Wednesday, July 8, 2026 8:08 am

21 और 22 अगस्त को होंगे अंतरिक्ष विज्ञान पर केन्द्रित व्याख्यान, संगोष्ठी और अन्य कार्यक्रम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 21 एवं 22 अगस्त को सभी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं स्कूलों में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर भारत के उतरने की ऐतिहासिक घटना को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और स्कूलों में अंतरिक्ष विज्ञान पर केन्द्रित व्याख्यान, संगोष्ठी, प्रदर्शनी, साइंस क्विज, मॉडल मेकिंग, पेंटिंग, विशेषज्ञ व्याख्यान और फिल्म प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भोपाल तथा आईआईटी इंदौर द्वारा विश्वविद्यालयीन, महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए अंतरिक्ष विज्ञान पर केन्द्रित हैकाथॉन का आयोजन किया जाएगा। हैकाथॉन में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत करने के साथ ही उनके नवाचार को आगे बढ़ाने में सहयोग किया जाएगा। हैकाथॉन में भाग लेने के लिए आईआईटी इंदौर और मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की वेबसाइट पर 18 अगस्त से रजिस्ट्रेशन प्रारंभ होंगे। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक संभाग में चयनित किसी एक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में अंतरिक्ष विषय पर वैज्ञानिक-विद्यार्थी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। विगत वर्ष 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर के अवतरण और प्रज्ञान रोवर के परिनियोजन से चंद्रयान-3 की सफलता के साथ भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश बन गया है। इसके साथ हमारा देश चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के समीप उतरने वाला पहला देश बनकर अंतरिक्ष अग्रणी राष्ट्रों के विशिष्ट समूह में शामिल हो गया है। इस ऐतिहासिक मिशन के परिणाम से आने वाले वर्षों में मानव जाति को लाभ होगा।   recent visitors 70

टाटा मोटर्स ने स्थानीय रूप से विनिर्मित रेंज रोवर स्पोर्ट की आपूर्ति की शुरू

मुंबई  टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर ने घरेलू बाजार में स्थानीय रूप से विनिर्मित रेंज रोवर स्पोर्ट की आपूर्ति शुरू करने की  घोषणा की। कंपनी ने कहा कि इसके साथ ही, अब रेंज रोवर का पूरा खंड भारत में निर्मित हो गया है। जगुआर लैंड रोवर ने इस वर्ष मई में घोषणा की थी कि वह भारत में टाटा मोटर्स के पुणे संयंत्र में रेंज रोवर और रेंज रोवर स्पोर्ट का विनिर्माण करेगी। कंपनी के अनुसार, पेट्रोल तथा डीजल दोनों इंजन में उपलब्ध नई रेंज रोवर स्पोर्ट की कीमत 1.40 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) है। जेएलआर इंडिया के प्रबंध निदेशक राजन अंबा ने कहा, ‘‘यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि हम स्थानीय रूप से निर्मित रेंज रोवर स्पोर्ट की आपूर्ति शुरू कर रहे हैं। इसके साथ ही, रेंज रोवर का पूरा खंड अब भारत में बना है। स्थानीय स्तर पर अब छह वाहनों का विनिर्माण किया जा रहा है।’’     recent visitors 114

इंग्लैंड ने ओलंपिक में क्रिकेट के लिए की खास प्लानिंग, पड़ोसी टीम को 4 साल पहले ही दे दिया बड़ा ऑफर

