Saturday, July 4, 2026 4:12 am

सऊदी अरब ने भारत और अन्य देशों के साथ मजबूत संबंध, हाल ही में एक नई पहल का शुभारंभ किया

सऊदी अरब सऊदी अरब ने हाल ही में एक नई पहल का शुभारंभ किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय समाज और भारतीय तथा अन्य प्रवासी समुदायों के बीच मजबूत और सकारात्मक संबंध स्थापित करना है। इस पहल का नाम "वैश्विक सद्भाव पहल" रखा गया है, और इसका मुख्य फोकस जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक संवर्धन करना है। बुधवार रात को इस पहल की शुरुआत करते हुए सऊदी अरब के मीडिया उप मंत्री खालिद बिन अब्दुल कादिर अल-गामदी ने कहा, “यह पहल प्रवासियों की विभिन्न संस्कृतियों और उनके बीच सद्भाव को प्रदर्शित करेगी।” उन्होंने कहा कि यह पहल सऊदी अरब में रहने वाले विभिन्न प्रवासी समुदायों के योगदान को उजागर करेगी और उनकी संस्कृति को सम्मान देगी। विज़न 2030 का हिस्सा वैश्विक सद्भाव पहल, सऊदी अरब के 'विज़न 2030' के अंतर्गत आने वाले जीवन की गुणवत्ता कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कार्यक्रम सऊदी अरब के सामाजिक और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया है। इस मौके पर भारत के राजदूत सुहेल एजाज़ खान और कई अन्य देशों के उच्चस्तरीय राजनयिक भी उपस्थित थे। राजदूत खान ने कहा कि सऊदी अरब में भारतीय समुदाय सबसे बड़ा प्रवासी समूह है, जिसकी संख्या लगभग 26 लाख है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में भारतीयों की संख्या में लगभग दो लाख की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि सऊदी अरब में बढ़ते आर्थिक अवसरों के साथ-साथ भारतीय कामगारों की अच्छी साख के कारण हो रही है। भारतीय कामगारों की अच्छी साख खान ने यह भी उल्लेख किया कि "विज़न 2030" के कारण सऊदी अरब में बड़े आर्थिक मौके खुल रहे हैं। उन्होंने कहा, "यहां भारतीयों की अच्छी साख है, जो उन्हें अधिक विश्वास के साथ काम करने की प्रेरणा देती है।" इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि भारतीय कामगारों की प्रोफाइल में भी बदलाव आया है। अब यहां ज्यादा कुशल और योग्य भारतीय कामगार आ रहे हैं, जो सऊदी अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती खान ने यह भी कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं, और सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान भी हाल ही में जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। उन्होंने दोनों देशों के बीच थल सैनिक और नौसैनिक अभ्यास की जानकारी भी साझा की, जिससे संबंधों में और मजबूती आई है। रियाद सीज़न का आयोजन वैश्विक सद्भाव पहल के तहत 13 से 21 अक्टूबर तक अल-सुवेदी पार्क में 'रियाद सीज़न' का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों की विविध जीवन शैलियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत के अलावा अन्य देशों जैसे कि फिलीपींस, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, यमन, सूडान, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, बांग्लादेश और मिस्र भी शामिल हैं। अल-सुवेदी पार्क में भारतीय नृत्य मंडलियों, संगीत समूहों और गायकों ने अपने प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत किया है। भारतीय कलाकारों की भागीदारी इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले भारतीय कलाकारों में प्रसिद्ध संगीतकार हिमेश रेशमिया, रैपर एमीवे बंटाई और क्रिकेटर उमरान मलिक तथा एस श्रीसंत शामिल हैं। भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए विशेष रूप से भारतीय व्यंजनों, कपड़ों और हस्तशिल्प के लिए एक अलग बाजार भी स्थापित किया गया है, जो भारतीय सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। सऊदी अरब की यह नई पहल न केवल भारतीय प्रवासी समुदाय को सशक्त बनाएगी, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों को और अधिक मजबूत करेगी। यह कार्यक्रम विभिन्न संस्कृतियों के बीच सद्भाव और एकता को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।   recent visitors 71

