दातासिंह वाला बॉर्डर सील: चार लेयर सुरक्षा में रोका गया किसानों का जत्था, 29 अगस्त तक पड़ाव का ऐलान

Datasinghwala border sealed: Farmers’ convoy halted by four-layer security; encampment announced until August 29. नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने दातासिंह वाला (खनौरी) बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रविवार को बॉर्डर को चार लेयर सुरक्षा घेरे में सील कर दिया गया। पंजाब की ओर से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे 51 किसानों के जत्थे को हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया गया। किसानों और प्रशासन के बीच करीब डेढ़ घंटे में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कराने और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक वे 29 अगस्त तक बॉर्डर पर ही पड़ाव जारी रखेंगे। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत दोपहर बाद पंजाब की ओर से किसानों का जत्था हरियाणा की तरफ बढ़ा तो प्रशासन ने किसान नेताओं के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में काका सिंह कोटड़ा, बलदेव सिंह सरसा, इंद्रजीत पन्नीवाल, सुखदेव भोजराज और अमनजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा और एसपी कुलदीप सिंह ने किसानों की संख्या कम करने और मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा। किसान नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर बातचीत होनी चाहिए। पैदल दिल्ली जाने पर अड़े किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पैदल दिल्ली पहुंचना है। प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद किसान नेता पंजाब की ओर लौट गए और खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोबारा पड़ाव डाल दिया। किसानों ने ऐलान किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और 29 अगस्त तक बॉर्डर पर डटे रहेंगे। हरियाणा के किसानों को भी हिरासत में लिया गया दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हरियाणा के 33 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, कैथल की ओर से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के नेतृत्व में बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे 18 किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। शुभकरण सिंह की मौत स्थल से मिट्टी लेकर जाएंगे दिल्ली किसानों ने आंदोलन को भावनात्मक रूप देने के लिए खनौरी में उस स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 21 फरवरी 2024 को किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी। किसान नेताओं के अनुसार, इस मिट्टी को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। गैर-एसकेएम किसान संगठनों की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस मिट्टी को दिल्ली ले जाने की बात कही गई है। आंदोलन फिर गरमाने के संकेत दातासिंह वाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा और किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास के बीच एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन किसानों को हरियाणा में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं है, वहीं किसान अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बॉर्डर पर सुरक्षा और आंदोलन दोनों को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। recent visitors 13

MP NEWS खाद बिक्री बंद: पोर्टल के मिलान के नाम पर किसानों पर फिर संकट, सरकार के किसान हितैषी दावों पर उठे सवाल

MP NEWS: Fertilizer sales halted: Farmers face another crisis due to portal matching, raising questions about the government’s farmer-friendly claims. भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों को खेती के लिए खाद की जरूरत के बीच सरकार के एक आदेश ने नई चिंता खड़ी कर दी है। सामने आए आदेश के मुताबिक 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से प्रदेश में उर्वरक की बिक्री आगामी आदेश तक बंद कर दी गई है। आदेश में भारत सरकार के FMS पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का Reconciliation यानी मिलान किए जाने का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार बिक्री बंद रहने की अवधि में विपणन संघ के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संबंधित केंद्रों से किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक का विक्रय नहीं किया जाएगा। पोर्टल का मिलान जरूरी, लेकिन किसानों की परेशानी का क्या? सरकार की ओर से स्टॉक और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान पारदर्शिता तथा वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया का सीधा असर किसान पर क्यों पड़े? खेती के मौसम में किसान को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री अचानक रोकने के फैसले से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों की चिंता रहती है। किसान पूछ रहे—खाद चाहिए या पोर्टल की प्रक्रिया? सरकार लगातार किसान हित और कृषि को प्राथमिकता देने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद बिक्री रोकने के आदेश ने सरकार की किसान-हितैषी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का सवाल है कि FMS पोर्टल का स्टॉक मिलान विभागीय स्तर पर करते हुए खाद की बिक्री जारी क्यों नहीं रखी जा सकती? यदि व्यवस्था में तकनीकी या स्टॉक संबंधी समस्या है तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते? क्या यह फैसला किसान विरोधी साबित होगा? विपक्ष और किसान संगठनों को सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। किसानों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी सिस्टम की तकनीकी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का बोझ आखिरकार अन्नदाता पर ही डाला जा रहा है। सरकार से किसानों के सवाल खाद बिक्री बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? बिक्री दोबारा शुरू करने की निश्चित तारीख क्यों नहीं बताई गई? स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी? इस दौरान जरूरतमंद किसानों को खाद कैसे मिलेगी? यदि किसी किसान की फसल खाद के अभाव में प्रभावित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब निगाह इस बात पर है कि सरकार खाद बिक्री दोबारा कब शुरू करती है और किसानों को इस दौरान खाद उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है। recent visitors 12

