Tuesday, July 7, 2026 2:21 am

iPhone 15, 14, 13 पर ऑनलाइन बंपर डिस्काउंट ऑफर

iPhone खरीदने के बारे में सोच रहे हैं तो हम कुछ नए ऑफर्स के बारे में आपको जानकारी देने वाले हैं। साथ ही बताएंगे कि अभी iPhone 15, iPhone 14 और iPhone 13 पर कितना भारी डिस्काउंट चल रह है। क्योंकि अभी सेल की शुरुआत भी हो चुकी है और मॉनसून ऑफर्स भी इसके साथ दिए जा रहे हैं। आज हम आपको इन्हीं ऑफर्स के बारे में बताने जा रहे हैं। iPhone 15- Apple iPhone 15 की बात करें तो ये आपके लिए काफी अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है। इस फोन की MRP 79,900 रुपए है। साथ ही आप इसे विजय सेल्स से खरीद सकते हैं और इसे 13% डिस्काउंट के बाद 69,690 रुपए में खरीदा जा सकता है। साथ ही इस पर कई बैंक ऑफर्स भी मिल रहे हैं जो भारी छूट ऑफर करते हैं। कार्ड्स से पेमेंट करने पर अलग से डिस्काउंट मिल रहा है। iPhone 14 की बात करें तो ये 2 साल पहले लॉन्च हुआ था और इसके कैमरे पर कंपनी ने काफी काम किया था। इस फोन की MRP 69,900 रुपए है और आप इसे 13% डिस्काउंट के बाद 60,990 रुपए में खरीद सकते हैं। यानी कुल मिलाकर ये फोन काफी अच्छा ऑप्शन साबित होता है। बैंक ऑफर्स भी अलग से दिए जा रहे हैं। ये फोन एक्सचेंज ऑफर के साथ ज्यादा सस्ता मिल सकता है। iPhone 13 हालांकि थोड़ा पुराना वैरिएंट हो गया है। लेकिन अगर आप कोई सस्ता आईफोन खरीदना चाहते हैं तो इसे आज ही अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। इस फोन को खरीदने के लिए आपको 52,999 रुपए खर्च करने होंगे। साथ ही बंक ऑफर्स अलग से मिल रहे हैं। लाइट वेट के साथ ये फोन डिजाइन में भी काफी अच्छा ऑप्शन साबित होता है। अलग से ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं जिनकी वजह से ये काफी अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है। Apple की बात करें तो भारत में इसके प्रोडक्ट्स को काफी पसंद भी किया जा रहा है। ऐसे में आपके लिए भी ये काफी अच्छे प्रोडक्ट साबित होने वाले हैं और आप आज ही इसे अपनी पसंदीदा लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। recent visitors 93

मध्य प्रदेश सरकार ने महिला एवं बालिका सशक्तीकरण नीति बनाने के लिए जनता से लेगी सुझाव

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार महिला एवं बालिका सशक्तीकरण के लिए नीति बनाने जा रही है। नीति बनाने के लिए राज्य सरकार जनता से सुझाव लेगी। वहीं प्रदेश के समस्त विभागों को भी नीति बनाने के लिए सहयोग करने को कहा गया है। इसके लिए विभागवार एक महिला अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। ये महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ नीति बनाने के लिए अपने-अपने विभागों में महिला एवं बालिका संबंधित संचालित विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। इसके साथ ही नीति बनाने में सहयोग करेंगे। वहीं जनता से भी ई-मेल और पत्र के माध्यम से सुझाव लिए जाएंगे। मैदानी अधिकारी भी अपने-अपने क्षेत्र में जनता से संपर्क कर उनके सुझाव लेंगे और सरकार को भेजेंगे। इन सुझावों के आधार पर महिला एवं बालिका सशक्तीकरण नीति तैयार की जाएगी। बता दें कि इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जून माह में दो दिवसीय राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन भी किया गया था। 45 से अधिक विभागों के प्रतिनिधियों ने इसमें सहभागिता की थी। कार्यशाला में आए सुझावों के आधार पर बालिकाओं की सुरक्षा, कानून, आजीविका और कौशल विकास के अवसर, जेंडर, पंचायत आदि को लेकर समग्र नीति तैयार की जा रही है। इस कार्य में एनजीओ तथा सामाजिक संस्थाओं को भी जोड़ना जाएगा। समान अधिकार प्राप्त करने करना पड़ता है संघर्ष सरकार का मानना है कि महिलाओं को आज सभी क्षेत्रों में वैधानिक रूप से समान अधिकार प्राप्त है लेकिन समाज में उन्हें आज भी इसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना उनके पूरे भविष्य को तय करता है। महिला सशक्तीकरण एक बहुआयामी दृष्टिकोण है जिसमें आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, विधिक और स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं का समावेश है। इधर, महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि महिला नीति मात्र कागजी दस्तावेज न बने, इसे मेनिफेस्टो के रूप में तैयार करें। सभी ऐसे विभाग जो महिला सशक्तीकरण के पहलुओं से अनछुए है, उन्हें भी शामिल करें। महिला सशक्तीकरण के कई घटक है जैसे शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, कानून आदि। नीति में महिलाओं के मानव अधिकार, उनकी भागीदारी, हिंसा जैसी कुरीतियों को कैसे दूर किया जा सकता है, उसका भी समावेश होगा। recent visitors 93