इजरायली हमले में हमास के नए राजनीतिक नेता याह्या सिनेवार के भी मारे जाने की संभावना

दुबई इजरायल-हमास युद्ध को लेकर एक और बड़ी खबर आ रही है, जहां हमास के नए राजनीतिक नेता याह्या सिनेवार के भी मारे जाने की संभावना है। इजरायली सेना ने इसकी कहा है कि वह इसकी जांच कर रही है और पूरी संभावना है कि हमास चीफ उसके हमले में मारा गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी याह्या सिनेवार के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसका खंडन भी किया गया था। अब इजरायली सेना नई संभावनाओं के साथ इसकी जांच कर रही है। आतंकियों की नहीं हुई है पहचान समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इजरायली सेना ने गाजा पट्टी में एक ऑपरेशन के बाद हमास नेता याह्या सिनवार को मार गिराने का अनुमान लगाया है। सेना ने यह भी कहा है कि उसने तीन आतंकवादियों को निशाना बनाया था। सेना ने बयान में कहा, 'इस स्तर पर आतंकवादियों की पहचान की पुष्टि नहीं की जा सकती है।' इसने कहा कि इस बात के कोई संकेत नहीं थे कि जिस इमारत में तीन आतंकवादी मारे गए थे, वहां बंधक मौजूद थे। गौरतलब है कि सिनवार, 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमले का मुख्य साजिशकर्ता था, जिसके कारण गाजा में बड़े पैमान पर युद्ध छिड़ा। उसे अगस्त में तेहरान में पूर्व नेता इस्माइल हानिये की हत्या के बाद हमास का नेता नामित किया गया था। हमास ने नहीं की कोई टिप्पणी इधर, हमास की ओर से इस पूरे मामले पर कोई तत्काल टिप्पणी नहीं की गई है। यदि सिनवार की मौत की पुष्टि की जाती है तो इजरायली सेना और प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह एक बड़ी सफलता होगी, जिन्होंने हाल के महीनों में अपने दुश्मनों के प्रमुख नेताओं की हाई-प्रोफाइल हत्याओं की श्रृंखला शुरू की है। रॉयटर्स के मुताबिक सिनवार इजरायल की वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर है, लेकिन अब तक उसका पता नहीं लगाया जा पा रहा था। संभवतः वह पिछले दो दशकों में हमास द्वारा गाजा के नीचे बनाई गई सुरंगों के जाल में छिपा हुआ है।   हिजबुल्लाह चीफ को भी मार गिराया था इससे पहले इजरायल ने पिछले महीने बेरूत में ईरानी समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के नेता हसन नसरल्लाह को भी मार डाला। साथ ही समूह की सैन्य शाखा के शीर्ष नेतृत्व को भी मार डाला। हमास के नेतृत्व वाले बंदूकधारियों ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया। जवाब में इजरायल के अभियान में 42,000 से अधिक लोग मारे गए। गाजा का अधिकांश हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और इसकी अधिकांश आबादी विस्थापित हो गई। recent visitors 85

व्यक्ति ने 112 पर फोन करके बताया मेरा घरवालों से झगड़ा हुआ है में फांसी लगाने जा रहा हु, मात्र 6 मिनट में पुलिस ने बचा ली जान

