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सनातन धर्म में जब भी मां और बेटे के निस्वार्थ प्रेम की बात की जाती है, तो मां यशोदा और श्रीकृष्ण का नाम सबसे पहले याद किया जाता है. बिना माता यशोदा के भगवान श्रीकृष्ण की कथा कभी पूरी नहीं होती है. पौराणिक परंपरा के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की षष्टि तिथि के दिन यशोदा जयंती मनाई जाती है. ये पावन पर्व मां की ममता को समर्पित किया गया है, जोकि माता यशोदा के जन्मदिवस पर मनाया जाता है. भले ही श्रीकृष्ण का जन्म मां देवकी के गर्भ से हुआ, लेकिन संसार उनको यशोदा के लाल के रूप में ही जानता है.

माता यशोदा ने ही नन्हे से श्रीकृष्ण का स्नेह, ममता और प्रेम से पालन-पोषण किया था. यशोदा जयंती के दिन विधि-विधान से माता यशोदा और भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से विवाहित स्त्रियों की सूनी गोद भर जाती है. इस दिन व्रत भी रखा जाता है. यशोदा जयंती का व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल यशोदा जयंती कब मनाई जाएगी? साथ ही जानते हैं इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व.

यशोदा जयंती 2026 डेट और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि की शुरुआत 7 फरवरी को रात 01 बजकर 18 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 8 फरवरी को रात 02 बजकर 54 मिनट पर होगा. सनतान धर्म में उदयातिथि मानी जाती है. ऐसे में उदयातिथि के नियम के अनुसार, साल 2026 में यशोदा जयंती 7 फरवरी को मनाई जाएगी.

यशोदा जयंती पूजा विधि

यशोदा जयंती पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद माता यशोदा के व्रत का संकल्प लें. फिर घर के मंदिर या पवित्र स्थान पर चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर माता यशोदा के साथ बाल श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखें. पूजा के दौरान दीपक, अगरबत्ती जलाएं. पुष्प, तुलसी दल, चंदन, हल्दी, कुमकुम और नारियल चढाएं.

माता यशोदा को लाल चुनरी चढ़ाएं. भगवान श्रीकृष्ण और माता यशोदा को माखन-मिश्री का भोग लगाएं. साथ ही फल, दही, खीर और मिठाइयां चढाएं. ॐ कृष्णाय नमः मंत्र का जाप करें. माता यशोदा-कृष्ण की वात्सल्य कथा का पाठ करें. पूजा का समापन आरती के साथ करें. दिनभर व्रत रखें. सायंकाल पूजा के बाद फलाहार करें. जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र का दान दें.

यशोदा जयंती का महत्व

यशोदा जयंती का व्रत रखने महिलाओं को श्रीकृष्ण जैसी गुणी संतान मिलती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यशोदा जयंती के दिन विधि-विधान से पूजन और व्रत करने से संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं. इतना ही नहीं संतान के जीवन में सुख-सौभाग्य भी बढ़ता है.

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