वैभव की आँधी में उडा गुजरात, रचे कई कीर्तिमान, पांच हार के बाद जीता RR

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल 2025) में सोमवार को राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच खेले गए मैच में 14 साल के वैभव सूर्यवंशी का तूफान देखने को मिला. वैभव सूर्यवंशी ने महज 35 गेंदों में शतक जड़कर इतिहास रच दिया. उनकी इस पारी के दम पर राजस्थान ने गुजरात के 210 रनों के टोटल को महज 16वें ओवर में ही 8 विकेट रहते चेज कर लिया. वैभव आईपीएल इतिहास में सबसे तेज शतक लगाने वालों की सूची में दूसरे स्थान पर आ गए हैं. उनसे आगे केवल वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिस गेल हैं, जिन्होंने 2013 में पुणे वॉरियर्स के खिलाफ रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की ओर से खेलते हुए मात्र 30 गेंदों में शतक ठोका था. इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर यूसुफ पठान हैं, जिन्होंने 2010 में मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स के लिए 37 गेंदों में शतक जमाया था. वहीं डेविड मिलर ने 2013 में किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स) के लिए रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ 38 गेंदों में शतक बनाया था. शतक जड़ने वाले सबसे युवा बल्लेबाज वैभव ने यह शतक महज 14 साल और 32 दिन की उम्र में लगाया. यानी सबसे कम उम्र में टी20 शतक लगाने का रिकॉर्ड अब वैभव के नाम आ गया है. इससे पहले यह रिकॉर्ड विजय जोल के नाम था, जिन्होंने 2013 में महाराष्ट्र की ओर से मुंबई के खिलाफ 18 साल और 118 दिन की उम्र में शतक लगाया था. वहीं, बांग्लादेश के परवेज हुसैन इमन ने 2020 में 18 साल और 179 दिन की उम्र में शतक बनाया था, जबकि फ्रांस के गुस्ताव मकेऑन ने 2022 में 18 साल और 280 दिन की उम्र में स्विट्जरलैंड के खिलाफ शतक जड़ा था. 17 गेंदों में ही लगाई फिफ्टी वहीं, वैभव ने अर्धशतक लगाने के लिए भी महज 17 गेंदों का सामना किया. इस दौरान वैभव ने 3 चौके और 6 छक्के जडे. वैभव ने 17 गेंद में फिफ्टी लगाई जो आईपीएल के इस सीजन में सबसे तेज अर्धशतक था. वहीं, राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल के इतिहास में लगाई गई ये दूसरी सबसे तेज फिफ्टी थी. इसके अलावा आईपीएल में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने का रिकॉर्ड भी अब वैभव के नाम दर्ज हो गया है. वैभव ने 14 साल और 32 दिन की उम्र में आईपीएल में फिफ्टी लगाई है. इससे पहले ये रिकॉर्ड रियान पराग के नाम था, जिन्होंने 17 साल 175दिन की उम्र में फिफ्टी लगाई थी. सूर्यवंशी के शतक में बने कुल 8 रिकॉर्ड, तूफान के बाद की शांत में वैभव को पिछले साल नवंबर में हुई नीलामी में राजस्थान रॉयल्स ने 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा था. इससे पहले, 12 साल और 284 दिन की उम्र में बिहार के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू कर वे भारत के चौथे सबसे युवा फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर बने थे. वहीं इस मैच में सूर्यवंशी ने अपनी पारी की धीमी शुरुआत के बाद ईशांत शर्मा के एक ओवर में 28 रन ठोककर 13 गेंदों में 35 रन पूरे किए. उन्होंने महज 17 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर आईपीएल इतिहास की पांचवीं सबसे तेज फिफ्टी बनाई. इसके बाद वे और आक्रामक हो गए और सिर्फ 18 गेंदों में 50 से 100 तक पहुंच गए. उन्होंने 35 गेंदों में अपना शतक पूरा कर आईपीएल के इतिहास में दूसरा सबसे तेज शतक लगाया. इस मामले में उनसे आगे सिर्फ क्रिस गेल (30 गेंदों में शतक, 2013) हैं. सूर्यवंशी अंततः 38 गेंदों में 101 रन बनाकर आउट हुए. उनकी इस विस्फोटक पारी में 11 छक्के और 7 चौके शामिल थे. यानी 94 रन केवल चौके और छक्के से आए. आइये उनकी इस शानदार पारी में बने कुल