मेरठ उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने 112 पर फोन करके बताया कि उसका अपने परिवार के साथ झगड़ा हुआ है और वह तंग आकर फांसी लगाने जा रहा है। इस सूचना के तुरंत बाद, पुलिस ने अपनी सुझबूझ का इस्तेमाल करते हुए मात्र 6 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने युवक को आत्महत्या करने से बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई की। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि संकट के समय में पुलिस की तत्परता कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। युवक की जान बचाने के लिए पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सभी ने सराहना की।   दरअसल, मामला यह है कि युवक का संपत्ति को लेकर अपने परिवार से विवाद चल रहा था। जिसके बाद उसने गुस्से में आकर आत्महत्या करने का फैसला लिया। शख्स ने फांसी लगाने से पहले 112 पर फोन कर बताया कि उसका अपने परिवार के साथ संपत्ति को लेकर झगड़ा हुआ है। अब वह फांसी लगाने जा रहा है। यह कहकर उसने फोन काट दिया। उसने फोन पर ना ही अपने गांव का नाम बताया और ना ही घटनास्थल का नाम बताया। जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने फोन कॉल करने वाली की लोकेशन के हिसाब से तत्काल कार्रवाई करते हुए इस घटना को पीआरवी 0584 को दे दिया।  मेरठ में एक परिवार में संपत्ति बंटवारे को लेकर झगड़ा हुआ। एक बेटा नाराज था जिसने UP 112 को कॉल किया और कहा कि परिजनों से झगड़ा हुआ है, मैं फाँ~सी लगाकर मर रहा हूँ। ना जनपद का नाम बताया और ना ही घटनास्थल, और कॉल काट दिया।     इस घटना को देखते हुए पीआरवी कर्मी लोकेशन और घटनास्थल की जांच में जुटाने में लग गए। पीआरवी कर्मी ने बिना देर लगाए मात्र 6 मिनट के अंदर ही घटनास्थल का पता लगा कर पहुंच गए। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने घर के अंदर झांककर देखा तो युवक लिंटर में रस्सी बांधकर फंदे पर लटका हुआ था। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए कमरे का दरवाजा तोड़ दिया। हालंकि इस दौरान युवक जीवित था। इसके बाद युवक को दो पुलिसकर्मियों ने अपने ऊपर उठा लिया, इसके बाद परिजनों की मदद से हंसिए से रस्सी को काटकर उसे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस तरह से पुलिस की सुझबूझ से शख्स की जांन बच गई। SP का बयान मेरठ के एसपी सिटी, आयुष विक्रम सिंह, ने कहा कि घटना की सूचना मिलने पर तुरंत अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने युवक की जान बचा ली और उसे थाने लाया गया। युवक को पूछताछ के बाद डॉक्टर के पास भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि मात्र 6 मिनट के भीतर पीआरवी की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई, जो उनकी तत्परता का प्रमाण है।   recent visitors 107

मध्यप्रदेश की बनेगी दीर्घकालिक जलवायु रणनीति, 18 अक्टूबर को होगी कार्यशाला

भोपाल पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन मध्यप्रदेश (एप्को) ने डब्ल्यूआरआई इंडिया के तकनीकी सहयोग से “मध्यप्रदेश की दीर्घकालिक न्यून उत्सर्जन विकास रणनीति” निर्मित करने के लिये परियोजना शुरू की है। यह रणनीति वर्ष 2026 तक तैयार की जाएगी। राज्य शासन द्वारा आवश्यक नीतिगत बदलाव किए जाएंगे एवं रणनीति का क्रियान्वयन किया होगा। एप्को और डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक बहु-हितधारक संवाद कार्यशाला 18 अक्टूबर को भोपाल में होगी। इसमें वरिष्ठ शासकीय अधिकारी, विषय विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता व अकादमिक संस्थाएं कार्यशाला में आमंत्रित किये गये है, जो मध्यप्रदेश में डीकार्बोनाइजेशन की चुनौतियों से संबंधित क्षेत्रों, वित्तीय और तकनीकी चुनौतियों/बाधाओं और भारत के 2030 तक और 2070 तक के नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों में योगदान करने के तरीकों पर विचार-विमर्श करेंगे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भारत के नेट-जीरो लक्ष्य में योगदान देने की दिशा में राज्य के लिए दीर्घकालिक रणनीति के निहितार्थों पर चर्चा करना और आवश्यक सुझाव प्राप्त करना है। परियोजना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि नवंबर 2022 में मिस्र में आयोजित CoP-27 के दौरान भारत द्वारा जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को सौंपी गई। दीर्घकालिक जलवायु रणनीतियों को राष्ट्रीय स्तर पर बनाया गया है, गतिविधियों का क्रियान्वयन राष्ट्रीय, प्रदेश एवं स्थानीय स्तर पर संचालित करने की आवश्यकता है। इस सन्दर्भ में डब्ल्यूआरआई इंडिया मध्यप्रदेश में राज्य स्तर पर शोध तथा हितधारकों के समन्वय से गतिविधियों व रणनीतियों के क्रियान्वयन के लिये परियोजना का नेतृत्व कर रहा है। कार्यशाला के दूसरे सत्र में मध्यप्रदेश के 4 महानगरों में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के हीट एक्शन प्लानिंग पर भी विचार-विमर्श किया जायेगा।   recent visitors 99

