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Sunday, March 22, 2026 5:06 am

बिलासपुर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिव्यांग अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए राज्य सरकार को नीति बनाने का निर्देश दिया है. जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया है. साथ ही विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत राज्य आयुक्त की नियुक्ति करने का भी आदेश दिया गया है. धारा 80 के तहत आयुक्त को अलग-अलग सक्षम व्यक्तियों के अधिकारों के हनन के संबंध में स्वप्रेरणा से विचार करना होगा.

कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को दिए जाने वाले इस लाभ का उद्देश्य, अन्य बातों के साथ-साथ शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को ऐसे स्थान पर तैनात करने में सक्षम बनाना है, जहां उनको आसानी से मदद मिल सके और शासकीय कामकाज के संचालन में दिक्कतें ना आए.

दरअसल, सचिव नगरीय प्रशासन ने 12.9.2023 काे आदेश को एक आदेश जारी किया, जिसमें नगर पालिका परिषद बेमेतरा में सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर याचिकाकर्ता का तबादला नगर पालिका परिषद कुम्हारी, जिला दुर्ग कर दिया गया. याचिकाकर्ता ने 21.8.2024 के उस आदेश को भी चुनौती दी है, जिसके तहत उसे वर्तमान पदस्थापना स्थान से हटाकर स्थानांतरित स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा गया है.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता को प्रारंभ में शारीरिक रूप से विकलांग श्रेणी के तहत नगर पालिका परिषद बेमेतरा में भृत्य के पद पर नियुक्त किया गया था. याचिकाकर्ता 70 प्रतिशत चलने-फिरने में अक्षम है . 13.9.2000 को याचिकाकर्ता को सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया. नियुक्ति की तिथि से याचिकाकर्ता लगातार नगर पालिका परिषद बेमेतरा में काम कर रहा है. सचिव नगरीय प्रशासन ने याचिकाकर्ता सहित विभिन्न नगर पालिका परिषदों के विभिन्न कर्मचारियों को स्थानांतरित करते हुए 12.9.2023 को स्थानांतरण आदेश जारी किया. याचिकाकर्ता ने कहा है कि हालांकि स्थानांतरण आदेश 12.9.2023 है, लेकिन उसे अभी तक तामील नहीं किया गया है और पिछले एक साल से याचिकाकर्ता को उसकी नियुक्ति के स्थान यानी नगर परिषद बेमेतरा में लगातार काम करने की अनुमति दी गई है. हालांकि, रिलीविंग ऑर्डर जारी होने पर याचिकाकर्ता ने पता किया तब उसे 12.9.2023 के आदेश के तहत उसके स्थानांतरण के बारे में पता चला.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सचिव नगरीय प्रशासन विभाग के समक्ष 10 दिनों के भीतर संपूर्ण दस्तोवजों के साथ विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने कहा है. अभ्यावेदन प्राप्त होने की तिथि से चार सप्ताह की अवधि के भीतर सचिव नगरीय प्रशासन विभाग को निराकरण करना होगा.

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