जबलपुर शहर में यातायात नियंत्रित बना बीमारी, चार चौराहों पर नए सिग्नल लगाने की तैयारी

Traffic management has become a problem in Jabalpur city; preparations are underway to install new signals at four intersections. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर शहर में यातायात नियंत्रित करने के लिए 23 प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं, इसके बावजूद लगभग हर प्रमुख चौराहे पर जाम की स्थिति बन रही है। कहीं सड़क किनारे अतिक्रमण और ठेले-टपरे यातायात की राह रोक रहे हैं, तो कहीं बेतरतीब पार्किंग के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सिग्नल होने के बावजूद कई वाहन चालक लाल बत्ती की अनदेखी कर निकल जाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था बिगड़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नियम तोड़ने वालों के चालान भी किए जा रहे हैं, लेकिन सड़क पर व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बरकरार है। यातायात पुलिस के दस्तावेज के अनुसार, नगर निगम ने रानीताल चौक, रामपुर चौक, एकता चौक और बलदेवबाग चौक पर नए ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव दिया है। दूसरी ओर, दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर रोटरी होने के कारण सिग्नल लगाने में बाधा है। इन स्थानों पर यातायात सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है। हालांकि, नए सिग्नल लगाने के प्रस्तावों पर अब तक की कार्रवाई और स्थापना की समयसीमा नहीं है। सिर्फ सिग्नल लगाने से नहीं सुधरेगी व्यवस्थाचौराहों पर यातायात सुधारने के लिए नए सिग्नल लगाने के साथ मौजूदा व्यवस्थाओं को भी प्रभावी बनाना जरूरी है। सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने, ठेले-टपरों को निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित करने, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने और लाल बत्ती तोड़ने वालों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। चौराहों की बनावट, डिवाइडर, सड़क संकेतक और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्तों की समीक्षा भी जरूरी है। लाल बत्ती तोड़कर निकलते वाहन, बढ़ रहे चालानट्रैफिक सिग्नल लगे होने का उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को निर्धारित क्रम में संचालित करना है, लेकिन नियमों की अनदेखी इस व्यवस्था को कमजोर कर रही है। वाहन चालक लाल बत्ती होने के बावजूद चौराहे से निकलने का प्रयास करते हैं। इससे दूसरे मार्ग से आने वाले वाहनों के साथ टकराव का खतरा बढ़ जाता है। दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर बड़ी चुनौतीशहर के दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर रोटरी होने के कारण ट्रैफिक सिग्नल स्थापित करने में दिक्कत है। ऐसे में इन चौराहों पर सड़क की बनावट, यातायात संकेतक, लेन अनुशासन और पुलिस की निगरानी के जरिए यातायात नियंत्रित करने की जरूरत है। नए चौराहों में सिग्नल लगाने के लिए यातायात विभाग ने प्रस्ताव बनाया है लेकिन यह कब तक लगेंगे यह साफ नहीं है। इन चार चौराहों पर नए सिग्नल प्रस्तावितरानीताल चौक : यातायात को नियंत्रित करने के लिए सिग्नल लगाने का प्रस्ताव।रामपुर चौक : वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित करने के लिए नई व्यवस्था की जरूरत।एकता चौक : यातायात प्रबंधन के लिए सिग्नल लगाने की योजना प्रस्तावित।बलदेवबाग चौक : चौराहे पर यातायात नियंत्रण के लिए नए सिग्नल का प्रस्ताव।सिग्नल लगे, लेकिन सड़क पर व्यवस्था नदारद जबलपुर शहर के गोहलपुर चौराहा, ब्लूम चौक, नागरथ चौक, रद्दी चौकी, घमापुर चौक, तीनपत्ती चौक, लेबर चौक, मढ़ाताल तिराहा, नौदरा ब्रिज, उखरी तिराहा, पेंटीनाका, आधारताल तिराहा, अहिंसा चौक, दर्शन तिराहा, सगड़ा तिराहा और जबलपुर अस्पताल तिराहा सहित 23 प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं। इसके बावजूद कई चौराहों पर यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है। इसकी एक बड़ी वजह सड़क किनारे होने वाले अतिक्रमण और अवैध कब्जे हैं। चौराहों के आसपास ठेले-टपरे लगने और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है। ऐसे में सिग्नल हरा होने के बाद भी वाहन आसानी से आगे नहीं बढ़ पाते। कुछ स्थानों पर सड़क की बनावट और वाहनों के अनियंत्रित आवागमन से भी परेशानी बढ़ती है। recent visitors 13

