कूनो में अब तक 28 चीतों की मौत, इस साल 7 ने गंवाई जान; आशा के 8 माह के शावक की भी गई जान
28 cheetahs have died in Kuno so far, with 7 losing their lives this year; Asha’s 8-month-old cub has also died. मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला जारी है। अक्टूबर 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के बाद अब तक 28 चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें वयस्क चीते और भारत में जन्मे शावक दोनों शामिल हैं। इस साल अब तक सात चीतों की मौत हुई है। ताजा मामला नामीबियाई मादा चीता आशा के आठ महीने के शावक की मौत का है। शावक की मौत का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। 2023 में सबसे ज्यादा 9 चीतों की मौतसरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद शुरुआती तीन वर्षों में भी कई चीतों की मौत हुई। सालवार आंकड़े के अनुसार वर्ष 2023 में 6 वयस्क चीते और तीन शवक कुल 9 मौतें। 2024 में 2 वयस्क और चार शावक यानी कुल 6 मौतें। 2025 में एक वयस्क और पांच शावक यानी कुल 6 मौतें। 2026 में 12 अक्टूबर तक दो वयस्क, पांच शावक कुल सात चीतों की मौत हुई। इस प्रकार अब तक 11 वयश्क, 17 शावक समेत कुल 28 चीतों की मौत हो चुकी हैं। इस साल इन घटनाओं में गई जानइस वर्ष सात चीतों की जान गई। इसमें मई 2026 में जंगल में जन्मे चार शावक मृत मिले थे। उनकी मौत के पीछे किसी दूसरे वन्यजीव के हमले की आशंका जताई गई थी। जून 2026 में भारतीय मूल की मादा चीता KGP-11 की मोरेना जिले में चोटों के कारण मौत हुई। सितंबर 2026 में नामीबियाई चीता गौरव की मौत हुई। उसे कमजोर और डिहाइड्रेशन की स्थिति में पाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, उसे पहले से एक गंभीर बीमारी थी। वहीं, 12 अक्टूबर 2026 को आशा के आठ महीने के पांच शावकों में से एक मृत मिला। उसकी मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। अब भारत में कितने चीते बचे हैं?5 अक्टूबर 2026 को कूनो में पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई थी। इसके बाद आशा के एक शावक की मौत के साथ यह संख्या घटकर 59 रह गई है। इनमें कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में मौजूद चीते शामिल हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी उठा सवालचीतों की मौत के बीच उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से मृत चीतों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी थी। हाल ही में मध्यप्रदेश वन विभाग ने सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट का हवाला दिया। इससे रिपोर्टों की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं। recent visitors 9