लंदन  इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) और क्रिकेट स्कॉटलैंड ने लॉस एंजिल्स में 2028 ओलंपिक खेलों में पुरुष और महिला ग्रेट ब्रिटेन (जीबी) क्रिकेट टीमों को मैदान में उतारने की योजना के बारे में बातचीत शुरू कर दी है। क्रिकेट 1900 के बाद पहली बार ओलंपिक में वापस आएगा, जब पिछले साल के अंत में इसे शामिल किए जाने की पुष्टि की गई थी। विवरण की पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन आईसीसी ने महिला और पुरुष दोनों प्रतियोगिताओं के लिए छह-टीम टी-20 टूर्नामेंट का प्रस्ताव दिया है, जो लगभग एक सप्ताह तक चलने की उम्मीद है और जो संभवतः एक साथ नहीं बल्कि लगातार खेले जाएँगे। क्वालिफिकेशन विवरण की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन आईसीसी की टी-20 रैंकिंग का कुछ हद तक उपयोग किया जाएगा। अधिकांश देश अपनी सामान्य शैली में प्रतिस्पर्धा करेंगे, लेकिन अगर इंग्लैंड क्वालीफ़ाई करता है तो वे बाकी ओलंपिक की तरह ग्रेट ब्रिटेन के रूप में खेलेंगे। इससे ब्रैंडन मैकमुलेन या सारा और कैथरीन ब्राइस जैसे कुछ स्कॉटिश खिलाड़ियों के प्रतिस्पर्धा करने की संभावना खुल जाती है। ईसीबी और क्रिकेट स्कॉटलैंड ने प्रस्तावित जीबी क्रिकेट टीमों पर एक साथ काम करने के बारे में प्रारंभिक चर्चा की है। क्रिकेट स्कॉटलैंड अपने संचालन में सक्रिय भागीदारी के लिए जोर दे रहा है और खिलाड़ियों और कर्मचारियों का योगदान देने के लिए उत्सुक है, लेकिन ईसीबी टीमों का नामित शासी निकाय होगा। ईसीबी के प्रवक्ता ने ईएसपीएनक्रिकइन्फो को बताया, लॉस एंजिल्स ओलंपिक में अभी चार साल बाकी हैं, यह अभी बहुत शुरुआती चरण है, लेकिन हम टीम जीबी और क्रिकेट स्कॉटलैंड से अगले कदमों के बारे में बात कर रहे हैं। एक बार फिर ग्रेट ब्रिटेन के ओलंपियनों ने इस साल पेरिस में अपने कारनामों से राष्ट्रीय कल्पना पर कब्जा कर लिया है, और हम 2028 में ओलंपिक मंच पर क्रिकेट की वापसी पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, इंग्लैंड और वेल्स द्वारा 2026 और 2030 में महिला और पुरुष [टी20] विश्व कप की मेजबानी के साथ, यह खेल को आगे बढ़ाने और अधिक लोगों को क्रिकेट के प्रति प्रेम विकसित करने के लिए प्रेरित करने का एक और शानदार अवसर है। ब्रिटिश ओलंपिक एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी एन्सन ने सोमवार को कहा, हमें गोल्फ़, रग्बी और महिला फ़ुटबॉल में अच्छा अनुभव है, कि कैसे चार राष्ट्र [इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड] एक साथ आ सकते हैं और एक देश को मुख्य शासी निकाय के रूप में नामित कर सकते हैं और अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि क्रिकेट भी ऐसा ही होगा। एन्सन, जो लंकाशायर के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा, ईसीबी इसके केंद्र में होगा। उन्हें क्रिकेट स्कॉटलैंड के साथ मिलकर काम करना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह ठीक से हो। हम उन्हें एक साथ आने और एक एकल राष्ट्रीय शासी निकाय बनाने के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर करने में मदद करेंगे, जैसा कि हमने उन अन्य खेलों में किया है। हम उन्हें पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का सदस्य बनाने के लिए ईसीबी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। टीम जीबी आधिकारिक तौर पर ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड ओलंपिक टीम है, और उत्तरी आयरलैंड के एथलीट टीम जीबी या आयरलैंड में से किसी एक के लिए प्रतिस्पर्धा करना चुन सकते हैं। लेकिन चूंकि क्रिकेट का आयोजन पूरे आयरलैंड में किया जाता है, इसलिए मार्क एडेयर और पॉल स्टर्लिंग जैसे उत्तरी आयरलैंड के प्रमुख क्रिकेटरों के टीम जीबी के लिए खुद को नामांकित करने की संभावना बहुत कम है। 2028 ओलंपिक में क्रिकेट आयोजनों के लिए स्थल की पुष्टि अभी नहीं हुई है। लॉस एंजिल्स नाइट राइडर्स और मेजर लीग क्रिकेट ने इरविन के ग्रेट पार्क में एक स्टेडियम बनाने की योजना बनाई है, जबकि ओकलैंड कोलिज़ीयम को भी एक विकल्प के रूप में पेश किया गया है।     recent visitors 82