हेड कॉन्स्टेबल निकला 6.26 करोड़ की संपत्ति का मालिक, 15 ठिकानों पर लोकायुक्त छापा

Head Constable found to own assets worth ₹6.26 crore; Lokayukta raids 15 locations. इंदौर । इंदौर और देवास जिलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार सुबह एक पुलिसकर्मी के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने सुबह छह 6 बजे से देवास और इंदौर में स्थित कुल 15 ठिकानों पर एक साथ सर्चिंग अभियान चलाया। करोड़ों की संपत्ति और अनुपातहीन आय का खुलासाशुरुआती जांच के दौरान आरोपी हेड कॉन्स्टेबल के पास लगभग 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, यह संपत्ति उसकी वैध आय से करीब 223 फीसदी अधिक है। एसपी राजेश सहाय ने जानकारी दी कि आरोपी को वेतन के रूप में लगभग 75 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है और अन्य सभी स्रोतों को मिलाकर उसकी कुल वैध आय करीब 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस विभाग की आड़ में प्रभाव का दुरुपयोगजांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी फिरोज खान पुलिस विभाग में अपने पद का धौंस जमाकर देवास क्षेत्र के विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करता था। उस पर अन्य लोगों के जरिए जमीनों की खरीद-फरोख्त करने, बेहिसाब संपत्तियों में भारी निवेश करने, परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर संपत्तियां खरीदने, कई वाहन रखने और लकड़ी का अवैध कारोबार करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। फर्मों के जरिए काले धन का लेन-देन और बेनामी निवेशलोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग कंपनी नाम से एक फर्म संचालित है, जिसके बैंक खातों में करोड़ों रुपये का भारी-भरकम लेन-देन हुआ है। इसके अलावा, आरोपी की परिचित रोशनी वर्मा द्वारा रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम से दूसरी फर्म चलाए जाने की जानकारी भी मिली है। जमीनों की खरीद में इन सभी की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद लोकायुक्त ने इन्हें भी मामले में आरोपी बनाया है। साथ ही, फिरोज खान ने रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट फर्म के माध्यम से रियल एस्टेट सेक्टर में भी भारी निवेश किया है। सांवेर में जमीन के सौदे और ठिकानों पर दबिशजांच के दौरान सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में लगभग 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़ा एक संदिग्ध मामला भी प्रकाश में आया है। इस जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के पुत्र और पिता के बीच विवाद चल रहा था, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवा लिया था। लोकायुक्त की टीम इस सौदे के दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है। वर्तमान में देवास में 11 और इंदौर में 4 ठिकानों पर आवासीय मकान, फ्लैट, कृषि भूमि, प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियों की तलाशी जारी है। इस पूरी कार्रवाई में 8 अधिकारियों की टीम बैंक खातों, निवेश के कागजातों और अन्य वित्तीय साक्ष्यों को खंगालने में जुटी हुई है। recent visitors 25

