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ढाका
बांग्लादेश में पूर्व पीएम शेख हसीना को इस साल 5 अगस्त को देश छोड़कर ही भागना पड़ा था। वहां छात्र आंदोलन की आड़ में कट्टरपंथियों ने उनका तख्तापलट कर दिया था और इस दौरान भीषण हिंसा हुई थी। यही नहीं अब भी रुक-रुक कर ही सही, लेकिन राजनीतिक कार्य़कर्ताओं पर हमलों की खबरें आती रहती हैं। इस बीच शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का दावा है कि उसके 400 कार्यकर्ता मारे गए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि इस साल जुलाई से अब तक उसके 400 लोगों का कत्ल कट्टरपंथियों के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के दौर में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार इन लोगों को जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के लोगों ने मारा है।

अवामी लीग के सदस्यों का कहना है कि उनके ज्यादातर लोगों की हत्याएं जमात-ए-इस्लामी के लोगों ने ही कराई थीं। अवामी लीग का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी के स्टूडेंट विंग छात्र शिबिर ने इन हत्याओं को अंजाम दिया है, जो ऐसी घटनाओं के लिए कुख्यात रहा है। शेख हसीना की पार्टी ने हाल ही में एक लिस्ट भी जारी की है, जिसमें 394 लोगों के नाम बताए गए हैं। अवामी लीग का कहना है कि इन लोगों की जुलाई से अब तक कत्ल किया गया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह तो शुरुआती आंकड़ा ही है। कुछ दिनों में एक और लिस्ट जारी करेंगे, जिसमें संख्या बढ़ भी सकती है। बता दें कि शेख हसीना फिलहाल भारत में ही हैं। यही से उन्होंने अवामी लीग के एक कार्यक्रम को ऑनलाइन ही संबोधित किया था, जिसका आयोजन अमेरिका में हुआ था।

शेख हसीना ने इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर हिंदुओं और ईसाइयों के कत्ल का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मोहम्मद यूनुस ही इन हत्याओं के मास्टरमाइंड हैं। बता दें कि बांग्लादेश में अब तक हालात सामान्य नहीं हैं। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार घिरी हुई है। इस्कॉन के संत चिन्मय कृष्ण दास फिलहाल देशद्रोह के आरोप में जेल में हैं। इसे लेकर भारत समेत दुनिया भर के हिंदुओं में गुस्सा है। भारत की संसद में भी बांग्लादेश में हिंदुओं के हालात पर चिंता जताई जा चुकी है। यही नहीं भारतीय विदेश सचिव भी बीते दिनों बांग्लादेश में थे और इस दौरान भी उन्होंने हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का मसला उठाया था।

अवामी लीग के स्टूडेंट विंग छात्र शिबिर को शेख हसीना सरकार में आतंकी संगठन घोषित किया गया था। उसके कई सदस्यों को जेल भी भेजा गया था। सूत्रों का कहना है कि अवामी लीग के खिलाफ हिंसा का दौर आगे भी जारी रहेगा। अगले साल के अंत में या फिर 2026 की शुरुआत में आम चुनाव की बात कही जा रही है। ऐसे में अवामी लीग को राजनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए भी हिंसा का सहारा लिया जा सकता है।

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