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अजमेर

अजमेर में कल रात केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मुस्लिम समुदाय ने शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जताया। यह विरोध प्रदर्शन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर किया गया, जिसमें अजमेर के विभिन्न मुस्लिम बहुल इलाकों में 'बत्ती गुल' कार्यक्रम का व्यापक असर देखने को मिला। इस दौरान रात 9 से 9:15 बजे तक लोगों ने अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद रखकर बिल के प्रति अपनी असहमति दर्ज कराई।

यह आंदोलन दरगाह शरीफ से सटे कई इलाकों में सक्रिय रूप से देखने को मिला। अंदरकोट, कमानी गेट, लंगर खाना गली, खादिम मोहल्ला, चौधर मोहल्ला, शीशा खान, लोंगिया, कुंदन नगर, लोहा खान, चौरासीवास और नई सड़क जैसे क्षेत्रों में रहवासियों ने इस विरोध में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इन क्षेत्रों में लोगों ने सामूहिक रूप से अंधेरा कर शांतिपूर्ण ढंग से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की।

मुस्लिम समुदाय का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के अधिकारों का हनन है। इस कानून के तहत वक्फ संपत्तियों को सरकारी हस्तक्षेप के दायरे में लाना, समुदाय की स्वायत्तता को प्रभावित करता है। इसीलिए इसे जनविरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी बताया जा रहा है।

विरोध प्रदर्शन में कई प्रमुख समाजसेवी और धार्मिक नेताओं मुख्तार अहमद नवाब, काजी मुनव्वर अली, इस्तखार सिद्दीकी, हुमायूं खान, मोहम्मद आजाद, आरिफ हुसैन, गुलाम मोईनुद्दीन, मोहम्मद अलीमुद्दीन, सादिक खान, अकबर हुसैन, नवाज खान, रियाज मंसूरी, इमरान खान, शरफुद्दीन मुल्तानी, शफीक नवाब, शमी नगारची और जब्बार मुल्तानी सहित कई लोगों ने भाग लिया और वक्फ संपत्तियों की रक्षा के लिए एकजुटता का संदेश दिया।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक आजादी और संपत्ति अधिकारों का सम्मान करते हुए बिल को वापस लेने की अपील की।

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