पिछले 20 दिनों में सरकार द्वारा संचालित आशा किरण आश्रय गृह में 13 मौतें हो चुकी हैं, मामला सदन में उठाएगी: स्वाति मालीवाल

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि उसने मानसिक स्वास्थ्य सुविधा आशा किरण आश्रय गृह में हाल ही में हुई मौतों के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कथित तौर पर इन आश्रय गृहों में रहने वाले लोगों की मौत “स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और कुपोषण” के कारण हुई है। मालीवाल ने कहा, “पिछले 20 दिनों में दिल्ली सरकार द्वारा संचालित आशा किरण आश्रय गृह में 13 मौतें हो चुकी हैं। कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। जब मैं डीसीडब्ल्यू में थी, तो मैंने यहां की स्थिति का निरीक्षण किया था। यहां की स्थिति बहुत खराब है। यहां न तो उचित स्टाफ है और न ही डॉक्टर।” उन्होंने कहा, "हमने उस समय एक रिपोर्ट बनाई और उसे दिल्ली सरकार को सौंप दिया, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं की गई।" उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे को उठाया जाए और एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में भी उठाएंगी। दिल्ली सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई मौतों की मजिस्ट्रेट से जांच के आदेश दिए। दिल्ली की मंत्री आतिशी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को 48 घंटे के भीतर मामले की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में 10 महिलाओं समेत 12 मरीजों की मौत हो गई और 45 से अधिक मरीजों को बाहर इलाज के लिए भेजा गया। हालांकि, 12 में से केवल एक शव का पोस्टमार्टम किया गया। सभी मृतकों में दस्त और उल्टी के लक्षण दिखे और मरीजों के शवों को आमतौर पर डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल भेजा जाता था, जो केंद्र से 2 किमी दूर है, जहां बीमार मरीजों का इलाज भी किया जाता था। इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने दिल्ली सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “आशा किरण में 450 लोग बिना उचित भोजन, पानी और दवा के रह रहे हैं। आतिशी को उन्हें दिए जा रहे दूषित पानी के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” उत्तरी दिल्ली के रोहिणी इलाके में 350 लोगों की क्षमता वाली आशा किरण की स्थापना 1989 में की गई थी। इसे दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा चलाया जाता है। राज कुमार आनंद के इस्तीफे के बाद से इसका कोई प्रमुख नहीं है। recent visitors 83

सभी सेक्टरों में नियुक्तियों में दोहरे अंक में वृद्धि देखने को मिली, भारत में जुलाई में नियुक्तियां 12 प्रतिशत बढ़ी

