नई दिल्ली

भारत सरकार बहुत जल्द ही ओला-उबर जैसे टैक्सी सर्विसेज के तर्ज पर एक सरकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म शुरु करने जा रही है. इसका ऐलान केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अपने एक भाषण में किया. संसद में बोलते हुए शाह ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहकार से समृद्धि का विजन सिर्फ एक नारा नहीं है. उन्होंने कहा, "सहकारिता मंत्रालय इसे हकीकत बनाने के लिए पिछले साढ़े 3 साल से अथक प्रयास कर रहा है." इस नए बनाए गए मंत्रालय के प्रमुख के रूप में शाह का लक्ष्य पूरे देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना है.

अमित शाह ने क्या कहा…

अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में त्रिभुवन सहकारिता यूनिवर्सिटी की स्थापना से संबंधित बिल पर हुई चर्चा का जवाब दिया. इस दौरान अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के गठन और इसके बाद मंत्रालय की ओर से किए गए कार्यों को गिनाया. अपने इस जवाब के बीच में शाह ने कहा कि, "सरकार बहुत जल्द ही आने वाले कुछ महीनों में ओला-उबर (Ola-Uber) जैसी एक सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म (Cooperative Taxi) शुरू करने वाली है. जो टू-व्हीलर, रिक्शा और फोर-व्हीलर का भी रजिस्ट्रेशन करेगी. इसका मुनाफा किसी धन्नासेठों के हाथ में नहीं जाएगा… बल्कि सीधे ड्राइवर के पास जाएगा."  

कोऑपरेटिव इंश्योरेंस कंपनी की तैयारी…

सहकारिता मंत्री शाह ने सदन में यह भी कहा कि, "बहुत कम समय के अंदर हम एक कोऑपरेटिव इंश्योरेंस कंपनी भी बनने जा रही है, जो देश भर की सभी कोऑपरेटिव व्यवस्था का इंश्योरेंस करेगी. मैं विश्वास के साथ बताता हूं कि, ये कंपनी बनने के बाद कुछ ही समय में ये प्राइवेट सेक्टर की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी बन जाएगी."

दुनिया में पहली बार होगा ऐसा…

अगर सरकार द्वारा प्रस्तावित इस नए सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म को शुरू किया जाता है. तो भारत प्राइवेट राइड-हेलिंग सर्विसेज के लिए सरकार समर्थित सहकारी विकल्प प्रदान करने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा. इस तरह की कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विसेज दुनिया के किसी और देश में उपलब्ध नहीं है. भारत में सहकारी उपक्रमों का एक सफल इतिहास रहा है, जिसमें सबसे उल्लेखनीय नाम है अमूल, जिसने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना दिया और विश्व स्तर पर 8वीं सबसे बड़ी डेयरी कंपनी बन गई.

ओला-उबर की बढ़ेगी मुश्किल..

कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस शुरू किए जाने के बाद ओला-उबर जैसी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म प्रदाता कंपनियों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी. ऐसा माना जा रहा है कि ये सहकारी व्यवस्था कम कीमत में लोगों को राइड सुविधाएं उपलब्ध कराएगी. इसके अलावा ये प्राइवेट कंपनियां छोटी राइड के लिए भी ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूलती हैं और कमीशन के नाम पर ड्राइवर्स को कम पैसे ही देती हैं. जिसकी शिकायत कैब-ड्राइवर्स आए दिन करते रहते हैं. हालांकि अभी सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये कोऑपरेटिव टैक्सी प्लेटफॉर्म किस तरह से काम करेगा.

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