नई दिल्ली
पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान को अक्सर उनकी इंग्लिश के लिए ट्रोल किया जाता है। इसको लेकर रिजवान ने अपना पक्ष रखा है। रिजवान ने कहा कि मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है। मेरा काम पाकिस्तान टीम के लिए क्रिकेट खेलना है। मुझसे क्रिकेट की डिमांड की जाती है। मुझसे अंग्रेजी बोलने की डिमांड नहीं की जाती है। गौरतलब है कि अक्सर टॉस के वक्त या पोस्ट मैच प्रजेंटेशन के दौरान कमेंटेटर्स कप्तानों से अंग्रेजी में बात करते हैं। इस दौरान खराब अंग्रेजी के लिए रिजवान का अक्सर मजाक उड़ाया जाता है।

मुझे अफसोस है
अब मोहम्मद रिजवान ने कहा है कि मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे इस बात पर फख्र है कि मैं जो भी बातें कहता हूं दिल से कहता हूं। मेरे दिल में जो भी होता है सच होता है। मुझे इंग्लिश नहीं आती। रिजवान ने आगे कहाकि मुझे इस बात का अफसोस है कि मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं। मैंने पढ़ाई नहीं की। लेकिन मुझे एक परसेंट भी शर्मिंदगी नहीं है कि मुझे इंग्लिश नहीं आती। इस बात का जरूर अफसोस है कि मैंने पढ़ाई नहीं की। वह एक अलग किस्म की शर्मिंदगी है।

जूनियर्स को क्या सलाह
रिजवान ने आगे कहाकि जो भी मेरे दिल में है मैं खुलकर कहता हूं। मेरे से जो डिमांड है वह क्रिकेट है। मेरे से डिमांड इंग्लिश नहीं है। मुझे कभी इस बात को लेकर फील नहीं हुआ। मुझसे पाकिस्तान ने हमेशा क्रिकेट मांगा। मुझसे कभी देश ने इंग्लिश नहीं मांगी। अगर इंग्लिश मांगते तो मैं क्रिकेट छोड़कर कहीं जाकर प्रोफेसर बन जाऊंगा, सीख लूंगा फिर आ जाऊंगा। मेरे पास इतना टाइम नहीं है इंग्लिश सीखने के लिए। हां, मुझे अफसोस है कि मैंने पढ़ाई पूरी नहीं की। इसलिए मैं अपने जूनियर्स से कहता रहता हूं कि पढ़ाई पर खूब ध्यान दें। ताकि आगे जाकर उन्हें इस तरह के हालात का सामना न करना पड़े।

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