नई दिल्ली भारत में नियुक्तियां जुलाई में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़ी हैं। सभी सेक्टरों में नियुक्तियों में दोहरे अंक में वृद्धि देखने को मिली है। शुक्रवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स के मुताबिक, जून के मुकाबले तिमाही आधार पर नियुक्तियों में 11 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। फार्मा और बायोटेक सेक्टर में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है। इस सेक्टर में बड़ौदा और हैदराबाद में नियुक्तियों में क्रमश: 61 प्रतिशत और 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, एफएमसीजी सेक्टर में नियुक्तियों में 26 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इस सेक्टर में बेंगलुरु और कोलकाता में नियुक्तियां क्रमश: 52 प्रतिशत और 43 प्रतिशत बढ़ी है। रियल एस्टेट और आईटी सेक्टर में पिछले साल के मुकाबले नियुक्तियों में क्रमश: 23 प्रतिशत और 17 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है। नौकरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर, डॉक्टर पवन गोयल ने कहा कि यह पहला महीना है, जब बाजार में सकारात्मक बढ़त देखने को मिली है। यह सभी सेक्टरों में फैला हुआ है। ये काफी अच्छा है। उन्होंने आगे कहा कि यह सकारात्मक बदलाव भारत में व्हाइट कॉलर नौकरियों में उत्थान की एक शुरुआत हो सकती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि मशीन लर्निंग इंजीनियर्स, डेटा साइंटिस्ट, बीआई मैनेजर्स और प्रोडक्ट मैनेजर्स की मांग में सबसे ज्यादा इजाफा देखने को मिला है। दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में नियुक्तियों के कारण वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) में साल-दर-साल 12 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। गुजरात लगातार नियुक्तियों में बढ़त का नेतृत्व कर रहा है। हैदराबाद अलग-अलग सेक्टर में रोजगार सृजन के एक हब के रूप में विकसित हुआ है। recent visitors 84

आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना से 3,029 ट्रांसजेंडर लाभान्वित हुए

नई दिल्ली  अगस्त 2022 से कुल 3,029 सत्यापित ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत शामिल किया गया है। इसकी जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा में दी। नड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। लाभार्थियों को मिलेगी कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं मंत्री ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए व्यापक पुनर्वास हेतु केन्द्रीय क्षेत्र योजना की आजीविका और उद्यम के लिए लोगों को सहायता उप-योजना के तहत लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। नड्डा ने कहा कि इन लाभार्थियों को स्वास्थ्य लाभ पैकेज 2022 के अनुसार कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। उन्होंने एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा, AB-PMJAY के राष्ट्रीय स्वास्थ्य लाभ पैकेज मास्टर के तहत लिंग पुष्टि सर्जरी से संबंधित प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए, किसी भी लाभार्थी ने इस योजना के तहत यह उपचार नहीं कराया है। ये लाभार्थी योजना के तहत अतिरिक्त ट्रांसजेंडर-विशिष्ट उपचार के लिए पात्र हैं। नड्डा ने कहा कि लिंग पुष्टि सर्जरी और अन्य ट्रांसजेंडर-विशिष्ट चिकित्सा उपचार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और डॉ. आरएमएल अस्पताल में उपलब्ध हैं। मरीजों ने बचाए 28000 करोड़ रुपये- नड्डा संसद में प्रश्नकाल के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि जनऔषधि केंद्रों पर कीमतों में कमी के कारण मरीज अबतक 28,000 करोड़ रुपये बचाने में सफल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि इलाज के लिए सस्ती दवाएं और विश्वसनीय प्रत्यारोपण (अमृत) योजना के तहत मरीज 24,273 करोड़ रुपये बचा सकते हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना फार्माक्यूटिकल्स विभाग द्वारा जन औषधि केंद्र नामक दुकानों में गरीबों और वंचितों को कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई एक योजना है। इस योजना का एकमात्र उद्देश्य कम कीमतों पर दवाएं उपलब्ध करके प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य देखभाल बजट को कम करना है। वैक्सीन को लेकर क्या बोले नड्डा? कोरोना काल में दवाओं की सप्लाई को लेकर जेपी नड्डा ने कहा कि सात देशों में कोवैक्सीन गया है। 48 देशों में विश्व मैत्री में मुफ्त वैक्सीन दी गई है। हमने 100 से अधिक देशों को दवाएं भेजीं। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि हमसे भी लोगों ने कहा कि भारत की वैक्सीन सर्वश्रेठ है। इसमें कोई आपत्ति है क्या? डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने सवाल किया कि क्या भारत की 99 फीसदी युवा आबादी अनफिट है। इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि ये रिपोर्ट फिट-अनफिट की नहीं है। रिपोर्ट है कि 99 फीसदी लोग सफिशिएंट फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते हैं। उनके मुताबिक सफिशिएंट फिजिकल एक्टिविटी का जो मानक है, आप भी और हम भी, बहुत से सदस्य इनसफिशिएंट में ही आते होंगे।  recent visitors 93