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह रामकथा में हुये शामिल

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि भारतीय संस्कृति एक सूत्र में इस वजह से बंधी है क्योंकि भगवान राम प्रत्येक भारतीय के मन में बसे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की सुबह भगवान राम से शुरू होती है और रात्रि विश्राम से पहले भगवान राम पर ही समाप्त होती है। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह  भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित मानस भवन में तुलसी जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। राम कथा 13 अगस्त से 17 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 6.30 बजे से पूज्य दीदी मंदाकिनी रामकिंकर जी के श्रीमुख से होगी। कार्यक्रम के बाद पूज्य दीदी ने रामकथा की। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि भोपाल का तुलसी मानस भवन अध्यात्म और सनातन का स्थाई पता है। भोपाल के नागरिक इसे चिरस्थायी बनाने के लिये पूरे श्रद्धाभाव से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भगवान राम की महिमा और रामचरित मानस से अवगत कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम से हमारे बड़े से बड़े कार्य अच्छी तरह संपन्न हो जाते हैं। कार्यक्रम में स्कॉलर होम स्कूल की छात्रा वृंदा जेठा ने राम नाम की महिमा पर विचार व्यक्त किये। छात्र वृंदा ने कहा कि भगवान राम का चरित्र प्रत्येक भारतीय की ताकत है। मर्यादा पुरूषोत्तम राम एक पुत्र, एक भाई एवं अन्य रूपों में अपनी मर्यादा का परिचय देते हैं। वह प्रत्येक भारतीय के लिये अनुकरणीय है। बगैर राम नाम के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। तुलसी मानस संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंडित रामकिंकर उपाध्याय जी का यह जन्म शताब्दी वर्ष है। पूज्य दीदी मंदाकिनी रामकिकंर जी की श्रीराम कथा का यह रजत जयंती वर्ष है। तुलसी जयंती समारोह में 8 अगस्त को स्कूल के छात्रों की तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता, 11 अगस्त को महाविद्यालयीन छात्रों की प्रतियोगिता, 12 अगस्त को पुरस्कार वितरण एवं संस्मरण सुनाये गये। कार्यक्रम का संचालन कमलेश जेमिनी ने किया। कार्यक्रम में सचिव कैलाश जोशी, देवेन्द्र कुमार रावत, प्रभुदयाल मिश्र, विजय अग्रवाल एवं बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित थे।   recent visitors 65

फर्जी जीएसटी पंजीकरण के खिलाफ दूसरा अखिल भारतीय अभियान 16 अगस्त से होगा शुरू

नई दिल्ली  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की बैठक नौ सितंबर को होगी।परिषद ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक खाते पर लिखा, ‘‘जीएसटी परिषद की 54वीं बैठक नौ सितंबर 2024 को नई दिल्ली में होगी।’’ केंद्र तथा राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के संबंध में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। यह एक जुलाई 2017 से काम कर रही है। बैठक में दरों को युक्तिसंगत बनाने, कर ‘स्लैब’ को कम करने के अलावा जीएसटी के तहत उलटा शुल्क हटाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। पिछली परिषद की बैठक 23 जून को हुई थी, जिसके बाद सीतारमण ने कहा था कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री सुमंत चौधरी के नेतृत्व में दरों को युक्तिसंगत बनाने पर गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) कार्य की स्थिति और समिति द्वारा ‘कवर’ किए गए पहलुओं तथा समिति के समक्ष लंबित कार्यों पर एक प्रस्तुति देगा। फर्जी जीएसटी पंजीकरण के खिलाफ दूसरा अखिल भारतीय अभियान 16 अगस्त से होगा शुरू केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा है कि कर अधिकारी 16 अगस्त से फर्जी (माल एवं सेवा कर) जीएसटी पंजीकरण के खिलाफ दो महीने का विशेष अभियान शुरू करेंगे। पहले, इस तरह का अभियान पिछले साल मई में चलाया गया था। इसमें 24,000 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध जीएसटी चोरी से जुड़े करीब 22,000 फर्जी पंजीकरणों का पता चला था। वरिष्ठ केंद्र और राज्य कर अधिकारियों वाली राष्ट्रीय समन्वय समिति ने पिछले महीने विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया था। विशेष अभियान के तहत, जीएसटी नेटवर्क, विश्लेषण एवं जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय (डीजीएआरएम), सीबीआईसी के साथ समन्वय से विस्तृत डेटा विश्लेषिकी तथा जोखिम मापदंडों के आधार पर संदिग्ध/उच्च जोखिम वाले जीएसटीआईएन की पहचान करेगा। ऐसी जानकारी आगे के सत्यापन के लिए क्षेत्राधिकार वाले कर अधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद केंद्र तथा राज्य जीएसटी अधिकारी संदिग्ध जीएसटीआईएन (जीएसटी पहचान संख्या) का तय समय में सत्यापन करेंगे। अगर यह पाया गया कि जीएसटीआईएन फर्जी है या मौजूद ही नहीं है, तो कर अधिकारी पंजीकरण को निलंबित करने और रद्द करने तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को रोकने की कार्रवाई शुरू करेंगे। सीबीआईसी ने क्षेत्रीय कार्यालयों को जारी निर्देश में कहा, ‘‘सभी केंद्रीय तथा राज्य कर प्रशासनों द्वारा 16 अगस्त 2024 से 15 अक्टूबर 2024 तक दूसरा विशेष अखिल भारतीय अभियान शुरू किया जा सकता है, ताकि संदिग्ध/फर्जी जीएसटीआईएन का पता लगाया जा सके और इनको जीएसटी परिदृश्य से बाहर निकालने तथा सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए अपेक्षित सत्यापन और आगे की सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।’’   recent visitors 108

देश में ऊर्जा की मांग 2050 तक दोगुनी होने की संभावना, हमारा सारा ध्यान एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर – मंत्री पुरी

