MY SECRET NEWS

Friday, March 27, 2026 10:02 pm

रतलाम
शहर के माणकचौक स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों द्वारा सजावट के लिए दिए जाने वाले जेवर, सिक्के, मोती, चांदी-सोना आदि से विशेष शृंगार की तैयारी हो गई है। मंदिर में सजावट के लिए बुधवार को झाबुआ जिले के पेटलावद से दो श्रृद्धालुओं ने 50, 20 व 10 रुपये के नोट दिए। 17 से 28 अक्टूबर तक सामग्री ली जाएगी। बुधवार रात से ही नोटों से सजावट शुरू कर दी गई।

सजावट होने के बाद पांच दिवसीय दीपोत्सव के पहले दिन धनतेरस पर ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाएंगे। दीपोत्सव में नोट, सोने-चांदी के जेवर, हीरे-मोती आदि से होने वाली सजावट को लेकर मंदिर में दर्शन के लिए देशभर से श्रृद्धालु आते हैं। धनतेरस से शुरू हुए विशेष शृंगार के दर्शन भाई दूज तक लगातार किए जा सकेंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को सामग्री वापस देना शुरू की जाएगी।

रतलाम के अलावा बांसवाड़ा, दाहोद, पीथमपुर सहित अन्य जिलों से भी भक्त सामग्री देने रतलाम आते हैं। दी जाने वाली सामग्री को रजिस्टर में दर्ज कर श्रद्धालु को टोकन दिया जाता है, इसी टोकन से सामग्री वापस मिल जाती है। इस बार भी यही व्यवस्था रहेगी।

पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा के लिए मंदिर समिति व पुलिस प्रशासन भी सभी जरूरी इंतजाम करता है। अतिरिक्त पुलिस बल लगाया जाता है। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे का डिस्पले पास में स्थित माणकचौक थाने पर रहता है। वहां से भी निगरानी होती है। मंदिर के संजय पुजारी ने बताया कि 17 से 28 अक्टूबर तक सामग्री ली जाएगी। भाई दूज के बाद रजिस्टर में दर्ज फोटो, टोकन आदि के आधार पर ही सामग्री वापस की जाएगी।

महालक्ष्मी मंदिर में विशेष शृंगार पर नजर
सामग्री: सोने-चांदी के नोट, चांदी की सिल्लियां, पांच से लेकर 500 रुपये तक के नोट, श्रीयंत्र, कछुआ, तिजोरी आदि।
सामग्री देने वाले औसतन श्रद्धालु-करीब 3000
मान्यता : शृंगार सामग्री वापस लेने के बाद घर की तिजोरी, पूजन स्थान पर रखने से सालभर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
व्यवस्था : धनतेरस से विशेष दर्शन शुरू होते हैं। दर्शन व्यवस्था में भी भक्त सहयोग करते हैं।
सुरक्षा : दीपोत्सव में मंदिर में विशेष पुलिस बल के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जाती है।

 

Loading spinner
यूजफुल टूल्स
QR Code Generator

QR Code Generator

Age Calculator

Age Calculator

Word & Character Counter

Characters: 0

Words: 0

Paragraphs: 0