हिंदू पंचांग का नौवां महीना मार्गशीर्ष शुरू हो चुका है. इसे अग्रहायण या अगहन का महीना भी कहते हैं. इस महीने को हिंदू शास्त्रों में सर्वाधिक पवित्र माना गया है. इसे लेकर भगवान ने गीता में कहा है- 'महीनों में, मैं मार्गशीर्ष हूं.' इसी महीने से सतयुग का आरंभ माना जाता है. इस महीने को जप-तप और ध्यान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. इस महीने पवित्र नदियों में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है. इस बार मार्गशीर्ष का महीना 16 नवंबर से 15 दिसंबर तक रहने वाला है. आइए आपको इस महीने आने वाले प्रमुख व्रत त्योहारों के बारे में बताते हैं.

मार्गशीर्ष माह कितना लाभकारी?
इस महीने में मंगलकार्य विशेष फलदायी होते हैं. इस महीने में श्रीकृष्ण की उपासना और पवित्र नदियों में स्नान विशेष शुभ होता है. संतान के लिए वरदान बहुत सरलता से मिलता है. साथ ही, चन्द्रमा से अमृत तत्व की प्राप्ति भी होती है. इस महीने भजन-कीर्तन करने का फल अमोघ होता है.

मार्गशीर्ष माह में आने वाले व्रत-त्योहार
16 नवंबर 2024 (शनिवार)- वृश्चिक संक्रांति
18 नवंबर 2024 (सोमवार)- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी
21 नवंबर 2024 (गुरुवार)- गुरु पुष्य योग
26 नवंबर 2024 (मंगलवार)- उत्पन्ना एकादशी
28 नवंबर 2024 (गुरुवार)- प्रदोष व्रत (कृष्ण)
29 नवंबर 2024 (शुक्रवार)- मासिक शिवरात्रि
1 दिसंबर 2024 (रविवार)- मार्गशीर्ष अमावस्या
5 दिसंबर 2024 (गुरुवार)- विनायक चतुर्थी
6 दिसंबर 2024 (शुक्रवार)- विवाह पंचमी
11 दिसंबर 2024 (बुधवार)- मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती
13 दिसंबर 2024 (शुक्रवार)- प्रदोष व्रत (शुक्ल), अनंग त्रयोदशी
14 दिसंबर 2024 (शनिवार)- दत्तात्रेय जयंती
15 दिसंबर 2024 (रविवार)- धनु संक्रांति, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत, अन्नपूर्णा जयंती

इस महीने किन बातों का ध्यान रखें?
इस महीने तेल मालिश बहुत उत्तम होती है. इस महीने से स्निग्ध चीजों का सेवन शुरू कर देना चाहिए. इसमें जीरे का सेवन नहीं करना चाहिए. मोटे वस्त्रों का उपयोग आरम्भ कर देना चाहिए. संध्याकाल की उपासना अवश्य करनी चाहिए. नित्य गीता का पाठ करना उत्तम होता है. जहां तक संभव हो भगवान कृष्ण की उपासना करें. किसी पवित्र नदी में स्नान का अवसर मिले तो अवश्य करें.

 

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