सीएम योगी बोले- 1947 का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण, पीएम मोदी होते तो कोई बाल भी बांका न कर पाता

CM Yogi said the Partition of 1947 was proof of the Congress’s cowardice; had PM Modi been in charge, no one could have caused even the slightest harm. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 में हुआ देश का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण है। उस समय अगर सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री होते या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व देश के पास होता तो कोई भी हमारे देश का बाल भी बांका नहीं कर पाता पर कांग्रेस की बुजदिली के कारण देश का बंटवारा हुआ। इस दौरान लाखों की संख्या में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों का कत्लेआम हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दो कारणों से भारत गुलाम हुआ था जिनमें से एक कारण आपसी अंतर्विरोध था। जाति, क्षेत्र और भाषा को लेकर अंतर्विरोध और षड्यंत्रों के कारण देश कमजोर होता चला गया। इसका परिणाम गुलामी के रूप में आया। अंतर्विरोधों के कारण हम सामूहिक रूप से लड़ ही नहीं सकें। इसका दुष्परिणाम सामने आना ही था। देश गुलाम हो गया। सनातन काल से जो भारत एक भारत था वो टुकड़ों में बंट गया। आजादी के बाद शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुईमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बंटरवारे के बाद कांग्रेस राज में शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुई। निजी संपत्तियां बनाई गईं। होना तो ये चाहिए था कि पाकिस्तान से जो हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख आए थे उन्हें बसाने के लिए मदद करनी चाहिए थी पर उनकी मदद नहीं की गई। जमीनों की बंदरबांट हुई। उन्होंन कहा कि पहले की तरह आज भी सपा और कांग्रेस की मानसिकता विभाजनकारी है। ये लोग देश को और समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। सीएम योगी ने निकाला पैदल मार्च, डिप्टी सीएम हुए शामिलविभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ में पटेल प्रतिमा से लेकर लोकभवन तक पैदल मार्च निकाला गया जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। recent visitors 8

बच्चों के वार्ड के बेड पर कुत्ता! MP के सरकारी अस्पताल का VIDEO वायरल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल

A dog on a bed in the children’s ward! Video from an MP government hospital goes viral; serious questions raised about the healthcare system. छतरपुर । जिले में स्थित एक सरकारी अस्पताल के वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया। जिले के लवकुशनगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था और साफ-सफाई की पोल खोलती एक गंभीर वीडियो सामने आई है। अस्पताल के वार्ड में मरीजो और बच्चों के इलाज के लिए लगाए गए बेड पर एक कुत्ते के आराम करने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। वीडियो सामने आने के बाद मरीजों में इन्फेक्शन के खतरे को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। इलाज कराने आए तीमारदार ने बनाया वीडियो, मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़मिली जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में अपने मरीज का इलाज कराने आए एक तीमारदार ने बच्चो के वार्ड में बेड पर कुत्ते को आराम फरमाते हुए देखा और इसे अपने कैमरे में कैद कर लिया। सोशल मीडिया पर वीडियो (Children Ward Dog Video)सामने आते ही अस्पताल प्रशासन की लापरवाही, सैनिटाइजेशन और सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकारी अस्पतालों में संक्रमण रोकने के लिए जहां सख्त सफाई के दावे किए जाते है, वहीं बच्चों के वार्ड तक आवारा कुत्ते का पहुंच जाना मरीजों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ माना जा रहा है। मरीजों में आक्रोश, तत्काल सुधार की रखी मांगमरीज के परिजनों का कहना है कि अस्पताल परिसर और वार्डों में आवारा जानवरों की मौजूदगी से हमेशा इंफेक्शन और काटने का खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से व्यवस्था लचर होतीं जा रही हैं। उन्होंने प्रबंधन से परिसर में बाहरी जानवरो के प्रवेश पर सख्त रोक लगाने और सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। मरीजों की सेहत से खिलवाड़: संक्रमण का बड़ा खतराइन्फेक्शन का खतरा: आवारा कुत्तों से रैबीज, त्वचा रोग और अन्य गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का जोखिम हमेशा बना रहता है। स्वच्छता पर सवाल: जिस बेड पर मरीज को रखकर इलाज किया जाना है, वहां जानवरों का बैठना साफ-सफाई के दावों पर सीधा तमाचा है। सीएमएचओ ने दिए जांच के निर्देशइस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरपी गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए बताया कि प्रकरण ध्यान में आया है। संबंधित अस्पताल प्रभारी व अधिकारियों से तत्काल इस लापरवाही पर जवाब-तलब किया गया है और मामले की जांच के निर्देश दिए गए है। recent visitors 15