नई दिल्ली  भारत मौजूदा समय में विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने  ये बात कही। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ऊर्जा की मांग 2050 तक दोगुनी होने की संभावना है। हमारा सारा ध्यान देश के मौजूदा एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर है। इस मिशन के लिए मंत्रालय की ओर से ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के नामांकित क्षेत्रों से नए कुओं या कुओं से उत्पादित गैस के आवंटन को 20 प्रतिशत प्रीमियम (नई गैस के लिए भारतीय क्रूड बास्केट मूल्य का कुल 12 प्रतिशत) पर नोटिफाइड किया गया है जबकि, पेट्रोलियम प्लानिंग और एनालिसिस सेल (पीपीएसी) द्वारा मासिक आधार पर घोषित प्रशासित मूल्य तंत्र (एपीएम) भारतीय क्रूड बास्केट मूल्य का 10 प्रतिशत तय किया गया है। केंद्रीय मंत्री की ओर से कहा गया कि इससे कंपनियों को ऐसे नए गैस प्रोजेक्ट को विकसित करने में और चलाने में सफलता मिलेगी, जहां से गैस निकलना कठिन होता है और अधिक मात्रा में कैपिटल और टेक्नोलॉजी की आवश्यकता होती है। आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य की तरफ बढ़ते हुए देश ने रिकॉर्ड गैस उत्पादन दर्ज किया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का गैस उत्पादन वित्त वर्ष 24 में 36.43 बिलियन क्यूबिक फीट (बीसीएम) रहा, जो कि वित्त वर्ष 21 में 28.7 बीसीएम था। वित्त वर्ष 26 तक देश का गैस उत्पादन 45.3 बीसीएम पहुंच सकता है। देश में बढ़ती हुई ऊर्जा की मांग को देखते हुए सरकार का फोकस कच्चे तेल और गैस की खोज को बढ़ाना भी है। देश में जून में 5,594 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (एमएमएससीएम) गैस की खपत हुई थी। सरकार के मुताबिक, ग्रीन ऊर्जा की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए गैस कंपनियां भी अपने नेटवर्क को बढ़ा रही है। देश में जून में पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की मांग 2.6 प्रतिशत बढ़कर 20 मिलियन मीट्रिक टन हो गई है।   recent visitors 82

नेशनल मिनिरल ट्रस्ट की मीटिंग में निर्णय, छत्तीसगढ़ के कटघोरा में खुलेगी देश की पहली लीथियम खदान

– मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में उपस्थित रहे श्री श्याम बिहारी जायसवाल – लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में 10 से 2 हजार पीपीएम लीथियम कंटेन्ट की उपलब्धता रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर उनके प्रतिनिधि के रूप में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित नेशनल मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की 6वीं गवर्निंग बॉडी मीटिंग में शामिल हुए। बैठक में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में खनिजों का दोहन और उनके उपयोग के साथ प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण पर चर्चा हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित कटघोरा क्षेत्र की भी चर्चा हुई। जिओलाजिकल सर्वे आफ इंडिया में कटघोरा के लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में लीथियम के बड़ा भंडार होने की पुष्टि हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में उपस्थित रहने वाले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जानकारी देते हुए कहा है कि कटघोरा में शीघ्र ही शुरू होने वाली लीथियम की खदान देश की पहली लीथियम खदान होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लीथियम एक अहम धातु है जिससे राज्य और देश विकास की नई दिशा की तरफ अग्रसर होंगे। उन्होंने कहा कि लीथियम खदान के शुरु हो जाने से छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश के अग्रणी राज्यों में से एक होगा और विकसित भारत, 2047 के योगदान में छत्तीसगढ़ के लीथियम भंडार का बड़ा योगदान होगा। गौरतलब है कि भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ सहित बिहार, गुजरात, झारखण्ड, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर में स्थित 20 क्रिटिकल एंड स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन हेतु एमएसटीसी पोर्टल में एनआईटी जारी किया गया है। इन 20 ब्लॉक्स में से छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित कटघोरा क्षेत्र में लिथियम एंड आरईई ब्लॉक भी शामिल है। लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में जीएसआई द्वारा प्रारंभिक सर्वे में लगभग 10 पीपीएम से 2 हजार  पीपीएम लिथियम कन्टेन्ट पाया गया है। ब्लॉक में रेयर अर्थ एलिमेंट की भी उपस्थिति पाई गई है। क्रिटिकल एंड स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की आवश्यकता रिन्यूवेबल एनर्जी, रक्षा, कृषि, फार्मास्युटिकल, उच्च-तकनीकी इलेक्ट्रानिक्स, दूरसंचार, परिवहन आदि में होती है। इस खनिज के मामलों में वर्तमान में देश आयात पर निर्भर है। recent visitors 73