गडकरी ने विक्रमादित्य सिंह को दिया जन्मदिन का तोहफा, मंडी जिला की दो सड़कों के लिए 21.05 करोड़ रुपए मंजूर किए

शिमला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को जन्म दिन का तोहफा दिया है। केंद्र ने मंडी जिला की दो सड़कों के लिए 21.05 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इसके तहत चैलचौक-पंडोह सड़क के लिए 9.10 करोड़ रुपए तथा मंडी-कमांद कटौला सड़क के लिए 11.89 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। चैलचौक-गोहर-पंडोह सड़क के सुधार व सुदृढ़ीकरण के चलते पंडोह से चैलचौक तक वैकल्पिक सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था। एचएचएआई की सड़क के बंद होने पर इस वैकल्पिक सड़क मार्ग से यातायात चलाया जाएगा। इसके अलावा गत वर्ष 16 सितम्बर, 2023 को मंडी-कमांद कटौला-बजौरा सड़क में बारिश से हुए नुक्सान की भरपाई के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था। केंद्र ने इन दोनों प्रस्ताव को मंजूर कर दिया है। केंद्र ने भूस्खलन के कारण सड़कों के बंद होने के जोखिम को देखते हुए यह राशि मंजूर की है। इसको लेकर एनएचएआई ने एसई मंडी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्हें इन दोनों कार्यों के टैंडर दस्तावेज के साथ अकाऊंट व कैंसल चैक जमा करवाने को कहा है। इसके बाद टैंडर की राशि के आधार पर मंजूर राशि को विभाग के एकांऊट में जमा करवा दिया जाएगा। इसकी जानकारी लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अपने सोशल मीडिया पेज पर दी है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मेरे जन्मदिन के अवसर पर नितिन गडकरी ने बड़ा तोहफा दिया है। विक्रमादित्य ने कहा कि उन्होंने मंडी के जो मसले केंद्रीय मंत्री से पिछली मुलाकात में उठाए थे, उस पर 21 करोड़ रुपए का समर्थन लोक निर्माण विभाग को दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। याद रहे कि गत 3 अक्तूबर को केंद्र ने हिमाचल की 4 सड़कों व 1 पुल के लिए 293.36 करोड़ रुपए की राषि जारी की थी। यह राषि सीआरआईएफ के तहत मंजूर की गई थी। recent visitors 115

कुर्सी बचाने के लिए ट्रूडो का नया दांव, अब राष्ट्रवाद-संप्रभुता मुद्दे बनाए मोहरे, जस्टिन ट्रूडो की राजनीति एक बार फिर चर्चा में