रिकॉर्ड पर नजर डालते हैं- टी20 क्रिकेट इतिहास में सबसे युवा शतकवीर बने 14 साल और 32 दिन की उम्र में टी20 क्रिकेट में शतक लगाने वाले वे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं, जिन्होंने विजय जोल का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2013 में मुंबई के खिलाफ महाराष्ट्र के लिए 18 साल और 118 दिन की उम्र में शतक लगाया था. यह टी20 क्रिकेट इतिहास में सातवां सबसे तेज शतक है. सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड साहिल चौहान के नाम है, जिन्होंने 2024 में एस्टोनिया के लिए साइप्रस के खिलाफ सिर्फ 27 गेंदों में शतक लगाया था. वैभव ने सिर्फ 17 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी की, जो आईपीएल इतिहास में पांचवीं सबसे तेज फिफ्टी है. एक पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज सूर्यवंशी ने अपनी पारी में 11 छक्के लगाए, जो आईपीएल इतिहास में चौथी सबसे बड़ी संख्या है. इस लिस्ट में पहले स्थान पर क्रिस गेल हैं, जिन्होंने 2013 में पुणे वॉरियर्स इंडिया के खिलाफ 17 छक्के लगाए थे. इसके अलावा, आईपीएल में किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा खेली गई पारी में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी उन्होंने साझा कर लिया है. इससे पहले, मुरली विजय ने 2010 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 11 छक्के लगाए थे. रन चेज में सबसे ज्यादा छक्के मारने का रिकॉर्ड आईपीएल के किसी रन-चेज में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी अब उनके नाम है. उन्होंने सनथ जयसूर्या (2008 में CSK के खिलाफ 11 छक्के) के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. इसके साथ ही, वे 18 साल से कम उम्र में टी20 क्रिकेट में 10 या अधिक छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं. एक शतक में बाउंड्री से आए सबसे ज्यादा रन वैभव ने 35 गेंद की अपनी सेंचुरी में कुल 11 छक्के और 7 चौके लगाए. 11*6= 66 और 7*4= 28 रन. यानी कुल 94 रन केवल बाउंड्री से आए. यह आईपीएल में किसी भी बल्लेबाज द्वारा एक शतक में बाउंड्री प्रतिशत के हिसाब से कुल रन के मामले में सबसे ज्यादा है. उन्होंने 100 रन बनाने में 93 प्रतिशत रन केवल बाउंड्री से बनाए.   आईपीएल इतिहास की तीसरी सबसे तेज 100+ पारी सूर्यवंशी ने 265.78 के स्ट्राइक रेट से यह पारी खेली, जो आईपीएल इतिहास में तीसरी सबसे तेज 100+ पारी है. 2010 में यूसुफ पठान ने 37 गेंदों में शतक लगाते हुए 270.07 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे, जबकि 2013 में डेविड मिलर ने 38 गेंदों में 101* रन बनाए थे और उनका स्ट्राइक रेट … Read more

भारतीय सेना की कार्रवाई से बचने पाकिस्तान ने आतंकवादियों को आर्मी के बंकर में शिफ्ट होने के लिए कहा

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों को लॉन्च पैड से निकालकर आर्मी शेल्टर्स में शिफ्ट किया जा रहा है. पाकिस्तान की सेना ने आतंकियों से कहा है कि वे या तो आर्मी शेल्टर या फिर बंकरों में चले जाएं. पीओके स्थित सभी लॉन्च पैड को खाली करने को कहा गया है. सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि, पीओके में स्थित लॉन्च पैड से गाइड के जरिए आतंकी जम्मू-कश्मीर की सीमा में दाखिल होते हैं. हाल फिलहाल में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कुछ लॉन्च पैड की पहचान की थी, जिनमें से इन लॉन्च पैड से आतंकियों को शिफ्ट किया जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि केल, सारडी, दुधनियाल, अथमुकम, जुरा, लीपा, पछिबन, फॉरवर्ड कहुटा, कोटली, खुइरत्ता, मंधार, निकैल, चमनकोट और जानकोटे में कुछ लॉन्च पैड हैं, जहां हमेश आतंकी मौजूद होते हैं. एलओसी के पास अपनी सुरक्षा बढ़ा रहे कश्मीरी सीमा पर तनाव के बीच कश्मीर में एलओसी के