कोवैक्सीन के टीके के पेटेन्ट हासिल करनेबीबीआईएल ने चुपचाप बिना बताये आवेदन कर दिया था

नई दिल्ली  कोरोना के विषाणु को निष्क्रिय करने के लिए स्वदेश में विकसित कोवैक्सीन के टीके के पेटेन्ट हासिल करने के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) ने चुपचाप बिना बताये आवेदन कर दिया था लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय जीवाणुविज्ञान संस्थान (एनआईवी), तीनों संयुक्त रूप से आवेदक बने हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। तृणमूल कांग्रेस के प्रो. सौगत राय ने एक सवाल में कहा कि कोवैक्सीन काेरोना संक्रमण के विरुद्ध दुनिया का सबसे प्रभावी टीका माना गया है जिसे आईसीएमआर और एनआईवी ने संयुक्त रूप से 35 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया था। लेकिन इस टीके के पेटेंट के लिए बीबीआईएल ने आवेदन किया है और उसमें आईसीएमआर और एनआईवी का उल्लेख नहीं किया है। इस पर सरकार क्या दंडात्मक कार्रवाई करेगी। नड्डा ने कहा कि यह सही है कि कोवैक्सीन के विकास के लिए आईसीएमआर और एनआईवी ने बीबीआईएल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। वैक्सीन के विकास के दो भाग थे -एक, विषाणु को अलग थलग करना और दूसरा, विषाणु को निष्क्रिय करना। ये काम आईसीएमआर ने एनआईवी की प्रयोगशाला में किया जिस पर सात करोड़ रुपए की लागत आयी और बीबीआईएल ने प्रयोगशाला परीक्षण एवं विकास का काम किया जिसमें सात करोड़ से अधिक राशि व्यय हुई। बीबीआईएल ने भी इस काम पर 60 करोड़ से अधिक राशि खर्च की है। उन्होंने कहा कि जब हमें पता चला कि बीबीआईएल ने पेटेंट आवेदन में सिर्फ खुद के नाम का उल्लेख किया था। लेकिन जैसे ही सरकार को इसका पता लगा, हमने तुरंत आपत्ति दाखिल की और कहा कि यह तो संयुक्त एमओयू के तहत विकसित किया गया है और तीनों का संयुक्त स्वामित्व है। इस पर बीबीआईएल ने स्वीकार किया कि अनजाने में गलती से वैक्सीन के विकास के लिए जिम्मेदार नामों में आईसीएमआर एवं एनआईवी के नाम छूट गये थे। बहरहाल अब तीनों नाम संयुक्त रूप में पेटेंट के आवेदन में दर्ज हो गये हैं। एक पूरक प्रश्न के उत्तर में नड्डा ने कहा कि कोविड काल में वैक्सीन मैत्री ऑपरेशन के तहत भारत ने 100 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की थी और उनमें से 48 देशों को मुफ्त वैक्सीन भेजी थी। सात देशों को कोवैक्सीन दी गयी थी। कुछ 220 करोड़ डबल डोज़ का उत्पादन हुआ था। भारत में काेविड टीकाकरण का कार्यक्रम विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम था।     recent visitors 94

तेजस फाइटर का भारत में अभी हो रहा इंतजार,पाक उड़ाने लगे पांचवीं पीढ़ी का चीनी फाइटर जेट J-31

