चेन्नई
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी की लिपि एक सदी से भी अधिक समय से एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। उन्होंने इसे समझने वाले को 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर का पुरस्कार देने की घोषणा की। एग्मोर के सरकारी संग्रहालय में आयोजित सिंधु घाटी सभ्यता की खोज की शताब्दी पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के दौरान सीएम एमके स्टालिन ने ये एलान किया।
दरअसल, तीन दिवसीय संगोष्ठी में दुनिया भर के प्रसिद्ध पुरातत्वविदों, इतिहासकारों और विद्वानों ने सभ्यता के महत्व और तमिलनाडु के साथ इसके संबंधों पर चर्चा की है। वहीं, इस कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान सीएम स्टालिन ने कहा कि सिंधु घाटी के मिट्टी के बर्तनों पर पाए गए लगभग 60 प्रतिशत प्रतीक तमिलनाडु में खुदाई के दौरान मिली कलाकृतियों पर पाए गए प्रतीकों के समान हैं।
सीएम स्टालिन ने कही ये बात
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस आश्चर्यजनक समानता ने विद्वानों के बीच काफी रुचि जगाई है और संभावित रूप से सिंधु घाटी सभ्यता के रहस्यों को उजागर कर सकती है। सीएम स्टालिन ने इस क्षेत्र में अनुसंधान को और बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध पुरातत्वविद् इरावतम महादेवन के नाम पर एक शोध पीठ स्थापित करने के लिए 2 करोड़ रुपये के अनुदान की भी घोषणा की। बता दें कि ये चेयर सिंधू घाटी सभ्यता पर गहन अध्ययन की सुविधा प्रदान करेगी, जिसमें तमिलनाडु के साथ इसके संबंधों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
तमिलनाडु और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच संबंध पर भी खोज
गौरतलब है कि तूतीकोरिन के शिवकलाई से हाल ही में मिली पुरातात्विक खोजों ने शोधकर्ताओं को तमिलनाडु और सिंधु घाटी सभ्यता के बीच एक निश्चित संबंध स्थापित करने के करीब ला दिया है। इन खोजों का समय निर्धारण उन्हें 2500 ईसा पूर्व और 3000 ईसा पूर्व के बीच रखता है।
खास बात है कि तमिलनाडु की खोजों से एक लौह युग की सभ्यता की उपस्थिति का पता चलता है जो सिंधु घाटी सभ्यता के समानांतर चलती थी, जो 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक फैली थी। वहीं, सिंधु घाटी सभ्यता ने इस दौरान मुख्य रूप से तांबे की वस्तुओं का उपयोग किया था।

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