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नई दिल्ली
शीत सत्र में कई दिनों तक लगातार हंगामे के बाद आज संविधान पर चर्चा शुरू हुई तो पहला भाषण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का हुआ। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर संविधान की अवहेलना करने और हमेशा उसके मुकाबले सत्ता को ही चुनने का आरोप लगाया। उन्होंने इस दौरान पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया और उनके बहाने ही राहुल गांधी पर भी इशारों में गहरा तंज कसा। राजनाथ सिंह ने कहा कि 1995 में अटल बिहारी वाजपेयी जेनेवा गए थे। उन्होंने तत्कालीन सरकार के कदमों की तारीफ की थी और भारत का पक्ष रखा। यही नहीं भारत लौटे तो यहां भी वही बात की। आज तो ऐसी स्थिति है कि विपक्ष के नेता विदेश जाकर भारत के ही खिलाफ बोलते हैं।

राजनाथ सिंह ने इस दौरान शाहबानो केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अदालत ने एक मुस्लिम महिला के पक्ष में फैसला सुनाया तो कांग्रेस की बहुमत वाली सरकार ने उसे ही पलट दिया। अब जाकर मोदी सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिया है। रक्षा मंत्री ने कहा, 'कांग्रेस को जब भी सत्ता और संविधान को चुनना था तो उन्होंने सत्ता को ही चुना। मैंने आपातकाल में जेल काटी। 40 दिन तो मुझे तनहाई बैरक में रहना पड़ा। यही नहीं इस दौरान मेरी मां का निधन हो गया, लेकिन अंतिम विदाई के लिए भी छोड़ा नहीं किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि संविधान अंधेरे में प्रकाश स्तंभ है।'

उन्होंने कहा कि यूपी में कई बार ऐसा हुआ कि हमारे पास बहुमत रहा, फिर भी सरकार बनाने से रोकने की कोशिश हुई। 6 दिसंबर, 1992 को कल्याण सिंह की सरकार ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद भी जानबूझकर बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया था। रक्षा मंत्री ने आपातकाल का भी जिक्र किया और कहा कि मैं खुद 6 महीने तक जेल में बंद रहा। हालात यह थे कि 40 दिन तो तनहाई बैरक में रखा गया। इस दौरान मेरी मां का निधन हुआ और वह लंबे समय तक अस्पताल में भी रहीं। मैं उन्हें अस्पताल में देखने नहीं गया और उनकी मौत के बाद अंतिम विदाई में शामिल होने का भी मौका नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि आर्टिकल 356 का इस्तेमाल करके राज्य सरकारों को बर्खास्त करने कांग्रेस का इतिहास रहा है। 100 बातों की एक बात है कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान और सत्ता में से सत्ता को ही चुना। उन्होंने इस दौरान बीते 75 सालों में समानता की ओर बढ़ने वाले कदमों का भी जिक्र किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी लैंगिक समानता के लिए कदम उठाए हैं। 7 दशकों से अधिक समय से संविधान भारत को दिशा दिखा रहा है और वह मजबूत होता जा रहा है। इस दौरान राजनाथ सिंह ने भीमराव आंबेडकर की एक टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान यदि अच्छा भी है तो बुरे लोगों के हाथ में जाकर वह खराब हो जाता है। यदि खराब है, लेकिन अच्छे लोग चलाएं तो वह अच्छा हो जाता है।

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