Tuesday, July 7, 2026 2:23 am

क्लाइमेट चेंज का असर खस के तेल की कीमतें बढ़कर 80,000 रुपये प्रति किलो पहुंची

कानपुर  क्लाइमेट चेंज का असर सिर्फ आम लोगों की सेहत या अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है। जबर्दस्त गर्मी और अनिश्चित मौसम ने खस को भी झटका दिया है। खस की घास से असेंशियल ऑइल का उत्पादन घटने लगा है। 2023 में हाथरस बेल्ट खस के तेल के उत्पादन में 20% तक गिरावट दर्ज हुई है। कन्नौज में तो खस की घास से निकलने वाले तेल की मात्रा में एक तिहाई तक कम हो गई। कन्नौज के सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) के डायरेक्टर शक्ति विनय शुक्ला का कहना है कि क्लाइमेट चेंज के कारण खस और पचौली के पौधों से निकलने वाला तेल कम हुआ। इस वजह से इनसे बनने वाले इत्र, परफ्यूम व अन्य उत्पादों की कीमत बढ़ने लगी है। देश में खस घास की 4-5 किस्में मिलती हैं। यूं तो खस जंगलों और नदी के किनारे उगती है, पर खस की खास प्रजातियों की खेती भी की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में दिवाली के बाद से मार्च तक खस की घास से तेल निकाला जाता है। 2022 तक तो खस के तेल का उत्पादन ठीक था, लेकिन 2023 में झटका लगा। हाथरस के इत्र कारोबारी लव शर्मा के अनुसार, 2022 में एक क्विंटल घास से 100 ग्राम तेल निकलता था, 2023 में यह घटकर 80 ग्राम रह गया। इस बार भी गर्मी का असर देखने लायक होगा। हाथरस में 2-3 दिन में खस का डिस्टिलेशन शुरू हो जाएगा। ज्यादा फसल लेने की चाह भी है वजह कन्नौज के इत्र एक्सपोर्टर प्रांजुल कपूर ने बताया कि मौसम ने निश्चित तौर पर इत्र/परफ्यूम के कारोबार पर असर डाला है। उत्पादकता घटी है, लेकिन इसके कई अन्य कारण भी हैं। पहले माना जाता था कि खस की बढ़िया उपज लेने के लिए घास की जड़ एक बार तोड़ने के बाद तीन साल तक उसे नहीं तोड़ना चाहिए। इस अंतराल में जड़ ज्यादा परिपक्व होती है और डिस्टिलेशन में तेल भी बढ़िया निकलता है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण अब कोई रुकने को तैयार नहीं है। कन्नौज में पैदा होने वाला गुलाब और बेला के फूलों से भी कम तेल निकल रहा है। रु. 28 हजार तक बढ़ गए दाम प्रांजुल बताते है कि पहले दुनिया में खस के तेल का बड़ा स्रोत हैती और डॉमिनिकन रिपब्लिक था, लेकिन वहां से इसकी सप्लाई बंद हो चुकी है। इस वजह से दुनिया अब खस की आपूर्ति के लिए भारत की तरफ देख रही है। एक साल पहले तक 62 हजार रुपये/किलो बिकने वाली 'रूह खस' ऑइल अब 80 हजार रुपये/किलो बिक रहा है। साधारण खस का ऑइल 14-15 हजार रुपये/किलो से बढ़कर 23 हजार रुपये तक पहुंच गया है। खस के दाम पर उसकी किस्म, डिस्टिलेशन और जगह का भी असर होता है। पचौली की फसल खराब, कीमत बढ़ी भारत में पचौली के तेल का भी इत्र और परफ्यूम में खूब इस्तेमाल होता है। पचौली के फूल और पत्तियां इंडोनेशिया से आते हैं। क्लाइमेट चेंज के कारण वहां भी फसल खराब हुई है। पचौली ऑइल के बढ़कर 16-19 हजार रुपये/किलो तक चल रहे हैं, जबकि 2 साल पहले दाम 3500-4000 रुपये/किलो की रेंज में होते थे। भारत में पूर्वोत्तर में पचौली का थोड़ा उत्पादन होता है। recent visitors 141

