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कोर्ट ने कहा कि वेश्या के साथ पकड़ा जाना देह व्यापार और मानव तस्करी की श्रेणी में नहीं आता

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई कार्यवाही को रद्द कर दिया। कार्यवाही रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि वेश्या के साथ रंगरलियां मनाना मानव तस्करी और देह व्यापार नहीं है। गाजियाबाद के रहने वाले विपुल कोहली की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कार्यवाही रद्द कर दी। मामला दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर जिले के सेक्टर-49 थाना क्षेत्र का है। गाजियाबाद जिले में एलोरा थाई स्पा सेंटर में पुलिस ने 20 मई 2024 को छापेमारी की गई थी। इस दौरान पुलिस ने याचिकाकर्ता को महिला के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था। पुलिस ने याचिकाकर्ता के खिलाफ मानव तस्करी और देह व्यापार का मुकदमा दर्ज किया था। एसीजेएम कोर्ट की ओर से मामले का संज्ञान लेते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ समन जारी किया गया था। जिसके खिलाफ याची ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में अपनी दलील रखी। वकील ने कोर्ट को बताया कि याची न तो स्पा सेंटर का मालिक है और न ही महिलाओं को देह व्यापार में ढकेलने का आरोपी है। याची ग्राहक है। उसने ली गई सेवाओं के बदले भुगतान किया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 12

संभल की शाही जामा मस्जिद में सफाई, रंगाई-पुताई के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी मंजूरी

संभल उत्तर प्रदेश के संभल की विवादित शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रंगो-रोगन की मंजूरी दे दी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम पक्ष यानी कि जामा मस्जिद कमेटी को बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने एएसआई को एक हफ्ते के भीतर मस्जिद की रंगाई-पुताई कराने का आदेश दिया है. हालांकि इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि है रंगाई-पुताई केवलस मस्जिद के बाहरी हिस्सों में होगी. दरअसल, मस्जिद कमेटी ने भी सिर्फ बाहरी हिस्से में रंगाई पुताई की इजाजत मांगी थी. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल के सिंगल बेंच में बुधवार को मामले की सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने पहले ही साफ सफाई की मांग को मंजूर कर लिया था. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने बताया कि मस्जिद परिसर में साफ-सफाई का काम पूरा भी करा चुका है. कोर्ट ने संभल जामा मस्जिद की नॉर्म्स के मुताबिक रंगाई पुताई का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना कुछ छेड़छाड़ किए बाहर से रोशनी की सजावट की जा सकती है. अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी. बता दें कि रमजान शुरू होने से पहले मस्जिद कमेटी ने एएसआई से मस्जिद की रंगाई-पुताई की अनुमति मांगी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था. इसके बाद मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का रुख किया. इस दौरान हिंदू पक्ष ने आरोप लगाया था कि रंगाई-पुताई के बहाने मस्जिद के निर्माण में छेड़छाड़ की जा सकती है. हालांकि शुरुआती सुनवाई में हाईकोर्ट भी लगातार टालता रहा और एएसआई से रिपोर्ट मांगी थी. इसपर एएसआई ने कहा था कि मस्जिद की रंगाई-पुताई की अभी जरूरत नहीं है, साफ-सफाई कराई जा सकती है. हालांकि अब कोर्ट ने मस्जिद कमेटी को शाही जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई की अनुमति दे दी है. Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 12

एक नाबालिग लड़की का अपहरण और उससे बलात्कार करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दी: इलाहाबाद हाई कोर्ट

