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भोपाल
भारत की गृहणियों की रसोई में कोई तराजू नहीं होता है, गृहिणियों को भोजन निर्माण के लिए किसी संस्थान में अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं होती है। भारतीय गृहिणियों में रसोई प्रबंधन का उत्कृष्ट कौशल, नैसर्गिक एवं पारम्परिक रूप से विद्यमान है। भारत की रसोई, विश्वमंच पर प्रबंधन का उत्कृष्ट एवं श्रेष्ठ उदाहरण है। भारतीय समाज में ऐसे असंख्य संदर्भ, परम्परा के रूप में प्रचलन में हैं। हमारे समाज में हर क्षेत्र में विद्यमान ज्ञान को युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में वर्तमान वैश्विक आवश्यकतानुरूप, पुनः शोध एवं अनुसंधान कर दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में "सृजन (एसआरजेएएन) " कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री श्री परमार ने "सृजन" कार्यक्रम की सूचना विवरणिका (इन्फॉर्मेशन ब्रॉशर) का विमोचन भी किया। मंत्री श्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स मात्र संस्थान परिसर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। विद्यार्थियों को, समाज के प्रश्नों के समाधानकारक नवाचारों के लिए सशक्त मंच देने के लिए "सृजन " कार्यक्रम तैयार किया गया है। विद्यार्थियों को नवाचारों के लिए प्रोत्साहित करने के लिए यह कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्यक्रम का समापन 11 मई को, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर किया जाएगा। श्री परमार ने सृजन कार्यक्रम की नोडल एजेंसी, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को कार्यक्रम के सफलतम आयोजन के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय, शिक्षा में नवाचारी पहल के लिए अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बनेगा। विद्यार्थियों को शोध एवं अनुसंधान के साथ नवाचार के दस्तावेजीकरण के लिए भी विश्वविद्यालय सहयोग प्रदान करने की दिशा में भी कार्य करें। शोध-अनुसंधान के साथ समाधानकारक नवाचारों का यह सिलसिला, निरंतर जारी रखने में सभी को सहभागिता करने की आवश्यकता है।

तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि भारत का ज्ञान विश्व मंच पर सर्वश्रेष्ठ ज्ञान था, इसलिए भारत विश्वगुरु की संज्ञा से सुशोभित था। हमारे पूर्वज शिक्षित और ज्ञानवान थे लेकिन अतीत के कालखंडों में भारतीय इतिहास का गलत चित्रण किया गया। भारतीय चिंतन और दर्शन को नष्ट कर, भ्रांतियों को स्थापित करने का कुत्सित प्रायोजन किया गया। हमारे पूर्वजों को निरक्षर बताने का कुत्सित प्रयास किया गया, स्वाधीनता के बाद इस ऐतिहासिक छल से मुक्त होने की आवश्यकता थी। हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से, स्वत्व के भाव के साथ राष्ट्र के पुनर्निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ है। इसके लिए हमें स्वत्व के भाव की जागृति के साथ, भारतीय ज्ञान परम्परा का अध्ययन करने की आवश्यकता है। हमारे पूर्वजों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर, समाज में परंपराएं एवं मान्यताएं स्थापित हुई हैं। भारतीय समाज, विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोणधारक समाज है। श्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता, भारतीय समाज की सभ्यता एवं विरासत है। प्रकृति सहित समस्त ऊर्जा स्रोतों के प्रति कृतज्ञता का भाव, हमारे समाज में विद्यमान है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्पना के अनुरूप स्वतंत्रता की शताब्दी वर्ष तक ऊर्जा एवं खाद्यान्न के क्षेत्र में भारत, आत्मनिर्भर एवं अन्य देशों की पूर्ति करने में भी सक्षम एवं सामर्थ्यवान होगा। इसके लिए हम सभी के पुरुषार्थ की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार के मार्गदर्शन में, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने सृजन कार्यक्रम का सूत्रपात किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल से संबद्ध इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक एवं उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत सभी महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को वर्त्तमान में संचालित पाठ्यक्रमों के अंतर्गत विकसित किये गए नवीन प्रोजेक्ट्स को प्रदर्शित करने के लिए मंच प्रदान करना है। यह कार्यक्रम उत्कृष्ट प्रोजेक्ट्स को चिन्हित करने एवं उन्हें भविष्य में प्रोटोटाइप के रूप में विकसित करने के लिए पूर्ण सुविधा प्रदान करने का प्रयास है। सृजन कार्यक्रम, स्टार्ट-अप की स्थापना को भी प्रोत्साहित करेगा। सृजन कार्यक्रम का मूल उद्देश्य, तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करना है। सृजन कार्यक्रम, विद्यार्थियों को रियल लाइफ प्रॉब्लम्स एवं इमर्जिंग प्रौद्योगिकी बेस्ड प्रोजेक्ट्स पर कार्य को आगे विकसित करने के लिए प्रोत्साहित एवं सहायता प्रदान करेगा। साथ ही इनोवेटिव आइडियाज को स्टार्ट-अप में बदलने की सहायता भी प्रदान करेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य, तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक इकोसिस्टम विकसित करना एवं सहायता प्रदान करना है। यह कार्यक्रम, नवीन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से अनुसन्धानोमुखी शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा।
 

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