पास रहने वाले लोग भी अपनी सुरक्षा के इंतजाम करने लगे हैं. मसलन,कुछ वर्षों की सामान्य स्थिति और शांति के बाद, एलओसी के पास रहने वाले लोगों के लिए तनाव और अनिश्चितता फिर से वापस आ गई है. खासतौर से पीओके में भारतीय सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों के बाद स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ी है. नियंत्रण रेखा, कुपवाड़ा के केरन, माछिल, तंगधार क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में डर का माहौल है, क्योंकि पहलगाम हमले के बाद गोलीबारी की घटनाएं फिर से आम हो गई हैं. अपनी सुरक्षा के लिए लोग अब बम शेल्टर खोल रहे हैं और उनकी सफाई कर रहे हैं, ताकि हालात बिगड़ने पर लोग अपनी जान बचा सकें. पाकिस्तान की तरफ से किया जा रहा सीजफायर का उल्लंघन पाकिस्तान पिछले कुछ हफ्तों से जम्मू-कश्मीर में सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है, और पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से ये उल्लंघन आम हो गए हैं. अप्रैल 2025 तक दर्ज की गई घटनाओं को एलओसी के साथ जम्मू-कश्मीर में कई क्षेत्रों में पाकिस्तान द्वारा उकसावे के रूप में देखा जा रहा है. भारतीय सेना ने प्रत्येक घटना का तेजी से और प्रभावी ढंग से जवाब दिया है, नागरिकों पर इसका कम से कम प्रभाव हुआ है.   recent visitors 35

नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी

भोपाल नई शिक्षा नीति के तहत अब निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। आगामी 16 जून से नए शिक्षा सत्र में जिले के 226 स्कूलों में नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों को नर्सरी से शिक्षा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए तीन वर्ष की उम्र वाले विद्यार्थियों को संस्था में प्रवेश दिया जायेगा। यह सभी स्कूल सांदिपनी विद्यालय से अलग होंगे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में यह सभी व्यवस्था लागू होंगी। जिला परियोजना समन्वयक रमेश राम उईके ने बताया कि जिले के 226 सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र 16 जून से नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी। इन कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 अन्य कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 और केजी-2 के समकक्ष हैं। नर्सरी के विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए डाइट के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे कि शिक्षक विद्यार्थियों को शुरुआती दौर में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ज्ञान दे सकें। इसके अतिरिक्त शिक्षक बच्चों को नाच-गाकर भी पढ़ाएंगे, जिससे कि विद्यार्थियों को आसानी से अक्षर का ज्ञान हो सकेगा। नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित नई शिक्षा नीति के अनुसार पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 से साढ़े 7 वर्ष व नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित की गई हैं। निजी स्कूलों में पहले से ही नर्सरी की कक्षाएं संचालित हैं। इन स्कूलों को टक्कर देने के लिए ही सरकारी स्कूलों में यह पहल शुरु की जा रही है। 226 स्कूलों के बाद आगामी समय में जिले के अन्य सभी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा। डीपीसी के मुताबिक प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर अब शिक्षक नर्सरी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाएंगे। पिछले वर्ष के आगे की कक्षा में भेजे जाएंगे और अभिभावकों को शिक्षक घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेंगे। नए प्रयोग से मजबूत होगी बच्चों की नींव डीपीसी आरआर उइके के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग का यह तर्क है कि सरकारी स्कूलों