प्रयागराज (उप्र) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण और उससे बलात्कार करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी है। व्यक्ति दूसरे समुदाय से है और उसके खिलाफ हिंदुवादी संगठन ‘बजरंग दल’ के एक सदस्य ने नाबालिग का अपहरण कर उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपी जावेद आलम को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति समीर जैन ने कहा कि लड़की के बयान के अनुसार, प्राथमिकी दर्ज कराने के समय उसकी उम्र 17 वर्ष से अधिक थी और वह खुद आरोपी के साथ गई थी तथा और उसने अपनी इच्छा से आरोपी के साथ शादी की। सुनवाई के दौरान, लड़की की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है तो लड़की को कोई आपत्ति नहीं है। पूछताछ के दौरान लड़की ने कहा कि आरोपी याचिकाकर्ता उसका पति है और उसने अपनी इच्छा से उससे शादी की है। ट्रेन में यात्रा के दौरान लड़की का आलम से विवाद हो गया जिसके बाद बजरंग दल के एक सदस्य ने आलम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसने 10वीं कक्षा की छात्रा का अपहरण कर लिया है। शिकायत के अनुसार आलम ने लड़की का धर्म परिवर्तन कराया। मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 363 (अपहरण), 366 (शादी के लिए मजबूर करने के वास्ते अपहरण), 506 (आपराधिक धमकी), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 44

विवाद पति-पत्नी में सेक्स को लेकर एकमत नहीं होने की वजह से है: HC

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन सुख को पति-पत्नी के बीच जारी झगड़े की वजह बताते हुए केस खारिज कर दिया है। दरअसल, उच्च न्यायालय एक महिला की तरफ से पति के खिलाफ दर्ज केस की सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने यातना, दहेज और अप्राकृतिक संबंध बनाने के आरोप लगाए थे। दोनों की शादी साल 2015 में हुई थी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने केस खारिज करते हुए कहा, 'पीड़ित के बयान और FIR की बारीकी से जांच से पता चलता है कि यदि कोई यातना या हमला किया गया है, तो वह दहेज की किसी मांग के लिए नहीं, बल्कि आवेदक क्रमांक 1 की सेक्स की इच्छाओं को ऑपोजिट पार्टी क्रमांक 3 की तरफ से इनकार किए जाने पर किया गया।' मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने कहा, '…यह जाहिर है कि विवाद पार्टियों के सेक्स को लेकर एकमत नहीं होने की वजह से है। जिसके कारण दोनों के बीच विवाद था और उस विवाद के कारण तत्काल FIR दर्ज कराई गई थी…।' रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा, 'अगर एक पुरुष अपनी पत्नी से और महिला अपने पति से सेक्स की मांग नहीं करेगी, तो सभ्य समाज में वह यौन इच्छाओं को पूरा करने के लिए कहां जाएंगे।' महिला के आरोप- नग्न घूमता था पति दोनों की शादी साल 2015 में हुई थी। इसके बाद पुरुष और उसके परिवार ने कथित तौर पर महिला से दहेज की मांग की। महिला के आरोप थे कि दहेज की मांग पूरी नहीं करने पर उसके साथ हिंसा की गई थी। महिला का यह भी कहना था कि पति को शराब की लत है और वह उससे अप्राकृतिक सेक्स की मांग करता है। उन्होंने आरोप लगाए थे कि पति पोर्न फिल्में देखता है और उसके सामने बगैर कपड़ों के घूमता है और हस्तमैथुन करता है। जब उसने इन बातों पर आपत्ति जताई, तो पति ने कथित तौर पर उसके साथ हिंसा की। महिला के आरोप थे कि सिंगापुर में भी पति ने उसे यातना दी थी। इसके बाद पति और उसके परिवार के खिलाफ IPC की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था। इसके बाद पति और उसका परिवार हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट का यह मानना था कि पत्नी ने पति और उसके परिवार पर यातना के अस्पष्ट आरोप लगाए थे। कोर्ट ने कहा, 'किसी भी घटना में ओपोजिट पार्टी क्रमांक 3 को चोट नहीं पहुंची है। ऐसे में मामले के तथ्यों से कोर्ट की राय से किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता है कि यह IPC की धारा 498 के तहत क्रूरता का अपराध है…।' Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 41

अमेरिका में बसने गयी एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच का निर्देश दिया: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

