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A game of profit concealment, Madhya Pradesh power company shows ‘fictitious’ loss of 6044 crores, prepares to increase prices

जबलपुर। बिजली कंपनियों ने प्रदेश में बिजली के दाम औसत 10.19 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। आयोग ने याचिका पर सुझाव और आपत्ति बुलाई है। इसमें बिजली विशेषज्ञों का दावा है कि बिजली कंपनी ने 6044 करोड़ का घाटा बताया है जबकि 9204 करोड़ रुपये के मनमाने आंकड़े आयोग के सामने रखकर इस घाटे को दर्शाया गया है ताकि बिजली की दर को बढ़ाया जा सके।

बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को जो आपत्ति दी है उसमें दावा किया है कि 9204 करोड़ रुपये के आंकड़े गलत और तथ्यहीन है। विद्युत नियामक आयोग यदि इन आंकड़ों से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण करेगी तो निश्चित ही घाटे की जगह मुनाफा नजर आएगा।

9204 करोड़ के फर्जी आंकड़े

सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी काल्पनिक खर्च को बताकर बिजली कंपनियों का घाटा बताया है। उनके अनुसार पावर मैनजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2022-23 तक की सत्यापन याचिका में खारिज 3450.63 करोड़ रुपये पूरक बिजली खरीदी लागत की पुन: असंवैधानिक मांग की गई है। इसके अलावा 832.96 करोड़ रुपये अन्य लागत जो कि स्टेशन आधार पर आवंटित नहीं की जा सकी थी उसकी असंवैधानिक मांग की है।

राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि ताप गृह से बिजली खरीदी का व्यय अलग है लेकिन अन्य व्यय का एक मुश्त यह राशि क्यों और किस लिए मांगी गई इसका कोई ब्यौरा नहीं है। पूरक बिल के नाम पर 2185 करोड़ रुपये मांगा है जबकि मप्र विद्युत नियामक आयोग ने पहले ही साफ किया है कि पूर्ण वितरण दस्तावेज सहित प्रस्तुत नहीं करने पर यह राशि स्वीकृति नहीं होगी।

अग्रवाल का कहना है कि विद्युत चोरी के कारण हुए नुकसान को उपभोक्ता से 696 करोड़ रुपये वसूल करने की तैयारी की गई है। इसके अलावा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पिछले दस साल की वार्षिक राजस्व आवश्यक्ता में पूंजीकरण में संसोधन के तहत 623 करोड़ के अवैधानिक मांग की है।

वहीं याचिका में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी का कार्य मात्र विद्युत वितरण कंपनी के लिए बिजली खरीद कर उपलबध कराना है किंतु मैनेजमेंट कंपनी समानांतर रूप से अवैधानिक रूप से बिजली खरीदी के लिए 438 करोड़ रुपये मांगे है।इसके साथ ही पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जो राशि नहीं मांगी वो भी उल्लेखित है 5.15 करोड़ रुपये की मांग की गई है।

मैनेजमेंट कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं पर दो वर्ष के ब्याज कि रुप में 774 करोड़ रुपये की मांग की है आपत्तिकर्ता ने इसे गलत मांग बताया है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर के लिए 197 करोड़ रुपये की मांग की है। राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग को भेजे पत्र में दावा किया है कि अभी तक बिजली वितरण कंपनियों ने स्मार्ट मीटर के नाम पर राशि का भुगतान ही नहीं किया है ऐसे में यह राशि वसूल करना गलत है।

25 जनवरी तक आपत्ति-सुझाव

मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बिजली टैरिफ याचिका को लेकर 25 जनवरी तक आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके बाद मप्र विद्युत नियामक आयोग आपत्ति और सुझाव के आधार पर प्रदेश के तीन शहर जबलपुर, भोपाल और इंदौर में जनसुनवाई का आयोजन करेगा।राजेंद्र अग्रवाल ने आयोग से मांग की है कि इस बार आनलाइन की बजाए फिजिकल जनसुनवाई की जाए ताकि लोग अपनी बात बेहतर तरीके से कह सके।

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