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भोपाल

मध्य प्रदेश के तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने से प्रदेश के तापमान में बढ़ोतरी देखी गई है। रात का तापमान 17 डिग्री तक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में 13 फरवरी से सर्दी का एक और दौर आएगा। दो दिन तक पारे में 2 से 3 डिग्री की गिरावट होगी। प्रदेश के 5 बड़े शहर- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में पारा 10 डिग्री से नीचे जा सकता है। हालांकि ज्यादा ठंड पड़ने के अनुमान नहीं है।

17 डिग्री दर्ज हुआ शिवनी का न्यूनतम तापमान
मध्य प्रदेश में इस समय रातें ज्यादा ठंडी नहीं है। सुबह और रात में ही हल्की ठंड पड़ रही है। सोमवार-मंगलवार की रात की बात करें तो भोपाल में 15.7 डिग्री, इंदौर में 14.4 डिग्री, ग्वालियर में 11.3 डिग्री, उज्जैन में 11.5 डिग्री और जबलपुर में पारा 13.6 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, सिवनी सबसे गर्म रहा। यहां रात का तापमान 17 डिग्री तक पहुंच गया। छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, बैतूल, खरगोन, धार और सागर में पारा 15-16 डिग्री के बीच ही रहा। इधर, मंगलवार को दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। भोपाल में सुबह से तेज धूप खिली रही। इस कारण लोग परेशान होते रहे। कई शहरों में दिन का तापमान 30 डिग्री के पार ही रहा।

अभी प्रदेश में रातें ज्यादा ठंडी नहीं है। सुबह और रात में ही हल्की ठंड पड़ रही है। सोमवार-मंगलवार की रात की बात करें तो भोपाल में 15.7 डिग्री, इंदौर में 14.4 डिग्री, ग्वालियर में 11.3 डिग्री, उज्जैन में 11.5 डिग्री और जबलपुर में पारा 13.6 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, सिवनी सबसे गर्म रहा। यहां रात का तापमान 17 डिग्री तक पहुंच गया। छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, बैतूल, खरगोन, धार और सागर में पारा 15-16 डिग्री के बीच ही रहा।

इधर, मंगलवार को दिन के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। भोपाल में सुबह से तेज धूप खिली रही। इस कारण लोग परेशान होते रहे। कई शहरों में दिन का तापमान 30 डिग्री के पार ही रहा।

मौसम बदलने की यह वजह

मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया, 8 फरवरी को एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) उत्तर भारत पहुंचा था। इसके असर के कारण प्रदेश में उत्तर से सर्द हवाएं चल रही थी, जो अब लौट गई है। वहीं, हवा का रुख दक्षिणी हो गया है। इस कारण ठंडी हवा प्रदेश में नहीं आ रही और दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई। 13 फरवरी से तापमान में फिर से गिरावट देखने को मिलेगी।

जेट स्ट्रीम हवा का असर नहीं एक सप्ताह पहले तक प्रदेश में सर्द हवा की रफ्तार 36 से 40 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच गई थी, लेकिन अब सर्द हवाएं नहीं आ रही है। इस वजह से गर्मी बढ़ गई है। मंगलवार को 12.6 किमी की ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम हवा की रफ्तार 231 किमी प्रतिघंटा रही, लेकिन इसका असर यहां देखने को नहीं मिला।

अगले 2 दिन ऐसा मौसम 12 फरवरी: दिन में गर्मी का एहसास होगा, लेकिन रात में ठंडक घुली रहेगी। 13 फरवरी: दिन-रात के तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिलेगी।

फरवरी में 10 साल का ट्रेंड… तीनों मौसम का असर प्रदेश में पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो फरवरी महीने में रातें ठंडी और दिन गर्म रहते हैं। बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार रहेगा, जबकि रात में 10 से 14 डिग्री के बीच रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, फरवरी में सबसे ज्यादा ग्वालियर ठिठुरता है। पिछले साल यहां न्यूनतम तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंचा था, लेकिन इससे पहले 5 डिग्री के नीचे ही रहा है। जबलपुर में दिन में गर्मी और रात में ठंड रहती है।

इस बार 2 महीने कड़ाके की ठंड, जनवरी में मिला-जुला असर

इस बार शुरुआती दो महीने यानी, नवंबर और दिसंबर में कड़ाके की ठंड पड़ी। ठंड ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। नवंबर की बात करें तो भोपाल में 36 साल का रिकॉर्ड टूटा। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा सामान्य से 7 डिग्री तक नीचे रहा।

वहीं, दिसंबर में भी ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ा। स्थिति यह रही कि पूरे प्रदेश में जनवरी से भी ठंडा दिसंबर रहा। भोपाल समेत कई शहरों में ठंड ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। 9 दिन शीतलहर चली। भोपाल में दिसंबर की सर्दी ने 58 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों में स्कूलों की टाइमिंग बदल दी गई है, जबकि भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में जानवरों को सर्दी से बचाने के लिए हीटर लगाए गए। भगवान को भी ठंड से बचाने के लिए जतन किए गए।

अब बात जनवरी की। शुरुआत 10 से 15 दिन तक कड़ाके की ठंड का दौर रहा, लेकिन फिर तेवर ठंडे हो गए। ठंड के दो दौर आए, जबकि तीन बार मावठा गिरा। मौसम वैज्ञानिक डॉ. सिंह ने बताया, जनवरी में ठंड का असर जरूर रहा, लेकिन पिछले 10 साल के ट्रेंड के अनुसार तेज सर्दी नहीं पड़ी। पश्चिमी विक्षोभ की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी नहीं होने से तेज बारिश का दौर नहीं रहा। न ही ओले गिरे, जबकि जनवरी में ओला-बारिश का दौर भी रहता है।

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