MP में 24×7 खुलेंगे Hotel-Mall-Shops! राज्यपाल की मंजूरी के बाद नए नियम लागू, जानिए पूरी खबर

Hotels, malls, and shops in MP to remain open 24×7! New rules implemented following the Governor’s approval—read the full story. भोपाल । मध्यप्रदेश में होटल, मॉल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक संस्थान अब दिन ही नहीं, बल्कि पूरी रात भी खुले रह सकेंगे. मध्यप्रदेश विधानसभा के बाद अब राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026 को अपनी मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही यह अधिनियम अब प्रदेश भर में लागू हो गया है. प्रदेश में होटल, मॉल आदि प्रतिष्ठिान 24 घंटे और सभी 7 दिन खुल सकेंगे. इससे लोग रात में भी जाकर खरीदारी कर सकेंगे. इसके साथ ही लोगों को भी रात में काम के अवसर मिलेंगे. संस्थानों को अलग-अलग शिफ्ट में कर्मचारियों को रखना होगा. हालांकि, शराब की दुकानों की समय सीमा का निर्णय स्थानीय प्रशासन लेगा. कराना होगा सिर्फ एक बार रजिस्ट्रेशनराज्य सरकार ने नए अधिनियम में संस्थानों के लिए अपने प्रतिष्ठिान के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आसान कर दी है. अब संस्थान को इसकी नियमानुसार विभाग को सूचना देनी होगी. इसके बाद उनका रजिस्ट्रेशन कर उन्हें इसका सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा. रजिस्ट्रेशन बार-बार रिन्यु नहीं कराना होगा. संस्थान बंद होने पर लिखित में इसकी सूचना देनी होगी, इसके बाद रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा. काम के घंटे लेबर लॉ के हिसाब से हीभले ही मॉल, दुकान और अन्य संस्थानों को 24 घंटे खोलने का नियम बना दिया गया हो, लेकिन संचालकों को कर्मचारियों को रखने और उसने कार्य कराने के लिए श्रम विभाग के न्यूनतम कार्य के घंटों के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. किसी भी कर्मचारी से हर दिन के निर्धारित और साप्ताहिक 48 घंटों से अधिक काम कराने की अनुमति नहीं होगी. रात्रि के समय महिलाओं को भी काम की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए नियोक्ता को सुरक्षा, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करनी होगी. अतिरिक्त काम कराने के लिए संस्थान को ओवरटाइम वेतन कर्मचारी को देना होगा. दवाब बनाने नहीं रख सकेंगे कर्मचारी के डॉक्युमेंटनए नियमों में कर्मचारियों के मूल डॉक्युमेंट और कोई अन्य सामान संस्थान द्वारा रखे जाने पर रोक लगा दी है. दरअसल, कई बार शिकायतें सामने आती हैं कि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के मूल दस्तावेज या कोई दूसरा सामान रख लिया जाता है, ताकि कर्मचारी काम छोड़कर न जा सके. नई संहिता में कर्मचारियों की सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में भी प्रावधान किया गया है. प्रतिष्ठान को कार्यस्थल पर साफ-सफाई, सुरक्षा उपकरण और आपात स्थिति से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी. शिकायतों के लिए बनाई जाएंगी समितियांकर्मचारियों की समस्याओं को निपटाने के लिए समितियां बनाई जाएंगी. कर्मचारी संबंधित समितियों और इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी को अपनी शिकायत दर्ज करा सकें. श्रम विभाग को अधिकार होंगे कि वे जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रतिष्ठिान की जांच कर सकेंगे और दस्तावेज मांगकर उसकी जांच कर सकेंगे. यदि जांच के दौरान किसी तरह के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी. recent visitors 19

भारत माता की प्रतिमा में तिरंगे की जगह RSS का झंडा; राजगढ़ के ब्यावरा में बड़ा सियासी बवाल

RSS flag replaces the Tricolour in a statue of Bharat Mata; major political uproar in Rajgarh’s Biaora. राजगढ़/ ब्यावरा । नगर पालिका द्वारा गुना बाईपास स्थित कमला लॉज के सामने शासकीय भूमि पर लगाई जा रही भारत माता की प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।शहर एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रतिमा में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के स्थान पर आरएसएस का झंडा लगाया जा रहा है, जो राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। तिरंगे का अपमान करने का आरोपकांग्रेस ने कहा कि भाजपा एक ओर तिरंगा यात्रा निकाल रही है, दूसरी ओर तिरंगे का अपमान कर रही है। जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह के निर्देश पर कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि विमोचन से पहले प्रतिमा के हाथों में सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया जाए।इस मांग को लेकर कांग्रेस द्वारा 13 अगस्त को दोपहर 12 बजे एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन दिया जाएगा। recent visitors 17