नईदिल्ली भारत इन दिनों तेजस फाइटर जेट के उत्‍पादन के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है लेकिन अमेरिका के इंजन नहीं देने से इसमें जल्‍द सफलता मिलती नहीं दिख रही है। अब कहा जा रहा है कि नवंबर महीने में भारत को पहला तेजस फाइटर जेट मिलेगा। वहीं भारत का सबसे बड़ा दुश्‍मन चीन अब पाकिस्‍तान की वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट से लैस करने जा रहा है। पाकिस्‍तानी मीडिया के मुताबिक पाकिस्‍तानी वायुसेना के फाइटर पायलट अब चीन के J-31 स्‍टील्‍थ फाइटर जेट की ट्रेनिंग लेना शुरू कर चुके हैं। कुछ समय पहले ही पाकिस्‍तानी वायुसेना के प्रमुख ने संकेत दिया था कि उनका देश जल्‍द ही चीन ने जे-31 फाइटर जेट खरीदने जा रहा है। पाकिस्‍तान की वायुसेना जहां पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट से लैस होने जा रही है, वहीं भारत अभी भी चौथी पीढ़ी के राफेल फाइटर जेट पर अटका हुआ है। पाकिस्‍तानी टीवी चैनल बोल न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्‍तानी वायुसेना के पायलटों ने चीन में जे-31 जेट की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया है। उसने बताया कि यह पाकिस्‍तान की एयरफोर्स के लिए बड़ी घटना है। उसने बताया कि जल्‍द ही पाकिस्‍तानी वायुसेना में चीनी जे-31 फाइटर जेट को शामिल कर लिया जाएगा और ये ट्रेन किए हुए पायलट उसे उड़ाएंगे। चीन का दावा है कि उसका जे-31 या FC-31 फाइटर जेट पांचवीं पीढ़ी का है और उसे रेडॉर से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसी वजह से चीन इसे 'अदृश्‍य' मानता है। इससे पहले पाकिस्‍तानी वायुसेना के तत्‍कालीन प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने 2 जनवरी को ऐलान किया था कि उनका देश इस नए चीनी फाइटर जेट को शामिल करने जा रहा है। पाकिस्‍तान और तुर्की के प्‍लान से डरा चीन! इससे पहले पाकिस्‍तान ने चीन से जे-10सी फाइटर जेट खरीदा था जो उसने राफेल से टक्‍कर लेने के लिए लिया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्‍तान को यह फाइटर जेट बेचना चीन के लिए काफी महत्‍वपूर्ण है। पाकिस्‍तान इन दिनों चीन के हथियारों का सबसे बड़ा ग्राहक बनकर उभरा है। उन्‍होंने कहा कि चीन इस विमान के लिए पाकिस्‍तान को सब्सिडी और सपोर्ट मुहैया करा सकता है। चीन पाकिस्‍तान को चेंगदू जे-20 फाइटर जेट के प्रोडक्‍शन में भी मदद का ऑफर दे सकता है। यह विमान भी पांचवीं पीढ़ी का है। दरअसल, चीन को डर सता रहा है कि उसका सबसे बड़ा ग्राहक तुर्की के पास जा सकता है जो कान फाइटर जेट बना चुका है। एफ-35 को टक्‍कर देने के लिए बनाया जे-31 जेट कान एक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है और तुर्की ने पाकिस्‍तान को इसका ऑफर दिया है। तुर्की चाहता है कि पाकिस्‍तान इस विमान के निर्माण में मदद करे। वहीं कंगाल पाकिस्‍तान अब चीन बनाम तुर्की में फंसा हुआ था लेकिन माना जा रहा है कि वह अपने आका चीन की ओर ही जा रहा है। जे-31 एक कम कीमत वाला पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है जिसका बड़े पैमाने पर उत्‍पादन किया जा सकता है। इसे चीनी वायुसेना और नेवी दोनों में शामिल किया गया है ताकि अमेरिका के एफ-35 और यूरोप के फोर प्‍लस फाइटर जेट को टक्‍कर दिया जा सके। पाकिस्‍तान की अभी जो माली हालत है, उसको देखकर लग नहीं रहा है कि वह बहुत बड़ी तादाद में यह विमान खरीद पाएगा। वहीं भारत की बात करें तो अभी हमारे पास एक भी पांचवीं पीढ़ी का विमान नहीं है। रूस और अमेरिका दोनों ही अपने स्‍टील्‍थ विमान बेचना चाहते हैं।   recent visitors 96