से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ा जाए। यदि प्रारंभिक दौर में नर्सरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाएगा तो वह आगे की कक्षा में भी सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करेंगे। शिक्षक नाच-गाकर नर्सरी के बच्चों को अक्षर का ज्ञान सिखाएंगे ऐसे में विद्यार्थी कक्षा पहली तक आते-आते अक्षर व शब्द लिखना पूरी तरह सीख जाएंगेे। ऐसे में बच्चों की शिक्षा की राह आसान होगी ओर उनकी नींव भी पूरी तरह मजबूत होगी। विभाग ने इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं। शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश भी जारी किये गए हैं। बच्चों के लिए करें व्यवस्था राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला कलेक्टरों को जारी दिशा-निर्देश में कहा है कि प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल में टाट पट्टी, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए. जिस विद्यालय में प्रवेश दिया जाना है, वहां कम से कम दो कक्षाओं में प्रवेश पाने वाले बच्चों की कक्षा संचालन की सुविधा हो और बाहर खेलने के लिए मैदान पर्याप्त जगह वाला हो.   recent visitors 50

एनसीईआरटी की कक्षा 7वीं की इतिहास की पाठ्यपुस्तक से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से संबंधित सभी संदर्भ हटाया

नई दिल्ली नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब में बड़ा बदलाव किया है. NCERT ने इस किताब में से मुगलों और दिल्ली सल्तनत से जुड़ा पूरा हिस्सा हटा दिया है. इसकी जगह पर ‘पवित्र स्थल’, ‘महाकुंभ’ और ‘सरकारी योजनाओं’ पर जोर दिया गया है. इस बदलाव को न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) 2023 के अनुरूप बताया गया है, जिसका मकसद शिक्षा में भारतीय ज्ञान, परंपराओं और स्थानीय सोच को जोड़ना है. क्लास 7 की सामाजिक विज्ञान की किताब का नाम 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' (Exploring Society: India and Beyond) है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें अब मौर्य, शुंग, सातवाहन जैसे प्राचीन भारतीय राजवंशों पर फोकस किया गया है. वहीं मुगलों, तुगलकों, खिलजियों, ममलूक और लोधी वंश जैसे मध्यकालीन शासकों का अब कोई जिक्र नहीं है. मुगलों को इतिहास से बाहर करने की कोशिश? प्रोफेसर अली नदीम रिजवी ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "देश का माहौल इस तरह से बदल रहा है कि मुगलों को इतिहास से गायब करने की कोशिश की जा रही है. इतिहास चाहे अच्छा हो या बुरा, वह इतिहास होता है और उसे बदला नहीं जा सकता. हां, अगर नए तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें शामिल किया जा सकता है, लेकिन इतिहास से किसी भी महत्वपूर्ण संदर्भ को हटा देना सही नहीं है." प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि इतिहास का या किसी भी विषय का सिलेबस बार-बार संशोधित किया जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ पन्नों को गायब करना चिंताजनक है. उनका मानना है कि अगर नई जानकारी मौजूद है, तो उसे पाठ्यपुस्तकों में जोड़ा जा सकता है, लेकिन इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाना या नजरअंदाज करना देश के लिए हानिकारक हो सकता है. क्या मुगलों का योगदान मिटाने की कोशिश हो रही है? प्रोफेसर रिजवी ने यह भी कहा कि यह बदलाव देखकर ऐसा लगता है कि मुगलों के योगदान को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को यह पता न चले कि मुगलों ने देश के इतिहास और संस्कृति में क्या योगदान दिया था. उन्होंने आशंका जताई कि यह बदलाव कहीं ना कहीं उस वातावरण का हिस्सा हो सकता है, जिसमें इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है और कुछ हिस्सों को जानबूझकर हटा दिया जा रहा है. प्रोफेसर रिजवी ने इस