रसोई का बजट बिगड़ा! 4.45% पहुंची महंगाई, जानिए क्या-क्या हुआ महंगा

Kitchen budget hit! Inflation reaches 4.45%; find out what has become costlier. रसोई घर से लेकर आपकी जेब तक, महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा बुधवार को जारी ताजा आर्थिक आंकड़ों ने आम लोगों की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है। जुलाई के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 4.45% पर पहुंच गई है, जो इससे पिछले महीने यानी जून में 4.38% थी। हालांकि यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 4.50% के अनुमान से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के तय लक्ष्य से लगातार ऊपर बना हुआ है। यह इस साल नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई शृंखला और नए कंजम्पशन बास्केट को अपनाने के बाद से महंगाई का सबसे उच्चतम स्तर है। जुलाई में महंगाई अचानक क्यों बढ़ गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों (खाद्य पदार्थों) के ऊंचे दाम हैं, जिन्होंने आम जनता के बजट को प्रभावित किया है। खाद्य महंगाई दर (कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स) जून के 5.32% से उछलकर जुलाई में 5.52% पर पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि गांवों में रहने वाले लोगों पर इसकी मार शहरों से ज्यादा पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह थोड़ा कम यानी 5.05% दर्ज की गई। किन सब्जियों ने रसोई का बजट बिगाड़ा और कहां मिली थोड़ी राहत?यदि आप सब्जी मंडी जा रहे हैं, तो कुछ खास मसालों और सब्जियों के दाम आपके होश उड़ा सकते हैं: प्याज: प्याज की महंगाई दर जून के 4.73% से सीधे छलांग लगाकर जुलाई में 22.54% पर पहुंच गई है।लहसुन: लहसुन की महंगाई दर भी 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई है।अदरक: अदरक ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए; इसकी महंगाई दर 50.41% से बढ़कर सीधे 83.62% के बेहद खौफनाक स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि, इस चौतरफा तेजी के बीच कुछ सब्जियों के दामों में गिरावट (डिफ्लेशन) भी दर्ज की गई जिससे थोड़ी राहत मिली। आलू के दाम पिछले साल की तुलना में 16.56% कम हुए। भिंडी में 5.52% की गिरावट आई, जबकि मटर (-5.27%) और टमाटर (-4.59%) भी सस्ते हुए हैं। रोजमर्रा की दूसरी जरूरतें और सेवाएं कितनी महंगी हुई हैं?महंगाई की यह आंच सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ी हैं: यातायात:ट्रांसपोर्ट महंगाई जून के 4.31% से बढ़कर जुलाई में 4.43% हो गई, जबकि माल ढुलाई की दरें 7.77% पर आ गईं।पर्सनल केयर: व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध सेवाओं की महंगाई दर सबसे अधिक 14.77% पर बनी हुई है, जिसमें अन्य व्यक्तिगत सामानों के दाम 43.54% तक बढ़े हैं।होटल और रेस्टोरेंट: रेस्टोरेंट और आवास सेवाओं की महंगाई दर 7.72% दर्ज की गई।शिक्षा और स्वास्थ्य: इस दौरान कपड़े और जूते-चप्पलों में 3.38%, शिक्षा में 3.64%, मकान किराए में 2.22% और स्वास्थ्य क्षेत्र में 1.34% की महंगाई दर्ज की गई। आरबीआई का महंगाई पर क्या सोचना है और क्या आगे राहत मिलेगी?भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को खुदरा महंगाई दर को 4% पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, जिसमें 2% से 6% का एक सहिष्णुता बैंड तय है। आरबीआई के अधिकारी मल्होत्रा ने साफ किया है कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और महंगाई पर काबू पाना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है। एक राहत की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सप्लाई सुधरने की वजह से आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। इसके अलावा, मुख्य कीमती धातुओं को छोड़कर अन्य कोर महंगाई अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है। आने वाले महीनों में महंगाई की रफ्तार कैसी रहेगी?आरबीआई और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले निकट भविष्य में मुख्य महंगाई दर में अभी थोड़ा और उछाल आ सकता है और इस साल की तीसरी तिमाही (Q3) में यह अपने चरम पर पहुंच सकती है। आरबीआई के तिमाही अनुमानों के मुताबिक: दूसरी तिमाही (Q2): महंगाई दर 4.7% रहने का अनुमान है (पहले के 5.1% के अनुमान से कम)।तीसरी तिमाही (Q3): इसमें उछाल आ सकता है और यह 5.9% के स्तर को छू सकती है।चौथी तिमाही (Q4): इसके बाद इसमें थोड़ी नरमी आएगी और यह घटकर 5.5% पर आ जाएगी।इसके बाद वित्तीय वर्ष के अंत तक कोर महंगाई और सामान्य महंगाई में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है। recent visitors 16