MY SECRET NEWS

Wednesday, March 25, 2026 1:15 am

गरियाबंद

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत शासन द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। फाइलेरिया के रोकथाम एवं जागरूकता के लिए सामूहिक दवा सेवन गतिविधि के जरिये 27 फरवरी से 13 मार्च 2025 तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। यह कार्यक्रम राजिम और छुरा क्षेत्र में विशेष रूप से चलाया जायेगा।

इसके तहत बूथ लगाकर, घर-घर भ्रमण, मॉप-अप राउंड एवं एमडीए कॉर्नर गतिविधि कर दवाईयों का वितरण किया जायेगा। इसके तहत फाइलेरियारोधी डीईसी की गोली और कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली बच्चों और बड़ों को सेवन कराया जा जायेगा। कार्यक्रम के तहत 27 फरवरी से 02 मार्च तक बूथ लगाकर  आंगनबाड़ी स्कूल एवं शैक्षणिक संस्थानों दवा का सेवन कराया जायेगा। इसी प्रकार 03 मार्च से 10 मार्च तक घर-घर भ्रमण कर समुदाय स्तर पर दवा वितरण किया जायेाग।

छूटे हुए जनसंख्या को 11 से 13 मार्च तक मॉप-अप राउंड के तहत दवा का सेवन कराया जायेगा। इसके अलावा 15 दिवसीय इस अभियान के दौरान स्वास्थ्य केन्द्रों में भी ओपीडी के पास बूथ लगाकर दवा का सेवन कराया जायेगा। कलेक्टर श्री दीपक अग्रवाल ने फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सुचारू क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश दिये है। उन्होंने छुरा एवं राजिम क्षेत्र के एसडीएम, जनपद सीईओ, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समन्वय कर कार्यक्रम को सक्रियतापूर्वक क्रियान्वित करने के निर्देश दिये है। साथ ही आवश्यक संख्या में अधिकारी – कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर गंभीरतापूर्वक विभिन्न गतिविधियों को संचालित करने के निर्देश दिये है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गार्गी यदु पाल ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है जो कि मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होता है। इस बीमारी में व्यक्ति के पैर हाथी पैर की तरह हो जाते है, इस कारण से इसे हाथी पांव कहते है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को यदि यह मच्छर काटता है तो उसमें एक साल बाद इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। मुख्यतः हाथी पांव बीमारी के परजीवी शरीर के लिम्फ नोड्स, लिम्फ वाहिकाओं को प्रभावित करता है। शर्म या संकोच न करते हुए अंडकोष में सूजन, पैरों में सूजन होने पर नजदीकी अस्पताल जाकर इसकी जाँच अवश्य कराना चाहिए ।

प्रारंभिक जांच में बीमारी का पता चलने पर दवाइयों के सेवन से हाथी पांव बीमारी से पूर्ण रूप से बचा जा सकता है। साथ ही मच्छरों के प्रसार को रोकने तथा बीमारी से बचाव हेतु सोते समय मच्छरदानी का उपयोग, घरों के आसपास साफ सफाई के अलावा पानी के गड्डों, टूटे बर्तन, गमलों, में पानी जमा न होने देना या जला हुआ तेल डालना चाहिए। अनुपयोगी कुंआ में भी जला हुआ तेल डालना चाहिए। इससे मच्छरों के पनपने के स्त्रोत को नियंत्रित कर सकते हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी हाथी पांव बीमारी से बचाव और नियंत्रण हेतु फाइलेरिया रोधी डीईसी की गोली और कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली सेवन के लिए विशेष कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा है।

Loading spinner
यूजफुल टूल्स
QR Code Generator

QR Code Generator

Age Calculator

Age Calculator

Word & Character Counter

Characters: 0

Words: 0

Paragraphs: 0