बारे में विस्तार से बताया कि अगर पाठ्यपुस्तकों में भारतीय संस्कृति, सभ्यता या समाज के बारे में बात की जा रही है, तो महाकुंभ, मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे विषयों को वहां शामिल किया जा सकता है, क्योंकि ये हमारे समाज और संस्कृति का हिस्सा हैं. लेकिन जहां तक इतिहास की बात है, तो इतिहास को सिर्फ इतिहास तक सीमित रखा जाना चाहिए. इतिहास को बदलने की कोशिश करना या उसमें हेरफेर करना, उनके मुताबिक, निंदनीय है. नया पाठ्यक्रम: संस्कृति और इतिहास का सही संतुलन प्रोफेसर रिजवी ने इस संदर्भ में कहा कि यदि किताबें संस्कृति और सभ्यता के बारे में बात करती हैं, तो उन्हें महाकुंभ और अन्य सांस्कृतिक संदर्भों को शामिल करने की आज़ादी होनी चाहिए. लेकिन इतिहास को इतिहास ही रहने देना चाहिए, और उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. उनका कहना था कि मुगलों को 'इनविजिबल' करने की जो कोशिश हो रही है, वह भारत के इतिहास को समझने में एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है. कौन-से चैप्टर हटाए गए? दिल्ली की NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों में कक्षा 7 की किताबों से मुगल और दिल्ली सल्तनत के चैप्टर्स हटा दिए गए हैं. इन बदलावों के तहत नए अध्यायों में भारतीय राजवंश, 'पवित्र भूगोल', महाकुंभ और सरकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है. NCERT अधिकारियों के मुताबिक, ये पाठ्यपुस्तक का पहला हिस्सा है और दूसरा हिस्सा आने वाले महीनों में जारी किया जाएगा. हालांकि, उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि पहले हटाए गए हिस्से वापस जोड़े जाएंगे या नहीं. कोविड-19 महामारी के दौरान 2022-23 में NCERT ने पहले ही मुगल और दिल्ली सल्तनत पर आधारित हिस्सों को कम कर दिया था, लेकिन अब नई पाठ्यपुस्तक ने इन्हें पूरी तरह हटाने का फैसला किया गया है. 'Exploring Society: India and Beyond' नाम के सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में नए अध्याय शामिल हैं जो प्राचीन भारतीय राजवंशों जैसे मगध, मौर्य, शुंग और सातवाहन पर केंद्रित हैं. महाकुंभ का जिक्र नई पाठ्यपुस्तक में 'पवित्र भूगोल' नाम के अध्याय भी शामिल हैं जिसमें भारत के पवित्र स्थानों और तीर्थयात्राओं के बारे में विस्तार से बताया गया है. इसमें 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा, और शक्ति पीठों का वर्णन किया गया है. महाकुंभ मेला, जो इस साल प्रयागराज में आयोजित हुआ, उसे भी पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है, जिसमें बताया गया है कि इस में लगभग 660 मिलियन यानी 66 करोड़ लोग शामिल हुए थे. एक नया चैप्टर 'हाउ दी लैंड बिकम्स सेक्रेड’ (How the Land Becomes Sacred) भी जोड़ा गया है. इसमें बताया गया है कि भारत और दूसरे देशों में कैसे जमीन को पवित्र माना जाता है. इस चैप्टर में इस्लाम, ईसाई, यहूदी, पारसी, हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म जैसे धर्मों के लिए भारत और विदेश में पवित्र माने जाने वाले स्थानों और तीर्थस्थलों के बारे में भी बताया गया है. इसके अलावा, चार धाम यात्रा, 12 ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और पवित्र नदियों के संगम की चर्चा है. साथ ही यह भी बताया गया है कि किस तरह बद्रीनाथ से कन्याकुमारी तक भारत को ‘तीर्थों की भूमि’ माना गया है. recent visitors 34