झूले से गिरकर बच्चे का पैर फ्रैक्चर, प्राचार्य और प्रबंधन को कोर्ट का नोटिस।

Child’s leg fractured after falling from a swing, court notice to principal and management. हरिप्रसाद गोहे  आमला। स्कूल परिसर में झूले से गिरकर छात्र का पैर फ्रैक्चर होने का मामला करीब डेढ़ साल बाद न्यायालय पहुंचा है। अप्रैल 2025 में हुई इस घटना में पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर पीड़ित बच्चे के पिता ने न्यायालय की शरण ली। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आमला के न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन प्रमुख को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत व्यक्तिगत उपस्थिति के नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने दोनों को आगामी 30 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इलाज में खर्च हुए 20 हजार, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप। परिवादी पिता के अनुसार हादसे में उनके बच्चे के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ था, जिसके उपचार में लगभग 20 हजार रुपए का खर्च आया। पिता ने स्कूल प्रबंधन पर बच्चों की सुरक्षा में कथित लापरवाही बरतने और हादसे के बाद उपचार खर्च में अपेक्षित सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया है। बताया गया कि घटना के बाद पुलिस और प्रशासन के समक्ष शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर पिता ने अधिवक्ता शिवम उपाध्याय के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। अब न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत संबंधित जिम्मेदारों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के नोटिस जारी किए गए हैं। बच्चों की सुरक्षा स्कूलों की अहम जिम्मेदारी। निजी स्कूलों की जिम्मेदारी बेहतर शिक्षा देने के साथ बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। खेल उपकरणों का सुरक्षित रखरखाव, समय-समय पर मेंटेनेंस और बच्चों की उचित निगरानी बेहद जरूरी है। हालांकि इस मामले में लापरवाही की वास्तविक जिम्मेदारी न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। यह घटना स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और हादसों की स्थिति में समय पर उचित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है। recent visitors 14

‘रोज 100 से 300 रुपये की भीख के बदले मिलता है सिर्फ खाना’, बच्चे का वीडियो वायरल

‘Gets only food in exchange for ₹100–₹300 in daily alms’ – video of child from Gwalior goes viral. ग्वालियर। बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के अभियान की पोल खोलता एक वीडियो सोमवार को वायरल हुआ। बैजाताल पर बैठे एक बच्चे से वीडियो में युवक बात कर रहा है जिसमें वह बता रहा है कि रोज 100 से 300 रुपये तक भीख मिलती है जिसे मुखिया को दे देता है और बदले में सिर्फ खाना मिलता है। बच्चे के ऐसे और भी कई साथी है, उसने खुद को फूलबाग पर रहना बताया। इस वीडियो से प्रशासन से लेकर बाल भिक्षावृत्ति रोकने वाले विभागों के अभियान पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पहले इसको लेकर तिराहों व सिग्नलों पर भीख मांगते बच्चों को रेस्क्यू करने का अभियान काफी चला था। ग्वालियर जिले में बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया था जिसमें इस अभियान में महिला बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, विशेष किशोर पुलिस इकाई, नेहरू युवा केंद्र और सेंटर फॉर डेवलपमेंट के सदस्य सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके बाद बीच-बीच में चलकर यह अभियान अब सक्रिय नहीं दिखता है। वर्तमान में हकीकत यह है कि मंदिरों से लेकर चौराहों व तिराहों के साथ सिग्नलों पर बाल भिक्षावृत्ति आसानी से देखी जा सकती है लेकिन कार्रवाई नहीं होती है। इधर, मालगाड़ी की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक की मौतबिरलानगर और रायरू रेलवे स्टेशन के बीच सोमवार सुबह मालगाड़ी की चपेट में आने से 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई। रेलवे ट्रैक के पास युवक का शव पड़ा होने की सूचना मिलने पर रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की टीम मौके पर पहुंची। पंचनामा की कार्रवाई के बाद शव को एंबुलेंस से ले जाया गया। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 6:55 बजे झांसी मंडल के नियंत्रण कक्ष से सूचना मिली कि बिरलानगर-रायरू के बीच किलोमीटर नंबर 1228/21 पर डाउन मालगाड़ी संख्या 156 से दुर्घटना हुई है। सूचना पर बिरलानगर में तैनात रेलवे सुरक्षा बल के आरक्षक धर्मवीर सिंह और नरपाल घटनास्थल पर पहुंचे। वहां रेलवे ट्रैक के पास एक युवक का शव पड़ा मिला। मौके पर बिरलानगर स्टेशन के पाइंट्समैन सुनील कुमार भी मौजूद थे। कुछ देर बाद जीआरपी ग्वालियर की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। मृतक की पहचान दीपक चौरसिया, उम्र 25 वर्ष के रूप में हुई। मौके पर पहुंचे उसके चचेरे भाई शिवदत्त ने उसकी पहचान की। हालांकि, घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मृतक के पास तलाशी के दौरान यात्रा टिकट, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य सामान नहीं मिला। पंचनामा की कार्रवाई के बाद जीआरपी ने सुबह करीब 10:30 बजे शव को आगे की कार्रवाई के लिए भिजवा दिया। पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है। recent visitors 17

तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे: फिर हिरासत में सौरव दास-रांका; दिपके बोले- प्रतिरोध को दबा नहीं सकते

Arrived at Jantar Mantar with the Tricolour: Sourav Das and Ranka detained again; Dipke says resistance cannot be suppressed. दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह तिरंगा लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सीजेपी की ओर से साझा की गई पोस्ट के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य समेत संगठन के अन्य सदस्य शामिल हैं। दिपके ने क्या-क्या कहा?सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है। दिपके ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों से कहा गया कि वे इस बार मतदान नहीं कर सकते तो अगली बार कर लेंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी यही कहेगा कि वह इस बार चुनाव न लड़ें और अगली बार लड़ लें? दिपके ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को बड़ा और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विपक्ष समेत पूरे देश को ऐसे प्रदर्शनों के लिए एकजुट होना चाहिए। पहले विमान से हिरासत, फिर रिहाई और अब जंतर-मंतर पर कार्रवाईकॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने पहली बार 10 अक्तूबर को हिरासत में लिया था। पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में पहुंचने की कोशिश में थे। पुलिस ने तीनों को दिल्ली हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से हिरासत में ले लिया। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहती थी। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद 11 अक्तूबर को तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया। प्रदर्शन की अनुमति लेने थाने पहुंचे थे रांका-दासरिहाई के बाद सीजेपी ने प्रदर्शन से पीछे हटने के बजाय आंदोलन जारी रखने का एलान किया। 12 अक्तूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। उन्होंने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए 24 घंटे के भीतर तारीख और समय तय करने की मांग की। उनका कहना था कि अगर पुलिस तारीख नहीं देती है, तो पार्टी खुद प्रदर्शन का एलान करेगी। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटा दिया। पुलिस ने प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान जैसे वैकल्पिक स्थान बताए। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग जारी रखी। इसी घटनाक्रम के बीच 13 अक्तूबर की सुबह सीजेपी के नेता और कार्यकर्ता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे समेत कई सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बार-बार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की क्यों हो रही है कोशिश?इसकी मुख्य वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर उठे सवाल हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और कई छात्र संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। प्रदर्शनकारी इसे मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। इसी विरोध के तहत 10 अक्तूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का एलान किया गया था। recent visitors 10

जबलपुर में नर्मदा नदी पर बनेगा 150 मीटर लंबा ब्रिज, हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम के सेंसर से होगी निगरानी

