरिया, आशुतोष तिवारी, श्याम महाजन, जयपाल सिंह चावड़ा और केशव सिंह भदौरिया को पद से मुक्त करते हुए पूरी जिम्मेदारी संगठन महामंत्री सुहास भगत और सह संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को दी गई थी।
तीन फैक्टर हावी
लंबे समय बाद जिला अध्यक्षों के चुनाव हो रहे हैं। 75 फीसदी जिलों में मौजूदा अध्यक्ष भारी पड़ रहे हैं, क्योंकि इन्हीं के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023, लोकसभा चुनाव 2024 और सक्रिय सदस्यता बनाने में देशभर में बाजी मारी।
जमीनी पदाधिकारी दावा ठोक रहे हैं कि वे लंबे समय से बिना पद के काम किए जा रहे हैं। उन्हें निगम मंडलों में जगह नहीं दी गई। कम से कम अब संगठन चुनाव में ही मौका मिल जाए।
कई सांसद व भाजपा विधायक भी जोड़-तोड़ में लगे हैं कि उनके गुट का अध्यक्ष हो तो चुनाव लड़ने को लेकर थोड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा भी अध्यक्षों को लेकर कई फैक्टर प्रभावी हैं।
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✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र