MP में सरकारी नौकरी पर भर्ती के लिए परीक्षा का तरीका बदलेगा, पीएससी और चयन मंडल की परीक्षाएं अब एक बार, बढ़ेगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती और चयन परीक्षा में बड़ा परिवर्तन करने जा रही है। राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली भर्ती परीक्षाएं अब बार-बार नहीं होंगी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर वर्ष में केवल एक बार परीक्षा होगी और सभी श्रेणी के पदों के लिए प्रावीण्य सूची बना ली जाएगी। प्रतीक्षा सूची भी एक ही रहेगी। इसके लिए पदों की संख्या सभी विभागों से वर्ष में एक बार पूछ ली जाएगी और उसके आधार पर सितंबर में आगामी वर्ष के लिए कैलेंडर निर्धारित हो जाएगा। जनवरी, 2026 से भर्ती-चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी सामान्य प्रशासन विभाग कर रहा है। कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं होती है आयोजित प्रदेश में द्वितीय और कार्यपालिक तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती पीएससी के माध्यम से होती है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए कर्मचारी चयन मंडल परीक्षाएं कराता है। अभी जैसे-जैसे विभागों की ओर से पद उपलब्ध होते हैं, वैसे-वैसे दोनों एजेंसियां अपने कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं आयोजित करती हैं। बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है इसमें न केवल अधिक समय लगता है बल्कि अभ्यर्थियों को बार-बार फीस और परीक्षा देनी पड़ती है। एजेंसियों को भी हर परीक्षा के लिए मानव संसाधन से लेकर अन्य व्यवस्थाएं करनी होती हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे। इसके अनुरूप सामान्य प्रशासन विभाग ने पीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं के साथ विभागीय भर्ती नियम सहित अन्य प्रक्रियाओं में परिवर्तन का खाका तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा ही तरह की परीक्षा से विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन किया जाएगा। एक बार बनाई जाएगी प्रतीक्षा सूची विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों से आवेदन के समय विकल्प मांगे जाते हैं। मेरिट के हिसाब से यदि उसका चयन दो पदों के लिए हो जाता है और ऐसे में वह जिस पद का चयन करता है तो दूसरा पद प्रतीक्षा सूची वाले को मिल जाएगा। प्रतीक्षा सूची एक बार बनाई जाएगी। पद उपलब्ध होते ही इस सूची के अभ्यर्थी को मौका मिलता रहेगा। दरअसल, अभ्यर्थी एक साथ कई परीक्षाएं देते हैं और अलग-अलग पद पर चयन होने पर वे किसी एक सेवा का चयन करते हैं। ऐसे में अन्य पद रिक्त रह जाते हैं। नियम से लेकर परीक्षा का ब्योरा रहेगा ऑनलाइन सूत्रों का कहना है कि पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा। अभी पीएससी के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई बातें सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं। परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है। पूरी प्रक्रिया रुक जाती है। आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई संदेह न रहे। एक जैसे होंगे विभागों के भर्ती नियम विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि एकरूपता रहे। इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे। साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे। दो-ढाई लाख पदों पर होंगी भर्तियां प्रदेश में आगामी दो-तीन साल में दो से ढाई लाख सरकारी पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसमें रिक्त पदों के साथ पदोन्नति होने पर खाली होने वाले पद भी शामिल हैं। ये सभी पद समयसीमा में भर जाएं, इसके लिए चयन प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किया जा रहा है। बार-बार नहीं देनी होगी परीक्षा     मुख्यमंत्री की मंशा है कि परीक्षाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। विवाद की स्थिति नहीं बननी चाहिए और अभ्यर्थी को बार-बार परीक्षा भी न देनी पड़े। इसके लिए नियमों में संशोधन करके पूरी व्यवस्था में ही परिवर्तन किया जा रहा है। प्रयास यह है कि सितंबर तक यह प्रक्रिया पूरी करके जनवरी, 2026 से लागू कर दिया जाए।- संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग   recent visitors 46