प्रयागराज इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सीबीआई और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भारत से अपने पति के साथ अमेरिका के सिएटल में बसने गयी एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने मेरठ जिले की कल्पना माहेश्वरी द्वारा दायर याचिका पर यह निर्देश पारित किया। पीठ ने कहा, “मौजूदा मामले में यह स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 188 के तहत जांच करने के लिए राज्य सरकार की सहमति लेने की कोई जरूरत नहीं है। फिर भी, राज्य सरकार ने मौजूद मामले में सीबीआई जांच कराने की अपनी सहमति के बारे में विदेश मंत्रालय को अवगत करा दिया था।” अदालत ने कहा, “सीबीआई और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग हालांकि अनावश्यक रूप से तकनीकी मुद्दे उठाते रहे और अमेरिका में याचिकाकर्ता की बेटी की मौत की जांच कराने के लिए कोई सार्थक कार्रवाई करने के बजाय एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। हमने देखा कि लघु जवाबी हलफनामा दाखिल कर केंद्र और अन्य प्रतिवादी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे हैं।” इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, याचिकाकर्ता की बेटी अंशु माहेश्वरी का विवाह 27 नवंबर, 2020 को सुमित बिनानी के साथ हुआ था। इसके बाद, दोनों अमेरिका चले गए जहां सिएटल में एक घर में हुए विस्फोट में याचिकाकर्ता की बेटी की मृत्यु हो गई। जब याचिकाकर्ता को इस बारे में पता चला, उन्होंने 28 सितंबर, 2023 को मेरठ के मेडिकल कॉलेज पुलिस थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई जिसमें सुमित बिनानी के खिलाफ दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाया गया। प्राथमिकी की एक प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई। मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने 15 अक्टूबर, 2023 को मेरठ जोन के आईजी को एक रिपोर्ट सौंपते हुए इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की क्योंकि अपराध भारत से बाहर किया गया था। अंततः इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया, लेकिन सीबीआई की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई जिस पर याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।   Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 45

UP विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध का मकसद धार्मिक आजादी की गारंटी देना है, जो भारत के सामाजिक सद्भावना को बनाए रखना -HC

इलाहाबाद इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने जबरन इस्लाम कबूल करवाने और यौन शोषण करने के आरोपी की जमानत खारिज करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 का मकसद सभी व्यक्तियों को धार्मिक आजादी की गारंटी देना है, जो भारत के सामाजिक सद्भावना को दर्शाता है. इस अधिनियम का उद्देश्य भारत में धर्मनिरपेक्षता की भावना को बनाए रखना है. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने आगे कहा कि संविधान हर शख्स को अपना धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है लेकिन यह व्यक्तिगत अधिकार धर्म परिवर्तन करवाने के सामूहिक अधिकार में तब्दील नहीं होता क्योंकि धार्मिक स्वतंत्रता धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरित होने वाले व्यक्ति दोनों को समान रूप से प्राप्त होती है. क्या है पूरा मामला? हाई कोर्ट ने ये टिप्पणी अजीम नाम के शख्स को जमानत देने से इनकार करते हुए की है. याचिकाकर्ता, अजीम पर एक लड़की को जबरन इस्लाम कबूल करवाने और उसका यौन शोषण करने के आरोप में धारा 323/504/506 आईपीसी और धारा 3/5(1) उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत केस दर्ज किया गया है. आवेदक-आरोपी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया है. उसने दावा किया कि सूचना देने वाली लड़की, जो उसके साथ रिश्ते में थी, स्वेच्छा से अपना घर छोड़कर चली गई थी और उसने पहले ही संबंधित मामले में धारा 161 और 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयानों में अपनी शादी की पुष्टि कर दी थी. दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने आरोपी की जमानत का विरोध करते हुए धारा 164 सीआरपीसी के तहत सूचना देने वाले के बयान का हवाला दिया, जिसमें इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया गया था और धर्म परिवर्तन के बिना की गई शादी की बात कही गई थी. इन तथ्यों के बैकग्राउंड में कोर्ट ने कहा कि सूचना देने वाले ने धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज अपने बयान में साफ तौर से कहा था कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार के सदस्य उसे इस्लाम धर्म अपनाने को मजबूर कर रहे थे. उसे बकरीद के दिन की जा रही पशु बलि देखने और मांसाहारी भोजन पकाने और खाने के लिए भी मजबूर किया गया था. कोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदक ने उसे कथित तौर पर बंदी बनाकर रखा था और परिवार के सदस्यों ने उसे कुछ इस्लामी अनुष्ठान करने के लिए मजबूर किया था, जो उसे स्वीकार्य नहीं था. इसके अलावा, कोर्ट ने माना कि धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान में एफआईआर के वर्जन को बरकरार रखा था. महत्वपूर्ण रूप से, न्यायालय ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता यह प्रदर्शित करने के लिए कोई भी कंटेंट रिकॉर्ड पर नहीं ला सका कि विवाह/निकाह होने से पहले लड़की को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए 2021 के अधिनियम की धारा 8 के तहत एक आवेदन दायर किया गया था. तथ्यों व परिस्थितियों को देखने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जमानत अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि 2021 के अधिनियम की धारा 3 और 8 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन है, जो 2021 के अधिनियम की धारा 5 के तहत दंडनीय है. Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 58

