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भोपाल
जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई के नदी जोड़ो का सपना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में साकार हो रहा है। प्रदेश की दो अत्यंत महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं केन-बेतवा तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं के कार्य का शुभारंभ शीघ्र ही प्रधानमंत्री श्री मोदी करने वाले हैं। यह मध्यप्रदेश ही नहीं पूरे देश के लिए सौभाग्य का विषय है। हम सिंचाई के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करने वाले हैं। हमारे प्रदेश की वर्तमान सिंचाई क्षमता 50 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है। हमने इसे वर्ष 2025-26 तक 65 लाख हेक्टेयर और वर्ष 2028 तक एक करोड़ हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हम इस दिशा में तेज गति से काम भी कर रहे हैं।

जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने होटल मैरियट में बांधों की सुरक्षा संबंधी दो दिवसीय कार्यशाला "रीजनल वर्कशॉप ऑन रैपिड रिस्क स्क्रीनिंग ऑफ डैम्स" का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बांधों की सुरक्षा के लिए वेब आधारित "रैपिड रिस्क एसेसमेंट टूल" भी लॉन्च किया। जल कलश से जल प्रवाहित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला में जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री आनंद मोहन, मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विषय विशेषज्ञ एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

जल संसाधन मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि राष्ट्र का विकास किसानों के विकास में निहित है और किसानों के लिए सिंचाई सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। हमारे राज्य में 6314 छोटे और बड़े बांध हैं। ये बांध हमारे किसानों, नागरिकों और उद्योगों की रीढ़ हैं। पुराने हो चुके इन बांधों का नियमित "चेकअप" करना आवश्यक है, इसीलिये 30 दिसंबर 2021 को देश में "बांध सुरक्षा अधिनियम" लागू किया गया। इसमें मध्यप्रदेश के 1361 बांधों को चिन्हित किया गया है। इनमें से 50 बांध 100 साल से अधिक पुराने हैं, जबकि 90% बांध ढाई दशक पुराने हो चुके हैं। इन सभी का नियमित रखरखाव और सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। चिन्हित बांधों में से 500 से अधिक की प्रथम स्तरीय रैपिड स्क्रीनिंग हो चुकी है। जून 2025 तक सभी बांधों का मूल्यांकन पूरा कर लिया जाएगा। यह अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण है। मध्यप्रदेश में 27 बांधों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्रिप परियोजना-2 के तहत 551 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति सरकार द्वारा प्रदान की गई है।

भारत सरकार जल मंत्रालय की सचिव सुश्री देवाश्री मुखर्जी ने कहा कि मौसम परिवर्तन के साथ बांधों की सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वैज्ञानिक तरीके से सभी बांधों की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए हर वर्ष बारिश के पहले और बाद में बांधों का निरीक्षण और रिस्क असेसमेंट आवश्यक है। इसके लिए शुक्रवार को ऑनलाइन टूल भी लॉन्च किया गया है।

डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन विभाग ने कहा कि मध्य प्रदेश में बांधों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए निरंतर निरीक्षण और रखरखाव किया जा रहा है। यह निरंतर सतर्कता का ही परिणाम है कि प्रदेश के एक बड़े बांध "कारम बांध" को समय से खाली करा लिया गया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री अनिल जैन ने कहा कि बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश में "राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण" का गठन किया गया। भारत में कुल 6.5 हजार बांध हैं, जिनकी निरंतर चौकसी और सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं। इसके लिए रैपिड रिस्क स्क्रीनिंग प्रणाली विकसित की गई है।

 

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