9 किलोमीटर के वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के कारण फंसा 495 करोड़ का हाईवे प्रोजेक्ट! 8 महीने से अटका काम

 श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में बन रहे 155 किमी के राष्ट्रीय राजमार्ग 52 (NH 52) में भले ही पहले दो भाग (पाली-गोरस और गोरस-श्यामपुर) काम चल रहा है, लेकिन तीसरे भाग श्यामपुर-सबलगढ़ का काम टेंडर होने के 8 महीने बाद भी अटका हुआ है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस भाग में 9 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का क्षेत्र आ रहा है, लिहाजा अभी काम की अनुमति नहीं मिली है। हालांकि एनएच के अफसर आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अभी एनओसी का इंतजार है।  यही वजह है कि पिछले दिनों श्योपुर आए प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला भी समीक्षा बैठक में वन विभाग के अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया गंभीरता से पूरी कराने के निर्देश दे गए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में नेशनल हाइवे के 155 किमी में पाली श्योपुर-गोरस के भाग में 60 फीसदी काम हो गया है, जबकि गोरस-श्यामपुर के भाग में प्रारंभिक काम शुरु हो गया है। बीच में नौ किमी का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर यूं तो श्यामपुर से सबलगढ़ तक फुल 55 किलोमीटर के हाइवे निर्माण होना है, लेकिन इसमें किलोमीटर का हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का आ रहा है। जिसमें श्योपुर कूनो नेशनल पार्क और राजस्थान के कैलादेवी अभयायरण्य के बीच का ये हिस्सा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के रूप में संरक्षित है, यही वजह है कि हाइवे निर्माण के लिए एनओसी की जरुरत है। बताया गया है कि श्यामपुर-सबलगढ़ हाइवे में नए एलाइनमेंट के अनुसार वीरपुर कस्बे के बाहर से हाइवे निर्माण होगा। वहीं वीरपुर के आगे जाकर ब्रॉडगेज रेल लाइन के ऊपर से ओवरब्रिज भी बनाया जाएगा। 495 करोड़ में बनना है ये 55 किमी का मार्ग नेशनल हाइवे 552 (एक्सटेंशन) पाली-श्योपुर-गोरस-श्यामपुर-सबलगढ़ का 3 भाग में काम हो रहा है। इसी के तहत ये तीसरा भाग श्यामपुर से सबलगढ़ का है। 55 किलोमीटर के इस भाग के लिए गत वर्ष सितंबर माह में ही टेंडर हो चुके हैं, जिसमें इसके निर्माण की लागत 495 करोड़ रुपए है। लेकिन टेंडर होने के 8 महीने बाद भी काम शुरु होना तो दूर अभी तक संबंधित कंस्ट्रक्शन कंपनी के साथ एग्रीमेंट भी नहीं हुआ है। यही वजह है कि फिलहाल सड़क निर्माण अधर में लटका है। इस मामले में एनएच-पीडब्ल्यूडी श्योपुर के सब इंजीनियर विजय अवस्थी ने बताया कि ‘एनएच के तहत श्यामपुर-सबलगढ़ के निर्माण के लिए टेंडर तो पिछले साल हो गए थे, लेकिन इसके बीच वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का हिस्सा आ रहा है, जिसकी एनओसी के लिए हमने आवेदन किया हुआ है। एनओसी मिलते ही इसका काम शुरू हो जाएगा।’ recent visitors 31

प्राइवेट स्कूलों में 5 मई से होंगे आरटीई से एडमिशन, टाइमटेबल घोषित, 7 मई से 21 मई तक होंगे आवेदन

भोपाल  आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में नि: शुल्क शिक्षा पाने का अवसर खुल गया है। सत्र 2025-26 के लिए आरटीई अधिनियम में नि: शुल्क प्रवेश प्रक्रिया कार्यक्रम घोषित कर दिया है। सीटें होंगी आरक्षित योजना में प्रदेश के मान्यता प्राप्त निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। आवेदन प्रक्रिया 7 से 21 मई तक पूरी तरह ऑनलाइन रहेगी। स्कूलों का आवंटन 29 मई को लॉटरी के माध्यम से होगा। प्रक्रिया पारदर्शी व डिजिटल होगी। शिक्षा विभाग 5 मई को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों और आरक्षित सीटों की जानकारी वेबसाइट पर जारी करेगा। आवेदन