अनजाने में जातिसूचक शब्द के प्रयोग से नहीं चल सकता एससी-एसटी एक्ट का केस :इलाहाबाद हाई कोर्ट

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि यदि आरोपित नहीं जानता कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है तो विवाद होने पर एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। कोर्ट ने जालौन जिले में टवेरा कार की सामने से आल्टो कार में टक्कर मारना और गाली-गलौच, मार-पीट करने पर आईपीसी सहित एससी-एसटी एक्ट में दर्ज आपराधिक केस कार्यवाही रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा कि विवेचना अधिकारी ने सतही तौर पर विवेचना की। किसी चश्मदीद गवाह का बयान नहीं लिया और यह पता करने की कोशिश नहीं की कि क्या घटना पर एससी-एसटी एक्ट का अपराध बनता भी है या नहीं और चार्जशीट दाखिल कर दी। किसी के चोटिल होने की रिपोर्ट नहीं है और पहचान परेड भी नहीं कराई गई। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा कि जब आरोपित को मालूम ही नहीं था कि शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति का है और अनजाने में अपमानित किया गया है तो एससी-एसटी एक्ट लागू नहीं होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने नसीम खान, फहीम व पांच अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने 27 जून 19 को दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश व सम्मन रद्द कर दिया है। मालूम हो कि शिकायतकर्ता आल्टो कार चला रहा था। याची व अन्य आरोपित टवेरा कार चला रहे थे। पेट्रोल पम्प पर याची ने अपनी कार से ऑल्टो में टक्कर मारी और मार-पीट की। जिस पर एफआईआर दर्ज की गई थी। ST/SC Act का दुरुपयोग चिंतनीय: इलाहाबाद हाई कोर्ट देश में एससी-एसटी ऐक्ट के दुरुपयोग को लेकर अक्सर सवाल उठाए जाते हैं। ये सवाल यूँ ही नहीं उठाए जाते हैं, इसके ऐसे कई उदाहरण हैं कि फर्जी SC-ST के कारण कई लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह हो गई। कई लोगों के जीवन के अनमोल वर्ष जेल में बीते और बाद में पता चला कि केस झूठा था। ऐसे ही एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और कठोर टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई करने के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी के इशारे पर एक पति-पत्नी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार ने कहा, “अगर उत्तर प्रदेश में इस प्रकार की गतिविधियों की अनुमति किसी और के द्वारा नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी के द्वारा दी जाती है तो यह न्यायालय अपने कर्तव्य में असफल होगा। यहाँ भू-माफियाओं, राजस्व अधिकारियों और तत्कालीन एसएचओ की मिलीभगत है, जिसमें एक जोड़े को गलत तरीके से आपराधिक कार्यवाही में फंसाया गया है और उन्हें दर-दर भटकने के लिए मजबूर किया गया।” याचिकाकर्ता अलका सेठी और उनके पति ध्रुव सेठी द्वारा दायर याचिका पर FIR रद्द करने का आदेश कोर्ट ने दे दिया। याचिकाकर्ताओं पर आरोप था कि सतपुड़ा में सड़क के खसरा नंबरों का लेखपाल निरीक्षण कर रहा था। इस दौरान अलका और उनके पति से लेखपाल का सामना हुआ। याचिका के अनुसार दोनों दंपत्ति ने लेखपाल को जातिसूचक गालियाँ दीं। कथित तौर पर ध्रुव सेठी ने कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह उसकी पत्नी के साथ बदतमीजी और भ्रष्टाचार के मुकदमे में फँसा देगा। आरोप है कि याचिकर्ता ने लेखपाल को बंधक बना लिया था और बिहारीगढ़ एसएचओ के हस्तक्षेप के बाद लेखपाल को रिहा कराया जा सका। इसके बाद लेखपाल ने SC/ST ऐक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पति-पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज करा दी। इसके बाद पूरे आपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम), सहारनपुर द्वारा पारित समन एवं आरोप पत्र को चुनौती देते हुए पति-पत्नी ने अदालत का रुख किया। इस पर तर्क दिया गया कि ध्रुव सेठी ने जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था और म्युटेशन के बाद सीमांकन के लिए आवेदन किया था। सीमांकन के आदेश के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने इसे पूरा नहीं किया। अधिकारी सीमांकन नहीं कर रहे थे और इसके लिए आवेदकों को इधर-उधर दौड़ा रहे थे। जब उन पर दबाव डाला गया तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सीमांकन पक्षों के सामने कराया जाएगा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उन्होंने आवेदकों की अनुपस्थिति में सीमांकन करना शुरू कर दिया। जब इसका विरोध किया गया तो हाथापाई शुरू हो गयी। दंपति ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय भू-माफिया, जिनका उस क्षेत्र में और राजस्व पर भी प्रभाव था, और स्थानीय पुलिस अधिकारी ने एक साजिश रची। वे उनकी जमीन हड़पना चाहते थे। इसी वजह से उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी। इसके साथ ही दंपति ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि लेखपाल की जाति क्या है और ना ही जाति से संबंधित उन्होंने कोई बात कही। इस पर न्यायालय ने कहा कि चौंकाने वाली बात है कि ST/SC ऐक्ट के प्रावधानों का कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत प्रतिशोध, व्यक्तिगत हितों या खुद को बचाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। न्यायालय ने कहा कि यह कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एक भी सबूत नहीं था कि उन्हें लेखपात की जाति के बारे में पता था। कोर्ट ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि आवेदकों ने लेखपाल के खिलाफ जाति-संबंधी शब्दों का इस्तेमाल किया था। राजस्व अधिकारी को बाँधने की घटना को भी कोर्ट ने अविश्वसनीय बताया और कहा कि एक महिला एवं एक पुरुष इतने लोगों कैसे हावी हो सकते हैं और एक व्यक्ति को बाँध सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि FIR पढ़ने से कोई मामला नहीं बनता। इसलिए इसे रद्द किया जाता है। SC/ST Act के दुरुपयोग को लेकर कई कोर्ट सख्त यह कोई पहली बार नहीं है कि किसी कोर्ट ने ST/SC ऐक्ट के गलत इस्तेमाल पर इस तरह की कठोर टिप्पणी की है। इससे पहले इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। फरवरी 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे ही व्यक्ति को निर्दोष करार दिया था, जो पिछले 20 वर्षों से जेल में कैद था। व्यक्ति को बलात्कार के आरोप और SC/ST एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपित की रिहाई की बात कहते हुए मामले पर तल्ख़ टिप्पणी भी … Read more