कनाडा कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने अपनी कुर्सी बचाने के लिए राष्ट्रवाद और संप्रभुता जैसे मुद्दों को उठाकर जनता का ध्यान अपनी नाकामियों से हटाने की कोशिश की है। ट्रूडो पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए भारत जैसे देशों पर आरोप लगाए हैं, और अब राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता और गिरती लोकप्रियता से पस्त ट्रूडो 2024 में कनाडा के कई प्रांतों में चुनाव होने वाले हैं, जिनमें नोवा स्कोटिया, ब्रिटिश कोलंबिया, न्यू ब्रंसविक और सस्केचेवान शामिल हैं। साथ ही, 2025 में देश के आम चुनाव होने हैं। ऐसे में, ट्रूडो की लिबरल पार्टी की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। उनकी लोकप्रियता ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है, और उनके सहयोगी दल एनडीपी ने भी उनसे समर्थन वापस ले लिया है। सभी राजनीतिक विश्लेषण यह संकेत देते हैं कि आगामी चुनावों में ट्रूडो की पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है। उनकी सरकार की कई नीतियां जनता के बीच अलोकप्रिय साबित हो रही हैं, विशेषकर आर्थिक मंदी, महंगाई, और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, ट्रूडो की पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ता जा रहा है। पार्टी में आंतरिक तख्तापलट की चर्चा हो रही है, जो ट्रूडो के राजनीतिक करियर के लिए खतरा साबित हो सकता है। इस स्थिति में, ट्रूडो ने जनता का ध्यान अपनी असफलताओं से हटाने के लिए राष्ट्रवाद और संप्रभुता के मुद्दों को उठाया है, ताकि वे अपने खिलाफ उठ रहे विरोध को कम कर सकें। भारत पर आरोप सिर्फ राजनीति का हिस्सा नहीं सितंबर 2023 में, जी20 शिखर सम्मेलन के बाद, ट्रूडो ने अचानक भारत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ था। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा, और ट्रूडो ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का मुद्दा बना दिया।कनाडा का दावा है कि भारतीय गृह मंत्रालय इस हत्या में शामिल था, जबकि कनाडाई पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गैंग को इसके लिए जिम्मेदार मानती है। ट्रूडो ने दावा किया कि भारत के राजदूत और अन्य उच्च स्तरीय अधिकारी भी इस मामले में शामिल थे। लेकिन अब तक उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, और एक साल बाद भी मामला केवल आरोपों तक ही सीमित है। ट्रूडो की यह रणनीति उनके घरेलू राजनीतिक संकट से निकलने का एक तरीका है। उन्होंने राष्ट्रवाद और कनाडा की संप्रभुता का मुद्दा उठाकर खुद को एक ऐसा नेता दिखाने की कोशिश की है, जो अपने देश की सुरक्षा के लिए खड़ा है। इससे उन्हें चुनावी फायदे की उम्मीद है, क्योंकि यह कदम उन मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति संवेदनशील हैं।  हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि ट्रूडो का यह कदम सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। उनके इस निर्णय का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी प्रभाव पड़ रहा है, खासकर भारत-कनाडा संबंधों में। भारत के साथ बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों पर नकारात्मक असर डाला है। ट्रूडो को चीन और विदेशी ताकतों का स्पोर्ट यह भी चर्चा  है कि ट्रूडो को चीन और अन्य विदेशी संस्थाओं से वित्तीय और राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने ट्रूडो और उनकी लिबरल पार्टी में भारी निवेश किया है। इसके साथ ही, क्लॉस श्वाब के वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन और जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन ने भी ट्रूडो को समर्थन दिया है। इस समर्थन के चलते ट्रूडो की राजनीतिक पेंशन और सेवानिवृत्ति निधि सुरक्षित मानी जा रही है, जिससे वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें यकीन है कि भले ही उनकी सरकार चुनाव हार जाए, उनकी राजनीतिक स्थिति पर इसका बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।   recent visitors 56

रणधीर जायसवाल ने कहा- जिन मुद्दों पर हमने कार्रवाई की मांग की थी, उन पर ट्रूडो द्वारा अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया

नई दिल्ली भारत और कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक तनाव पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के बयानों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री ट्रूडो की ‘वन इंडिया पॉलिसी’ को लेकर की गई टिप्पणियों को देखा है, लेकिन जिन मुद्दों पर हमने कार्रवाई की मांग की थी, उन पर अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। उनकी कथनी और करनी में बड़ा अंतर है।” लॉरेंस बिश्नोई गैंग के बारे में भारत ने बताया था विदेश मंत्रालय ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर कनाडा द्वारा की गई आपत्तियों पर भी बयान दिया। जायसवाल ने आगे कहा, “हमने कनाडा को कुछ अनुरोध भेजे थे, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी करने को कहा था, लेकिन अब तक हमारी मुख्य चिंताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसमें राजनीतिक उद्देश्य भी छिपे हुए हैं।” ट्रूडो ने दावा किया था कि भारतीय राजनयिक उन कनाडाई लोगों के बारे में जानकारी एकत्र कर रहे थे जो नरेंद्र मोदी सरकार से असहमत हैं और इसे भारत सरकार के उच्च स्तरीय अधिकारियों और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह जैसे आपराधिक संगठनों तक पहुंचा रहे थे। भारत इन बेतुके दावों को पहले ही खारिज कर चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "हमने कनाडा को 26 प्रत्यर्पण के अनुरोध भेजे और सभी पेंडिंग हैं। ये पिछले एक दशक या उससे अधिक समय से पेंडिंग पड़े हैं। इसके साथ ही कुछ अपराधियों की अनंतिम गिरफ्तारी के कई अनुरोध भी कनाडा की ओर से पेंडिंग हैं…हमने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों सहित अन्य गैंग के सदस्यों के बारे में कनाडाई सरकार के साथ सुरक्षा संबंधी जानकारी शेयर की थी और उनसे उन्हें (अपराधियों को) गिरफ्तार करने का अनुरोध किया था…अभी तक हमारे अनुरोध पर कनाडा की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है…हमें यह वास्तव में अजीब लगता है कि जिन लोगों को हम निर्वासित करना चाहते थे या जिन पर कार्रवाई की जानी थी, अब हमें बताया जा रहा है कि, आरसीएमपी (रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस) कनाडा में इन लोगों द्वारा किए गए अपराधों के लिए भारतीय पक्ष को दोषी ठहरा रही है।" कनाडाई आदेश से पहले ही बुलाए अपने राजनायिक इसके अलावा, भारत ने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनयिकों को कनाडा से वापस बुलाने का फैसला लिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए जायसवाल ने कहा, "हमने कनाडा के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब किया और साफ कहा कि हमें कनाडा सरकार पर अपने राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर कोई भरोसा नहीं है, इसलिए हमने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनयिकों को पहले ही वापस बुलाने का निर्णय लिया। इसके बाद कनाडा की ओर से उनको वापस बुलाने का आदेश आया था, लेकिन हमने पहले ही यह कदम उठा लिया था।" कनाडा द्वारा भारतीय राजनयिकों पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने कहा, "हमने इस मुद्दे पर अपना पक्ष बहुत स्पष्ट कर दिया है। बीते दो दिनों में कई प्रेस विज्ञप्तियां जारी की गई हैं जिनमें हमने अपना रुख साफ किया है। सितंबर 2023 से अब तक कनाडा सरकार ने हमारे साथ कोई भी सबूत साझा नहीं किया है। हाल ही में सार्वजनिक सुनवाई के बाद भी कनाडा (के पीएम) ने गंभीर आरोप लगाए, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया। प्रधानमंत्री ट्रूडो द्वारा दिए गए बयानों से इन आरोपों की वास्तविकता पर भी सवाल उठता है। हमारी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है, हम इन झूठे आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। हम अपने राजनयिकों के खिलाफ झूठे आरोपों को खारिज करते हैं।” recent visitors 71