के साथ जन्म, निवास, बीपीएल प्रमाण-पत्र तथा माता-पिता के पहचान-पत्र को अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। आवेदन के बाद 7 से 23 मई तक दस्तावेजों का मूल सत्यापन संबंधित जनशिक्षा केंद्रों पर होगा। सूची होगा तैयार सत्यापन उपरांत योग्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार होगी। स्कूल आवंटन के बाद अभिभावकों को एसएमएस के माध्यम से सूचना मिलेगी। इसके बाद 2 से 10 जून तक विद्यार्थियों को उपस्थिति दर्ज करानी होगी तथा मोबाइल एप के माध्यम से रिपोर्टिंग भी करनी होगी। योजना का लाभ केवल मप्र के मूल निवासी बीपीएल या वंचित समूह के बच्चों को मिलेगा। इस प्रकार तय किए गए नर्सरी: 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह, केजी-14 वर्ष से 5 वर्ष 6 माह, केजी-2: 5 वर्ष से 6 वर्ष 6 माह व कक्षा-1:6 वर्ष से 7 वर्ष 6 माह। गलत जानकारी देने या अधूरे दस्तावेज प्रस्तुत करने पर आवेदन निरस्त हो जाएगा। दिन 1-5: इम्पॉर्टन्ट सब्जेक्ट्स कवर करें सभी इम्पॉर्टन्ट सब्जेक्ट्स निकालें सबसे पहले उन विषयों को चुनें जो आपके लिए सबसे इम्पॉर्टन्ट हैं और जिन्हें आप अच्छे से समझते हैं। उदाहरण के तौर पर, गणित, रसायनशास्त्र और भौतिकी के कुछ महत्वपूर्ण चैप्टर्स जैसे मैट्रिक्स, काइनेमैटिक्स, वर्क एंड एनर्जी, और आर्गेनिक केमिस्ट्री पर ध्यान दें। इन विषयों को पहले मजबूत करें। सिंपल टॉपिक्स को प्रायोरिटी दें जिन टॉपिक्स को आपने पहले अच्छी तरह से पढ़ा है, उन पर रिवीजन करें। यदि कोई टॉपिक थोड़ा कठिन लगता है, तो उसे छोड़कर अपने मजबूत विषयों पर ध्यान केंद्रित करें। टाइम मैनेजमेंट हर विषय के लिए 2-3 घंटे का समय निर्धारित करें और अपनी समय सारणी का पालन करें। यह सुनिश्चित करें कि आप हर दिन समय पर काम समाप्त कर सकें। दिन 6-10: मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस पेपर मॉक टेस्ट लेना शुरू करें इन 5 दिनों के दौरान मॉक टेस्ट लें और हर एक टेस्ट के बाद उसे अच्छे से एनालिसिस करें। यह आपको यह जानने में मदद करेगा कि आप कहां कमजोर हैं और किसे और मजबूत करना है। नोट्स बनाएं उन टॉपिक्स के लिए छोटे-छोटे नोट्स तैयार करें जिनमें आपको मुश्किल आ रही है। इन नोट्स को दिन में एक बार रिवीजन करने की आदत डालें। स्पीड और एक्युरेसी पर ध्यान दें मॉक टेस्ट में समय सीमा का पालन करते हुए अपनी स्पीड और एक्युरेसी को सुधारने पर ध्यान दें। सही उत्तर की संख्या ज्यादा महत्वपूर्ण है, समय से पहले सभी सवाल हल करने की कोशिश करें। दिन 11-13: कमजोर क्षेत्रों पर फोकस केवल कठिन टॉपिक्स पर काम करें इन तीन दिनों में केवल उन्हीं टॉपिक्स पर काम करें जिनमें आप कमजोर हैं। जैसे भौतिकी के कुछ खास टॉपिक्स या रसायनशास्त्र के किसी विशेष चैप्टर पर ध्यान केंद्रित करें। डाउट्स क्लियर करें अपने टीचर्स या ट्यूटर्स से डाउट्स को क्लियर करें। अब आखिरी समय में जो भी शंका है, उसे तुरंत दूर करें। दिन 14-15: रिवीजन और फाइनल प्रैक्टिस किसी भी नई चीज़ को न सीखें अंतिम दो दिन केवल रिवीजन के लिए रखें। नए टॉपिक्स को अब सीखने का कोई फायदा नहीं है। केवल पहले से पढ़े हुए विषयों की समीक्षा करें। मॉक टेस्ट और मॉक इंटरव्यू दिन में एक या दो मॉक टेस्ट लें और उनकी जाँच करें। मॉक टेस्ट से यह भी पता चलेगा कि परीक्षा में किस तरह के प्रश्न आ सकते हैं। मनोबल बनाए रखें परीक्षा से एक दिन पहले मन को शांत रखें। थोड़ी देर के लिए ध्यान या हल्का-फुल्का शारीरिक व्यायाम करें, जिससे आपका मन प्रसन्न रहे। एक्सट्रा टिप्स स्वस्थ आहार और पर्याप्त नींद परीक्षा से पहले शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। अच्छा आहार लें और सही नींद लें ताकि आप परीक्षा के दिन ताजगी महसूस करें। पॉजिटिव मानसिकता रखें खुद पर विश्वास रखें। सकारात्मक सोच आपकी परीक्षा में सफलता की कुंजी है। recent visitors 46