2000 के करीब 2% नोट अभी भी रिजर्व बैंक को वापस नहीं आए, 7000 करोड़ रुपये की वैल्यू

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए थे। उनकी जगह ₹2000 का नोट लाया गया था। 19 मई 2023 को RBI ने पहली बार ₹2000 के नोट वापस लेने की घोषणा की। उस समय चलन में ₹3.56 लाख करोड़ मूल्य के ₹2000 के नोट थे। RBI ने इन्हें बैंकों और डाकघरों में बदलने की सलाह दी। RBI की घोषणा के बाद लोग अपने ₹2000 के नोट बदलने लगे। अब तक लगभग 98.04% ₹2000 के नोट वापस आ चुके हैं। ₹2000 के नोट वापस लेने पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग ₹6,970 करोड़ मूल्य के नोट चलन में हैं। इन्हें भी वापस लेने के लिए RBI ने एक और मौका दिया है। जिन लोगों के पास अभी भी ₹2000 के नोट हैं, वे उन्हें RBI कार्यालयों में बदल सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें डाकघर के माध्यम से RBI के क्षेत्रीय कार्यालयों में भेजकर भी बदला जा सकता है।  साल 2016 में नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ने 2000 रुपये के नोट जारी किए थे। लेकिन पिछले साल रिजर्व बैंक ने इस नोट को चलन से बाहर कर दिया था। बैंक ने कहा था कि जिनके भी पास ये नोट हैं, उन्हें बदल लें। रिजर्व बैंक ने  इन नोटों को लेकर डेटा जारी किया। इस डेटा के मुताबिक 19 मई 2023 तक प्रचलन में रहे 2000 रुपये के नोटों में से करीब 98 फीसदी नोट अब वापस आ चुके हैं। वहीं करीब 2 फीसदी नोट अब भी प्रचलन में हैं। 19 मई 2023 को कारोबार बंद होने पर जब 2000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा की गई थी, तब प्रचलन में इन नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था। करीब जो दो फीसदी नोट अभी भी प्रचलन में हैं, उनकी वैल्यू करीब 7 हजार करोड़ रुपये है। यानी से नोट अभी भी लोगों के पास हो सकते हैं।बैंकों के मर्जर की तैयारी, 43 से घटकर रह जाएंगे 28, जानिए क्या है सरकार का प्लान क्या बेकार हो गए हैं 2000 के नोट? रिजर्व बैंक अब 2000 के नोटों को प्रचलन से बाहर कर चुका है। रिजर्व बैंक ने 19 मई 2023 को घोषणा की थी कि 2000 रुपये के नोट अब प्रचलन में नहीं रहेंगे। लेकिन जिनके पास भी ये नोट हैं, वे 7 अक्टूबर 2023 तक किसी भी बैंक में जाकर अपने अकाउंट में जमा कर सकते हैं। ऐसे में लोगों के दिमाग में सवाल है कि जिनके पास अभी भी ये नोट हैं, क्या वे अब बेकार हो गए हैं। दरअसल, ये नोट अब बाजार में चलन में नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों के पास अभी भी ये नोट बचे हैं, वे रिजर्व बैंक जाकर अपने बैंक अकाउंट में जमा करवा सकते हैं। नोटबंदी के समय हुई थी शुरुआत 2000 के नोट रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के समय शुरू किए थे। दरअसल, नोटबंदी के दौरान 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया गया था। ऐसे में लोगों की पैसों की जरूरत को पूरा करने के लिए रिजर्व बैंक ने 2000 के नोट जारी किए थे। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद रिजर्व बैंक ने साल 2018-19 में इन नोटों की छपाई बंद कर दी थी। बाद में इनकाे प्रचलन से बाहर कर दिया। कैसे बदलें 2000 के नोट? अगर अभी भी आपके पास 2000 के नोट हैं तो उन्हें दिल्ली स्थित रिजर्व बैंक में जाकर बदला जा सकता है। इस दौरान ओरिजिनल आधार कार्ड और इसकी फोटो कॉपी ले जाना न भूलें। वहीं अगर कुल रकम 50 हजार रुपये से ज्यादा है तो ओरिजिनल पैन कार्ड और इसकी फोटो कॉपी भी जरूर लेकर जाएं। recent visitors 70