A 150-meter-long bridge will be built over the Narmada River in Jabalpur; it will be monitored by sensors from a health monitoring system. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर की 114 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड परियोजना का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। लगभग 3500 करोड़ रुपये की इस परियोजना में नर्मदा नदी पर 150 मीटर स्पान पर एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज बनाया जा रहा है। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं, अमझर से बरेला तक के पांचवें पैकेज में करीब 30 प्रतिशत काम हुआ है, जिसे दिसंबर 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। रिंग रोड बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होने और प्रमुख राजमार्गों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। ब्रिज की तकनीकी बारीकियों का निरीक्षणयह जानकारी शनिवार को एनएचएआई के अधिकारियों ने पत्रकारों के साथ रिंग रोड़ निर्माण के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने बरेला से मनेगांव के बीच नर्मदा नदी पर बन रहे केबल ब्रिज की तकनीकी बारीकियों को देखा और पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।एनएचएआई के प्रोजेक्ट प्रभारी पीयूष रंजन ने दावा किया कि एनएचएआई में यह प्रदेश का पहला केबल ब्रिज है, जो केबल के साथ पिलर पर भी खड़ा है। करीब एक किमी लंबे इस ब्रिज का मुख्य भाग में लगे पिलर के बीच करीब 150 मीटर की दूरी है, जो इसे और मजबूत और आकर्षित बनाता है। उन्होंने बताया कि इस केबल ब्रिज का निर्माण पूरा होने के बाद इसमें एडवांस हेल्थ मानिटरिंग सिस्टम के सेंसर लगाए जाएंगे। इनसे पुल के झुकाव और केबलों के तनाव में होने वाले बदलावों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।डेटा को एटीएमएस कंट्रोल सेंटर से जोड़ने की योजना है। अधिकारियों के अनुसार, स्वतंत्र इंजीनियर इसकी निगरानी करेंगे, ताकि संभावित तकनीकी खामियों का समय रहते पता लगाकर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। अधिकारियों ने पुलों और प्रमुख संरचनाओं की डिजाइन लाइफ करीब 100 वर्ष बताई है। पुल में लगेंगे प्रोफाइल लाइटिंगनर्मदा पर बन रहे एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज में 150 मीटर का स्पान रखा गया है। सामान्य तकनीक से 50-50 मीटर के स्पान बनाने पर करीब 10 फाउंडेशन की जरूरत होती, जबकि इस डिजाइन में तीन से चार फाउंडेशन से काम पूरा करने की योजना है।इससे नदी के भीतर निर्माण करने में लगने वाले अतिरिक्त प्रयास और संसाधनों की बचत होगी। ब्रिज के एक हिस्से में छह केबल लगाने का काम पूरा हो चुका है। पुराने पुल के जीर्णोद्धार और फसाड लाइटिंग का प्रस्ताव भी है, ताकि घाट की ओर से इसका दृश्य आकर्षक दिखाई दे। पूरी रिंग रोड पर सर्विस रोड एनएचएआई के प्रबंधक तकनीकी पारस बंसल ने बताया कि इस पूरे रिंग रोड़ पर सर्विस रोड भी बनाई है। मुख्य सड़क का उपयोग तेज और भारी वाहनों के लिए होगा, जबकि सर्विस रोड से स्थानीय लोगों को आवाजाही की सुविधा मिलेगी।इससे स्थानीय और तेज गति वाले यातायात के बीच टकराव कम करने में मदद मिल सकती है। मुख्य सड़क से जुड़ने के लिए पैकेज-1 में पांच, पैकेज-2 में छह, पैकेज-3 में आठ और पैकेज-4 में चार प्रवेश-निकास बिंदु रखे गए हैं। पैकेज-5 में एक्सेस कंट्रोल के तहत केवल दो बिंदु प्रस्तावित हैं। पांच साल तक ठेकेदार की जिम्मेदारी पत्रकारों से चर्चा करते हुए एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि निर्माण पूरा होने के बाद पांच साल तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी संविदाकार की होगी। इसके बाद सरकार यातायात की संभावनाओं और वित्तीय जरूरतों के आधार पर सामान्य रखरखाव या मुद्रीकरण पर निर्णय लेगी। उन्होंने नईदुनिया के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि डामर और सीमेंट-कंक्रीट सड़क में से किस तकनीक का उपयोग किया जाए, यह लागत, यातायात और रखरखाव की जरूरतों पर निर्भर करता है। टायर फटने की घटनाओं के लिए केवल सीसी सड़क को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, तेज गति, टायर का दबाव, ओवरलोडिंग और खराब स्थिति भी इसके कारण हो सकते हैं। recent visitors 19

आज इंडिया ब्लॉक का ‘सुप्रीम’ मार्च, कांग्रेस मुख्यालय में तैयारियां तेज; दिल्ली में नेताओं का जुटना शुरू

INDIA bloc’s ‘Supreme’ march today; preparations intensify at Congress headquarters; leaders begin gathering in Delhi. चुनाव आयोग में कथित अनियमितता को लेकर विपक्ष लामबंद दिख रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में आंदोलन हो रहा है। आज विपक्षी दलों के गठबंधन- इंडिया ब्लॉक के नेताओं के मार्च, विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने व्यापक बंदोबस्त किए हैं इंडिया गठबंधन के मार्च पर क्या बोले राजभर?उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता ने गठबंधन को नकार दिया है और उसके पास कोई सबूत नहीं है। राजभर ने कहा कि ज्ञानेश कुमार एक साल से चुनाव आयुक्त हैं, जबकि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर हुए 10 साल और कांग्रेस को 30 साल हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया 1952 से चली आ रही है। जेएनयू के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज, कांग्रेस सांसद का नाम भी शामिलदिल्ली पुलिस ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। 11 अक्तूबर 2026 को दर्ज इस एफआईआर में कांग्रेस के लोकसभा सांसद और जेएनयू के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम का नाम भी शामिल है। पुलिस ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत मामला दर्ज किया है। recent visitors 14